द्वादश ज्योतिर्लिंग : जानिए महादेव के सभी ज्योतिर्लिंगों तक पहुंचने का रास्ता, जानिए हर एक धाम का रहस्य
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द्वादश ज्योतिर्लिंग : जानिए महादेव के सभी ज्योतिर्लिंगों तक पहुंचने का रास्ता, जानिए हर एक धाम का रहस्य

- ये सभी ज्योतिर्लिंग भारत के अलग अलग राज्यों में स्थित हैं। इन सभी ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव ज्योति के रूप में स्वयं विराजमान हैं।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jan 13, 2023, 06:27 pm IST
inधर्म-संस्कृति

भगवान भोलेनाथ के धामों की महिमा ही अपार है। हर साल भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने लाखों भक्त जाते है। इन ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव ज्योति के रूप में स्वयं विराजमान हैं। ये सभी ज्योतिर्लिंग भारत के अलग अलग राज्यों में स्थित हैं। इन ज्योतिर्लिंगों के अगर आप दर्शन करना चाहते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि इन 12 ज्योतिर्लिंगों का क्या नाम है और ये कहां स्थित है। सबसे ज्यादा ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में स्थित हैं।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)

इसे पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। यह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थापित है। शिवपुराण के अनुसार दक्ष प्रजापति ने जब चंद्रमा को क्षय रोग का श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इससे मुक्ति के लिए यहां पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। ऐसी भी मान्यता है कि इसी दौरान चंद्रदेव ने इस शिव लिंग की स्थापना की थी।

चंद्र देव ने सोमनाथ मंदिर को सोने से, सूर्य देव ने रजत से और भगवान श्री कृष्ण ने लकड़ी से बनवाया था। भगवान श्री कृष्ण ने यहीं से भालुका तीर्थ में देह त्यागकर वैकुंठ गमन किया था। इसके साथ ही यहाँ त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है। यहां पर तीन पवित्र नदियों हिरण,कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है।

सोमनाथ जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/BsuBYns7GaDME3hf9

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आन्ध्र प्रदेश)

यह ज्योतिर्लिंग मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे श्रीशैल पर्वत पर स्थापित है। इस मंदिर को दक्षिण का कैलाश पर्वत कहा गया है। महाभारत में दिए वर्णन के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने के सामान फल प्राप्त होता है। माता पार्वती का ‘मल्लिका’ है और भगवान शिव को ‘अर्जुन’ कहा जाता है। इस प्रकार सम्मिलित रूप से वे श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से यहाँ निवास करते है।

मल्लिकार्जुन जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/Nx1A2V9NzVmQv9pB7

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)

भगवान शिव मध्य प्रदेश राज्य के अत्यंत पुराने शहर उज्जैन में महाकालेश्वर के रूप में निवास करते है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहाँ भगवान महाकाल को उज्जैन का राजा कहा जाता है। यहाँ की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। क्षिप्रा नदी के किनारे बसे उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होता है। यहाँ गुरु सांदीपनी के आश्रम में भगवान श्री कृष्ण व बलराम विद्या प्राप्त करने हेतु आये थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अकाल मृत्यु से मुक्ति पाने के लिए यहां भगवान शिव की पूजा करने से लाभ मिलता है।

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/gG9z1Bg5PFESYGC47

ममलेश्वर व ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)

हरियाली की चादर ओढा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में माँ नर्मदा नदी के तट पर, मन्धाता नाम के आइलैंड पर स्थित है। यहाँ माँ नर्मदा ॐ के आकार में बहती है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है, जो चौथे स्थान पर है। यह अन्य ज्योतिर्लिंगों से इसलिए अलग है क्योंकि यहां भगवान शंकर दो रूप में विराजमान हैं, एक ओंकारेश्वर और दूसरे ममलेश्वर। दो ज्योतिर्लिंग के रूप में होने पर भी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को एक ही गिना जाता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/D7498ejgxgoPtjEV7

केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में यह सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है, यह ज्योतिर्लिंग हिमालय की गोद में केदारनाथ घाटी में है। यह भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक व इसके साथ ही यह चार धामों में से एक और पंच केदार में से एक है। यहां बहुत ज्यादा ठण्ड और बर्फबारी के कारण यह मंदिर साल में केवल 6 महीने अप्रैल से नवंबर माह तक ही खुलता है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदार क्षेत्र को कैलाश जितना महत्त्व दिया गया है। मन्दिर के गर्भ गृह में भगवान केदारनाथ का स्वयंमभू ज्योतिर्लिंग है और बाहर नंदी भगवान विराजमान है। में है। केदारनाथ के दर्शनों के लिए बैशाखी बाद गर्मियों में इस मंदिर को खोला जाता है, दीपावली के बाद पड़वा के दिन मंदिर के द्वार बंद होते हैं।

केदारनाथ जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/LFJ7LXuLaMbZiEYH8

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)

यह ज्योतिर्लिंग मोटेश्वर महादेव के नाम से भी प्रसिद्ध है। पुणे से लगभग 115 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सहाद्रि नामक पर्वत की हरि-भरी वादियों से घिरा यह भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शंकर के 12 दर्शनीय ज्योतिर्लिंगों में छटवें स्थान पर है। भीमा नदी के उद्गम स्थल पर शिराधन गांव में स्थित इस मंदिर का शिवलिंग, मोटा होने के कारण यह मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। भीमेश्वर ज्योतिर्लिंग अमोघ है, इसके दर्शन का फल सभी मनोकामनाए पूर्ण करता है। मराठा राज्य के महाराज छत्रपति शिवाजी यहाँ कई बार पूजन करने आते थे।

भीमाशंकर जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/RzEYhQftmPX3gbPQA

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग सप्तम ज्योतिर्लिंग है. वाराणसी का पौराणिक नाम काशी है, इसलिए यह ज्योतिर्लिंग को काशी विश्वनाथ के नाम से भी प्रसिद्ध है। कहते है तीनों लोकों में न्यारी नगरी काशी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है। कहा जाता है कि भगवान शिव काशी के राजा हैं, और वे यहां के लोगों की रक्षा करते हैं। यहां ज्योतिर्लिंग दो भागों में विभाजित है। ज्योतिर्लिंग के दायें भाग में माँ पार्वती और बाएं भाग में भगवान भोलेनाथ सुन्दर रूप में विराजमान है। गंगा नदी के किनारे बसे काशी को मुक्ति का धाम भी कहा जाता है।

काशी विश्वनाथ जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/544PGa1x2X7et1kC7

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में पंचवटी से लगभग अठारह मील की दूरी पर गोदावरी नदी कें किनारे त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। अत्यंत प्राचीन त्र्यंबकेश्वर मंदिर के अंदर एक छोटे से गड्ढे में तीन छोटे-छोटे शिवलिंग हैं। इन तीन शिवलिंग को ब्रह्मा, विष्णु और शिव के नाम से जाना जाता हैं। ये शिवलिंग स्वयं प्रकट हुए है, यानी इसे किसी ने स्थापित नहीं किया था। कहा जाता है कि गौतम ऋषि और गोदावरी नदी ने भगवान शिव से यहां पर निवास करने का निवेदन किया था, जिसके परिणामस्वरूप भगवान शिव त्र्यंबकेश्वर  ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/zcKBZkjeVCdC8HmU9

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखण्ड)

ज्योतिर्लिंगों में से नौवां श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखण्ड के देवघर में स्थित है। बाबा बैद्यनाथ जोतिर्लिंग होने के कारण इस स्‍थान को “देवघर” अर्थात देवताओं का घर कहा जाता हैं। बैद्यनाथधाम में माता सती का ह्रदय गिरा था इसलिए यह स्थान एक शक्तिपीठ भी है। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में भोलेनाथ यहां आने वाले की सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग को ‘कामना लिंग’ भी कहा जाता है।

बाबा वैद्यनाथ जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/H6SSugLvq1pGMepd9

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात राज्य के जामनगर जिले के द्वारका धाम से लगभग 18 किमी दूर स्थापित है। भगवान महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग 10 वे स्थान पर आता है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा अभूतपूर्व है। यहाँ श्री द्वारकाधीश भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते थे। भगवान शिव के सहस्र नामों में एक नाम नागेश्वर भी है, यानि नागों के ईश्वर। इसलिए यहाँ भगवान शिव ‘नागेश्वर’ कहलाये और माता पार्वती ‘नागेश्वरी’।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/7y5mZ8RAUtoUxM5G7

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)

तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग, चार धामों में से एक धाम और भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंग में एक है। रामेश्‍वर का अर्थ होता है “राम के ईश्वर”। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय से पूर्व भगवान श्रीराम ने यहां पर इस शिवलिंग को स्थापना’ कर भगवान शिव की अराधना की थी। इस वजह से इसे रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग कहा गया।

रामेश्वरम जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/JFSta4jGdNjnf17x8

घुमेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के दौलताबाद के निकट एलोरा गुफा के पास वेसल गांव में स्थापित है। यह घृष्णेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से भी प्रसिद्ध है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। शिवभक्त घुश्मा की भक्ति के कारण प्रकट होने से भगवान शिव यहाँ घुश्मेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुए। इस मंदिर के निकट विश्व प्रसिद्ध एलोरा की गुफाएं यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल हैं।

घुमेश्वर व घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने का रास्ता – https://goo.gl/maps/myWJHUj3f58NDfzR7

Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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