नक्सली कब्जे में दो गांव!
August 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

नक्सली कब्जे में दो गांव!

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के दो गांव, तुंबा हाका और सरजमबुरू करीब दो महीने से नक्सलियों के कब्जे में हैं, लेकिन प्रशासन इससे कर रहा इनकार

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप
Mar 17, 2023, 10:30 am IST
inभारत, झारखण्‍ड
झारखंड में सक्रिय नक्सली (फाइल चित्र)

झारखंड में सक्रिय नक्सली (फाइल चित्र)

एक रपट के अनुसार नक्सलियों ने इन दोनों गांवों को आने वाले सभी रास्तों पर बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं। इस कारण इन दोनों गांवों में न तो कोई बाहरी व्यक्ति जा पा रहा है और न ही गांव के लोग कहीं निकल पा रहे हैं। इस रपट के लिखे जाने तक खबर यह थी कि दोनों गांवों को मुक्त करने के लिए सीआरपीएफ सक्रिय हो गई है।

झारखंड सरकार दावा कर रही है कि राज्य में नक्सली गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन इन दिनों पश्चिमी सिंहभूम जिले में जो हो रहा है, वह सरकार के दावे को झुठला रहा है। बता दें कि तुंबा हाका और सरजमबुरू नामक दो गांव लगभग दो महीने से नक्सलियों के कब्जे में हैं। ये दोनों टोंटो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। एक रपट के अनुसार नक्सलियों ने इन दोनों गांवों को आने वाले सभी रास्तों पर बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं। इस कारण इन दोनों गांवों में न तो कोई बाहरी व्यक्ति जा पा रहा है और न ही गांव के लोग कहीं निकल पा रहे हैं। इस रपट के लिखे जाने तक खबर यह थी कि दोनों गांवों को मुक्त करने के लिए सीआरपीएफ सक्रिय हो गई है।

इन गांवों में ‘हो’ जनजाति के लोग रहते हैं। नक्सलियों ने लगभग 500 की आबादी को घरों में ही कैद कर रखा है। नक्सलियों के कारण तुंबा हाका का प्राथमिक विद्यालय भी बंद है। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यालय के शिक्षकों ने लिखित में सूचित किया है कि गांव में नक्सलियों का कब्जा है। इसलिए वहां जाना और विद्यालय चलाना संभव नहीं है। एक अन्य रपट के अनुसार 16 जनवरी को जिला मुख्यालय से दो शिक्षकों को विद्यालय खोलने के लिए भेजा गया था, लेकिन उन दोनों को नक्सलियों ने डरा-धमका कर वापस भेज दिया। यह भी कहा जा रहा है कि तुंबा हाका गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले मुख्य सड़क पर पेड़ काटकर रखे गए हैं और उनमें भी विस्फोटक लगाए गए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि गांव से कुछ ही दूरी पर जंगलों में नक्सली जमे हुए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसकी पुष्टि ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरें भी कर रही हैं।

इतना सब होने के बाद भी प्रशासन खुलकर कुछ बोलने से कतरा रहा है। पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर परोक्ष रुप से स्वीकार करते हुए कहते हैं, ‘‘नक्सलियों द्वारा पूरे गांव को कब्जे में नहीं लिया गया है, बल्कि कुछ जगहों पर उनका बसेरा है। ग्रामीणों को सुरक्षा मुहैया कराने और रास्ते में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने का प्रयास किया जा रहा है।’’

नक्सलियों ने लगभग 500 की आबादी को घरों में ही कैद कर रखा है। नक्सलियों के कारण तुंबा हाका का प्राथमिक विद्यालय भी बंद है। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यालय के शिक्षकों ने लिखित में सूचित किया है कि गांव में नक्सलियों का कब्जा है। इसलिए वहां जाना और विद्यालय चलाना संभव नहीं है। एक अन्य रपट के अनुसार 16 जनवरी को जिला मुख्यालय से दो शिक्षकों को विद्यालय खोलने के लिए भेजा गया था, लेकिन उन दोनों को नक्सलियों ने डरा-धमका कर वापस भेज दिया।

लेकिन कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि नक्सली इतने दुस्साहसी कैसे हुए! फिर इसका उत्तर भी वहीं लोग बताते हैं। कहते हैं कि राज्य सरकार पर नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई न करने का भारी दबाव है, लेकिन जब नक्सली लोगों की जान लेने लगते हैं, तब आम लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए राज्य सरकार को उनके विरुद्ध कुछ कार्रवाई करनी पड़ती है।

बता दें कि इस क्षेत्र में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के हत्यारों का दबदबा है। ये लोग आए दिन कुछ ऐसा करते हैं कि उनके विरुद्ध सुरक्षाबलों को अभियान चलाना पड़ता है। एक ऐसा ही अभियान जनवरी में भी चला था। उस दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ के दौरान आईईडी विस्फोट में छह सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। सूत्रों के अनुसार उस समय सुरक्षाबलों को नक्सली मिसिर बेसरा के दस्ते की जानकारी मिली थी। इसके बाद टोंटो के जंगलों में बड़ा अभियान चलाया गया था। कहा जा रहा है कि उस अभियान के बाद नक्सली और अधिक सक्रिय हो गए और उन्होंने प्रशासन को चुनौती देने के लिए इन दोनों गांवों पर कब्जा कर लिया।

पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा से तुंबा हाका की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। चाईबासा से नरसंडा मोड़, सोनुवा, बरकेला, जोजोहातु, अंजदबेड़ा, माईपी, स्वयंबा, पालातरुब होते हुए तुंबा हाका जाया जाता है। स्वयंबा के आगे रास्ता नहीं है। गांव वाले तुंबा हाका जाने के लिए पगडंडी का ही इस्तेमाल करते हैं। गोइलकेरा और टोंटो के बीच के रास्तों पर नक्सलियों ने बारुदी सुरंग बिछाई हुई हैं। इस कारण गांव के लोग दुनिया से कटे हुए हैं।

पुलिस हो या नक्सली, दोनों एक-दूसरे के खिलाफ रणनीतियां बनाते हैं और एक-दूसरे के लिए चुनौती भी समय-समय पर बनते रहते हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आक्रामक नीति बनाते हुए अब मोटरसाइकिल दस्ता बनाया है। ये कई स्थानों पर मोटरसाइकिल से पहुंचकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ये झारखंड में नक्सली बच्चों और महिलाओं का भी इस्तेमाल करते रहे हैं।

कोल्हान के पुलिस उप महानिरीक्षक अजय लिंडा के अनुसार, ‘‘लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस कारण मिसिर बेसरा और उसके साथी नक्सली ठिकाने बदल रहे हैं, लेकिन पुलिस चारों तरफ से उन्हें घेर चुकी है। अब नक्सली या तो मारे जाएंगे या फिर जेल के अंदर जाएंगे।’’ हालांकि उन्होंने गांव पर नक्सलियों का कब्जा होने की बात से इनकार किया है, लेकिन जो स्थितियां बनी हुई हैं, वे कुछ और ही बताती हैं।

सूत्रों के अनुसार गोइलकेरा और टोंटो के बीच के रास्तों पर नक्सलियों ने बम बिछाए हुए हैं। पिछले एक महीने में इन क्षेत्रों में 100 से अधिक विस्फोट हो चुके हैं। ऐसा ही एक विस्फोट गोइलकेरा थाना क्षेत्र के इचाहातु में 1 जनवरी को हुआ था, जिसमें 52 वर्षीय कृष्णा पूर्ति की मौत हो गई थी और उनकी पत्नी 45 वर्षीया नंदी पूर्ति घायल हो गई थीं। ये दोनों सुबह खेत में लगी अरहर की फसल को देखने जा रहे थे, तभी जमीन के अंदर विस्फोट हुआ। इस नक्सली हरकत पर झारखंड के पूर्व गृह सचिव और भाजपा नेता जेबी तुबिद कहते हैं, ‘‘नक्सलवाद की वजह से ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। लोग नक्सली हिंसा के पुराने दिनों को याद करने लगे हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि जो सख्ती पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में थी, वैसी ही सख्ती रहती तो आज यह स्थिति नहीं बनती। हालांकि जेबी तुबिद यह भी कहते हैं कि नक्सलियों और पुलिस के बीच हो रही लड़ाई में ग्रामीण बेवजह अपनी जान गंवा रहे हैं। इसलिए इस समस्या का स्थायी निदान निकलना ही चाहिए।

एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पुलिस हो या नक्सली, दोनों एक-दूसरे के खिलाफ रणनीतियां बनाते हैं और एक-दूसरे के लिए चुनौती भी समय-समय पर बनते रहते हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आक्रामक नीति बनाते हुए अब मोटरसाइकिल दस्ता बनाया है। ये कई स्थानों पर मोटरसाइकिल से पहुंचकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ये झारखंड में नक्सली बच्चों और महिलाओं का भी इस्तेमाल करते रहे हैं।

इस समय झारखंड के कई जिले नक्सलवाद से प्रभावित हैं। एमसीसी, पीएलएफआई, जेजेएमपी सहित कई नक्सली संगठन पूरे राज्य में सक्रिय हैं। रामगढ़, चतरा, हजारीबाग, पलामू आदि क्षेत्रों में ऐसी कई नक्सली घटनाएं हुई हैं, जो सरकार और समाज के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं। ल्लझारखंड सरकार दावा कर रही है कि राज्य में नक्सली गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन इन दिनों पश्चिमी सिंहभूम जिले में जो हो रहा है, वह सरकार के दावे को झुठला रहा है। बता दें कि तुंबा हाका और सरजमबुरू नामक दो गांव लगभग दो महीने से नक्सलियों के कब्जे में हैं। ये दोनों टोंटो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। एक रपट के अनुसार नक्सलियों ने इन दोनों गांवों को आने वाले सभी रास्तों पर बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं। इस कारण इन दोनों गांवों में न तो कोई बाहरी व्यक्ति जा पा रहा है और न ही गांव के लोग कहीं निकल पा रहे हैं। इस रपट के लिखे जाने तक खबर यह थी कि दोनों गांवों को मुक्त करने के लिए सीआरपीएफ सक्रिय हो गई है।

इन गांवों में ‘हो’ जनजाति के लोग रहते हैं। नक्सलियों ने लगभग 500 की आबादी को घरों में ही कैद कर रखा है। नक्सलियों के कारण तुंबा हाका का प्राथमिक विद्यालय भी बंद है। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यालय के शिक्षकों ने लिखित में सूचित किया है कि गांव में नक्सलियों का कब्जा है। इसलिए वहां जाना और विद्यालय चलाना संभव नहीं है। एक अन्य रपट के अनुसार 16 जनवरी को जिला मुख्यालय से दो शिक्षकों को विद्यालय खोलने के लिए भेजा गया था, लेकिन उन दोनों को नक्सलियों ने डरा-धमका कर वापस भेज दिया। यह भी कहा जा रहा है कि तुंबा हाका गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले मुख्य सड़क पर पेड़ काटकर रखे गए हैं और उनमें भी विस्फोटक लगाए गए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि गांव से कुछ ही दूरी पर जंगलों में नक्सली जमे हुए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसकी पुष्टि ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरें भी कर रही हैं।

इतना सब होने के बाद भी प्रशासन खुलकर कुछ बोलने से कतरा रहा है। पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर परोक्ष रुप से स्वीकार करते हुए कहते हैं, ‘‘नक्सलियों द्वारा पूरे गांव को कब्जे में नहीं लिया गया है, बल्कि कुछ जगहों पर उनका बसेरा है। ग्रामीणों को सुरक्षा मुहैया कराने और रास्ते में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने का प्रयास किया जा रहा है।’’

लेकिन कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि नक्सली इतने दुस्साहसी कैसे हुए! फिर इसका उत्तर भी वहीं लोग बताते हैं। कहते हैं कि राज्य सरकार पर नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई न करने का भारी दबाव है, लेकिन जब नक्सली लोगों की जान लेने लगते हैं, तब आम लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए राज्य सरकार को उनके विरुद्ध कुछ कार्रवाई करनी पड़ती है।

बता दें कि इस क्षेत्र में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के हत्यारों का दबदबा है। ये लोग आए दिन कुछ ऐसा करते हैं कि उनके विरुद्ध सुरक्षाबलों को अभियान चलाना पड़ता है। एक ऐसा ही अभियान जनवरी में भी चला था। उस दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ के दौरान आईईडी विस्फोट में छह सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। सूत्रों के अनुसार उस समय सुरक्षाबलों को नक्सली मिसिर बेसरा के दस्ते की जानकारी मिली थी। इसके बाद टोंटो के जंगलों में बड़ा अभियान चलाया गया था। कहा जा रहा है कि उस अभियान के बाद नक्सली और अधिक सक्रिय हो गए और उन्होंने प्रशासन को चुनौती देने के लिए इन दोनों गांवों पर कब्जा कर लिया।

पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा से तुंबा हाका की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। चाईबासा से नरसंडा मोड़, सोनुवा, बरकेला, जोजोहातु, अंजदबेड़ा, माईपी, स्वयंबा, पालातरुब होते हुए तुंबा हाका जाया जाता है। स्वयंबा के आगे रास्ता नहीं है। गांव वाले तुंबा हाका जाने के लिए पगडंडी का ही इस्तेमाल करते हैं। गोइलकेरा और टोंटो के बीच के रास्तों पर नक्सलियों ने बारुदी सुरंग बिछाई हुई हैं। इस कारण गांव के लोग दुनिया से कटे हुए हैं।

कोल्हान के पुलिस उप महानिरीक्षक अजय लिंडा के अनुसार, ‘‘लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस कारण मिसिर बेसरा और उसके साथी नक्सली ठिकाने बदल रहे हैं, लेकिन पुलिस चारों तरफ से उन्हें घेर चुकी है। अब नक्सली या तो मारे जाएंगे या फिर जेल के अंदर जाएंगे।’’ हालांकि उन्होंने गांव पर नक्सलियों का कब्जा होने की बात से इनकार किया है, लेकिन जो स्थितियां बनी हुई हैं, वे कुछ और ही बताती हैं।

सूत्रों के अनुसार गोइलकेरा और टोंटो के बीच के रास्तों पर नक्सलियों ने बम बिछाए हुए हैं। पिछले एक महीने में इन क्षेत्रों में 100 से अधिक विस्फोट हो चुके हैं। ऐसा ही एक विस्फोट गोइलकेरा थाना क्षेत्र के इचाहातु में 1 जनवरी को हुआ था, जिसमें 52 वर्षीय कृष्णा पूर्ति की मौत हो गई थी और उनकी पत्नी 45 वर्षीया नंदी पूर्ति घायल हो गई थीं। ये दोनों सुबह खेत में लगी अरहर की फसल को देखने जा रहे थे, तभी जमीन के अंदर विस्फोट हुआ। इस नक्सली हरकत पर झारखंड के पूर्व गृह सचिव और भाजपा नेता जेबी तुबिद कहते हैं, ‘‘नक्सलवाद की वजह से ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। लोग नक्सली हिंसा के पुराने दिनों को याद करने लगे हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि जो सख्ती पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में थी, वैसी ही सख्ती रहती तो आज यह स्थिति नहीं बनती। हालांकि जेबी तुबिद यह भी कहते हैं कि नक्सलियों और पुलिस के बीच हो रही लड़ाई में ग्रामीण बेवजह अपनी जान गंवा रहे हैं। इसलिए इस समस्या का स्थायी निदान निकलना ही चाहिए।

एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पुलिस हो या नक्सली, दोनों एक-दूसरे के खिलाफ रणनीतियां बनाते हैं और एक-दूसरे के लिए चुनौती भी समय-समय पर बनते रहते हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आक्रामक नीति बनाते हुए अब मोटरसाइकिल दस्ता बनाया है। ये कई स्थानों पर मोटरसाइकिल से पहुंचकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ये झारखंड में नक्सली बच्चों और महिलाओं का भी इस्तेमाल करते रहे हैं।

इस समय झारखंड के कई जिले नक्सलवाद से प्रभावित हैं। एमसीसी, पीएलएफआई, जेजेएमपी सहित कई नक्सली संगठन पूरे राज्य में सक्रिय हैं। रामगढ़, चतरा, हजारीबाग, पलामू आदि क्षेत्रों में ऐसी कई नक्सली घटनाएं हुई हैं, जो सरकार और समाज के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं।

Topics: Tonto forestnaxalismतुंबा हाकासरजमबुरूमार्क्सवादी कम्युनिस्ट सेंटर‘हो’ जनजातिटोंटो के जंगलNaxal occupation of two villages!Tumba HakaSarjamburuMarxist Communist Centreनक्सलवाद
रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

सौरव दास

Fact Check: PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान को CJP के सौरव दास ने भ्रामक तरीके से पेश किया

Basti Sohar World Record 2100 Women

बस्ती में बना ‘सोहर’ का विश्व रिकॉर्ड : 2500 महिलाओं ने अनोखे अंदाज में कहा अमित शाह को धन्यवाद

Anti-Naxal Operation in Saranda : नक्सलियों को CRPF की अंतिम चेतावनी- 1 महीने में करो सरेंडर, वरना होगी फ़ाइनल कार्रवाई

नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

नक्सलवाद : बाधा हटी, राह खुली

Chhattisgarh Naxalites

वामपंथी नक्सलवाद जड़ से उखड़ा, लेकिन शहरी नक्सली अभी भी सक्रिय

सदन में चर्चा का जवाब देते केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

Naxal Free India: अमित शाह ने कांग्रेस-नक्सलियों का गठजोड़ किया उजागर, ‘इंदिरा गांधी को माओवादी पार्टी ने समर्थन दिया’

Load More

ताज़ा समाचार

रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो)

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ सुनवाई 23 सितंबर को

जनसांख्यिकी परिवर्तन (चित्र प्रतीकात्मक)

यूरोप का जनसांख्यिकीय चौराहा: आंकड़ों के पीछे छिपता जनसांख्यिकीय परिवर्तन

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

हिमाचल: कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालय से जुड़े मामले पर नहीं बुलाई बैठक,  हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, 5 लाख का जुर्माना

झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन

‘कपड़े फाड़े, दुपट्टा खींचा’, झारखंड में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का पुलिस पर गंभीर आरोप

Rahul Gandhi

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्रों को पैसे बांटने का आरोप, मुख्यमंत्री ने कहा-छानबीन की जाएगी

बहुआयामी वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि

अमित शाह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री

‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने की बैठक, घुसपैठ रोकने काे बनेगा त्रिस्तरीय सुरक्षा तंत्र

पूज्य सतगुरु लाल दास महाराज के 51वाँ निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

संतों का मार्गदर्शन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा, देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना प्राथमिकता : सीएम धामी

सज्जन कुमार (फाइल फोटो)

मौत से मिट नहीं जाता गुनाह का न्यायिक इतिहास!

Paper Leak से Power Surplus तक… भजनलाल सरकार ने कितना बदला राजस्थान?- Mehraj Singh Choudhary

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies