हिमालय दिवस : दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक केंद्र हिमालय, आज भी हैं बहुत से अनसुलझे रहस्य
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हिमालय दिवस : दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक केंद्र हिमालय, आज भी हैं बहुत से अनसुलझे रहस्य

हिन्दूकुश पर्वत मारा काराकोरम से लेकर अरुणाचल की वादियों तक हिमालय का विस्तार है। यह संपूर्ण क्षेत्र भरतखंड के अंतर्गत आता है

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Sep 9, 2023, 07:11 pm IST
inउत्तराखंड

आज हिमालय दिवस है, हिन्दूकुश पर्वत मारा काराकोरम से लेकर अरुणाचल की वादियों तक हिमालय का विस्तार है। यह संपूर्ण क्षेत्र भरतखंड के अंतर्गत आता है। हिमालय को भारत की आत्मा कहा जाता है, जिसका विभाजन नहीं किया जा सकता। हिमालय के विषय में आज भी कई रहस्य ऐसे हैं, जिनका खुलना बाकी है।

■ हिमालय धरती के मध्य भाग में स्थित है। यहां का कैलाश पर्वत तो चमत्कारों की खान है जिसे एक्सिस मुंडी (Axis Mundi) कहा जाता है। हजारों किलोमीटर क्षेत्र में फैला हिमालय चमत्कारों की खान है।

■ हिमालय में कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिन्हें मैग्नेटिक हिल कहते हैं। मैग्नेटिक हिल पर गाड़ियां अपने आप ही पहाड़ चढ़ने लगती है।

■ हिमालय के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अचानक काम करना बंद कर देते हैं। घड़ियों का समय अचानक ही बदल जाता है।

■ हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा, एवरेस्ट, अन्नपूर्णा, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रोलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, के 2, लहोत्से, मकालू, चो ओयू, नागा, नैनादेवी, धौलागिरी और कंचनजंघा हैं।

■ सिंधु, गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज बड़ी नदियां हैं जो हिमालय से ही निकलती है। इन्हीं की सैंकड़ों सहायक नदियां हैं। जैसे सरस्वती, चंद्रभागा, (चिनाब), यमुना, शुतुद्री (सतलुज), वितस्ता (झेलम), इरावती (रावी), कुहू (काबुल), गोमती, धूतपापा (शारदा), बाहुदा (राप्ती), दृषद्वती (चितंग), विपाशा (बियास), देविका (दीग), सरयू (घाघरा), रंक्षू (रामगंगा), गंडकी (गंडक), कौशिकी (कोसी), त्रित्या और लोहित्या (ब्रह्मपुत्र)।

■ हिमालय में विश्व की सबसे सुंदर और अद्भुत झीलें हैं। कहते हैं कि हिमालय में *4,699 झीलें* पाई जाती हैं। सूरज ताल, नैनीताल, लाहौल स्पीती, चंद्रताल, मानसरोवर, पैंगोंग त्सो, दशीर, ब्रिघू झील, महाकाली झील, चंदर नौन लेक्स, त्सो ल्हामो झील, चोलमू झील, नागिन झील, मनसर झील, रेणुका झील, रिवालसर झील, सातताल झील, त्सोंगमो या चांगू झील, सुमेन्दु झील, सेला झील आदि।

■ मुण्डकोपनिषद् के अनुसार सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माओं का एक संघ है। इनका केंद्र हिमालय की वादियों में उत्तराखंड में स्थित है। इसे देवात्मा हिमालय कहा जाता है। इन दुर्गम क्षेत्रों में स्थूल-शरीरधारी व्यक्ति सामान्यतया नहीं पहुंच पाते हैं।

■ पुराणों के अनुसार विवस्ता नदी के किनारे मानव की उत्पत्ति हुई थी। प्रसिद्ध समाज विज्ञानी कालचेंटर के अनुसार मनुष्य प्राकृतिक रूप से फल और अनाज पर निर्भर करता है अतः हिमालय का क्षेत्र ही मानव की स्वाभाविक जन्मस्थली है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है यहां जीवाश्म का पाया जाना, जो विश्व में अन्य जगहों पर पाए गए दूसरे सभी जीवाश्मों की अपेक्षा कहीं ज्यादा पुराना है। विज्ञानियों एवं इतिहासवेत्ताओं के अनुसार हिमालय पर फल, अन्न और शाक आदि सभी खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं।

■ कैलाश, मानसरोवर, अमरनाथ, कौसरनाग, वैष्णोदेवी, पशुपतिनाथ, हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देवप्रयाग, हेमकुण्ड, ऋषिकेश, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि सैंकड़ों तीर्थ स्थान है। केदारखंड में अलकापुरी तपोवन, गोमुख, ब्रह्मपुरी, नंदनवन, गन्धमादन, वासुकीताल, वसुधारा आदि दर्शनीय देवस्थल हैं।

■ हिमालय में जैन, बौद्ध और हिन्दू संतों के कई प्राचीन मठ और गुफाएं हैं। मान्यता है कि गुफाओं में आज भी कई ऐसे तपस्वी हैं, जो हजारों वर्षों से तपस्या कर रहे हैं।

■ रामायण की कथा के अनुसार हनुमानजी हिमालय के एक क्षेत्र से ही संजीवनी का पर्वत उखाड़कर ले गए थे। हिमालय ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां दुनियाभर की जड़ी-बूटियों का भंडार है। हिमालय की वनसंपदा अतुलनीय है।

■ हिमालय में ऐसी भी कई चमत्कारिक जड़ी-बूटियां हैं जिनका वर्णन अथर्ववेद, आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों के ग्रंथों में मिलता है। सोमवल्ली, संजीवनी बूटी, अरुंधती, ब्रह्मकमल जैसी वनस्पतियां हिमालय के एक विशेष क्षेत्र में पाई जाती हैं।

■ मान्यता है कि येति का निवास हिमालय में ही है। येति या यति एक विशालकाय हिम मानव है जिसे देखे जाने की घटना का जिक्र हिमालय के स्थानीय निवासी करते आए हैं। येति आज भी एक रहस्य है। कोई इसे भूरा भालू कहता है, कोई जंगली मानव तो कोई हिम मानव। कुछ वैज्ञानिक इसे निंडरथल मानव मानते हैं। विश्वभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिममानव मौजूद हैं।

■ हिमालय में ऐसे कई जीव-जंतु हैं, जो बहुत ही दुर्लभ है। उनमें से एक दुनिया का सबसे दुर्लभ मृग है कस्तूरी मृग। यह हिरण उत्तर पाकिस्तान, उत्तर भारत, चीन, तिब्बत, साइबेरिया, मंगोलिया में ही पाया जाता है। इस मृग की कस्तूरी बहुत ही सुगंधित और औषधीय गुणों से युक्त होती है। कस्तूरी मृग की कस्तूरी दुनिया में सबसे महंगे पशु उत्पादों में से एक है। यह कस्तूरी उसके शरीर के पिछले हिस्से की ग्रंथि में एक पदार्थ के रूप में जमा होती है।

■ विश्वभर के वैज्ञानिक मानते हैं कि धरती पर कुछ जगहों पर एलियंस छुपकर रहते हैं दूसरे ग्रह के लोग। उन जगहों में से एक हिमालय है। भारतीय सेना और वैज्ञानिक इस बात को स्वीकार नहीं करते लेकिन वे एकदम अस्वीकार भी नहीं करते हैं। भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की यूनिटों ने सन् 2010 में जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में उडऩे वाली अनजान वस्तुओं (यूएफओ) के देखे जाने की खबर दी थी।

■ भारतीय हिमालय के 4 भाग हैं। जम्मू-कश्मीर हिमालय (सिन्धु नदी से सतलुज नदी के बीच का भाग), गढ़वाल-कुमाऊं हिमालय (सतलुज से काली नदी (सरयू) के बीच का भाग), नेपाल हिमालय (सरयू नदी से तीस्ता नदी के बीच का भाग), असम-अरुणाचल हिमालय (तीस्ता नदी से ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ तक का भाग)

■ पौराणिक मान्यता के अनुसार हिमालय के बीचोबीच सुमेरू पर्वत है। सुमेरू के दक्षिण में हिमवान, हेमकूट तथा निषध नामक पर्वत हैं, जो अलग-अलग देश की भूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुमेरू के उत्तर में नील, श्वेत और श्रृंगी पर्वत हैं, वे भी भिन्न-भिन्न देश में स्थित हैं। इस सुमेरू पर्वत को प्रमुख रूप से बहुत दूर तक फैले 4 पर्वतों ने घेर रखा है। 1. पूर्व में मंदराचल, 2. दक्षिण में गंधमादन, 3. पश्चिम में विपुल और 4. उत्तर में सुपार्श्व। इन पर्वतों की सीमा इलावृत के बाहर तक है।

■ हिमालयी ग्लेशियरों को लेकर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने एक अध्ययन कराया था। इस अध्ययन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय क्षेत्र की 15,000 हिमनद (ग्लेशियर) और 9,000 हिमताल (ग्लेशियर लेक) में आधे वर्ष 2050 और अधिकतर वर्ष 3100 तक समाप्त हो जाएंगे।

■ ब्रह्म कमल, नील कमल, कृष्ण कमल और अन्य कई तरह के दुर्लभ कमल के फूल हिमालय में ही पाए जाते हैं।

■ हिमालय में उबसे ऊंचे पेड़ पाए जाते हैं। चीड़, कैल, देवदार, रई-मुरिंडा, जैसे महत्वपूर्ण शंकुधारी पेड़ हैं जो इन जंगलों में पाए जाते हैं। अनेकानेक जड़ी-बूटियों का भण्डार हैं यहाँ के वन।

■ हिमालय के वन भी अद्भुत हैं। उत्तराखंड का कॉर्बेट नेशनल पार्क, जम्मू कश्मीर का दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान, हिमाचल का हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान, किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान, अरुणाचल के वन आदि। यहां ओक के जंगल, देवदार के जंगल आदि कई लुप्तप्राय वृक्षों के जंगल पाए जाते हैं। इन जंगलों में हिम तेंदुए, हिमालयी थार, हिमालयी याक, मोनाल आदि जैसे जीव जंतु इस क्षेत्र में पाए जाते हैं।

■ श्रीनगर, लद्दाख, उत्तरकाशी, ऊखीमठ, त्रिजुगीनाराण, जोशीमठ, टिहरी, पौड़ी, फूलों की घाटी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, रानीखेत, नैनीताल, मनुस्यारी, वागेस्यारी, वागेश्वर, शिमला, मनाली, जागेश्वर, धारचूला, पिथौरागढ़, लोहाघाट, चम्पावत, देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार आदि स्थान है।

■ हिमालय पृथ्वी पर सबसे ऊंची और सबसे प्रभावशाली पर्वत श्रृंखला है। परिवहन दुर्गमता के कारण अब तक उनके कई कोनों का पता नहीं लगाया गया है। बेशक, आधुनिक उपग्रह लगभग कहीं भी देखने में सक्षम हैं, लेकिन हेलीकॉप्टर काफी ऊंचाई पर उड़ नहीं सकते, वहां विमानों के उतरने के लिए बहुत कम स्थल है।

■ समुद्र तल से 8 किलोमीटर ऊपर स्थित 14 चोटियों में से 10 हिमालय में स्थित हैं। शेष 4 काराकोरम पुंजक का हिस्सा हैं।

■ यह हिमालय में है कि अन्नपूर्णा, और एवरेस्ट, पृथ्वी की सबसे ऊंची चोटी स्थित हैं, वैसे, अन्नपूर्णा, पर्वतारोहियों के बीच कुख्यात है, क्योंकि इसकी चोटी पर विजय पाने की कोशिश करने वाले तीन में से एक व्यक्ति की दुःखद मृत्यु हो जाती है।

■ यह पर्वत प्रणाली पूरे विश्व के लगभग 0.4% हिस्से पर है। यह 1 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत में फैली है।

■ कई हिमालय श्रृंखलाएं कभी समुद्र तल का हिस्सा थीं। इसका प्रमाण जीवाश्म समुद्री जानवरों से मिलता है, जो समय-समय पर यहां पहाड़ी ढलानों पर पाए जाते हैं।

■ कठोर और विषम जलवायु के कारण हिमालय में पौधों को उगाना मुश्किल होता है। हालाँकि, स्थानीय निवासियों ने ऐसी परिस्थितियों में भी आलू और कुछ अनाज उगाना सीख लिया है।

■ हिमालय में चोटियों की औसत ऊंचाई लगभग 6 किलोमीटर है।

■ दुनिया की सबसे बड़ी नदी प्रणालियों में से तीन हिमालय में स्थित हैं।

■ स्थानीय लोग शेरपा हैं। वे सामान्य के 50-60% के वायुमंडलीय दबाव में अच्छा महसूस करते हैं, और आसानी से इलाके को नेविगेट करते हैं।

■ हिमालय में कुछ स्थानों पर इंटरनेट की सुविधा है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि एवरेस्ट की चोटी पर भी *वाई-फाई* है।

■ प्राचीन संस्कृत भाषा से, शब्द *हिमालय* का अनुवाद “बर्फ के घर” के रूप में किया जाता है।

■ हर साल दर्जनों पर्वतारोही हिमालय की चोटियों पर चढ़ने की कोशिश करते समय मर जाते हैं, लेकिन यह नए डेयरडेविल्स का अनुसरण करने से उन्हें नहीं रोक पाता है।

■ हिमालय के पश्चिमी भाग में अदभुत *फूलों की घाटी* है। यह यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है। यहाँ नन्दादेवी बायोस्फियर रिज़र्व भी स्थित है।

■ हिमालय में 30 पर्वत श्रृंखला हैं। उनमें से प्रत्येक का अपना नाम एक स्थानीय लोगों द्वारा दिया गया है, और इससे जुड़ी एक न एक किंवदंती भी है, कभी सुंदर और रोमांटिक, और कभी भयावह।

साभार- नरेंद्र सिंह, पर्यावरण विशेषज्ञ

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