उत्तराखंड : मजार जिहाद की हद पार, कालू सैय्यद की 10 तो सैय्यद बाबा के नाम से आधा दर्जन मजारें
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उत्तराखंड : मजार जिहाद की हद पार, कालू सैय्यद की 10 तो सैय्यद बाबा के नाम से आधा दर्जन मजारें

आखिर एक ही शख्स को कितनी जगह दफनाया गया? किस साजिश के तहत लगाई जा रही मजारों की भरमार? कालू, भूरे जैसे मजारों के नाम रखकर हिंदू जनमानस को किया जा रहा भ्रमित।

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Apr 7, 2023, 11:59 am IST
in भारत, उत्तराखंड

उत्तराखंड में पाञ्चजन्य की खबर का लगातार असर दिख रहा है। मजार जिहाद की खबर सबसे पहले पाञ्चजन्य ने ही चलाई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मजार जिहाद को लेकर कड़ा रुख अपना चुके हैं। धामी के बुलडोजरों ने फॉरेस्ट की जमीनों से अवैध मजारों को हटाना शुरू कर दिया है।

उत्तराखंड में अवैध मजारों को लेकर एक और रोचक जानकारी सामने आई है। यहां एक धंधे की तरह सरकारी जमीनों पर मजारें बनाई गई हैं। इसका प्रमाण इनके नामों से मिल जाता है। कुमायूं में कालू सैय्यद बाबा की मजार अल्मोड़ा में बताई जाती है, यहां उनके घोड़े की भी मजार है, लेकिन कालू सैय्यद बाबा की मजार हल्द्वानी के कालाढूंगी चौराहे, लामाचौड़, कालाढूंगी, रामनगर, जसपुर, गैबुआ और कॉर्बेट पार्क के भीतर भी मिल जाएगी। मजार जिहाद की पुष्टि यहां से हो जाती है कि आखिर एक पीर एक ही जगह दफनाया गया होगा, फिर उसके नाम से दस मजारें कैसे बन गईं? क्या मजार की इंतजामिया कमेटी इनकी फ्रैंचाइजी बांट रही है?

इसी तरह गढ़वाल में पछुवा देहरादून में सैय्यद बाबा की मजारें भी फ्रैंचाइजी की तरह दिखती हैं। ये मजारें जीवन गढ़, जलालिया, हरबर्टपुर, पृथ्वीपुर, तेलपुर, सहसपुर में मिल जाएंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि एक शख्स क्या इतनी जगह दफनाया गया होगा? सैय्यद की मजार भीमताल में भी है, ये कौन से पीर हैं, जो यहां दफनाए गए। पछुवा में पीर बाबा की मजार के नाम से सहसपुर, बालूवाला, शेरपुर, छरबा, भीमावाला में मजारें मिल जाएंगी। मतलब एक ही नाम की पांच मजारें साफ दिख रही हैं, अभी इस नाम से और जाने कितनी होंगी।

मजार के नामों को लेकर एक और जानकारी मिल रही है कि ज्यादातर मजारें ऐसी हैं, जिनके नाम को लेकर हिंदू समुदाय भ्रमित रहे, क्योंकि इन मजारों में मुस्लिम नहीं, हिंदू ज्यादा जाते देखे गए हैं। ऐसी जानकारी में आया है कि देवबंदी मुस्लिम इन मजारों को नहीं मानते हैं। मजारें बरेलवी मुस्लिम बनवाते हैं और इनका यहां झाड़-फूंक का धंधा चलता है। ये लोग हिंदू समुदाय को अपना लक्ष्य बनाए रखते हैं। इसलिए यहां कालू, भूरे शाह, इमली वाले बाबा, ढपल्ली वाले पीर बाबा, जैसे नाम मजारों के मिलेंगे। कालू सैय्यद को धीरे-धीरे कालू सिद्ध नाम मिलने लगता है। कुछ एक ने कालू साई प्रचारित करना शुरू कर दिया है। ये सब एक मार्केटिंग का तरीका है, जो उत्तराखंड में मजार जिहाद का हिस्सा बन चुका है।

उत्तराखंड को देवभूमि माना जाता है। देवभूमि मे मजार बनाने का जिहाद यहां की सनातन संस्कृति को चोट पहुंचाने का षड्यंत्र माना जा रहा है। ज्यादातर मजारें वन भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाई गई हैं। वन विभाग ने सीएम के आदेश पर कई फॉरेस्ट डिवीजन में मजारें चिन्हित करके उन्हें हटाना शुरू भी किया है, किंतु कुछ डिवीजन में अभी यथा स्थिति बनी हुई है।

सीएम धामी का बयान
इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करके बनाई गईं मजारें हटाई जाएंगी। वन विभाग ने ये काम शुरू कर दिया है। ये अतिक्रमण है और हम अतिक्रमण होने नहीं देंगे।

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