विहिप की षष्ठिपूर्ति पर विशेष : सनातन सेवा के 60 साल
June 24, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

विहिप की षष्ठिपूर्ति पर विशेष : सनातन सेवा के 60 साल

विहिप ने अवैध कन्वर्जन पर रोक तथा कर्न्वजन कर चुके हिंदुओं को अपनी जड़ों से पुन: जोड़ने की दिशा में बड़ा कार्य किया है। अभी तक लगभग 40 लाख हिन्दुओं का कन्वर्जन रोकने के साथ-साथ 9 लाख की घरवापसी कराई है

Written byविनोद बंसलविनोद बंसल
Sep 5, 2024, 10:34 am IST
in भारत, विश्लेषण, संघ @100, धर्म-संस्कृति, लव जिहाद
विहिप की स्थापना के समय मंच पर बैठे हैं (बाएं से) स्वामी चिन्मयानंद जी, श्रीगुरुजी, श्री दादासाहेब आप्टे, संत श्री तुकडो जी महाराज, पूज्य शंकराचार्य जी

विहिप की स्थापना के समय मंच पर बैठे हैं (बाएं से) स्वामी चिन्मयानंद जी, श्रीगुरुजी, श्री दादासाहेब आप्टे, संत श्री तुकडो जी महाराज, पूज्य शंकराचार्य जी

देश की स्वतंत्रता के पश्चात कथित सेकुलरवाद के नाम पर हिन्दू समाज पर बढ़ते अन्याय तथा ईसाइयों व मुसलमानों के तुष्टीकरण के बीच 1957 में नियोगी आयोग रिपोर्ट आई। इसमें ईसाई मिशनरियों द्वारा छल, कपट, लोभ, लालच व धोखे से पूरे देश में हिंदुओं के कन्वर्जन की सचाई के सामने आने के बावजूद, तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा कन्वर्जन के विरुद्ध केंद्रीय कानून बनाने से स्पष्ट मना कर दिया गया।

विनोद बंसल,
राष्ट्रीय प्रवक्ता-विहिप

उधर, विदेशों में रहने वाला हिन्दू समाज भी अपनी विविध समस्याओं के समाधान हेतु भारत की ओर ताक तो रहा था, किन्तु उसके प्रति भी केंद्र सरकार के उदासीन रवैये ने निराश ही किया। ऐसे में हिन्दू समाज को संगठित कर धर्म रक्षा करने तथा हिन्दू धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन मूल्यों की रक्षा हेतु साठ वर्ष पूर्व जन्माष्टमी (अंग्रेजी तिथि के अनुसार 29 अगस्त, 1964) को विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना हुई।

इस अवसर पर एक बैठक हुई जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और हिदुस्थान समाचार के संस्थापक श्री दादासाहेब आप्टे जी के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मुंबई के पवई स्थित पूज्य स्वामी चिन्मयानन्द जी के आश्रम सांदीपनि साधनालय में पूज्य स्वामी चिन्मयानन्द, राष्ट्रसंत तुकडो जी महाराज, सिख सम्प्रदाय से माननीय मास्टर तारा सिंह, जैन सम्प्रदाय से पूज्य सुशील मुनि, गीता प्रेस गोरखपुर से हनुमान प्रसाद पोद्दार, केएम मुंशी तथा पूज्य श्री गुरुजी सहित 40-45 अन्य महानुभाव भी उपस्थित थे।

इस बैठक में हिन्दू समाज को संगठित और जागृत करने, उसके स्वत्वों, मानबिन्दुओं तथा जीवन मूल्यों की रक्षा और संवर्धन करने और विदेश स्थित हिंदुओं से संपर्क स्थापित कर उन्हें सुदृढ़ बनाने व उनकी सहायता करने सम्बन्धी विश्व हिंदू परिषद के तीन मुख्य उद्देश्य तय किए गए। हिन्दू को पारिभाषित करते हुए कहा गया कि ‘जो व्यक्ति भारत में विकसित जीवन मूल्यों में आस्था रखता है या जो स्वयं को हिन्दू कहता है वह हिन्दू है।’

22 से 24 जनवरी, 1966 को कुंभ के अवसर पर 12 देशों के 25 हजार प्रतिनिधियों की सहभागिता के साथ प्रथम विश्व हिंदू सम्मेलन प्रयाग में सम्पन्न हुआ। इसमें 300 प्रमुख संतों के साथ पहली बार प्रमुख शंकराचार्य भी एक साथ आए और कन्वर्जन पर रोक व परावर्तन (घरवापसी) का संकल्प लिया गया। मैसूर के महाराज मा. चामराज जी वाडियार को प्रथम अध्यक्ष व दादासाहब आप्टे को महामंत्री बनाने के साथ विहिप की प्रबंध समिति की घोषणा भी हुई। इस सम्मेलन में जहां घरवापसी को मान्यता देने का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हुआ, वहीं विहिप के बोध वाक्य ‘धर्मो रक्षति रक्षित:’ और बोध चिह्न ‘अक्षय वटवृक्ष’ भी तय हुआ।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का मत था कि यदि देश के संत-महात्मा मिलकर यह घोषित कर दें कि हिन्दू धर्म-शास्त्रों में छुआछूत का कोई स्थान नहीं है तो इस अभिशाप को समाप्त किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 13-14 दिसम्बर, 1969 की उडुपी धर्म संसद में संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरुजी के विशेष प्रयासों से भारत के प्रमुख संतों ने एक स्वर से ‘हिन्दव: सोदरा सर्वे, ना हिन्दू पतितो भवेत्’ के उद्घोष के साथ सामाजिक समरसता का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया।

1994 में काशी में हुई धर्म संसद का निमंत्रण डोम राजा को देने पूज्य संत न सिर्फ स्वयं चलकर गए, बल्कि उनके घर का प्रसाद ग्रहण किया तथा अगले दिन डोम राजा धर्म संसद के अधिवेशन में संतों के मध्य बैठे और संतों ने उन्हें पुष्पहार पहनाकर उनका स्वागत किया। इस धर्म संसद में 3500 संत उपस्थित थे। वनवासी, जनजाति, अति पिछड़ी व पिछड़ी जाति के हजारों लोगों को ग्राम पुजारी के रूप में प्रशिक्षण देकर उनका समय-समय पर अभिनन्दन व मंदिरों में पुरोहित के रूप में नियुक्ति, विहिप के ग्राम पुजारी प्रशिक्षण अभियान के कारण ही संभव हुई।

9 नवम्बर, 1989 को श्रीराम जन्मभूमि का शिलान्यास एक अनुसूचित जाति के कार्यकर्ता कामेश्वर चौपाल द्वारा कराए जाने के अतिरिक्त, देश भर में आयोजित समरसता यज्ञ, समरसता यात्राएं, समरसता गोष्ठियां, हिन्दू परिवार मित्र योजना, अनुसूचित जाति व जनजातियों के लिए छात्रावास इत्यादि अनेक योजनाओं व कार्यक्रमों के माध्यम से हिन्दू समाज के बीच व्याप्त छुआछूत के अभिशाप से मुक्ति हेतु अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। 2003 से लगातार देशभर में भगवान वाल्मीकि, संत रविदास तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर इत्यादि महापुरुष, जिन्होंने देश की समरसता में योगदान दिया, उनकी जयंती व्यापक रूप से मनाई जा रही हैद्ध इन सब कार्यक्रमों के परिणामस्वरूप अब संत समाज सहज रूप से वंचित बस्तियों में प्रवास, प्रवचन और सह-भोज सहजता से करते हैं।

द्वितीय विश्व हिंदू सम्मेलन भी प्रयाग की पावन धरा पर 27 से 29 जनवरी, 1979 को 18 देशों के 60 हजार प्रतिनिधियों की सहभागिता से सम्पन्न हुआ। इसका उद्घाटन पूज्य दलाई लामा ने किया था। उनका स्वागत ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य ने किया था। यह भी एक ऐतिहासिक प्रसंग था।

