फिर 'मार्शल लॉ' के शिकंजे में जाएगा पाकिस्तान? पूर्व PM ने किया इशारा
October 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

फिर ‘मार्शल लॉ’ के शिकंजे में जाएगा पाकिस्तान? पूर्व PM ने किया इशारा

आम लोगों को खाने के लिए अन्न नहीं मिल रहा है। अन्य उठापटक है ही। सारी परिस्थितियां वहां एक बार फिर सैन्य शासन के आने की चिंताजनक संभावनाएं दर्शा रही हैं

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 24, 2023, 03:00 pm IST
inविश्व
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी

पाकिस्तान की वर्तमान परिस्थितियां इतनी बदतर हैं कि देश में नागरिक सरकार कब चरमरा कर ढह जाएगी, कहना मुश्किल है। न तो वहां के नेताओं में देश को लेकर कोई चिंता है, न फौज ही सरकार के कहे को मानती है। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की बाढ़ बह रही है। कर्मचारियों के वेतन के लाले पड़े हैं। कारोबार ठप है और विदेशी मुद्रा भंडार रीता पड़ा है। आईएफएफ से कर्ज की किस्तों से गुजारा करना मुश्किल है। आम लोगों को खाने के लिए अन्न नहीं मिल रहा है। इसलिए सारी परिस्थितियां वहां एक बार फिर सैन्य शासन के आने की चिंताजनक संभावनाएं दर्शा रही हैं। यह किसी और ने नहीं, खुद वहां के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर ​कहा है।

पाकिस्तान के ये पूर्व प्रधानमंत्री हैं शाहिद खाकन अब्बासी। कल एक टीवी साक्षात्कार में उन्होंने लगभग चेतावनीभरे स्वर में का कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में यदि जनता तथा शाहबाज सरकार के बीच कोई गंभीर टकराव होता है तो उस स्थिति में फौज कोई कदम उठा सकती है। शाहिद ने यह भी कहा कि जब किसी भी मुल्क में राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्थाएं ढह जाती हैं, तो बहुत बार दूसरे तरीके अमल में लाए जाते हैं। आज के हालात को देखकर लगता है, सैन्य शासन वह अन्य तरीका हो सकता है।

भारत का पड़ोसी इस्लामवादी देश फिलहाल गंभीर आर्थिक तथा राजनीतिक उठापटक का सामना कर रहा है। ऐसे में एक टेलीविजन साक्षात्कार में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी का ऐसा बयान देना गंभीरता से लिया जा रहा है। बेशक, इस बयान के आने के बाद वहां के राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है।

शाहिद खाकन अब्बासी पड़ोसी इस्लामी देश के 21वें प्रधानमंत्री रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर देश में तंत्र असफल हो गया या सरकारी संस्थान आपस में टकराए तो सरकार भी आगे काम नहीं कर पाती। ये वही हालात हैं जब किसी देश में मार्शल लॉ की नौबत दिखने लगती है। यह कोई छुपा तथ्य नहीं है कि पाकिस्तान में पहले इसी तरह के हालातों में बहुत बार मार्शल लॉ के तहत सेना के जनरलों का राज चला है।

शाहिद ने जैसे ही मुल्क में फिर से सैन्य हुकूमत के आने का अंदेशा व्यक्त किया है, तमाम मीडिया समूह और अखबारों में विशेष आलेख प्रकाशित हुए हैं। क्योंकि पाकिस्तान में सारी परिस्थितियां उसी ओर इशारा कर रही हैं, तो तथाकथित बौद्धिक जगत में भी खलबली सी मची है। पूर्व प्रधानमंत्री का बयान आखिर काफी मायने रखता है। शाहिद का आगे कहना था कि पाकिस्तान में न पैसा है, न कोई राजनीतिक सोच ही है, इसलिए संकट बहुत गंभीर दिख रहा है। और अगर ऐसा है तथा हालात जल्दी ही नहीं सुधरते तो फिर दूसरे तरीके के तौर पर सेना की हुकूमत ही एक रास्ता हो सकती है। इस बात को आगे बढ़ाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उस स्थिति से बचने के लिए हालात से जुड़े सभी पक्षों को बातचीत शुरू करके आगे का रास्ता निकालना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2017 से मई 2018 तक पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी के वरिष्ठ नेता शाहिद खाकन अब्बासी पड़ोसी इस्लामी देश के 21वें प्रधानमंत्री रहे थे। अपने ताजा टीवी साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश में तंत्र असफल हो गया या सरकारी संस्थान आपस में टकराए तो सरकार भी आगे काम नहीं कर पाती। ये वही हालात हैं जब किसी देश में मार्शल लॉ की नौबत दिखने लगती है। यह कोई छुपा तथ्य नहीं है कि पाकिस्तान में पहले इसी तरह के हालातों में बहुत बार मार्शल लॉ के तहत सेना के जनरलों का राज चला है। वहां के पिछले कुछ महीनों के मीडिया समाचारों का विश्लेषण करने से यह और अधिक संभावना वाली बात बन जाती है।

