साधना-समर्पण की सरिता
June 25, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

साधना-समर्पण की सरिता

जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेवा संगम में साधना और समर्पण के ऐसे उदाहरण मिले, जो लोगों को नि:स्वार्थ सेवा करने के लिए प्रेरित कर गए। हजारों प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि वे और गति तथा शक्ति से कार्य कर देश को सबल और सशक्त बनाएंगे

अरुण कुमार सिंहअश्वनी मिश्रWritten byअरुण कुमार सिंहandअश्वनी मिश्र
Apr 17, 2023, 12:45 pm IST
in भारत, संघ @100, धर्म-संस्कृति, राजस्थान
सेवा संगम के उद्घाटन सत्र के मंच पर हैं (बाएं से) श्री अशोक बागला, श्री अजय पीरामल, श्री मोहनराव भागवत, बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, श्री राजकुमार मटाले और श्री पन्नालाल भंसाली

सेवा संगम के उद्घाटन सत्र के मंच पर हैं (बाएं से) श्री अशोक बागला, श्री अजय पीरामल, श्री मोहनराव भागवत, बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, श्री राजकुमार मटाले और श्री पन्नालाल भंसाली

राष्ट्रीय सेवा संगम में देशभर में कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों के अलावा पर्यावरण रक्षा, पंचगव्य से बनने वाली वस्तुओं आदि को भी प्रदर्शित किया गया। इसमें 50 से अधिक जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों और वीरों के शानदार चित्रों को भी शामिल किया गया 

जयपुर में जामडोली स्थित केशव विद्यापीठ में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेवा संगम का समापन ‘आत्मनिर्भर समाज और आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ 9 अप्रैल को हुआ। राष्ट्रीय सेवा भारती द्वारा आयोजित इस संगम में कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से लेकर कछार तक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें अधिकतर वे लोग थे, जो दिन-रात नि:स्वार्थ भाव से सेवा कार्य में लगे हैं।
संगम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने 7 अप्रैल को किया। (देखें, सरसंघचालक जी का उद्बोधन, पेज 16 पर) वाल्मीकि धाम, उज्जैन के पूज्य पीठाधीश्वर बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे प्रसिद्ध उद्योगपति और पीरामल समूह के अध्यक्ष श्री अजय पीरामल।

इससे पूर्व 6 अप्रैल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री प्रेमचंद गोयल ने सेवा संगम परिसर में लगी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में देशभर में कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों के अलावा पर्यावरण रक्षा, पंचगव्य से बनने वाली वस्तुओं आदि को भी प्रदर्शित किया गया। इसमें 50 से अधिक जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों और वीरों के शानदार चित्रों को भी शामिल किया गया था। 8 अप्रैल को सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत प्रतिनिधियों से मिले। उन्होंने उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों आदि के बारे में जानकारी ली।

उद्घाटन सत्र में उपस्थित (बाएं से) श्री भैयाजी जोशी, श्री दत्तात्रेय होसबाले और संघ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी

सेवा संगम में गोमय के विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी। लोग वहां गोबर से बनी वस्तुएं देखकर चकित रह गए। गोबर से बने घर, छोटी से लेकर बड़े आकार के फोटो फ्रेम, दीवार घड़ियां, मैगजीन होल्डर व अन्य छोटी-छोटी उपहारनुमा वस्तुएं लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहीं। जयपुर के छात्र सोहम कहते हैं कि यदि प्लास्टिक का उपयोग कम होता है तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बहुत अच्छी पहल मानी जाएगी।

इस संगम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें सफलता की 100 से अधिक कहानियों से लोग परिचित हुए। ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ के ध्येय वाक्य पर हुए इस सेवा संगम में उन लोगों को एक नया मंच मिला, जो सामंजस्यपूर्ण और सक्षम भारत बनाने का सपना पाले हैं। सभी ने समृद्ध भारत के निर्माण के लिए आत्मनिर्भर समाज बनाने का संकल्प लिया।

संगम के समापन पर प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
संगम में महामंडलेश्वर परमहंस स्वामी महेश्वरानन्द, विश्व जागृति मिशन के संस्थापक आचार्य सुधांशु जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री भैयाजी जोशी, सह सरकार्यवाह श्री मुकुंद, राजसमंद की सांसद दीया कुमारी, जी न्यूज के स्वामी डॉ. सुभाषचंद्रा, उद्योगपति नरसीराम कुलरिया, उद्योगपति अशोक बागला आदि ने अपनी उपस्थिति से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया।

सेवा संगम में स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और सामाजिक कार्यों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया और सफलता की कहानियों से सबको प्रेरित किया। इससे परस्पर सहयोग की भावना प्रबल हुई। प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि वे समाज उत्थान के कार्यों में एक-दूसरे का संबल बनेंगे, ताकि पूरे भारत के जनमानस को सामंजस्य और सफलता का बड़ा संदेश दिया जा सके।

तीन दिन तक चले इस सेवा संगम को सफल बनाने के लिए जो कार्यकर्ता लगे थे, उनमें भी सेवा और समर्पण का अद्भुत भाव दिखा। बहुत सारे ऐसे कार्यकर्ता थे, जो व्यक्तिगत जीवन में एक ऊंचाई हासिल कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने संगम में आए प्रतिनिधियों के लिए हर तरह के कार्य किए। साफ-सफाई से लेकर वाहन तक चलाया, ताकि किसी भी प्रतिनिधि को कोई असुविधा न हो। कार्यकर्ताओं के इस भाव से प्रतिनिधि भी गद्गद् दिखे। इसी सुखद अनुभव के साथ सभी प्रतिनिधि अपने-अपने कर्मक्षेत्र की ओर लौट गए।

झलकियां

संगम में गणगौर उत्सव मनाती महिलाएं
  • सेवा संगम में देश के 45 प्रांत और 11 क्षेत्र के 800 से अधिक स्वैच्छिक सेवा संगठनों के 2,756 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इनमें 515 महिलाएं शामिल थीं।
  •  संगम से छोटे शहरों में भी नवाचार और रोजगार को प्रोत्साहित करने और हर क्षेत्र में ‘स्टार्टअप’ को प्रोत्साहित करने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ।
  • संगम को सुचारु रूप से संपन्न कराया 820 कार्यकर्ताओं ने, जिनमें 95 महिलाएं थीं।
    सेवा संगम स्थल पर छह नगर बसाए गए थे। प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए 19 भवनों की व्यवस्था की गई थी।

सेवा संगम का सफर
राष्ट्रीय सेवा भारती प्रत्येक पांच वर्ष में ऐसे सेवा संगम आयोजित करती है। पहला सेवा संगम 2010 में बेंगलूरु में आयोजित हुआ था। इसका ध्येय वाक्य था ‘परिवर्तन’। इसमें 980 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दूसरा सेवा संगम 2015 में नई दिल्ली में हुआ। इसका ध्येय वाक्य था ‘समरस भारत, समर्थ भारत’। इसमें 3,500 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। 2020 में जयुपर में तीसरे सेवा संगम की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण वह नहीं हो पाया और अब 2023 में आयोजित हुआ। इसमें 2,756 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका ध्येय वाक्य रहा-‘स्वावलंबी भारत, समृद्ध भारत।’

सशक्त और समरस बनता समाज
राष्ट्रीय सेवा भारती 43,045 सेवा परियोजनाओं द्वारा समाज को सशक्त और समरस बनाकर एकता के सूत्र में बांधने के लिए प्रयासरत है। देश के 117 जिलों में 12,187 स्वयं सहायता समूह संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 1,20,000 से अधिक सदस्य हैं। इन समूहों में 2,451 समूह स्वावलंबन के कार्यों में सक्रिय हैं। देश के 55 जिलों में स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं। इनमें 27,494 सदस्य हैं। दो वर्ष में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 25,000 से अधिक लोगों को आत्मनिर्भर बनाया गया है।

राजस्थानी संस्कृति के रंग
सेवा संगम में आईं महिला कार्यकर्ताओं को जहां ठहराया गया, उसका नाम था- भगिनी निवेदिता नगर। प्रतिभागियों को यहां राजस्थानी संस्कृति की अनुभूति हुई। 6 अप्रैल को जब महिला कार्यकर्ता यहां पहुंचीं तो उनके हाथों में मेहंदी रचाई गई। यह कार्य सेवा बस्ती की प्रशिक्षित किशोरियों ने किया। परिसर की व्यवस्था को 60 महिला कार्यकर्ताओं ने संभाला। व्यवस्थाओं में पेयजल, स्वच्छता, भोजन वितरण, कार्यालय, पार्किंग, पूछताछ, पंजीकरण, खोया-पाया, कक्ष आवंटन आदि शामिल रहीं। सुरक्षा व्यवस्था भी मातृशक्ति के जिम्मे रही। व्यवस्था में लगीं महिला कार्यकर्ताओं ने राजस्थानी संस्कृति को परिलक्षित करने वाला हर दिन का परिधान तय किया था। 7 अप्रैल को प्रात: गणगौर का प्रतीकात्मक उत्सव भी हुआ। ढोल के साथ गणगौर माता की सवारी निकाली गई, देशभर से आर्इं महिला प्रतिभागियों ने भी श्रद्धा और उत्साह के साथ इसमें भाग लिया।

जगी जीवन की आस
सेवा संगम में आए कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने अनुभव को साझा किया। असम से आए आदेश और खिरोद गोगोई अपनी आपबीती सुनाते-सुनाते भावुक हो गए। उन दोनों ने बताया कि 2008 में दंगाइयों ने उनके घर जला दिए थे। न खाने को भोजन था, न रहने को आश्रय। चारों ओर भय और डर का वातावरण था, पग-पग पर जीवन को संकट था। ऐसे में सेवा भारती के कार्यकर्ता देवदूत बने। सेवा भारती द्वारा लगाए गए शिविर में उन्हें शरण मिली। मन में जब सुरक्षित होने का विश्वास हुआ, तो जीवन की आशा भी जगी। इसी शिविर में संगठन के सेवाभाव से प्रभावित होकर सेवा भारती से जुड़ाव बढ़ गया। इसके बाद सेवा भारती, पूर्वांचल ने उनके लिए रोजगार की व्यवस्था की। आज लगभग 3,000 लोग सेवा भारती, पूर्वांचल की ओर से संचालित संस्थानों में रोजगार एवं आश्रय पा रहे हैं। यहां के हस्तनिर्मित उत्पादों की मांग विश्व भर में है। लोग तरह-तरह के उत्पाद बनाकर रोजी-रोटी कमा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि असम के जोरहाट, मालीगांव, बोंगाईगांव, गुवाहाटी और कोकराझार जिलों में स्थानीय संस्कृति एवं कला को बढ़ावा देने के लिए सेवा भारती के प्रयास अनुकरणीय हैं। स्थानीय लोगों की ओर से बनाए गए अचार, वस्त्रों पर कढ़ाई का काम, बांस के पैन स्टैंड, गमछों इत्यादि को काफी पसंद किया जाने लगा है।

पीड़ा हरते स्वयंसेवक

सेवा संगम में राष्ट्रीय सेवा भारती के अध्यक्ष पन्नालाल भंसाली के वक्तव्य के संपादित अंश

सेवा क्षेत्र में कार्य करने वाले कार्यकर्ता दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र से लेकर वनांचल तथा समुद्री क्षेत्रों में विषम से विषम परिस्थिति में कार्य करते हुए अपने भाई-बंधुओं का दुख हर रहे हैं। यह सभी कार्यकर्ता मत-पंथ, जात-पांत को दूर रखकर सकल समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में बहुत से लोगों को हुनरमंद बनाया है। प्रत्येक प्राणी में हुनर छिपा हुआ है। आवश्यकता है उस हुनर को पहचान कर उसे तराशने की। उसे रोजगार देकर उसके उत्पाद बिक्री की व्यवस्था की। जिस प्रकार रामसेतु के निर्माण में गिलहरी का योगदान रहा, उसी प्रकार पुनीत कार्य में मैं कुछ दे पाऊं, इसे ध्यान रखना है।

बेहतर विकल्प बन रहे गोमय उत्पाद
सेवा संगम में गोमय के विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी। लोग वहां गोबर से बनी वस्तुएं देखकर चकित रह गए। गोबर से बने घर, छोटी से लेकर बड़े आकार के फोटो फ्रेम, दीवार घड़ियां, मैगजीन होल्डर व अन्य छोटी-छोटी उपहारनुमा वस्तुएं लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहीं। जयपुर के छात्र सोहम कहते हैं कि यदि प्लास्टिक का उपयोग कम होता है तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बहुत अच्छी पहल मानी जाएगी।

गोसेवा प्रकल्प से जुड़े चित्तौड़ प्रांत के राजेन्द्र पामेचा और नीरज का कहना था कि गोमय उत्पाद सिर्फ प्लास्टिक का ही विकल्प नहीं बन रहे, अपितु यूरिया एवं अन्य हानिकारक पदार्थों का भी विकल्प बन रहे हैं। गोमय से दानेदार खाद भी बनाई जा रही है, जिसका उपयोग कृषक कर रहे हैं और उन्हें अच्छे परिणाम भी मिल रहे हैं। भूमि की उर्वरता में भी वृद्धि हो रही है।

 

Topics: राष्ट्रीय सेवा भारतीRashtriya Seva Sangamराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघSadhana-Dedication Saritaसेवा संगमSelf-reliant societyRashtriya Swayamsevak SanghSangh bannedसंघ पर प्रतिबंधSarkaryavahश्री दत्तात्रेय होसबालेSadhana-Dedication to the nation's victoryस्वयंसेवी संगठनShri Dattatreya Hosabaleसरकार्यवाहआत्मनिर्भर समाजWorld Awakening Mission‘आत्मनिर्भर भारत’जनजातीय स्वतंत्रता सेनानिTribal Freedom Fighterहिंदूराजस्थानी संस्कृतिNational Service BhartiSelf-reliant Indiaसमरस भारतRajasthani Culture‘समर्थ भारत’गोमय उत्पाद सिर्फ प्लास्टिकSamras Bharatविश्व जागृति मिशनसाधना-समर्पण की सरिताSamarth Bharatराष्ट्रीय सेवा संगमसाधना-समर्पण की सरिता जीत राष्ट्र कीHinduCow products only plastic
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

इमरजेंसी फाइल्स- सुमित्रा गुलाटी की आपबीती

आपातकाल का सच: ‘इंदिरा ने बहुत गलत किया’, सुमित्रा गुलाटी के पूरे परिवार को जेल भेजा, छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा

आपातकाल का सच

हिटलर गांधी : स्वयंसेवकों का बलिदान, बचा संविधान

Narendra Modi vision for developing India

पीएम मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किए तीन स्वदेशी युद्धपोत- दूनागिरी, अग्रय और संशोधक, जानिए इनकी खासियत?

संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार

राष्ट्र-चिंतक डॉ. हेडगेवार

मानसा में आयोजित संघ वर्ग में जीरो वेस्ट मॉडल से पर्यावरण संरक्षण की जगाई अलख

छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज से संघ तक: राष्ट्र पुनर्निर्माण की वह विचारधारा जिसे जानना जरूरी है

Load More

ताज़ा समाचार

POJK Protest

POJK में विरोध प्रदर्शन: पाकिस्तान की नाकेबंदी से खाने-दवाइयों की भारी कमी, मुनीर के सेना ने शवों का किया अपहरण

आपातकाल का सच

आपातकाल का सच : तानाशाही के विरुद्ध संघ के दो स्वयंसेवकों के जेल में ही बलिदान होने की दर्दनाक गाथा

पहलगाम में आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों की हत्या की थी

पहलगाम आतंकी हमला: NIA ने फाइल की चार्जशीट, पाकिस्तानी हैंडलर अली साजिद का खुलासा

Venezuela earthquake

वेनेजुएला में दो बड़े भूकंपों ने मचाई तबाही, काराकास में ढहीं इमारतें; 10,000 मौतों की आशंका

Hormuz strait Iran Blocked economic crisis

होर्मुज स्ट्रेट खुला: 30 भारत-बाउंड जहाज पार कर चुके, 26 अभी इंतजार में

Passport is only a travel document

पासपोर्ट सिर्फ यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं: MEA

इजरायल का सख्त ऐलान: दक्षिणी लेबनान से सैनिक नहीं हटाएंगे, IDF बनी रहेगी

इमरजेंसी फाइल्स- सुमित्रा गुलाटी की आपबीती

आपातकाल का सच: ‘इंदिरा ने बहुत गलत किया’, सुमित्रा गुलाटी के पूरे परिवार को जेल भेजा, छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा

आज का राशिफल

25 जून का राशिफल: ग्रह-नक्षत्रों का असर, जानें आपका दिन कैसा रहेगा?

आज का इतिहास

25 जून का इतिहास: क्रिकेट, आतंकवाद और कूटनीति से जुड़ी बड़ी घटनाएं

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies