रोबोट भी नहीं झेल पा रहे काम का दबाव! हैरतअंगेज है दुनिया की पहली ‘रोबोट सुसाइड’
July 4, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

रोबोट भी नहीं झेल पा रहे काम का दबाव! हैरतअंगेज है दुनिया की पहली ‘रोबोट सुसाइड’

साउथ कोरिया में एक रोबोट ने एक आदमी की ही भांति आत्महत्या कर ली है और यह दुनिया का इस तरह का पहला हैरतअंगेज मामला है।

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Jul 6, 2024, 05:00 pm IST
in विश्व, विश्लेषण

दक्षिण कोरिया में हाल ही में एक अद्भुत घटना सामने आई। दरअसल दुनियाभर में लोगों द्वारा मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या किए जाने की खबरें तो आए दिन सामने आती ही रही हैं और अब दावा किया जा रहा है कि साउथ कोरिया में एक रोबोट ने भी एक आदमी की ही भांति आत्महत्या कर ली है और यह दुनिया का इस तरह का पहला हैरतअंगेज मामला है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कहा यही जा रहा है कि रोबोट ने काम के बोझ से परेशान होकर सीढ़ियों से कूदकर खुदकुशी कर ली और दुनियाभर में किसी भी रोबोट अथवा मशीन द्वारा आत्महत्या करने का यह अपनी तरह का पहला मामला है। दक्षिण कोरिया गुमी शहर की सिटी काउंसिल ने स्वयं यह बताया है कि ‘साइबॉर्ग’ नामक उसके प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी रोबोट की मौत हो गई है, जिसने सीढ़ियों से साढ़े छह फीट नीचे छलांग लगाकर अपनी जान दे दी है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक गुमी सिटी काउंसिल का यह रोबोट सुपरवाइजर एक बेहद मेहनती कर्मचारी था, जो प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से सायं 6 बजे तक काम करता था और सिटी काउंसिल की ही रिपोर्ट में कहा गया है कि रोबोट (जिसे रोबोट सुपरवाइजर कहा जाता है) के हिस्से काउंसिल भवन की पहली और दूसरी मंजिल के बीच सीढ़ियों के नीचे बिखरे हुए पाए गए। रोबोट जब सीढ़ियों से गिरा तो उसके शरीर के तमाम पुर्जे इधर-उधर बिखर गए थे। अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि रोबोट ने अज्ञात कारणों से खुद को सीढ़ियों से नीचे फैंक दिया यानी उसने एक प्रकार से सीढ़ियों से कूदकर अपनी जान दे दी। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक रोबोट कुछ ऐसी स्थिति में पाया गया, जिसकी उम्मीद एक मशीन से नहीं की जा सकती थी। यह रोबोट अधिकारी लोगों को बहुत पसंद था क्योंकि यह स्थानीय निवासियों तक कई प्रकार के सरकारी कागजात पहुंचाने के अलावा लोगों को जरूरी जानकारियां भी देता था।

कैलिफोर्निया के रोबोट स्टार्टअप ‘बियर रोबोटिक्स’ द्वारा निमित आत्महत्या करने वाले इस रोबोट पर्यवेक्षक की नियुक्ति गुमी सिटी काउंसिल में अगस्त 2023 में ही की गई थी और अधिकारी (एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर) के तौर पर नियुक्त होने वाला यह पहला रोबोट था, जिसके भीतर एक सिविल सेवा अधिकारी का कार्ड भी लगा था। रोबोट को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि यह सीढ़ियों की तरफ न जाए और इसमें लगे अनेक सेंसर तथा बुद्धिमान फीचर्स यह समझने में इसकी मदद करते थे कि उसके दायरे क्या हैं। अनोखे ढ़ंग से डिजाइन किया गया यह रोबोट अपनी तरह का पहला ऐसा रोबोट था, जिसे नगर परिषद अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। जिस जगह पर रोबोट ने आत्महत्या की, उसके आसपास मौजूद रहे कुछ लोगों के मुताबिक गिरने से पहले रोबोट काफी देर तक एक ही जगह पर चक्कर लगाता रहा और फिर अचानक नीचे कूद गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रोबोट का व्यवहार सुसाइड से ठीक पहले अजीब लग रहा था। जब वह नगर निगम के कार्यालय में बनी सीढ़ी के पास पहुंचा तो उसने पहले आसपास देखा और फिर ऑफिस की सीढ़ी पर अपने आप को धकेल दिया, जिसके बाद वह निष्क्रिय हो गया। नगर निगम के अधिकारियों ने भी माना है कि आत्महत्या की घटना से पहले रोबोट ठीक उसी तरह इधर-उधर घूम रहा था, जैसे कोई अवसादग्रस्त परेशान व्यक्ति घूमता है। हालांकि रोबोट क्यों और कैसे गिरा, इसकी जांच की जा रही है और इसके सभी टुकड़ों को विशेष जांच टीम द्वारा आगे की जांच के लिए इकट्ठा कर कब्जे में ले लिया गया लेकिन कहा यही जा रहा है कि काम के बोझ के कारण रोबोट तनाव में आ गया था। दक्षिण कोरिया की नगर परिषद का कहना है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि रोबोट ने आत्महत्या की है लेकिन इस बात में संदेह है कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया? आत्महत्या की वजह काम का अधिक बोझ था या कुछ और?

दक्षिण कोरिया के रोबोट द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाए जाने के बाद सवाल यही उठ खड़ा हुआ है कि क्या काम का दबाव केवल इंसानों पर ही होता है? क्या रोबोट भी दिन-रात काम करके परेशान हो सकते हैं और इंसानों की ही भांति आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा सकते हैं? सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यही है कि यदि मशीनी रोबोट भी काम के बोझ से तंग आकर आत्महत्या करने लगे तो इंसानों की क्या हालत होगी? रोबोट द्वारा सुसाइड की इस घटना के बाद दक्षिण कोरियाई अधिकारी सकते में हैं। दरअसल दक्षिण कोरिया रोबोटिक तकनीक को तेजी से अपनाने वाले देश के रूप में जाना जाता है। ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स’ के मुताबिक दक्षिण कोरिया में दुनियाभर के तमाम अन्य देशों के मुकाबले सर्वाधिक रोबोट हैं। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स द्वारा रोबोट की आत्महत्या के बाद जारी किए गए बयान के अनुसार दक्षिण कोरिया में रोबोट के प्रति जबरदस्त आकर्षण है, जहां प्रत्येक 10 मानव कर्मचारियों पर 1 औद्योगिक रोबोट काम कर रहा है। हालांकि रोबोट द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना सामने आने के बाद फिलहाल गुमी सिटी काउंसिल दूसरे रोबोट अधिकारी को लाने पर विचार नहीं कर रही है।

रोबोट द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना सामने के बाद हर कोई इसलिए भी सकते में है क्योंकि रोबोट अब पूरी दुनिया में बहुत सारी ऐसी जगहों पर भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिसके बारे में कुछ वर्ष पूर्व तक किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। माना जाता है कि चूंकि रोबोट बिना थके लगातार घंटों तक काम कर सकते हैं, इसीलिए बहुत से कार्य तो ऐसे हैं, जो पूरी तरह से रोबोट के ही कंधों पर आ गए हैं। रोबोट अब रेस्तरां से लेकर अस्पतालों, होटलों और कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों में, इंसानी जिंदगी के अलग-अलग पहलुओं का अहम हिस्सा बन चुके हैं। रोबोट एक प्रोग्राम की हुई मशीन होती है और इसीलिए माना जाता है कि इनके अंदर मनुष्यों की भांति इमोशन नहीं होते, न ही इनके पास इंसानी दिमाग होता है और न ही ये इंसानों की तरह सोच सकते हैं। वे स्वयं की मर्जी से कोई काम नहीं करते बल्कि अपने प्रोग्राम के हिसाब से ही कार्य करते हैं। ऐसे में सवाल यही है कि जब रोबोट इंसान की तरह सोच-विचार ही नहीं सकते तो आत्महत्या जैसा निर्णय कैसे ले सकते हैं? रोबोट बिना थके दिन-रात काम कर सकते हैं और इनमें इंसानी भावनाएं नहीं होने के चलते इनके डिप्रेशन में जाने का डर भी नहीं होता लेकिन ‘साइबॉर्ग’ रोबोट के सुसाइड मामले ने इस थ्योरी पर सवालिया निशान लगा दिया है।