टीवी साक्षात्कार में पूर्व प्रधानमंत्री ने चेतावनी भी दी कि हालात ठीक करने जरूरी हैं नहीं तो सब हाथ से निकल जाएगा और तब दूसरे उपाय खोजे जाएंगे जिसमें मार्शल लॉ भी एक रास्ता है। हालांकि उनके हिसाब से संतोष की बात है कि सेना की तरफ से इस वक्त ऐसी किसी संभावना पर सोचा नहीं जा रहा है।

पाकिस्तान के बनने के बाद से अब तक, आधे से ज्यादा वक्त तो वहां फौजी जनरलों ने कुर्सी संभाली है। फौज ने कई बार तख्ता पलट करके सुरक्षा और विदेश नीतियों में भी अपना दखल दिया है। लेकिन पिछले कुछ सालों से बिगड़ते हालात के बावजूद, पाकिस्तान की फौज का यही कहना रहा है कि ‘फौज देश की राजनीति से फासला बनाकर रखेगी’। खुद पूर्व जनरल बाजवा ने यह बात सार्वजनिक रूप से कही थी।

राजनीतिक और आर्थिक संकट के बाद पाकिस्तान संवैधानिक संकट में फंस हुआ है, क्योंकि पीएमएलएन के नेतृत्व वाली संघीय गठबंधन सरकार ने पिछले साल जनवरी में पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों की विधानसभाओं के चुनाव कराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। खान ने कहा कि अपनी हार को देखते हुए पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और उसकी सहयोगी पार्टियां देश में अभी या अक्तूबर में चुनाव नहीं चाहती हैं।

 

Topics: primministerपाकिस्तानसैन्य शासनPakistanमार्शल लॉgovernmentabbasiभ्रष्टाचारislamabadmusharrafpmlnmarshallawgeneralbajwashabaaz
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

पीओजेके में अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी

वोट पीओजेके के, चाबी इस्लामाबाद की

Captain Smit Machchhar पर Pakistan को करारा जवाब | ABVP की बड़ी मांग

ओमानी को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी

फ्लाईदुबई विमान को उड़ाने की कोशिश करने वाले को-पायलट हामिद का पाक से क्या है कनेक्शन? बहुत ज्यादा नमाज पढ़ता था आरोपी

पाकिस्तान में 128 साल से 'गिरफ्तार' बरगद का पेड़

पाकिस्तान में 128 साल से ‘गिरफ्तार’ है बरगद का पेड़, जानिए क्यों दी गई थी सजा?

मक्का पैक्ट पाकिस्तान के लिए एक समस्या बनता जा रहा है

मक्का समझौते के बाद पाकिस्तान के सामने नई मुसीबत, हूतियों की धमकी ने बढ़ाई टेंशन

पाकिस्तान में नमाज के वक्त कैसे हुआ फिदायीन हमला? 16 की मौत 50 से अधिक घायल

Load More

ताज़ा समाचार

ट्रंप की कोशिशों के बावजूद ईरान सख्त: 7 शर्तें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खुलेगा

Punjab Khalistan police

AAP शासित पंजाब में खाकी पर खतरा बढ़ा: बीती रात एक और ASI की हत्या

Delhi Metro

दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद, कांग्रेस मार्च के चलते दिल्ली पुलिस अलर्ट पर

सऊदी एयरपोर्ट पर लगातार हमले: रियाद में फिर से मिसाइल हमला, 13 की मौत

Donald trump halt aids to bangladesh

ट्रंप का एकतरफा ऐलान: रूस-यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर शुरू, जेलेंस्की बोले- यह मेरे लिए न्यूज है

अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन के बारे में सूचना दी गई थी।

‘दीपके को दादी के निधन की खबर दी थी’, दिल्ली पुलिस ने CJP के आरोपों को खारिज कर वीडियो जारी किया

गुरुद्वारा बंगला साहिब में घुसे प्रदर्शनकारी

गुरुद्वारा बंगला साहिब: केजरीवाल और AAP नेताओं पर गुरु घर के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप, दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल अगस्त में अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी।

ट्रंप की रूस नीति: ऊर्जा सुरक्षा, चीन की महत्वाकांक्षाएं और भारत की कूटनीतिक दूरदर्शिता

राहुल गांधी और डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम

“Smash the Patriarchy” का सच? JNU प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद पर गंभीर आरोप, राहुल गांधी की चुप्पी पर उठे सवाल

Bharat Bhushan tiwari Fact check

दिल्ली में NSG जवानों को डिप्लॉय किए जाने का वीडियो वायरल, PIB ने बता दी सच्चाई

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies