
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार हो रहे हैं विधानसभा चुनाव।
जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। इस चरण में कुल 65.58% मतदान दर्ज किया गया, जो कि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाता है। चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे समाप्त हुआ। कुल मिलाकर तीनों चरणों में जम्मू-कश्मीर के नागरिकों ने बड़ी संख्या में मतदान किया, और यह प्रक्रिया बिना किसी बड़ी हिंसा या कानून-व्यवस्था की समस्या के पूरी हुई।
तीसरे चरण में मतदान प्रतिशत का ब्योरा
तीसरे चरण के मतदान में कई जिलों में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न जिलों में मतदान प्रतिशत इस प्रकार रहा:
बांदीपोरा : 64.85%
बारामूला : 55.73%
जम्मू : 66.79%
कठुआ : 70.53%
कुपवाड़ा : 62.76%
सांबा : 72.41%
उधमपुर : 72.91%
पहले और दूसरे चरण का मतदान प्रतिशत
इससे पहले पहले चरण में 61.38% मतदान दर्ज किया गया था, जबकि दूसरे चरण में 57.31% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। तीनों चरणों में मिलाकर यह चुनाव जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की लोकतंत्र के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है।
मतगणना 8 अक्टूबर को
चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि इन विधानसभा चुनावों की मतगणना 8 अक्टूबर, 2024 को की जाएगी। सभी तीनों चरणों के मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रूप से संपन्न किया गया है।
सीईसी राजीव कुमार का बयान
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने इन चुनावों को जम्मू-कश्मीर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इन चुनावों ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के लोकतंत्र में दृढ़ संकल्प और विश्वास को साबित किया है। शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था के प्रबंधन में सुधार को भी उजागर किया, जो कि 2014 के चुनावों के मुकाबले काफी बेहतर था।
उन्होंने यह भी कहा कि मतदान केंद्रों पर लंबी कतारों में खड़े होकर मतदान करने वाले नागरिकों की दृढ़ता ने लोकतंत्र की भावना को मजबूती दी है और भविष्य के लिए एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में काम करेगा।
शांतिपूर्ण और उत्सवी माहौल
चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे चरण में 40 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान हुआ और कहीं भी हिंसा की कोई घटना दर्ज नहीं हुई। शांतिपूर्ण माहौल में हुए इस मतदान ने जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और मजबूत किया है।