रामलला विराजमान के मंदिर में पानी नहीं टपका :  चंपत राय
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रामलला विराजमान के मंदिर में पानी नहीं टपका :  चंपत राय

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चम्पत राय का बयान आया है। उन्होंने बताया कि गर्भगृह जहां भगवान रामलला विराजमान है, वहां एक भी बूंद पानी  छत से नहीं टपका और न ही कहीं से पानी गर्भगृह में प्रवेश हुआ है।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 27, 2024, 06:24 pm IST
inउत्तर प्रदेश
महामंत्री चम्पत राय

महामंत्री चम्पत राय

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में वर्षाकाल के दौरान छत से पानी टपकने के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चम्पत राय का बयान आया है। उन्होंने बताया कि गर्भगृह जहां भगवान रामलला विराजमान है, वहां एक भी बूंद पानी  छत से नहीं टपका और न ही कहीं से पानी गर्भगृह में प्रवेश हुआ है।

उन्होंने बताया कि गर्भगृह के आगे पूर्व दिशा में मंडप है , इसे गूढ़मण्डप कहा जाता है। वहां मंदिर के द्वितीय तल की छत का कार्य पूर्ण होने के पश्चात ( भूतल से लगभग 60 फीट ऊँचा ) घुम्मट जुड़ेगा और मण्डप की छत बन्द हो जाएगी। इस मंडप का क्षेत्र  35 फीट व्यास का है, जिसको अस्थायी रूप से प्रथम तल पर ही ढक कर दर्शन कराये जा रहे हैं। द्वितीय तल पर पिलर निर्माण कार्य चल रहा है। रंग मंडप एवं गुढ़ मंडप के बीच दोनो तरफ( उत्तर एवं दक्षिण दिशा में) उपरी तलो पर जाने की सीढियां हैं, जिनकी छत भी द्वितीय तल की छत के ऊपर जाकर ढँकेगी। वह  कार्य भी प्रगति पर है।

सामान्यतया पत्थरों से बनने वाले मंदिर में बिजली के कन्ड्युट एवं जंक्शन बाक्स का कार्य पत्थर की छत के ऊपर होता है एवं कन्ड्युट को छत मे छेद करके नीचे उतारा जाता है, जिससे मंदिर के भूतल के छत की लाइटिंग होती है। ये कन्ड्युट एवं जंक्शन बाक्स ऊपर के फ्लोरिंग के दौरान वाटर टाईट करके सतह में छुपाईं जाती है। चूंकि प्रथम तल पर बिजली, वाटर प्रूफिंग एवं फ्लोरिंग का कार्य प्रगति पर है अतः सभी जंक्शन बॉक्सेज़ में पानी प्रवेश किया। वही पानी कंड्यूट के सहारे भूतल पर गिरा। ऊपर देखने पर यह प्रतीत हो रहा था की छत से पानी टपक रहा है। जबकि यथार्थ में पानी कंड्यूट पाइप के सहारे भूतल पर निकल रहा था। उपरोक्त सभी कार्य शीघ्र पूरा हो जाएगा,, प्रथम तल की फ्लोरिंग पूर्णतः वाटर टाइट हो जाएगी और किसी भी जंक्शन से पानी का प्रवेश नहीं होगा, फलस्वरूप कन्डयुट के जरिये पानी नीचे तल पर भी नही जाएगा।

चंपत राय के मुताबिक मन्दिर एव परकोटा परिसर में बारिश के पानी की निकासी का सुनियोजित तरीके से उत्तम प्रबंध किया गया है जिसका कार्य भी प्रगति पर है अतः मंदिर एवं परकोटा परिसर में कहीं भी जलभराव की स्थिति नहीं होगी। पूरे श्रीराम जन्मभूमि परिसर को  बरसात के पानी के लिए बाहर शून्य वाटर डिस्चार्ज के लिए प्रबंधन किया गया है।

श्री राम जन्म भूमि परिसर में बरसात के पानी को अंदर ही पूर्ण रूप से रखने के लिये रिचार्ज पिट का भी निर्माण कराया जा रहा है। मन्दिर एवं परकोटा निर्माण कार्य तथा मन्दिर परिसर निर्माण / विकास कार्य भारत की दो अति प्रतिष्ठित कंपनियों L & T तथा टाटा के इंजीनियरों एवं पत्थरों से मन्दिर निर्माण की अनेक पीढ़ियों की परम्परा के वर्तमान उत्तराधिकारी चन्द्रकान्त सोमपुरा जी के पुत्र आशीष सोमपुरा व अनुभवी शिल्पकारों की देखरेख मे हो रहा है अतः निर्माण कार्य की गुणवत्ता  में कोई कमी नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर भारत में (लोहा का उपयोग किए बिना ) केवल पत्थरों से मन्दिर निर्माण कार्य ( उत्तर भारतीय नागर शैली में ) प्रथम बार हो रहा है। देश-विदेश में केवल स्वामी नारायण परम्परा के मंदिर पत्थरों से बने हैं। प्राण प्रतिष्ठा दिन के पश्चात लगभग एक लाख से एक लाख पन्द्रह हज़ार भक्त प्रतिदिन रामलला के बाल रूप के दर्शन कर रहे हैं , प्रातः 6.30 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक दर्शन के लिए प्रवेश होता है। किसी भी भक्त को अधिक से अधिक एक घण्टा दर्शन के लिए प्रवेश, पैदल चलकर दर्शन करना, बाहर निकल कर प्रसाद लेने में लगता है, मन्दिर में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित है। मोबाइल का प्रयोग दर्शन में बाधक है , सुरक्षा के लिए घातक हो सकता है।

Topics: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्रीprime minister modiNational Education Policyfield of educationfuture of the nation depends on educationcultural unity and integritycolonial mentalityquestion paper leak
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