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असम में जनजातीय विद्रोह का अंत, सभी उग्रवादी समूह मुख्यधारा में हुए शामिल

अंतिम जनजातीय उग्रवादी समूह DNLA ने नई दिल्ली में शांति संधि पर किए हस्ताक्षर

Written byदिब्या कमल बोरदोलोईदिब्या कमल बोरदोलोई
Apr 28, 2023, 02:22 pm IST
in भारत, असम
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का अभिवादन करते डिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी/दिमासा पीपुल्स सुप्रीम काउंसिल के प्रतिनिधि। साथ में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का अभिवादन करते डिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी/दिमासा पीपुल्स सुप्रीम काउंसिल के प्रतिनिधि। साथ में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा।

गुवाहाटी। केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में भारत सरकार, असम सरकार और डिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी/दिमासा पीपुल्स सुप्रीम काउंसिल (DNLA/DPSC) के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही अब असम में जनजातीय विद्रोह का भी अंत हो गया है।

असम के सभी जनजातीय विद्रोही समूह पिछले 9 वर्षों में मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने 27 अप्रैल को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में डिमासा उग्रवाद समूह (DNLA) के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद यह बात कही। सीएम शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पहले बोडो, कार्बी, जनजातीय उग्रवादी समूहों के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। 27 अप्रैल को अंतिम जनजातीय विद्रोह समूह DNLA ने भी शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। अब असम में कोई सक्रिय जनजातीय उग्रवादी समूह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में पूर्वोत्तर के सभी उग्रवादी समूहों को मुख्य धारा में लाने का प्रयास जारी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में गुरुवार को भारत सरकार, असम सरकार और डिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी/दिमासा पीपुल्स सुप्रीम काउंसिल (DNLA/DPSC) के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता 2024 तक उत्तर-पूर्व को उग्रवाद मुक्त बनाने और एक शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। समझौते का उद्देश्य असम के दीमा हसाओ जिले में उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करना है।

यह समझौता असम के दीमा हसाओ जिले में उग्रवाद को पूर्ण रूप से समाप्त कर देगा। इसके साथ ही अब असम में सशस्त्र समूह नहीं हैं, सभी जनजातीय समूह भारत की विकास प्रक्रिया में मुख्यधारा से जुड़कर अपना योगदान दे रहे हैं।

समझौते के तहत, DNLA के प्रतिनिधियों ने हिंसा छोड़ने, सभी हथियारों और गोला-बारूद को आत्मसमर्पण करने, अपने सशस्त्र समूहों को भंग करने, DNLA कैडरों के कब्जे वाले सभी शिविरों को खाली करने और मुख्यधारा में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की है।

NCHAC के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में रहने वाले डिमासा लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए भारत सरकार और असम सरकार द्वारा पांच साल की अवधि में प्रत्येक को 500 करोड़ रुपये का एक विशेष विकास पैकेज भी प्रदान किया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता 2024 तक उत्तर-पूर्व को उग्रवाद मुक्त बनाने और शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह समझौता उग्रवाद को पूरी तरह समाप्त कर देगा और इसके साथ ही आज असम में जनजातीय सशस्त्र समूह नहीं बचे हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंक मुक्त, हिंसा मुक्त और विकसित पूर्वोत्तर का विजन देश के सामने रखा है और प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत, DNLA के प्रतिनिधियों ने हिंसा छोड़ने, सभी हथियारों और गोला-बारूद को आत्मसमर्पण करने, अपने सशस्त्र संगठन को भंग करने, DNLA कैडरों के कब्जे वाले सभी शिविरों को खाली करने और कानून द्वारा स्थापित शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की है। इस समझौते के परिणामस्वरूप, DNLA के 168 से अधिक कैडर हथियार डालकर मुख्य धारा में शामिल हो रहे हैं।

Topics: जनजातीय विद्रोहउग्रवादी समूहडिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मीदिमासा पीपुल्स सुप्रीम काउंसिलअसमअसम शांति समझौताअमित शाहtribal insurgencyAmit Shahinsurgent groupsहिमंत बिस्वा शर्माassam peace accordAssam CMHimanta Biswa Sharmaअसम के सीएमAssam
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