देश के वनवासी, गिरिवासी व नगरवासियों के कुंभ के रूप में असम के जोरहाट में 27 से 29 मार्च, 1970 को देश के सभी प्रमुख तीर्थों व 45 नदियों के जल से एकात्म हुए इस सम्मेलन में अनेक पूज्य संत-महात्माओं और पूर्वोत्तर के विचारकों के साथ नागारानी गाइडिन्ल्यु ने यह घोषणा की कि प्रकृति पूजक वनवासी समाज, जिसे ईसाई मिशनरियां अपने चंगुल में फंसा रही हैं, हिन्दू समाज का ही अभिन्न अंग है।

1982 में श्री अशोक सिंघल विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी बने। इसके बाद व्यापक जन जागरण के कार्यक्रम होने लगे। 1983 में हुई एकात्मता यात्रा में तो देश के 6 करोड़ लोगों ने सहभाग किया। अप्रैल 1984 में नई दिल्ली में प्रथम धर्म संसद का अधिवेशन संपन्न हुआ।
विश्व हिंदू परिषद द्वारा समाज के सहयोग से देश भर में 45 सौ से अधिक सेवा प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। इनमें 31 प्रांतों के 93 हजार स्थानों पर 840 संस्कार शालाओं में 17 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। इनके अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, स्वावलंबन केंद्र, आवासी छात्रावास, अनाथालय, चिकित्सा केंद्र, कम्प्यूटर, सिलाई, कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र, विवाह केंद्र इत्यादि प्रमुख हैं।

गौ रक्षा, गौ पालन व गौ संवर्धन के क्षेत्र में विश्व हिन्दू परिषद् ने अनेक कार्य किए हैं। देश में 60 स्थानों पर गौवंश की देशी नस्लों का संवर्धन, 40 स्थानों पर पंचगव्य आधारित औषधि निर्माण केंद्र तथा तीन पंचगव्य अनुसंधान केंद्र इस समय कार्यरत हैं। 25 लाख गोवंश की कसाइयों से मुक्ति, अनेक राज्यों में गोवंश की हत्या के विरुद्ध कठोर कानून की व्यवस्था और गोपालन से स्वावलंबन की ओर योजना के अन्तर्गत पांच गायों से 50 हजार मासिक की कमाई तथा गोवंश आधारित ऋण मुक्त, कृषि व रोजगार युक्त युवकों की दिशा में विहिप ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसने अनेक राज्यों में गोरक्षा हेतु कठोर कानून भी बनवाए हैं।

विहिप ने अवैध कन्वर्जन पर रोक तथा कन्वर्ट हो चुके हिंदुओं को अपनी जड़ों से पुन: जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कार्य किया है। अभी तक लगभग 40 लाख हिन्दुओं का कन्वर्जन रोकने के साथ-साथ लगभग 9 लाख की घरवापसी भी हुई है। अनुसूचित जाति, जनजाति, वनवासी व गिरिवासी समाज के बीच सेवा, समर्पण व स्वावलंबन के मंत्र के साथ अनेक राज्यों में छल-बल पूर्वक कन्वर्जन के विरुद्ध कठोर दण्ड की व्यवस्था वाले कानून विहिप के सतत प्रयासों के कारण ही बन पाए हैं। उसने 8 हजार बहिनों को लवजिहाद के षड्यंत्र से बचाया है।

भारत धर्म यात्राओं का देश है जिसकी आत्मा तीर्थों में वास करती है। इन यात्राओं के माध्यम से ही देश, धर्म व समाज की एकता, अखण्डता और समरसता प्रतिबिम्बित होती है। बात चाहे कांवड़ यात्रा की हो या कैलाश मान सरोवर की, अमरनाथ यात्रा हो या गोवर्धन परिक्रमा, जगन्नाथ की नव कलेवर यात्रा हो या सिन्धु यात्रा, श्रीराम जानकी विवाह बारात यात्रा हो या बाबा अमरनाथ की यात्रा, इन सभी को सस्ती, सफल, सुखद, संस्कारित व आध्यात्मिक स्वरूप देने में विश्व हिन्दू परिषद् के धर्म यात्रा महासंघ ने वर्ष 1995 से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शासन-प्रशासन व सम्बन्धित सरकारों के साथ अनवरत संपर्क के माध्यम से इन्हें व्यवस्थित भी किया गया है। अनेक मृत प्राय: यात्राओं को पुनर्जीवित भी किया गया।

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा को लेकर विदेशों में बसे हिन्दू समाज की सुरक्षा, संस्कार व उनके अन्दर हिन्दू जीवन मूल्यों को जीवंत रखने हेतु विहिप ने अनेक कदम उठाए है। विश्व के किसी भी भू भाग पर रहने वाले हिन्दू की आवाज के रूप में विहिप कार्यकर्ता सदैव अग्रणी रहे हैं।

इसी कारण विहिप ने अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, कनाडा, फिजी, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, थाईलैंड, इंडोनेशिया, ताईवान, श्रीलंका, नीदरलैंड, सिंगापुर, नेपाल, जर्मनी इत्यादि देशों में अनेक स्थानीय व वैश्विक स्तर के सम्मेलनों का सफलता पूर्वक आयोजन किया तथा इनमें से अधिकांश देशों में हिन्दू त्योहारों, परम्पराओं को धूमधाम से मनाया जाता है।

अपने 60 वर्ष की विकास यात्रा में विहिप ने अनेक जन जागरण अभियान चलाए जो वैश्विक कीर्तिमान बने। 1984 में प्रारम्भ हुए श्री राम जन्म भूमि मुक्ति आन्दोलन ने देश के लाखों गांवों के 65 करोड़ लोगों को जोड़ा। सड़क से संसद व सर्वोच्च न्यायालय तक अपनी आवाज बुलंद कर 496 वर्षों के संघर्ष के उपरांत, देश के स्वाभिमान का पुनर्जागरण करते हुए, 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा ने इस ऐतिहासिक दिवस को स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा दिया।

1995 में जब आतंकियों ने बाबा अमरनाथ की यात्रा को बंद करने की धमकी देते हुए यह कहा, ‘‘यदि कोई आएगा तो वापस नहीं जाएगा। तब बजरंगदल के आह्वान पर 51 हजार बजरंगी व एक लाख अन्य शिव भक्तों ने जय भोले की हुंकार भरते हुए यात्रा की ओर जब कूच किया तो उसे रोकने का कोई दुस्साहस नहीं कर पाया।’’ पूंछ जिले के सीमांत क्षेत्र को हिन्दू विहीन करने के जिहादी षड्यंत्र को भांपते हुए बजरंग दल ने 2005 में बाबा बूढ़ा अमरनाथ की यात्रा को जब पुन: प्रारम्भ कराया तो वहां से हिन्दुओं का पलायन भी रुका और समाज व सुरक्षाकर्मियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा। इनके अलावा मेवात में नलहड़ महादेव यात्रा, कर्नाटक में दत्ता पीठ यात्रा तथा अयोध्या से जनकपुर तक जाने वाली श्री राम-जानकी बारात यात्रा भी सामाजिक समरसता व एकात्मता का भाव जागृत कर रही हैं।

भगवान श्रीराम के आदेश पर नल व नील द्वारा दक्षिण में बनाए गए राम सेतु को तत्कालीन सरकार के हमले से बचाने हेतु भी विहिप ने एक बड़ा जन आन्दोलन खड़ा किया था। जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में श्री राम के अस्तित्व को ही नकार दिया तो विहिप के मात्र चार घंटे के सफल देशव्यापी चक्का जाम ने सरकार को उसी दिन झुकने को मजबूर कर दिया। दिल्ली के स्वर्ण जयंती पार्क में उपस्थित लाखों राम भक्तों के सैलाब के आगे सरकारी जिद धरी रह गई। विहिप की युवा शाखा बजरंग दल तथा दुर्गा वाहिनी ने 1984 से लेकर आज तक देश-धर्म संस्कृति व राष्ट्र की रक्षार्थ सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। सेवा, सुरक्षा व संस्कार इनके मूल मंत्र रहे हैं। विहिप ने संस्कृत भाषा, वेद पाठशाला तथा संस्कारों की अभिवृद्धि हेतु भी अनेक कदम उठाए हैं।

इतने सब के बावजूद हमारे समक्ष कन्वर्जन, लव जिहाद, सामाजिक समरसता, धर्म स्थलों की सुरक्षा व सरकारी अधिग्रहण से मुक्ति, संस्कृति व संस्कारों का क्षरण, धार्मिक शिक्षा व जागरूकता का अभाव, विदेशी घुसपैठ, जनसंख्या असंतुलन जैसी अनेक चुनौतियां सामने खड़ी हैं जिनका मुकाबला करते हुए हिन्दू समाज को इनसे मुक्ति दिलानी है।

Topics: हिन्दू समाज की सुरक्षाsecurity and cultureसंस्कारBaba Budha Amarnath Yatraसेवावसुधैव कुटुम्बकम्पाञ्चजन्य विशेषदेश-धर्म संस्कृतिlove jihadराष्ट्र की रक्षार्थकन्वर्जनसुरक्षा व संस्कारसामाजिक समरसताधर्म स्थलराम सेतुहिन्दुओं का पलायनShri Ram Janmabhoomi
विनोद बंसल
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता, विश्व हिंदू परिषद [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

वीर निकला आरिफ

फरीदाबाद: ‘वीर’ बनकर युवती से की शादी, बाद में निकला आरिफ; पहले से शादीशुदा और तीन बच्चों का पिता होने का आरोप

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान : नेहरू की भूमिका, मौत के पीछे की साजिश, मां का पत्र और बेटी का रहस्योद्घाटन

महान वीरांगना रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती: स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालीं महान वीरांगना

संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार

राष्ट्र-चिंतक डॉ. हेडगेवार

बनाएं स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

अंदमान निकोबार : भारत को मिली नई ‘ऊर्जा’

Load More

ताज़ा समाचार

rajnath singh cm pushkar dhami-visit dehradun tribute shok sabha

उत्तराखंड : पदम श्री निशानेबाज़ जसपाल राणा को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंची हस्तियां

मुंबई में चलती ट्रेन में युवक की हत्या

मुंबई: चलती लोकल ट्रेन में युवक की चाकू मारकर हत्या, आरोपी गिरफ्तार

रणशाला प्रोजेक्ट के तहत बच्चों के पास पहुंचेगा स्कूल

School on Wheels : गुजरात सरकार की अनोखी पहल, ST बस बनी मोबाइल क्लासरूम, बच्चों तक पहुंचेगा स्कूल

कोलकाता: निर्माणाधीन गोदाम की छत ढहने से 3 मजदूरों की मौत, 18 को बचाया गया; राहत-बचाव कार्य जारी

UCC: MP में 71 फीसदी मुस्लिम महिलाएं यूसीसी के समर्थन में…

25 जून का पंचांग

25 जून का पंचांग: एकादशी पर बन रहा शुभ संयोग, जानें आज का शुभ समय और ग्रहों की चाल

दाने-दाने को मोहताज पाकिस्तान, युद्ध की धमकी के नाम पर मांग रहा पानी की भीख

सना मलिक, एनसीपी नेता

UCC पर बोलीं सना मलिक: पाकिस्तान की तरह भारत में लागू हो इस्लामिक कानून, NCP नेता ने तीन तलाक, बहुविवाह का किया समर्थन

BJP ने कहा- AAP और भगवंत मान ने किया सिख गुरुओं का अपमान, इस्तीफा दें… अकाल तख्त से क्षमा मांगे

प्रतीकात्मक तस्वीर (AI-generated image)

भारत को मिला नया गोल्ड हब! इस जिले से हर दिन निकलेगा इतने किलो सोना

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies