‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में न जाकर कांग्रेस ने किया पाप’ -गौरव वल्लभ
June 24, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम साक्षात्कार

‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में न जाकर कांग्रेस ने किया पाप’ -गौरव वल्लभ

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ उस पार्टी में सनातन विरोधी माहौल को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। गौरव के शब्दों में कहें तो, श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में निमंत्रण के बाद भी कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता का उसमें न जाना किसी पाप से कम नहीं था।

Written byतृप्ति श्रीवास्तवतृप्ति श्रीवास्तव
Apr 21, 2024, 06:10 pm IST
in साक्षात्कार
कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ के साथ पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव

कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ के साथ पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ उस पार्टी में सनातन विरोधी माहौल को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। गौरव के शब्दों में कहें तो, श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में निमंत्रण के बाद भी कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता का उसमें न जाना किसी पाप से कम नहीं था। इस पाप से मुक्ति के लिए उन्होंने मानस का अखंड पाठ तक कराया था। दिल में सनातन के प्रति अटूट आस्था लिए आखिरकार वह गत दिनों कांग्रेस को त्याग भाजपा से जुड़े हैं। सनातन धर्म, कांग्रेस की देशविरोधी राजनीति और आगामी आम चुनावों से जुड़े अनेक विषयों पर पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव ने उनसे विस्तृत बातचीत की, जिसके प्रमुख अंश प्रस्तुत हैं

आप पेशे से प्राध्यापक हैं और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं। कांग्रेस को छोड़ते वक्त क्या आपने ‘जोखिम मूल्यांकन’ किया था?
‘जोखिम मूल्यांकन’ वित्तीय निर्णय से जुड़ा होता है। लेकिन व्यक्ति के दिल से जुडे़ मामलों में जोखिम मूल्यांकन नहीं, बल्कि दिल का मूल्यांकन करना चाहिए। कांग्रेस को दिए अपने त्यागपत्र में मैंने दिल की भावनाएं व्यक्त की हैं। मैंने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय अचानक नहीं लिया। मैंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को स्पष्ट बता दिया था कि जब तक वे सनातन विरोध को मौन सहमति देना बंद नहीं करेंगे, तब तक न टेलीविजन पर दिखूंगा और न प्रेसवार्ता करूंगा। जब कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दलों के लोग सनातन धर्म के खिलाफ खराब बातें करते हैं तो देश के आमजन को बुरा लगता ही है। तमिलनाडु में स्टालिन ने धर्म को गाली दी, कांग्रेस ने उसका विरोध नहीं किया। मैंने प्रश्न उठाया तो कहा कि गठबंधन में फूट पड़ जाएगी। कांग्रेस के नेताओं ने सनातन की तुलना कोरोना से करने का अपराध किया। यह सब देखने के बाद धैर्य का बांध टूटा तो कांग्रेस नेताओं से दो टूक कह दिया कि भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने और रामलला के दर्शन करने नहीं जाओगे, तो मैं टीवी बहसों में नहीं जाऊंगा।

हर वर्ष वह बजट पर प्रेस वार्ता करते थे, लेकिन इस बार नहीं की। कांग्रेस आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करते-करते अपनी ही पुरानी नीतियों का विरोध कर रही है। उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति पीवी नरसिम्हा राव की सरकार के काल में आयी थी। आज कोई सीईओ प्रधानमंत्री की तारीफ करता है तो कांग्रेस अकारण ही उसके खिलाफ खड़ी हो जाती है। राष्ट्र की प्रगति, धर्म की रक्षा और अर्थ निरपेक्षता, इन तीन चीजों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मैंने कांग्रेस के नेताओं को बोला कि जब अडानी को ‘सेबी’ ने क्लीनचिट दे दी है, तो अब विरोध बंद करो। लेकिन उनके लिए सेबी, सीबीआई, ईडी, सर्वोच्च न्यायालय से लेकर सभी अदालतें खराब हैं। तो क्या सिर्फ वे ही सही हैं, बाकी सब गलत?

चुनाव आते ही कांग्रेस राहुल गांधी व उनकी बहन को शिवभक्त दिखाने की कोशिश करती है। सनातन विरोधी होते हुए भी इस दोहरे चरित्र को आप कैसे देखते हैं?
क्या आपने कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता को चुनावी रैली के अलावा कभी किसी मंदिर में जाते देखा है? जो सनातन को मानते हैं, वे मंदिर जाकर भगवान के पूजन के लिए चुनाव आने का इंतजार नहीं करते। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने तो भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिलने के बाद भी उसे अस्वीकार कर दिया। मैं तब उदयपुर में था। वहीं पर मानस अखंड पाठ करवाया। हमारा यही कहना था कि कांग्रेस के पाप को धोने के लिए यह अखंड पाठ कर रहे हैं।

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को इस तरह का परामर्श आखिर कौन देता है?
कांग्रेस पार्टी को अभी जो लोग चला रहे हैं, वे स्कूल में रहते अपनी कक्षा में मॉनीटर का चुनाव भी नहीं लड़े होंगे जबकि वे कई दशक से राज्यसभा में हैं। वे यही चाहते हैं कि कांग्रेस न तो सत्ता में आये और न ही सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाये। दूसरा, ऐसे ही लोग 30 साल से कांग्रेस का घोषणापत्र बना रहे हैं। उन घोषणापत्रों में इतना दम होता तो आज कांग्रेस का यह हाल नहीं होता। तीसरे, जो व्यक्ति कांग्रेस में चुनावी टिकट पर हस्ताक्षर करता है, यदि उससे पूछ लिया जाए कि उत्तर प्रदेश और बिहार क्या अलग-अलग राज्य हैं, तो वह दुविधा में पड़ जाएगा। सचाई जानते हुए भी कांग्रेस के शीर्ष नेता मौन हैं तो वे भी उतने ही दोषी हैं। सच तो यह है कि जो लोग कभी मंत्रियों के निजी सहायक हुआ करते थे, वे आज कांग्रेस चला रहे हैं। उनका जमीनी जुड़ाव नहीं है। ऐसे लोग जब अपनी पार्टी के निर्णय भी लागू नहीं करा सकते, तो देश से जुड़े निर्णय कैसे कर पाएंगे? प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में कांग्रेस के नेता इतने अंधे हो चुके हंै कि सुबह नाश्ते के समय प्रधानमंत्री के बारे में खराब बातें बोलते हैं, दोपहर में अडानी, अंबानी, टाटा को कोसते हैं और रात में डिनर के समय जो करते हैं, वह मैं यहां बता नहीं सकता !

कहा जाता है कि राहुल गांधी को ऐसे लोग घेरे हुए हैं, जो कांग्रेस का भला नहीं चाहते?
यह बात सही है कि राहुल जिन लोगों से घिरे हुए हैं, उनको राजनीति का ‘रा’ भी नहीं पता। कांग्रेस का अध्यक्ष अच्छा हो सकता है, लेकिन वह स्वयं एक भी निर्णय नहीं ले सकता। आज देश के कुछ राज्यों से कांग्रेस 50 साल से गायब है। राजस्थान में कांग्रेस ने सीपीआई को तीन सीट सिर्फ इसलिए दीं, क्योंकि उसे उम्मीदवार ही नहीं मिले। कांग्रेस का आज हाल यह है कि पार्र्टी से टिकट लेने वाला खुद ही कह रहा है कि मैं हारने वाला हूं।

क्या वजह है कि कांग्रेस के नेता बार-बार देश के बडे उद्योगपतियों के लिए बुरा-भला कहते हैं?
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लगता है कि जितना उनको गाली देंगे, उतना वे अपशब्द प्रधानमंत्री मोदी को लगेंगे। हैरत की बात है कि कांग्रेस अडानी को गाली दे रही है और कांग्रेस की राज्य सरकारें उनके लिए लाल कालीन बिछा रही हैं। यह गलत नहीं है, क्योंकि किसी भी राज्य में पूंजी निवेश से ही रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।

राहुल गांधी जो भी बोलते हैं, उस पर मीम बन जाता है। क्या उनको अर्थ जगत का ज्ञान है?
देखिए, मैं राजस्थान का रहने वाला हूं। हमारे यहां के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि सोये हुए को तो कोई भी जगा सकता है, परंतु जो सोने का दिखावा कर रहा हो, उसको प्रभु भी नहीं जगा सकते। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी की यही हालत है। अगर कोई सीखना ही न चाहे तो उसको कोई नहीं सिखा सकता। मैं कांग्रेस के नेताओं के व्यक्तिगत कारनामे बता दूं तो उनका सड़क पर निकलना मुश्किल हो जाएगा। मैंने कांग्रेस के नेताओं को बताया कि विपक्ष की भूमिका होती है सकारात्मक आलोचना करना। आप आलोचना करो और बताओ कि इसके लिए सही रास्ता क्या है? मैंने जब यह बोला तो कहा गया कि ये तो आरएसएस का ‘मोल’ है। मैंने कहा, अटल बिहारी वाजपेयी जब विपक्ष में थे तो उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार की प्रशंसा की थी। तब देश को लगा कि यह व्यक्ति जो बोलता है, वह सही है। यदि मैं रोज रोज सरकार का मजाक उड़ाऊं तो इसका मतलब होगा मैं देश का मजाक उड़ा रहा हूं, क्योंकि सरकार को देश की जनता चुनती है। विपक्ष सरकार की सकारात्मक कमी निकाले तो सरकार को मदद मिलती है।

आपने तो एक बार कहा था कि ‘मैं कभी भी भाजपा में नहीं जाऊंगा’, लेकिन अब…?
मैं तो सनातन के पक्ष में खड़ा हूं। शुरू से कहा है कि अरविंद केजरीवाल कलयुग के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी हैं। कांग्रेस 15 दिन में बदल गयी और कहने लगी केजरीवाल सबसे बड़े ईमानदार हैं। मैंने कहा था कि वाम दलों को दुनिया ने नकार दिया, उनसे बात नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस आज उन्हीं की गोद में बैठी है। मैं शुरू से कहता था कि भगवान राम का विरोध राष्ट्र का विरोध है। मैं मानता हूं कि राजनीति समाज को बदलने का माध्यम है। मैं भाजपा से जुड़कर सामाजिक बदलाव में योगदान देना चाहता हूं। मैंने कांग्रेस से कहा था कि आज मोदी को लोग इसलिए सुनते हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसा मॉडल बनाया है, जिसको देश ने सराहा है। कांग्रेस की आज हालत ऐसी है कि वहां कार्यकर्ता अपने शीर्ष नेता से नहीं मिल सकते। मेरे जीवन में तीन मुद्दे सबसे ऊपर रहे हैं-राष्ट्र निर्माण में योगदान, धर्म की रक्षा व आर्थिक समानता।

भाजपा में आप अपनी क्या भूमिका मानते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनाना है। इसी संकल्प ने मुझे प्रेरणा दी है। उनके इस संकल्प में गिलहरी का सा योगदान मैं भी देना चाहता हूं। माता-पिता एवं गुरुओं के आशीर्वाद से उन्हें बहुत मिला है। वे अपने तीसरे कार्यकाल में भारत को दुनिया की तीसरी आर्थिक महाशक्ति बनाने की बात कर रहे हैं और कांग्रेस व उसके सहयोगी सिर्फ उन्हें हराने की बात कर रहे हैं।

विपक्षी दल केन्द्र सरकार पर बेरोजगारी का आरोप लगाते हैं? एक अर्थ विशेषज्ञ के नाते इसे कैसे देखते हैं?
बेरोजगारी को लेकर कई तरह के सर्वे आते रहते हैं। समस्या यह है कि जो खुद का रोजगार कर रहे हैं, सर्वे में उन्हें बेरोजगार मान लिया जाता है। संगठित और असंगठित क्षेत्र से जुड़े डाटा को ठीक से समझने की जरूरत है। हमारे देश में असंगठित क्षेत्र भी सुदृढ़ है। इसलिए इस तरह के आंकड़े आधे-अधूरे होते हैं। भारत में युवा आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है। परंतु इसका कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए भयावह चित्रण करते नजर आते हैं। यह गलत है, इसे रोका जाना चाहिए। सरकार का पूरा ध्यान स्वरोजगार पर है, जो देश की आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।

 राहुल गांधी जैसे नेता कभी-कभी ऐसे बयान देते हैं जो देश के लिए खतरनाक कहे जा सकते हैं। इस पर आप क्या कहेंगे?
देखिए, मैंने कांग्रेस को दिए अपने त्यागपत्र में दिशाहीनता जैसे शब्द का प्रयोग किया था। आप कांग्रेस के किसी भी नेता से पूछें कि जाति जनगणना में कौन सा आंकड़ा जोड़ेंगे? उनको इस बारे में कुछ भी पता नहीं है। ऐसी बातों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस लोगों को जाति के नाम पर भ्रमित करने का काम कर रही है। इस तरह के बयान देने की सलाह राहुल गांधी को बिहार के एक दल ने दी है, जिसे मानना किसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि हमारे लिए सिर्फ चार जातियां हैं-महिला, गरीब, युवा और किसान। वहीं, राहुल गांधी आज ऐसी बातें बोल रहे हैं, जो भारत की अखंडता और सौहार्द के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। कांग्रेस की नीति है, जाति के नाम पर फूट डालो और राज करो। लेकिन अच्छा यह है कि अब देश की जनता जाग चुकी है और इसका जबाव भी दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री का प्रयास है कि साल 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाएंगे। आपका इस पर क्या नजरिया है?
आर्थिक क्षेत्र में भारत आज दुनिया में पांचवें स्थान पर है। भारत की सकल घरेलू उत्पाद दर 7 प्रतिशत की औसत से बढ़ रही है, जबकि बाकी दुनिया में यह 3.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। स्वाभाविक है कि दुनिया बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में निवेश करेगी। इस दृष्टि से आने वाले समय में भारत दुनिया का एकमात्र पूंजी बाजार होगा और दुनिया को एक मुनाफे वाला बाजार उपलब्ध कराएगा। साल 2047 तक विकसित देश बनने के सपने को संजोए भारत तेजी से उस दिशा में बढ़ रहा है।

Topics: श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठासनातन विरोधी माहौलधर्म को गालीShri Ram Mandir Pran PratisthaAnti Sanatan Environmentधर्म की रक्षाSecularism
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Justice GR Swaminathan

भारतीय परंपराओं और भारतीय धरोहरों को सम्मान देने वाले न्यायाधीशों पर कथित लिबरल मीडिया का निशाना क्यों?

BJP Uttar Pradesh NDA

केरल: बौखलाहट में वामपंथी, सीपीआई नेता बिनॉय विश्वम ने भाजपा को सेक्युलरिज्म के लिए बताया खतरा

SP Muslim apeasement

धर्मनिरपेक्षता की आड़ में मुस्लिम तुष्टिकरण: समाजवादी पार्टी की रणनीति

Vishnu Shankar jain Sanatan Dharma

विष्णु शंकर जैन का कांग्रेस पर हमला: जैन समुदाय को अल्पसंख्यक बनाकर सनातन धर्म को तोड़ने का आरोप

अयोध्या में सीएम योगी ने जन्मदिन पर की श्रीरामलला पूजा

the Wire Omar Rashid Rape a women

‘द वायर’ के पत्रकार ओमर रशीद द्वारा बलात्कार का मामला और फिर एक बार सेक्युलर गैंग की अंतहीन चुप्पी

Load More

ताज़ा समाचार

पुरी रथ यात्रा 2026: दूसरी समन्वय समिति बैठक में सुरक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की व्यापक तैयारियों को अंतिम रूप

अनुच्छेद 370 हटाए जाने से डॉ. मुखर्जी का सपना साकार हुआ: CM मोहन माझी

वीर निकला आरिफ

फरीदाबाद: ‘वीर’ बनकर युवती से की शादी, बाद में निकला आरिफ; पहले से शादीशुदा और तीन बच्चों का पिता होने का आरोप

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

भगवंत मान ने सिखों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया, विवादित वीडियो पर बोली भाजपा

लखनऊ अग्निकांड की घटनास्थल पर जांच करते पुलिस अधिकारी

Lucknow : एसआईटी ने की अग्निकांड स्थल की पड़ताल, घायलों से भी मिला जांच दल

प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड में 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड खत्म, 452 मदरसे नई शिक्षा व्यवस्था में होंगे शामिल

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

वैज्ञानिक अध्यात्म के प्रणेता युगद्रष्टा पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

आरोपी गिरफ्तार

फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, खाते में मिले 1.70 करोड़ रुपये

प्रवर्तन निदेशालय (प्रतीकात्मक चित्र)

मुंद्रा ड्रग्स मामले में ED की दिल्ली में छापेमारी, नाइट क्लब में पैसा खपाने की जांच

प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड को रेलवे की बड़ी सौगात, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट की डेडलाइन तय

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies