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कठुआ पर चुप, मुजफ्फरनगर पर फर्जी शोर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर का अपना एक खास इतिहास रहा है। करीब 3,300 की आबादी वाले खुब्बापुर में आज हिन्दू-मुस्लिम की तादाद लगभग बराबर हैऔर अधिकांश मुस्लिम तृप्ता के पक्ष में हैं। निहित स्वार्थी तत्व उत्तर पदेश को बदनाम करने का बहाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं

Written byअनुरोध भारद्वाजअनुरोध भारद्वाज
Sep 8, 2023, 07:44 am IST
inविश्लेषण, उत्तर प्रदेश
शिक्षिका तृप्ता त्यागी के विरुद्ध वोट बैंक की लालची पार्टियों और कट्टर इस्लामी तत्वों ने खड़ा किया फर्जी तमाशा। गांव के मुस्लिम तृप्ता के साथ हैं।

शिक्षिका तृप्ता त्यागी के विरुद्ध वोट बैंक की लालची पार्टियों और कट्टर इस्लामी तत्वों ने खड़ा किया फर्जी तमाशा। गांव के मुस्लिम तृप्ता के साथ हैं।

केरल और हैदराबाद में बैठकर मुजफ्फरनगर के एक स्कूल को लेकर जो शोर मचाया जा रहा है, सच्च्चाई उसके बिल्कुल उलट है। एक मुस्लिम बच्चे को सुधार की राह पर ले जाने की कोशिश करने वाली शिक्षका तृप्ता त्यागी की छवि इलाके में नायिका से कम नहीं है।

मुजफ्फरनगर। केरल और हैदराबाद में बैठकर मुजफ्फरनगर के एक स्कूल को लेकर जो शोर मचाया जा रहा है, सच्च्चाई उसके बिल्कुल उलट है। एक मुस्लिम बच्चे को सुधार की राह पर ले जाने की कोशिश करने वाली शिक्षका तृप्ता त्यागी की छवि इलाके में नायिका से कम नहीं है। वे एक भरे-पूरे सुशिक्षित, संस्कारित एवं सभ्य परिवार से हैं और विकलांग होने के बाद भी उन्होंने अपना जीवन गरीबों के आंगन में शिक्षा की लौ जलाने में लगा रखा है। खासतौर पर मुस्लिम समाज में शिक्षा की अलख जगाने को लेकर स्थानीय लोग उनका अतिशय सम्मान करते हैं। इलाके के बुद्धिजीवी हाल में उनसे जुड़े स्कूल प्रकरण को लेकर खुलकर यह बात कह रहे हैं कि राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेता लोकसभा चुनाव से पहले सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक की खातिर हिन्दू समाज की तृप्ता त्यागी जैसी समर्पित शिक्षिका को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, तृप्ता के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे मुस्लिम समाज के लोग ही इन नेताओं को आड़े हाथ लेते दिखाई दे रहे हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनैतिक धुरी मेरठ की तरह मुजफ्फरनगर का भी अपना एक खास इतिहास रहा है। खुब्बापुर गांव को इसका उदाहरण माना जा सकता है। करीब 3300 की आबादी वाले खुब्बापुर में अब हिन्दू-मुस्लिम की तादाद लगभग बराबर हो चुकी है। एक वक्त ऐसा भी था, जब इस गांव में अधिसंख्य त्यागी समाज के लोग ही रहते थे। मुगल आक्रांताओं के जुल्म-जबरदस्ती के खिलाफ आधे गांव ने संघर्ष की राह चुनी, जिसके लिए त्यागी समाज विशेष तौर पर पहचाना जाता है। मगर कई परिवार संघर्ष करने की जगह मुगलों के डर से मुस्लिम हो गए। उसके बाद से यहां आधे हिन्दू तो आधे मुसलमान की कहानी जरूर बनी मगर सामाजिक ताने-बाने में बदलाव इसके बाद भी नहीं आया।

मुस्लिम लोग आज भी यहां अपने नाम के आगे गर्व से त्यागी लिखते हैं। आखिर सबका खून एक ही है, इसलिए सरोकार, संस्कार और सभ्यता की एक जैसी तस्वीर खुब्बापुर में देखी जा सकती। यही वजह है कि अपवाद के तौर पर छोटी-मोटी बातों को छोड़ दें तो मुजफ्फरनगर जिले का मिश्रित आबादी वाला यह गांव हमेशा से समाजिक एकता की मिसाल पेश करता आ रहा है। उस वक्त भी, जब सपा सरकार में कवाल कांड के बाद मुजफ्फरनगर दंगों की आग में झुलस गया था और खुब्बापुर ने शांति व सौहार्द की मिसाल पेश की थी।

मुजफ्फरनगर पर हाय-तौबा मचाने वाली पार्टियों के मुंह से कठुआ की घटना पर एक शब्द नहीं निकला। राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया भी कठुआ पर मौन साधे रहा मगर मुजफ्फरनगर मामले पर बढ़-चढ़कर शोर मचाया गया।

खुब्बापुर गांव में रहने वाले हिन्दू-मुस्लिम सभी एक सुर में कहते हैं कि हिन्दू शिक्षिका तृप्ता त्यागी और मुस्लिम परिवार के पढ़ाई में कमजोर छात्र के बीच के मामले को सांप्रदायिक तरीके से पेश कर रहीं कांग्रेस, सपा, रालोद, एआईएमआईएम जैसी पार्टियां सही मायनों में शिक्षा विरोधी हैं। खासतौर पर ये पार्टियां मुस्लिम समाज के वोट तो चाहती हैं मगर उनके हित में सोचना नहीं चाहतीं, जहां शिक्षा की जमीनी सच्चाई आजादी के इतने लंबे समय बाद भी बेहद चिंताजनक नजर आती है। खुब्बापुर और आसपास के गांव वालों की सुनें तो नेहा पब्लिक स्कूल प्रकरण का सच वह नही है, जिसे वोट बैंक की खातिर कांग्रेस, सपा, रालोद जैसी पार्टियां तोड़-मरोड़कर पेश करने में लगी हैं।

सच तो यह है कि समाज को बांटकर ये पार्टियां अपना स्वार्थ हासिल करने की कोशिश कर रही हैं और यह बात खुब्बापुर ही नहीं, बल्कि समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की समझ में आ रही है। त्यागी भूमिहार समाज के बड़े चेहरे सेवानिवृत्त पुलिस अफसर सुनील त्यागी बताते हैं कि मुजफ्फरनगर के नेहा पब्लिक स्कूल और मुस्लिम छात्र का मामला सिर्फ इतना सा है कि मुस्लिम परिवार की अनुनय-विनय पर दिव्यांग शिक्षिका तृप्ता त्यागी पढ़ाई में कमजोर बच्चे को अपनी तरह से सुधार की राह पर लाना चाहती थीं। सुनील त्यागी कहते हैं कि समाज में अग्रणी भूमिका निभाने वाले नेता, अफसर, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षकों में कौन ऐसा होगा, जिसने पढ़ाई की खातिर सख्त शिक्षक से डांट-चपत न खाई हो। नेहा पब्लिक स्कूल बच्चों में सुधार की दृष्टि से गुरुकुल जैसा रहा है। यह राजनीति का घिनौना चेहरा ही है कि बच्चों के लिए समर्पित शिक्षिका तृप्ता त्यागी को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

कठुआ में छात्र की पिटाई किए जाने के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करते स्थानीय लोग

आदर्श शिक्षिका के साथ मुस्लिम

बेवजह विवाद पैदा कर दिए जाने की वजह से नेहा स्कूल पर ताले पड़ गए हैं। इससे खुब्बापुर के हिन्दू-मुस्लिम सभी दुखी हैं। गांव के मारुफ त्यागी और तस्लीम ही नहीं, बल्कि सभी मुस्लिम कहते हैं कि सरकारी शिक्षा की कहानी किसी से छिपी नही है। ऐसे में तृप्ता त्यागी का स्कूल ही गरीब बच्चों की पढ़ाई का अकेला सहारा रहा है। इलाके में वैसे तो और भी पब्लिक स्कूल हैं, मगर पढ़ाई बहुत महंगी होने की वजह गरीब परिवार वहां बच्चों को पढ़ाने की सोच भी नहीं सकते। तृप्ता त्यागी के स्कूल की फीस नाममात्र है। आर्थिक तंगी से जूझते कई मुस्लिम परिवारों के बच्चों को वह मुफ्त में पढ़ाती हैं।

ऐसी शिक्षिका कहां मिल सकती हैं, जिनका मकसद सिर्फ गरीब बच्चों को पढ़ाना हो। यही वजह है कि 80 फीसदी मुस्लिम परिवार अपने बच्चों को तृप्ता त्यागी के स्कूल में पढ़ने भेजते हैं। मारूफ त्यागी कहते हैं कि उनकी बातों में अगर कुछ भी गलत हो तो वह चोर की तरह सजा भुगतने को तैयार हैं। कुछ भी हो जाए, वे लोग तृप्ता त्यागी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुनेंगे। अगर तृप्ता त्यागी पर कार्रवाई होगी तो मुस्लिम समाज उसका पुरजोर विरोध करेगा। शिक्षिका के खिलाफ शिकायत करने वाला परिवार गलत ताकतों का मोहरा बन गया है। शिकायत करने वाला अकेला मुस्लिम परिवार अगर अपनी भूल नहीं सुधारेगा तो मुस्लिम समाज उसका हुक्का-पानी बंद कर देगा। पूरा गांव तृप्ता त्यागी के साथ है।

तृप्ता पर कार्रवाई हुई तो नेता घुस नहीं पाएंगे

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में त्यागी-भूमिहार संयुक्त महासभा को समाज का प्रभावी संगठन माना जाता है। मुजफ्फरनगर के संजीव त्यागी क्षेत्रीय स्तर पर महासभा की कमान संभाल रहे हैं, जो कि खुब्बापुर के पड़ोसी गांव परा के निवासी हैं। संजीव त्यागी बताते हैं कि तृप्ता त्यागी जैसी शिक्षिका न हों, तो संपूर्ण समाज की शिक्षा का सपना कभी पूरा नहीं होगा। तृप्ता पहले बाहर कहीं पढ़ाती थीं मगर उन्होंने अपने गांव के गरीब बच्चों के भले के लिए गांव में ही स्कूल खोला। विकलांग होकर भी दिन-रात उनकी पढ़ाई के लिए काम किया है।

स्कूल बंद हो जाएगा तो इससे तृप्ता त्यागी पर तो असर नहीं पड़ेगा मगर गरीबों के बच्चों का क्या होगा, जिनके लिए वही एक सहारा हैं। ओवैसी, अखिलेश, राहुल कुछ भी बयानबाजी कर लें, मगर खुब्बापुर की नायिका तृप्ता त्यागी हैं और हिन्दू-मुस्लिम सब उनके साथ हैं। तृप्ता त्यागी पर कार्रवाई हुई तो तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे नेता इलाके में घुस नहीं पाएंगे। संजीव त्यागी ने बताया कि मामले की जानकारी होने पर वह खुब्बापुर गए थे। वहां पता लगा कि केरल से कोई नेता हवाईजहाज से वहां आया था और बच्चे को केरल में पढ़ाने का नाटक कर रहा था। गांववालों ने उसको भगा दिया। इससे समझा जा सकता है कि समाज को बांटने के लिए कितना गहरा षड्यंत्र चल रहा है।

तृप्ता के समर्थन में उठी आवाज

मेरठ में त्यागी समाज के प्रमुख नेता प्रदीप त्यागी ने खुलकर कहा है कि हमारा पूरा समाज तृप्ता त्यागी के साथ खड़ा है। जिलों में बैठकें कर आगे के लिए रणनीति बना ली गई है। पुलिस ने अगर राजनैतिक दलों के दबाव में तृप्ता त्यागी पर कार्रवाई की तो विरोध में आंदोलन झेलना पड़ेगा।

कश्मीर पर मौन, मुजफ्फरनगर पर हल्ला

हाल में देश के अंदर दो जगह से ऐसे मामले सामने आए थे। एक मामला मुजफ्फरनगर से और दूसरा जम्मू-कश्मीर के कठुआ से। कठुआ के एक स्कूल में पिछले दिनों एक हिंदू छात्र की मुस्लिम शिक्षक और प्रधानाध्यापक ने जबरदस्त पिटाई की थी। कक्षा 10 के उसी छात्र ने ब्लैक बोर्ड यानी श्याम पट्टिका पर जय श्रीराम लिख दिया था। शिक्षक शाहरुख क्लास में घुसते ही छात्र को बुरी तरह मारते हुए बाहर ले गए। फिर प्रिंसिपल ने उसे अपने रूम में बंद कर अमानवीय तरीके से पीटा एवं धमकी दी कि अगली बार ऐसा किया तो बुरे नतीजे होंगे। प्रिंसिपल और शिक्षक ने एक कर्मचारी को भेजकर बोर्ड को पानी से धुलवाया। छात्र की हालत खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन होने के बाद शिक्षक व प्रिंसिपल के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई।

ऐसे ही मुजफ्फरनगर में पुलिस केस दर्ज हुआ। दोनों मामलों में फर्क सिर्फ इतना है कि मुजफ्फरनगर पर हाय-तौबा मचाने वाली पार्टियों के मुंह से कठुआ की घटना पर एक शब्द नहीं निकला। राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया भी कठुआ पर मौन साधे रहा मगर मुजफ्फरनगर मामले पर बढ़-चढ़कर शोर मचाया गया। वह भी तब, जबकि कठुआ की घटना प्रमाणित है और मुजफ्फरनगर मामले में शिक्षिका तृप्ति त्यागी के बारे में झूठ प्रचारित हुआ। आल्ट न्यूज के पत्रकार मोहम्मद जुबैर ने तो खुब्बापुर के बच्चे की पहचान ही उजागर कर डाली। इसे लेकर जुबैर के खिलाफ जुवेनाइल एक्ट में केस भी दर्ज हुआ है। वीडियो बनाने वाले मुस्लिम छात्र के चाचा सबके सामने कह चुके हैं कि शिक्षिका तृप्ता त्यागी ने इस्लाम के खिलाफ कुछ नहीं कहा। फिर भी कांग्रेस, सपा, रालोद, एआईएमआईएम जैसी पार्टियां मुजफ्फरनगर मामले को सांप्रदायिक रंग देने में लगी रहीं, लेकिन कठुआ पर कुछ नहीं बोलीं।

राजनैतिक रंग देना गलत: संजीव बालियान

केन्द्रीय मंत्री एवं मुजफ्फरनगर के सांसद डॉ. संजीव बालियान ने खुब्बापुर प्रकरण को लेकर मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस तरह से स्कूल मामले को बढ़ा-चढ़ाकर जाति-पंथ से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, वह पूरी तरह से गलत है। यह एक स्कूल व एक गांव का मामला है, गांव के लोग ही इसको सुलझा लेंगे। घटना का राजनीतिकरण व सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। गांव की बातें गांव तक समाप्त होनी चाहिए। यह बच्चों का मामला है। हर बच्चे के साथ स्कूल में ऐसी घटना होती है। जांच में जैसे तथ्य सामने आएंगे, पुलिस उसी तरह से कार्रवाई करेगी।

वीडियो से किसने की छेड़छाड़?

एसपी सिटी सत्य नारायण ने मीडिया को बताया कि खुब्बापुर के नेहा पब्लिक स्कूल का मामला सामने आने के बाद पुलिस हर पहलू की गहराई से छानबीन कर रही है। प्रारम्भिक जांच में वीडियो में छेड़छाड़ करने का पता चला है। ऐसा किसने और क्यों किया? फॉरेंसिक लैब भेजकर वीडियो की आगे जांच कराई जाएगी। इसके बाद पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी।

Topics: संजीव बालियानHindu student's Muslim teacherSanjeev BalyanMohammad Zubair said so in Khubbapurमुस्लिम समाजDr. Sanjeev BalyanMuslim Societysilent on Kathuaशिक्षक शाहरुख क्लासfake noise on Muzaffarnagarकश्मीर पर मौनहिंदू छात्र की मुस्लिम शिक्षकमोहम्मद जुबैर ने तो खुब्बापुरडॉ. संजीव बालियानTeacher Shahrukh classsilence on Kashmir
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