दक्षिण कोरिया के ‘रोबोट सुसाइड’ मामले में यही माना गया है कि ‘साइबॉर्ग’ रोबोट ने काम के बोझ से परेशान होकर आत्महत्या की लेकिन वैज्ञानिकों का स्पष्ट मानना है कि कोई मनुष्य जब लगातार देर तक कार्य करता है तो उसे थकान का अहसास होता है लेकिन चूंकि ‘थकान’ जैसी चीज किसी भी रोबोट के प्रोग्राम में नहीं होती, इसलिए रोबोट के अंदर थकान का भाव आना असंभव माना जाता है। इंसानों तथा अन्य सभी ऐसे जीवों को, जिनके अंदर ‘प्राण’ होते हैं, जीवन और मृत्यु का अहसास होता है, केवल यही जीवन और मृत्यु के अंतर को समझ सकते हैं जबकि किसी रोबोट के अंदर ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं होता, जिससे उसे जीवन और मृत्यु का अहसास हो सके, ऐसे में किसी रोबोट द्वारा आत्महत्या करने का दुनिया का पहला मामला वैज्ञानिकों को भी हैरान कर रहा है। बहरहाल, अभी तक रोबोट या रोबोटिक मशीनों के खराब होने अथवा उनमें शॉर्ट सर्किट होने के बारे में तो सुना जाता रहा है लेकिन रोबोट द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आने के बाद पूरी दुनिया के वैज्ञानिक अब इसे जांच और गहन शोध का विषय मान रहे हैं।

Topics: Robot Sicide newsरोबोट आत्महत्याsouth koreaसाउथ कोरियापाञ्चजन्य विशेषRobotRobot Suicide CaseRobot Commits SuicideWorld First Robot Sicide
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

देवमाली गांव का विहंगम दृश्य और पहाड़ी पर स्थित मंदिर

देवमाली के घरों में नहीं लगता ताला

बहुआयामी वीर सावरकर (4) : राष्ट्रचेतना के नाटककार

सेमीकंडक्टर (चित्र- एआई द्वारा निर्मित)

Explainer : क्या है सेमीकंडक्टर ? क्या ‘चिप’ तय करेगी दुनिया की सत्ता और भारत बनेगा भविष्य का निर्माता?

पश्चिम बंगाल : सड़क ‘मरहम’ की

बहुआयामी वीर सावरकर (3) : निर्भीक उपन्यासकार

पाकिस्तान की नई साजिश

बाबर, गजनी पर नाज़ करने वाला पाकिस्तान खेल रहा हिंदू कार्ड? संस्कृत, पाणिनी, चाणक्य पर क्यों ठोका दावा?

Load More

ताज़ा समाचार

गुजरात और मध्य प्रदेश से पकड़े गए जैश ए मोहम्मद के आठ आतंकी

जैश आतंकियों का खुलासा: गुजरात में बना रहे थे नेटवर्क, मदरसा कनेक्शन, मसूद अजहर की ‘दर्स ए जिहाद’ का गुजराती में अनुवाद

Explainer: 15 बिंदुओं में समझिए क्यों इतनी खास है देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी?

Explainer: क्या होती है ग्रीनफील्ड रिफाइनरी? PM मोदी ने देश को की समर्पित; ऐसे बदलेगी राजस्थान की तस्वीर

2021 हिंसा का जख्म अभी ताजा है: दिलीप घोष ने अभिषेक-ममता पर लगाया गंभीर आरोप

Europe heatwave

हीटवेव का कहर: यूरोप में अब तक 20,000 से अधिक मौतें, फिर भी पश्चिमी मीडिया का दोगलापन देखिए

Indian Army Fact check

चीन ने अरुणाचल प्रदेश में अतिक्रमण किया? पाक प्रोपगैंडा की भारतीय सेना फैक्ट चेक में खुली पोल

Uttarakhand Gokshi

गदरपुर गौकशी मामले में फरार आरोपी मोईन गिरफ्तार, मुठभेड़ में पैर में लगी गोली

What is MPATGM Missile system

Explainer: क्या है MPATGM मिसाइल कार्यक्रम? जिसे DRDO ने दी है मंजूरी, भारत को क्या होगा फायदा ?

ओडिशा सरकार ने जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप के साथ 67,000 करोड़ के समझौते पर हस्ताक्षर किए

करमाला आईटीआई की नाम पट्टिका का अनावरण करते श्री मंगलप्रभात लोढा। साथ में हैं श्री सुनील आंबेकर और अन्य अतिथि (प्रकोष्ठ में) श्री मदनदास देवी

स्व. मदनदास देवी के नाम पर आईटीआई का नामकरण

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies