मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चे, मजहबी तालीम और इस्लामी तौर-तरीके, 'जो अल्लाह को नहीं मानते वे काफिर'
June 16, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चे, मजहबी तालीम और इस्लामी तौर-तरीके, ‘जो अल्लाह को नहीं मानते वे काफिर’

आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में दलील रखी कि मदरसों में बच्चों को औपचारिक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दी जा रही। वहां शिक्षा के लिए जरूरी माहौल और सुविधाएं भी नहीं हैं। मदरसे, बच्चों को अच्छी शिक्षा के अधिकार से वंचित रख रहे हैं।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 13, 2024, 11:38 am IST
in भारत
मदरसा (प्रतीकात्म चित्र)

मदरसा (प्रतीकात्म चित्र)

भारत में न केवल अवैध मदरसे फल-फूल रहे हैं बल्कि इनमें कट्टरता का पाठ भा पढ़ाया जाता है। इनमें गैर मुस्लिम बच्चों को भी दीनी तालीम देने के मामले सामने आ चुके हैं। मदरसे शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) का उल्लंघन भी कर रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने बच्चों की शिक्षा और विकास को लेकर एक और बड़ा कदम उठाया है। एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को पत्र लिखकर मदरसा बोर्ड को दिए जाने वाले फंड को बंद करने और उनमें पढ़ने वाले गैर मुस्लिम बच्चों को आरटीई के तहत मुख्यधारा के स्कूलों में भेजने का निर्देश दिया है।

इससे पहले एनसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा भी दायर किया था। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में दलील रखी कि मदरसों में बच्चों को औपचारिक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दी जा रही। वहां शिक्षा के लिए जरूरी माहौल और सुविधाएं भी नहीं हैं। मदरसे, बच्चों को अच्छी शिक्षा के अधिकार से वंचित रख रहे हैं। उन्हें मिड डे मील, यूनिफॉर्म और प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं मिल रहे। मदरसों में मजहबी शिक्षा पर जोर होता है। मुख्यधारा की शिक्षा में उनकी भागीदारी कम है।

आयोग ने यह भी बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति मदरसों के अपने मैनेजमेंट करते हैं। कुछ मामले तो ऐसे आए हैं जिनमें शिक्षक के लिए ज़रूरी योग्यता भी नहीं थी। शिक्षकों की नियुक्ति के समय योग्यता के रूप में कुरान और मजहबी पुस्तकों की समझ परखी जाती है। शिक्षा के अधिकार कानून में जिन बातों का जिक्र है, उससे मदरसे कोसों दूर हैं।

संविधान के आर्टिकल 28(3) का उल्लंघन

मदरसों में मुस्लिमों के अलावा गैर मुस्लिम बच्चों को भी पढ़ाया जाता है। गैर-मुस्लिम बच्चों को भी इस्लाम की परम्पराओं की शिक्षा दी जा रही है, जोकि आर्टिकल 28(3) का उल्लंघन है। बाल संरक्षण आयोग ने मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम को भी देखा है। इसमें कई आपत्तिजनक बातें हैं। वे किताबें भी पढ़ाई जाती हैं, जो सिर्फ इस्लाम को श्रेष्ठ बताती हैं।

कुछ समय पूर्व एनसीपीसीआर के अध्‍यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बिहार के मदरसों में पढ़ाई जाने वाली किताब ‘तालीमुल इस्‍लाम’ एवं इसी प्रकार की अन्‍य मजहबी पुस्‍तकों का जिक्र किया था। ये पुस्‍तकें बच्‍चों के मन में गैर मुसलमानों के प्रति नफरत का भाव भरती हैं। देश के हर मदरसे में इस तरह की पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं।

‘तालीमुल इस्‍लाम’ की बात करें तो तालीमुल-इस्लाम हिस्सा (भाग) 1 के पृष्‍ठ 3 पर लिखा है “खुदा एक है” इबादत के लायक वही है… “गवाही देता हूं मैं कि अल्लाह तआला के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं “। यहां विचार करने वाली बात यह है कि क्या ये दृष्टि सामाजिक नफरत और विभेद पैदा नहीं करती है? भारत में ईश्‍वर भक्‍ति की अनेक धाराएं हैं, जो ईश्‍वर को अनेक रूपों में स्‍वीकार करती हैं।

इसी किताब के पृष्‍ठ पांच-छह पर प्रश्‍न पूछे जा रहे हैं;

सवाल : जो लोग अल्लाह को नहीं मानते उन्हें क्या कहते हैं?
जवाब : उन्हें काफिर कहते हैं!

सवाल : जो लोग खुदा तआला के सिवा और चीज़ों की पूजा करते हैं या दो-तीन खुदा मानते हैं उन्हें क्या कहते हैं?
जवाब: ऐसे लोगों को काफिर और मुश्रिक कहते हैं।

सवाल : मुश्रिक बखशे जाएंगे या नहीं?
जवाब : मुश्रिकों को बख्शा नहीं जायेगा।
वह हमेशा तक्लीफ और अज़ाब (दुख) में रहेंगे।

जो अल्लाह को नहीं मानते वे काफिर हैं

तालीमुल इस्लाम किताब में इस बात पर जोर दिया जाता दिखता है कि जो ‘अल्‍लाह’ को नहीं मानते, उन्‍हें काफिर कहते हैं। हालांकि ‘काफिर’ शब्‍द को लेकर कुछ इस्‍लामवादी इसके कई अर्थ बताते हैं, किंतु एक अर्थ जिसे यह पुस्‍तक आगे बहुत ही स्‍पष्‍ट कर देती है वह यही है कि जो मुसलमान नहीं, जो कुरान नहीं पढ़ता, जो कुरान और हदीस में लिखे हुए पर भरोसा नहीं करता, वह कोई भी हो, इस्‍लाम की नजरों में ऐसा व्‍यक्‍त‍ि ‘काफिर’ है और ये काफिर जो इस पुस्‍तक के अनुसार (मुश्रिक) मूर्त‍िपूजक है, वह बख्‍शा नहीं जाएगा। उसे हमेशा दुख और तक्‍लीफ रहेगी। क्‍या बच्‍चे इसे बार-बार पढ़ने के बाद समझदार होने के बाद अपने अवचेतन मस्तिष्क से इस बात को नकार पाएंगे? विचार करें, हम अपने आस-पास भविष्‍य का कौन सा समाज गढ़ रहे हैं! पृष्‍ठ 7 पर कहा गया; जो आदमी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को खुदा का रसूल न माने वह भी काफिर है। यदि आपका विश्‍वास प्रोफिट मोहम्‍मद पर नहीं, तो भी आप काफिर हैं।

बच्‍चे पढ़ रहे, ईश्‍वर की सच्‍ची किताब सिर्फ कुरान अन्‍य कोई नहीं

तालीमुल-इस्‍लाम के तीसरे भाग ‘तौहीद’ (एकेश्वरवाद) है जो यह ईमान अल्लाह को छोड़ कर किसी अन्य की पूजा करने से रोकता है के पृष्‍ठ क्रमांक 76 में पूछा जाता है – क्या कुरआन मजीद में तौहीद की तालीम दी गयी है? जवाब : हां ! कुरआन मजीद में तौहीद की तालीम पूरी और आला दर्जे पर दी गयी है। बल्कि आज दुनिया में सिर्फ कुरआन मजीद ही ऐसी किताब है जो ख़ालिस तौहीद की तालीम देती है। अगर्चे पहली आसमानी किताबों में भी तौहीद की तालीम थी, लेकिन इन तमाम किताबों में लोगों ने अदल-बदल कर डाली और तौहीद के खिलाफ बातें दाखिल कर दीं और खुदा की भेजी हुई आसमानी तालीम को बदल दिया। इसकी इस्लाह के लिए और सच्ची तौहीद दुनिया में फैलाने के लिए अल्लाह तआला ने हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को भेजा और अपनी ख़ास किताब कुरआन मजीद नाज़िल फरमाई और उसमें साफ़-साफ़ सच्ची और ख़ालिस तौहीद की तालीम दी।

एक अध्‍याय ‘ख़ुदा तआला की किताबें’ के नाम से है। इसमें पूछा जा रहा है कि तौरेत, ज़बूर और इंजील का आस्मानी किताबें होना कैसे मालूम हुआ? जवाब : इन तीनों किताबों का आस्मानी किताबें होना कुरआन मजीद से साबित होता है। यहां इस पुस्‍तक में यह स्‍थापित करने का प्रयास किया गया कि आज इस्‍लाम के अलावा अन्‍य जो इन दो पंथों को माननेवाले और उनकी पवित्र कताबें हैं, वह इसलिए पवित्र हैं, क्‍योंकि इसे कुरआन मजीद के ज़रिये से इन तीनों किताबों का आस्मानी किताबें होना मालूम हुआ।

किताब में सवाल किया जा रहा है – अगर कोई आदमी तौरेत, ज़बूर, इन्जील को ख़ुदा तआला की किताबें न माने तो वह कैसा है ? उत्‍तर आया, ऐसा आदमी काफिर है। क्योंकि इन किताबों का ख़ुदा की किताबें होना कुरआन मजीद से साबित हुआ है तो जो आदमी इनको ख़ुदा की किताबें नहीं मानता वह कुरआन मजीद की बताई हुई बात को नहीं मानता है। और जो कुरआन मजीद की बताई हुई बात को न माने वह काफिर है। फिर इसी में आगे लिखा गया है कि इन तीनों पुस्‍तकों में बहुत कुछ अपने मूल से बदल दिया गया है, इसलिए इन्‍हें माननेवाले सही नहीं, सिर्फ जो कुरआन पर मानते हैं, वही सच्‍चे हैं।

हिंदुओं से जुड़ा प्रश्न भी

पुस्‍तक के हिस्‍सा चार में एक प्रश्‍न हिन्‍दुओं से जुड़ा है। यहां सवाल आया- ‘‘क्‍या यह कह सकते हैं कि हिन्‍दुओं के पेशवा जैसे कृष्‍णजी और रामचन्‍द्रजी वगैरा खुदा के पैगम्‍बर थे ?’’ फिर जवाब दिया गया- ‘‘नहीं कह सकते, क्‍योंकि पैगम्‍बरी एक खास उहदा था जो खुदा की तरफ से उसके बरगुज़ीदा और ख़ास बन्दों को अता फरमाया जाता था। तो जब तक शरीअत से यह बात मालूम न हो कि यह ख़ास उहदा खुदा तआला ने फलाँ शख्स को अता फरमाया था उस वक्त तक हम भी नहीं कह सकते कि वह खुदा का नबी था। अगर हमने बिना शरीअत की दलील के सिर्फ अपनी राय से किसी शख्स को पैग़म्बर समझ लिया और फिल-वाका यह पैग़म्बर नहीं था तो ख़ुदा तआला के हुजूर में हम रो इस गलत अकीदे का मवाखिज़ा होगा। यूं समझो कि अगर तुम सिर्फ अपने ख़्याल से किसी शख्स को समझ लो कि वह बादशाह का नाइब यानी गवर्नर जनरल है और वह अस्ल में गवर्नर जनरल न हो तो तुम हकूमत के नज़दीक मुजरिम होंगे कि एक ऐसे शख्स को जिसे बादशाह ने गवर्नर जनरल नहीं बनाया है, तुमने गवर्नर जनरल मानकर बादशाह की तरफ एक गलत बात की निस्बत की। बस गुज़िशता लोगों में से हम ख़ास तौर पर उन्हीं बुजुर्गों को पैग़म्बर कह सकते हैं जिनका पैगम्बर होना शरीअत से साबित हो, और कुरआन मजीद या हदीस शरीफ़ में उनको पैग़म्बर बताया’’

स्‍पष्‍ट किया गया ये हैं काफिर

पुस्‍तक में कुफ्र और शिर्क का बयान अध्‍याय में समझाया गया है कि जिन चीज़ों पर ईमान लाना ज़रूरी है उनमें से किसी एक बात को भी न मानना कुफ्र है। जैसे कोई आदमी खुदा तआला को न माने या खुदा तआला की सिफ़तों का इन्कार करे, या दो-तीन खुदा माने या फरिश्तों का इन्कार करे या खुदा तआला की किताबों में से किसी किताब का इनकार करे, या किसी पैग़म्बर को न माने या तकदीर से इनकार करे या कयामत के दिन को न माने या खुदा तआला के बुनियादी हुक्मों में से किसी हुक्म का इनकार करे या रसूलुल्लाह सल्ल० की दी हुई किसी खबर को झूठा समझे तो इन सब सूरतों में काफिर हो जायेगा। और शिर्क उसे कहते हैं कि खुदा तआला की जात या सिफात में किसी दूसरे को शरीक करे।

आगे इस पुस्‍तक में सवाल है कि खुदा तआला की जात में शिर्क करने के क्या माने हैं? जवाब आया- जात में शिर्क करने के माने ये हैं कि दो-तीन खुदा मानने लगे जैसे ईसाई, कि तीन खुदा मानने की वजह से मुशरिक हैं, और आग को पूजने वाले कि दो खुदा मानने की वजह से मुशरिक हुए, और जैसे बुत परस्‍त (हिन्‍दू, बौद्ध, जैन एवं अन्‍य) भी कि बहुत से खुदा मानकर मुशरिक होते हैं। वहीं, शिर्क फिल इबादत यानी ख़ुदा तआला की तरह किसी दूसरे को इबादत का मुस्तहक समझना, जैसे किसी कब्र या पीर को सज्‍दा करना या किसी के लिए रूकू करना (यानी जिस तरह नमाज़ में रूकू करते हैं) या किसी पीर, पैग़म्बर, वली या इमाम के नाम का रोज़ा रखना या किसी की नज़र और मन्नत माननी या किसी कब्र या मुर्शिक के घर का ख़ाना काबा की तरह तवाफ करना, ये सब शिर्क फिल इबादत है।

दान (जकात) सिर्फ मुसलमानों को ही दिया जा सकता है

पुस्‍तक यह भी साफ कहती है कि काफिर को ज़कात देना नाजाइज़ है। यानी जो दान इस्‍लाम में बताया गया है, वह सिर्फ मुसलमान को ही दिया जा सकता है, किसी अन्‍य जरूरत मंद को नहीं । वस्‍तुत: इसके अलावा भी बहुत कुछ इस पुस्‍तक में लिखा हुआ है जोकि बच्‍चों के मन में अन्‍य मत, पंथ, र‍िलीजन, धर्म को माननेवालों के प्रति नफरती सोच एवं भावनाएं भर देता है। यहां कहना होगा कि अकेली ये ही पुस्‍तक भारत के सभी मदरसों में नहीं पढ़ाई जा रही है, इसके अलावा इस तरह की अनेक पुस्‍तकों के माध्‍यम से मदरसों में गैर मुस्‍लिमों के प्रति नफरत भरने का काम हो रहा है। अब ऐसे में आप यानी कि देश का कोई भी देश भक्‍त नागरिक स्‍वत: विचार कर सकता है कि जब बच्‍चे इस तरह की अशिक्षा (अज्ञान) लेकर मदरसों से बाहर आएंगे तो फिर उनसे कैसे प्रेम, शांति और अपनत्‍व की उम्‍मीद की जा सकती है? इस प्रकार के प्रश्‍न अनेक हैं, अब उत्‍तर सरकारों, न्‍यायपालिका और इस्‍लाम के जानकारों को देना है!

यहां बड़ा सवाल यही है कि बाल मन में शुरुआत से ही काफिर और दूसरे धर्मों को नकारने की तालीम दी जाएगी तो बच्चों का सर्वांगीण विकास कैसे होगा। एक समरस समाज का निर्माण कैसे होगा ? शिक्षा अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है, सद्भाव का उजियारा फैलाती है। विकास के सोपानों के जरिये लक्ष्य का संधान कराती है तो आखिर इन बच्चों को शिक्षा के अधिकार से क्यों वंचित किया जा रहा है ?

Topics: एनसीपीसीआरमदरसाप्रियंक कानूनगोअवैध मदरसेभारत में मदरसे
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में अवैध मदरसों पर कार्रवाई : घुसपैठ और कट्टरपंथ का पूरा तंत्र होगा ध्वस्त

Ghaziabad Dasna Madarsa Buldozed

गाजियाबाद: डासना में सरकारी जमीन पर बने अवैध मदरसे पर चला बुलडोजर, कोर्ट ने ठोंका 1.23 करोड़ का जुर्माना

Uttar Pradesh illegal Madarsa fined 10000 rs

धामी सरकार का बड़ा फैसला: मदरसा बोर्ड समाप्त, बनेगा USAME प्राधिकरण

Uttarakhand Minority Institution

उत्तराखंड: अधिकारों का दुरूपयोग करते अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान

Uttarakhand Madarsa board abolished

धामी सरकार का फैसला: मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता जरूरी

Uttarakhand Illegal Madarsa

उत्तराखंड: मदरसों में परदेसी बच्चे, चार डीएम को मिले निर्देश

Load More

ताज़ा समाचार

राहुल गांधी की राजनीतिक यात्रा पर सहयोगियों में भ्रामक जानकारी

प्रतीकात्मक तस्वीर

महिला को नशीला जूस पिलाकर किया दुष्कर्म, जबरन इस्लामिक कन्वर्जन भी, अय्याज-आमीन गिरफ्तार; मौलवी फरार

Pakistan Table tennis self fund

पाकिस्तान की बदहाली: एशियन गेम्स 2026 के लिए टेबल टेनिस खिलाड़ियों को कहा- खुद उठाओ अपना खर्च

Kakoli Ghosh dastidar new NPCI President

तृणमूल कांग्रेस में भारी बगावत! 20 सांसदों ने एनसीपीआई पर कब्जा कर लिया, काकोली घोष दस्तिदार बनीं नई अध्यक्ष

जेवर एयरपोर्ट पर लखनऊ से आई पहली फ्लाइट

जेवर एयरपाेर्ट का सपना साकार, लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद और अमृतसर के लिए उड़ानें शुरू, जानें क्या है खास

वामपंथी प्रकाश राज ने भगवान श्रीराम पर एवं श्रीलक्ष्‍मण पर विवादास्‍पद टिप्‍पणी की, आपराधिक शिकायत दर्ज

जेवर से आए किसानों से मिलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अब ‘कुबेर’ भी आना चाहते हैं जेवर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Hormuz Water strait

खाड़ी संकट खत्म होने का असर: एलएनजी वाहक ‘दिशा’ होर्मुज से सुरक्षित निकला, 34 जहाजों को मिली राहत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुंचे किसान

सीएम योगी का आभार जताने पहली उड़ान से लखनऊ आए जेवर के किसान, बोले- इतना अच्छा दौर पहले नहीं देखा

Supreme court Aadhar misuse

सुप्रीम कोर्ट में आज आधार कार्ड दुरुपयोग पर सुनवाई, केवल पहचान पत्र तक सीमित रखने की मांग

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies