जनवादी और प्रगतिशील शब्दों के खोल में दशकों से चल रहा 'खाप लेखक संघ
September 18, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

जनवादी और प्रगतिशील शब्दों के खोल में दशकों से चल रहा ‘खाप लेखक संघ

राजेन्द्र यादव होते तो कक्ष इतना खाली नहीं होता, वे होते तो पूरा आयोजन एकपक्षीय नहीं होता

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु'
Aug 3, 2023, 06:56 pm IST
inभारत, दिल्ली
प्रेमचंद जयंती के अवसर पर एवाने गालिब सभागार में आयोजित हुआ कार्यक्रम

प्रेमचंद जयंती के अवसर पर एवाने गालिब सभागार में आयोजित हुआ कार्यक्रम

यह लगभग बीस साल पुरानी बात होगी। राष्ट्रवादी पत्रकारों के एक मिलन कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार मनोज रघुवंशी ने भारतीय राष्ट्रवाद पर एक टिप्पणी कर दी। यह बात मिलन में शामिल हुए कुछ पत्रकारों को पसंद नहीं आई और उन्होंने श्री रघुवंशी को अपनी बात पूरी नहीं करने दी। इस घटना की जानकारी एक मित्र से मिली थी। वे मित्र उस मिलन में शामिल हुए थे। यह जानने के बाद राष्ट्रवादियों को लेकर मेरी राय बनी कि यहां अपनी बात कहने की आजादी नहीं है। उन दिनों मेरी सोच थी कि वामपंथ में इसकी गुंजाइश है। वे उदार लोग हैं और यदि आप उनकी आलोचना भी करो तो वे सुनते हैं। लेकिन बाद के कई अनुभव ऐसे सामने आए जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मैं गलत था।

प्रेमचंद जयंती के अवसर पर प्रत्येक साल 31 जुलाई की शाम एवाने गालिब सभागार में होने वाला ‘हंस समारोह’ इसका सटीक उदाहरण हो सकता है।

वामपंथ का एकालाप

आज की बात इस बार 31 जुलाई की गोष्ठी के जिक्र से ही प्रारंभ करते हैं, तो वहां कॉमरेड प्रत्यक्षा का संचालन था, गणेश देवी, गौहर रजा, सुधीर चंद्र, कृष्ण कुमार ने अपना वक्तव्य दिया। कार्यक्रम स्थल पर अधिकांश कुर्सियां खाली थीं और राजेन्द्र यादव की याद दिला रही थीं। वे होते तो कक्ष इतना खाली नहीं होता। वे होते तो पूरा आयोजन एकपक्षीय नहीं होता। बहरहाल, मंच पर मौजूद एक ही विचारधारा के चार लोग मिलकर उनकी हंसी उड़ा रहे थे, जिस विचार का कोई प्रतिनिधि मंच पर मौजूद नहीं था। मंच से कृष्ण कुमार ने कहा, उनकी (राष्ट्रवादियों) विचारधारा में दम कहां है? उनके पास एक साहित्यकार नहीं। उनके बीच पढ़ने लिखने की कोई संस्कृति नहीं है। मतलब जो प्रगतिशील हैं, वे सवाल उठाना भी चाहते हैं और आने वाले जवाब से डरे हुए भी हैं। कृष्ण कुमार को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि जिस प्रेमचंद के नाम पर सारा आयोजन है, उन प्रेमचंद को सबसे अधिक जानने वाले और उनकी अप्रकाशित कहानियां तलाश तलाश कर हंस को भी उपलब्ध कराने वाले कमल किशोर गोयनका का संबंध किस विचारधारा से है? ना जाने कृष्ण कुमार बंकिम चंद्र और गुरुदत्त को किस खेमे में रखना पसंद करेंगे?

सुधीर चन्द्र को नव राष्ट्रवाद शब्द से आपत्ति थी, वे इसमें हिन्दू जोड़ना चाहते थे। उन्हीं पत्रकारों की तरह जो मेवात के नूह में निकली ब्रजमंडल यात्रा को भगवा यात्रा कहते नहीं थक रहे थे। वास्तव में उन्हें नैरेटिव गढ़ने के लिए हिन्दू, राष्ट्रवाद, भगवा जैसे शब्द चाहिए। यदि ये शब्द ना मिल रहे हों तो कैसे उसे पूरे विमर्श में लाना है, इसी विशेषज्ञता का नाम वामपंथ है।

आजादी नहीं, गिरोहबंदी का समर्थन

वामपंथी अथवा उसकी प्रगतिशील धारा से जुड़े लोग ‘कहने की आजादी के अधिकार’ का जिक्र खूब करते हैं लेकिन जब साथ खड़े होने की बात होती है तो वे सिर्फ अपने गिरोह के लोगों के साथ ही खड़े होते हैं। कमलेश तिवारी, नुपूर शर्मा से लेकर मनीष कश्यप तक ऐसे दर्जनों नाम हैं, जिनकी हत्या अथवा उत्पीड़न सिर्फ ‘कहने’ की वजह से हुआ। इनके साथ कोई प्रगतिशली लेखक, पत्रकार, यू ट्यूबर खड़ा नहीं दिखा क्योंकि इनमें से कोई उनकी गिरोह का हिस्सा नहीं है।

पिछले दिनों ‘वामपंथ’ महिला पहलवानों के आंदोलन में खाप पंचायतों के पीछे खड़ा था। जहां महिला खिलाड़ियों के बदले सारे निर्णय खाप पंचायत चला रहे पुरुष ले रहे थे, उस दौरान वामधारा की एक भी बड़ी बिंदी वाली नारीवादी चिंतक को यह ख्याल नहीं आया कि खाप पंचायत में महिलाएं क्यों नहीं हैं? हरियाणा में खाप पंचायतें पितृ सत्ता की प्रतीक हैं अथवा जब बात महिला खिलाड़ियों की है तो उनके संबंध में कोई भी अंतिम निर्णय पुरुषों वाला खाप पंचायत क्यों लेगा? गौरतलब है कि वामपंथ की प्रगतिशील धारा का अपना काम करने का तरीका भी खाप पंचायत जैसा ही है। वे जिस विचार के संबंध में दिन रात लेख लिख रहे हैं, विष वमन कर रहे हैं। उस विचार को उन्होंने कभी ठीक से सुना नहीं। उसे जाना नहीं और उस विचारधारा पर निर्णय सुनाने में कभी तनिक देर भी नहीं की।

बोलने की आजादी ‘सिर्फ अपनों’ को है

हंस समारोह हमेशा से एकपक्षीय नहीं था। कुछ वर्षों तक दूसरे पक्ष को सुनने का ‘औपचारिक प्रयास’ प्रगतिशील हंस के मंच पर हुआ। वर्ष 2015 की बात है, हंस के कार्यक्रम में साहित्यकार रमणिका गुप्ता ने मंच पर चढ़कर वक्ताओं से चल रहे सवाल जवाब के दौरान प्रश्न पूछने की जगह पांचजन्य के पूर्व संपादक तरुण विजय के वक्तव्य पर टिप्पणी की। इस बीच मंच संचालक ने उन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। रमणिका गुप्ता के तरुण विजय पर एकालाप के बाद उन्हें जवाब देने का अवसर मिलना चाहिए था। समारोह में वे वक्ता के तौर पर बुलाए गए थे और मंच पर अपनी विचारधारा के अकेले प्रतिनिधि थे। तरुण, रमणिका गुप्ता के सवाल का जवाब देना चाहते थे, लेकिन मंच संचालन कर रहे कॉमरेड संजीव कुमार ने कहा कि यहां कौन टिप्पणी करेगा, कौन सवाल पूछेगा और कौन जवाब देगा, यह मैं तय करूंगा। मतलब साफ था कि संजीव वहां मंच संचालक की जगह अपनी ‘तानाशाह विचारधारा’ के एक सिपाही की भूमिका निभा रहे थे। संजीव को लगा कि तरुण विजय ने रमणिका गुप्ता की टिप्पणी पर अपनी बात कही तो ‘विचारधारा’ खतरे में आ जाएगी। अब रमणिकाजी हमारे बीच नहीं हैं। मार्च 2019 में उनका निधन हो गया। 2015 की हंस गोष्ठी में तरुण विजय के अलावा मंच पर अशोक वाजपेयी, पवन के वर्मा, एम के रैना, सुभाषिनी अली उपस्थित थीं। वहां किसी के बोलने पर शोर नहीं हुआ लेकिन तरुण विजय के आते ही हर तरफ हंसी, फुसफुसाहट का माहौल बनाया गया, जिसे शिष्टता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

सब मिले हुए हैं जी

राजेन्द्र यादव के प्रयास से राष्ट्रवादी विद्वान हंस के मंच पर बुलाए तो जा रहे थे लेकिन किसी प्रगतिशील लेखक को यह बात पसंद नहीं आई कि उनके मंच पर गोविन्दाचार्य और तरुण विजय जैसे गैर प्रगतिशील आकर भाषण करें। उस मंच से चंदन मित्रा और राम बहादुर राय भी होकर आए। वामपंथियों को एकालाप करने की आदत रही है। दूसरी धारा की बात अपने मंच से सुनना उनके अभ्यास में नहीं है। जनवादी और प्रगतशील शब्दों के खोल में दशकों से खाप लेखक संघ ही चल रहा है।

दिल्ली के एक वरिष्ठ वामपंथी पत्रकार जिन्होंने ना जाने अपनी रिपोर्टिंग से लेकर यू ट्यूबर के तौर मोनोलॉग करते—करते कितने लोगों की निजी जिन्दगी पर टिप्पणियां की हैं। वे खुद को ‘कहने की आजादी के बड़े पैरोकारों’ में भी गिनते हैं लेकिन जब राजेन्द्र यादव ने उनकी पत्नी और बेटी पर अपनी एक किताब में सात-आठ सौ शब्द खर्च किए तो वे पत्रकार तिलमिला उठे। उन्होंने यादवजी के लिखने की आजादी के सम्मान की न सिर्फ उपेक्षा की, वे लाल पीले होकर उनके घर तक पहुंच गए। बताया जाता है कि उस प्रगतिशील सवर्ण पत्रकार ने जिस लहजे में यादवजी से बात की, वह सम्मान का लहजा नहीं था। इतना ही नहीं, प्रकाशित किताब से वह दो पन्ने हटाए गए जिन पर उन पत्रकार को आपत्ति थी। यहां उल्लेखनीय है कि यादवजी की किताब का प्रकाशक भी कहने की आजादी का बहुत बड़ा हिमायती है लेकिन एक पन्ना छपी हुई किताब से फाड़कर हटाने में उसने भी तनिक देर नहीं की।

यह प्रश्न प्रासंगिक है

कहने की आजादी के पक्ष में खड़े दिखते इस विचारधारा के संबंध में पत्रकार अनंत विजय बताते हैं कि जब वे ‘मार्क्सवाद का अर्धसत्य’ लिख रहे थे। उन्हें आस—पास के लेखकों ने खूब हतोत्साहित किया। वे नहीं चाहते थे कि यह किताब लिखी जाए। कहने की आजादी के पक्ष में दिखने वाला यह समूह कमलेश्वर के खिलाफ भी हो गया था, जब वे अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले ‘अक्षरम’ नाम के एक गैर वामपंथी मंच पर भाषण करने चले गए थे। वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी की याद में हुए एक कार्यक्रम में आलोचक नामवर सिंह के जाने पर उनकी घोर आलोचना हुई क्योंकि उन्होंने वहां केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मंच साझा किया था। निर्मल वर्मा, रामदरश मिश्र जैसे लेखकों को वामपंथी गिरोह ने इसलिए अधिक महत्व नहीं दिया क्योंकि उन्होंने लिखते हुए वामपंथियों की ‘सहमति-असहमति को अधिक महत्व नहीं दिया।

वामपंथी लेखकों, फिल्मकारों और पत्रकारों के लिए यह प्रश्न वाजिब जान पड़ता है कि जिस सत्ता के खिलाफ आप लिख रहे थे और दिख रहे थे। वही आपको पोषित कर रही थी। आपको तमाम तरह के अवार्ड और फेलोशिप दे रही थी। इसका तो यही मतलब निकलता है कि उस समय की सत्ता आपके विरोध को अधिक गंभीरता से नहीं ले रही थी अथवा वह वामपंथियों को अपनी बी टीम ही समझती थी। पिछले कुछ समय में अचानक ऐसे यू ट्यूबरों की संख्या बढ़ी है, जो अब कांग्रेस की बी टीम बनकर नहीं बल्कि ए टीम बनकर काम कर रहे हैं। यहां जिन घटनाओं का उल्लेख हुआ है, वह सारी घटनाएं आज प्रासंगिक हैं और वामपंथ की प्रासंगिकता पर प्रश्न भी खड़े कर रही हैं।

Topics: Premchand Jayantiswan ceremonydemocratic and progressiveKhap Writers Associationराजेंद्र यादवnationalist journalistRajendra Yadavप्रेमचंद जयंतीहंस समारोहजनवादी और प्रगतिशीलखाप लेखक संघराष्ट्रवादी पत्रकार
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
Share36
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

श्री बलबीर पुंज (फाइल फोटो)

बलबीर पुंज: छिप गया वो साज़े हस्ती छेड़कर… अंतरंग मित्र की कलम से भावांजलि

राजस्थान के गृहराज्य मंत्री के उत्तराखंड आवास पर आयकर का छापा

प्रतीकात्मक चित्र

बीमारी ठीक होने का प्रलोभन देकर भोले-भाले हिंदुओं का करा रहे थे कन्वर्जन, दो आरोपी गिरफ्तार

Load More

ताज़ा समाचार

अवैध घुसपैठियों पर कसता शिकंजा

जम्मू में जनसंख्या असंतुलन – घुसपैठियों के नेक्सस पर प्रहार, जानें कैसे काम करता है पूरा गिरोह

रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय

पाक के आरोपों को भारत ने किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने कहा-INS कोलकाता पूरी तरह सुरक्षित, PNS हुनैन ने तोड़ा नियम

कल का मौसम: 19 सितंबर को 14 राज्यों में ‘मूसलाधार बारिश’, पहाड़ों में लैंडस्लाइड का अलर्ट; IMD का बड़ा अपडेट

कोलकाता पुलिस STF को मिली बड़ी सफलता : 2.20 करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल ‘आकाश’ गिरफ्तार

Dr Mohan Bhagwat Ujjain Yuva Dharma Sansad 2026 Geeta Bhawan Panchjanya

धर्म वृद्धावस्था की चीज नहीं, युवावस्था से ही जीवन को दिशा देता है: उज्जैन में बोले सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

दो दिन दिल्ली में दुनिया

Punjab Police ASI Murder Amritsar

पंजाब में एएसआई हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या: TTH ने ली जिम्मेदारी, बीते महीनों में तीसरी घटना!

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और गणेश जोशी नेपाल आपदा राहत सहायता दल को हरी झंडी दिखाते हुए

उत्तराखंड: धामी ने नेपाल आपदा राहत सहायता दल को दिखाई हरी झंडी, 8 सदस्यीय दल रवाना

mukhyamantri yuva vidyarthi manthan 140 students tab dbt

उत्तराखंड: युवाओं के विचार विकसित उत्तराखंड के निर्माण में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका – सीएम धामी

CCTNS में उत्तराखंड की रैंकिंग में सुधार, राष्ट्रीय स्तर पर 9वें स्थान पर पहुंचा राज्य

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies