उत्तराखंड : मुस्लिम सेवा संगठन, भीम आर्मी, ईसाई मिशनरी बना रही है सामाजिक, राजनीतिक गठजोड़
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उत्तराखंड : मुस्लिम सेवा संगठन, भीम आर्मी, ईसाई मिशनरी बना रही है सामाजिक, राजनीतिक गठजोड़

देवभूमि में मोदी विरोधी मंच हो रहा तैयार, कांग्रेस के लिए जमीन तैयार कर रही तबलीगी जमात

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Sep 20, 2023, 05:05 pm IST
inउत्तराखंड
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

उत्तराखंड के चार मैदानी जिलों में गुप-चुप तरीके से तबलीगी जमात सक्रिय हो चुका है। आगामी चुनाव में मोदी, बीजेपी को घेरने के लिए कांग्रेस ने तबलीगी जमात का सहारा लिया है। सामाजिक गठबंधन के रूप में मुस्लिम सेवा संगठन, भीम आर्मी और ईसाई मिशनरियां यहां एकसाथ काम कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम सेवा संगठन, भीम आर्मी ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया है। ये दोनों संगठन जमीयत के इशारे पर काम कर रहे हैं। हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र का एक हिस्सा देहरादून और ऋषिकेश में भी पड़ता है। देहरादून पलटन बाजार के मरकज से तबलीगी जमात के मौलवी और अन्य कर्ता धर्ता इस नए सामाजिक समीकरण को बना चुके हैं और आगामी लोकसभा चुनाव में इसका प्रयोग किया जाने वाला है।

इसी तरह देहरादून जिले में टिहरी लोकसभा क्षेत्र में भी पछुवा दून इलाके की विधान सभाओं के अंतर्गत बैठकों का सिलसिला जारी है। देहरादून जिले में ईसाई मिशनरियां अपनी धार्मिक शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से ईसाई वर्ग को भीम आर्मी और मुस्लिम सेवा संगठन के साथ समन्वय कर रही है। इनका एक ही लक्ष्य है कि मुस्लिम, वंचित, ईसाई वर्ग को एक करके उनको कांग्रेस को वोट देने के लिए प्रेरित करना।

इसी तरह नैनीताल उधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र में किच्छा, खटीमा, सितारगंज नानकमत्ता, जसपुर, गदरपुर, काशीपुर, बाजपुर, रामनगर, हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम, वंचित और जट राय सिखो के गठजोड़ को बनाया जा रहा है। इनमें ईसाई बन चुके थारू बुक्सा जनजाति के लोग भी शामिल हैं, जोकि चर्च मिशनरी के प्रभाव में इस राजनीतिक गठजोड़ में शामिल हैं, यहां भी हल्द्वानी मरकज से तबलीगी जमात निर्देशित कर रही है।

जानकारी के अनुसार मुस्लिम सेवा संगठन, भीम आर्मी और एक दो अन्य मुस्लिम संगठन तबलीगी जमात की ही उपज हैं, जोकि उत्तराखंड में एकाएक सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गई है। भीम आर्मी का गढ़ सहारनपुर में है, जहां देवबंद से वो दिशा निर्देश लेते हैं। भीम आर्मी ने हरिद्वार और देहरादून जिले में पिछली बार के विधानसभा चुनाव भी अपने पैर जमाने शुरू कर दिए थे। इनके नेता छोटी-छोटी जनसभाओं में मोदी, बीजेपी विरोधी जहर उगलते देखे गए थे और ये सिलसिला अब भी जारी है।

इसी तरह मुस्लिम सेवा संगठन की छोटी-छोटी रणनीतिक बैठकों का दौर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में देर रात्रि तक चलता रहता है और वहां मोदी, बीजेपी को इस बार सत्ता से हटाने की योजनाएं बनाई जा रही है। देहरादून और हल्द्वानी में तबलीगी जमात के मरकजों से मुस्लिमों को राजनीतिक ताकत बनाने के लिए योजनाएं दी जा रही है, जैसे शुक्रवार के दिन नमाज के लिए जरूर आना और क्षेत्र में कितने मुस्लिम बाहर से आए उनका डेटा रखना, उनके नाम वोटर लिस्ट में कैसे दर्ज होंगे, आदि विषय बाकायदा रजिस्टर में दर्ज किए जा रहे हैं।

ऐसी जानकारी भी मिली है कि उत्तराखंड में तीन से अधिक चर्च, मिशनरियां और कॉन्वेंट स्कूल हैं, जो इस वक्त वंचित समाज के लोगों में सहायता, प्रलोभन ,के जरिए मतांतरण के लिए काम कर रहे हैं। तराई क्षेत्र में हरिद्वार और पछुवा दून क्षेत्र में वंचित समाज के लोगों में ये मिशनरियां बीजेपी सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करने में जीजान से जुट गई हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले 10 सालों में मुस्लिम, ईसाई संगठनों की सामाजिक, राजनीतिक हैसियत खत्म होती जा रही है। मोदी, योगी, धामी राज के चलते इन्हें अपने अस्तित्व की चिंता सता रही है, इसलिए ये उत्तराखंड में कांग्रेस को समर्थन देने के लिए जमीन तैयार करने में जुटे हैं। हाल ही में पंजाब में चर्च, ईसाई मिशनरियों ने जिस तरह से मान सरकार में अपनी गतिविधियों को तेज किया है उसे देखकर सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त भी चिंतित हो गया है। हिमाचल में कांग्रेस सरकार के आते ही नए-नए चर्चो के निर्माण की बातें सामने आने लगी है।

उत्तराखंड में जिस तरह से राज्य सरकार ने तेज़ी से गहरा रही जनसंख्या असंतुलन की समस्या पर एक्शन लेना शुरू किया है उसके बाद तबलीगी जमात भी सक्रिय हुआ और उसने मुस्लिम सेवा संगठन और भीम आर्मी को आगे कर अपना सामाजिक, राजनीतिक ताना बाना बुनना शुरू कर दिया है। वो कांग्रेस के लिए जमीन तैयार कर रही है। ऐसा भी जानकारी में आया है कि तबलीगी जमात ने स्पष्ट हिदायत दी है कि वोट डालने के समय तक मौन रहना है और किसी भी सूरत में कहीं ये नहीं जताना है कि किस पार्टी को समर्थन या वोट देना है, क्योंकि उनका मानना है कि खुले समर्थन से बीजेपी और उसके सहयोगी संगठन सक्रिय हो जाते हैं।

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के दौरान भी पछुवा देहरादून से कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं के जरिए से मुस्लिम यूनिवर्सिटी की बात उठी थी ये ऐसे ही नहीं उठी थी उसके पीछे एक मकसद था। अब वही कांग्रेस के नेता यहां मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में बैठकों में शामिल हो रहे हैं और मुस्लिम अस्पताल बनाए जाने, मस्जिद, मदरसे को मुफ्त बिजली दिए जाने के मुद्दो पर सहमति जता रहे हैं। ये बात तो तय है कि बीजेपी चाहे कितना भी काम अल्प संख्यक वर्ग के लिए कर ले, उसका वोट उसे नहीं मिलता है। मुस्लिम और ईसाई वोटबैंक पर शुरू से कांग्रेस की नजर रहती आई है। उत्तराखंड में बीजेपी और कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। राज्य बनते वक्त थोड़ा जनाधार बीएसपी और सपा का भी था जो अब लगभग समाप्त हो गया है। हालांकि वो विधानसभा, लोकसभा में अपने उम्मीदवार भी उतारती है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें ऐसी सफलता नहीं मिली जैसे यूपी में मिलती है। आम आदमी पार्टी चुनाव के समय जागती है फिर सो जाती है। वही हाल ओवैसी की पार्टी का भी है।

ऐसे में तबलीगी जमात, मुस्लिम वोटबैंक को खामोशी की चादर उढ़वा कर बैठा देगी और बीजेपी को हरवाने के लिए कांग्रेस का साथ देगी। मुस्लिम वोट बैंक को खामोश रहने देने के लिए भी एक योजना रहती है क्योंकि जमात को मालूम है कि जहां कांग्रेस के साथ मुस्लिमों की भीड़ दिखाई दी उसकी प्रतिक्रिया में हिंदू वोट बैंक बीजेपी की तरफ सरक जाता है।

बहरहाल चुनाव नजदीक आ रहे हैं। बीजेपी भी इन सभी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है क्योंकि वो सत्ता में है और उसके बाद सूचनाएं एकत्र करने के स्रोत भी है। बीजेपी भी अगले चुनाव में बूथ प्रबंधन पर ध्यान दे रही है। वोट प्रतिशत ठीक ठाक रहे इसके लिए बकायदा प्रशिक्षण का दौर भी पूरा हो चुका है। चुनावी सियासत के रंग अभी और सामने आएंगे, मुस्लिम और ईसाई संगठन की प्रतिक्रिया में हिंदू संगठन भी अपनी रणनीति बना रहे हैं। उनके आगे भी एक मात्र चुनौती मोदी सरकार को वापस लाने की है।

Topics: उत्तराखंड की राजनीतिPolitics of UttarakhandTablighi JamaatBJPमोदी विरोधी मंचCongressउत्तराखंड में मोदी विरोधी मंचउत्तराखंड में तबलीगी जमातAnti-Modi ForumAnti-Modi Forum in UttarakhandबीजेपीTablighi Jamaat in Uttarakhandकांग्रेसतबलीगी जमात
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