जम्मू-कश्मीर चुनावों के बाद सुरक्षा की संभावित चुनौतियां
October 7, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम मत अभिमत

जम्मू-कश्मीर चुनावों के बाद सुरक्षा की संभावित चुनौतियां

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के पक्ष में आए हैं। पार्टी नेतृत्व ने अपने मुख्य चुनावी वादे के तौर पर अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को बहाल करने का राग अलापा है।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
Oct 9, 2024, 05:01 pm IST
inमत अभिमत, जम्‍मू एवं कश्‍मीर

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के पक्ष में आए हैं। पार्टी नेतृत्व ने अपने मुख्य चुनावी वादे के तौर पर अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को बहाल करने का राग अलापा है। हालांकि यह सोच अपने आप में नए कश्मीर के विचार के लिए खतरों से भरी है।

जम्मू क्षेत्र और घाटी बहुल कश्मीर क्षेत्र का मतदान पैटर्न भी चिंता का विषय है। साझा विरासत वाले दो अलग-अलग क्षेत्रों की विचार प्रक्रिया में विभाजन और दरारें भी परेशान करने वाली हैं। समाज में इस तरह का विभाजन पाकिस्तान और अन्य लोगों के लिए शुभ समाचार होगा जो भारत को जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा चिंताओं में उलझाए रखना चाहते हैं। नई सरकार को जम्मू-कश्मीर के व्यापक हित में क्षुद्र राजनीति से ऊपर उठना होगा।

सबसे महत्वपूर्ण, नई सरकार को राज्य प्रायोजित आतंकवाद पर अपना रुख स्पष्ट रूप से बताना होगा । पिछले पांच वर्षों में सुरक्षाबलों ने कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियान में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। स्थानीय पुलिस और केंद्र सरकार के सुरक्षा बलों ने घाटी से बड़ी संख्या में आतंकवादियों को बेअसर करने के लिए मिलकर काम किया है। नई सरकार के तहत इस तरह की समन्वित कार्रवाई की अभी भी आवश्यकता है। निरपवाद रूप से, यह देखा जाता है कि स्थानीय सरकारें स्थानीय राजनीति में फंस जाती हैं और इससे पुलिस और सुरक्षा बलों का मनोबल गिरता है। एक संवैधानिक तंत्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आंतरिक सुरक्षा के खतरों को पहले की तरह गंभीरता से संबोधित किया जाए।

अगला महत्वपूर्ण कारक स्थानीय जनता के साथ-साथ अन्य राज्यों के अन्य नागरिकों को भी एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करना होगा। भारतीय संघ के साथ जम्मू-कश्मीर का सही एकीकरण केवल तभी संभव है जब यह विशेष स्थिति और संरक्षित वातावरण से आगे बढ़े। नए कश्मीर को भारतीय उद्यम का खुले हाथों से स्वागत करना चाहिए और भेदभावपूर्ण नीतियों का पालन नहीं करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर की नई व्यवस्था को यह समझना होगा कि अगर विरोधी ताकतें समाज में गुटबाजी महसूस करती हैं तो संघर्ष और अराजकता की स्थिति में फिसलना बहुत आसान है। नई सरकार को मौसम से मदद मिलने की संभावना है क्योंकि सर्दियां जल्द ही शुरू हो जाएंगी और सर्दियों के दौरान आतंकी गतिविधियों में कमी आएगी।

नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद पुलिस पदानुक्रम में बदलाव की बात चल रही है। नई व्यवस्था हमेशा अधिकारियों को अपने प्रति वफादार बनाने की कोशिश करती है। यह दृष्टिकोण कुछ ऐसा है जिस पर एलजी को विशेष ध्यान देना चाहिए। राजनीतिक कारणों से अनुभवी पेशेवरों को पोस्ट करने के लिए कोई अनुचित जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। स्थिति अभी भी सुरक्षा में शामिल लोगों के नेतृत्व में निरंतरता की मांग करती है।

जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा प्रदान करना सभी सुरक्षा और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के बाद एक जांची समझी प्रक्रिया होनी चाहिए। वास्तव में, नई सरकार को संविधान की शपथ लेनी चाहिए, जिसने अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को निरस्त करने की पुष्टि की है। नई विधानसभा को इस पर किसी भी चर्चा और इसके लिए प्रस्ताव पारित करने से रोका जाना चाहिए। नेकां के नेतृत्व वाली सरकार इस विवादास्पद मुद्दे को उठा सकती है। केंद्र सरकार को ऐसी किसी भी शरारत को एलजी के कार्यालय के माध्यम से शुरू में ही खारिज कर देना चाहिए।

यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एलजी और सीएम के बीच टकराव के दिल्ली मॉडल को हर कीमत पर टाला जाए। जम्मू-कश्मीर एक अत्यधिक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जिसका राष्ट्र की रक्षा में बड़ा हाथ है। जम्मू क्षेत्र के हितों की रक्षा की जानी चाहिए, भले ही इस क्षेत्र ने बहुमत में किसी विशेष पार्टी को वोट दिया हो।

जम्मू-कश्मीर में सरकार बनने के बाद जो दिक्कतें होंगी, वे वैश्विक जांच से महत्वपूर्ण हैं। यहां तक कि एक मामूली बदलाव भी विदेशी मीडिया द्वारा उजागर किया जाएगा । स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया और नैरेटिव लोगों के दिल और दिमाग को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हैं। यहां तक कि सुरक्षा वातावरण को भी मीडिया की बहुत अधिक जांच का सामना करना पड़ेगा। कानून और व्यवस्था मशीनरी को शासन के कम से कम पहले छह महीनों में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।

आजादी के बाद पहली बार, जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड मतदाताओं के साथ सबसे निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव हुए हैं। एक राष्ट्र के रूप में भारत ने जम्मू-कश्मीर में चुनावों के सफल संचालन के लिए बड़ी मात्रा में अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना अर्जित की है। हिंसा मुक्त चुनावों की लगभग असंभव उपलब्धि हासिल करने के बाद, अब ध्यान प्रभावी शासन पर स्थानांतरित होना चाहिए। नई सरकार को यह सुनिश्चित करने के प्रयासों में तालमेल बिठाना होगा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में और सुधार हो। शासन में किसी भी टकराव का फायदा शत्रुतापूर्ण ताकतों द्वारा हिंसा को भड़काने और जम्मू-कश्मीर को अशांत रखना हो सकता है। आने वाला समय जम्मू-कश्मीर के लिए निर्णायक होगा।

Topics: Jammu Election Result 2024Kashmir Election Result 2024NCJammu Kashmir Chunav 2024अनुच्छेद 35एBJPआतंकवादअनुच्छेद 370जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव
Share1
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

छात्रसंघ चुनाव, वोट चोरी, केरल की जीत से CJP तक

सुधांशु त्रिवेदी, सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा

इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन पर BJP हमलावर, सुधांशु त्रिवेदी बोले-चार पीढ़ियों से लोकतंत्र का गला घोंट रही कांग्रेस

अमित शाह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री

गृह मंत्री अमित शाह बोले-UP में अब कट्टा उद्योग की जगह डिफेंस कॉरिडोर और वाहन चोरी की जगह वाहन निर्माण

BJP ने कई राज्यों में नए महासचिव और संयुक्त महासचिव नियुक्त किए, जानिये किसे मिली किस राज्य की जिम्मेदारी

प्रख्यात चिंतक राम माधव

‘बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की नई भूमिका’

डिजिटल आतंकवाद

ना ट्रेनिंग कैंप, ना कोड वर्ड: सोशल मीडिया पर कैसे चल रही ISI की ‘डिजिटल आतंकी फैक्ट्री’?

Load More

ताज़ा समाचार

गोकशी का आरोपी महफूज, जिसे नालंदा से गिरफ्तार किया गया।

गोकशी का इनामी आरोपी महफूज नालंदा से गिरफ्तार

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करते मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा

यूपी में मतदाताओं के पंजीकरण के लिए चलेगा विशेष अभियान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

कभी यूपी में अराजकता की दिखती थी डरावनी तस्वीर, अब माफिया मिट्टी में मिल गए : सीएम योगी आदित्यनाथ

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम

मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान,  8 से 10 अक्टूबर तक सभी बूथों पर विशेष कैंप लगाएंगे बीएलओ

उत्तरकाशी में सेवा ज्योति कलश यात्रा एवं सेवा संकल्प सभा में प्रतिभाग करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

सीएम धामी ने उत्तरकाशी में सेवा ज्योति कलश यात्रा एवं सेवा संकल्प सभा का किया आगाज, बनेगा विश्वनाथ-शक्ति मंदिर कॉरिडोर

ड्रग तस्करों के बारे में मीडिया को जानकारी देते पुलिस अधिकारी।

हल्द्वानी: बनभूलपुरा का दर्जी  निकला ड्रग तस्कर, पुलिस ने भेजा जेल 

आकाशवाणी भवन के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी समेत अन्य नेता।

विपक्ष ने न समय मांगा, न माना प्रोटोकॉल; ‘संसद एनेक्सी’ में बैठक की रखी असामान्य शर्त : चुनाव आयोग

दीप प्रज्वलित कर श्री अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का श्रीगणेश करते महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज। साथ में हैं बाएं से श्री अमित शाह, श्री आलोक कुमार, श्री दत्तात्रेय होसबाले और श्री महेश भागचंदका

संगठन शिल्पी की शताब्दी

प्रतीकात्मक चित्र

‘मुस्लिम लड़कियां नास्तिक हो रहीं, उन्हें रोकें’- कांग्रेस नेता शाजी से लेकर मौलाना रशीदी की चिंता पर ‘आजादी’ वाले मौन?

छात्रसंघ चुनाव, वोट चोरी, केरल की जीत से CJP तक

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies