अग्निपथ योजना स्वैच्छिक, जिन्हें समस्या है वे न हों शामिल : हाई कोर्ट
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अग्निपथ योजना स्वैच्छिक, जिन्हें समस्या है वे न हों शामिल : हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अग्निपथ योजना को विशेषज्ञों ने तैयार किया है, कोर्ट विशेषज्ञ निकाय नहीं जो इस पर फैसला करे।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 14, 2022, 11:15 am IST
in भारत, दिल्ली

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि अग्निपथ योजना को विशेषज्ञों ने तैयार किया है और कोर्ट विशेषज्ञ निकाय नहीं है कि वो इस योजना के बारे में फैसला करे। चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वो विभिन्न देशों के रक्षा बलों और उनकी सैन्य रणनीति की भी पड़ताल नहीं करने जा रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अग्निपथ योजना स्वैच्छिक है, जिन लोगों को इसमें कोई समस्या है, उन्हें सशस्त्र बलों में नहीं शामिल होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अग्निपथ योजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक है। सैन्य बलों में शामिल होने वाले अग्निवीरों में किसी यूनिट से जुड़ने के लिए ट्रेनिंग की कमी होगी। ये योजना समान काम समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन है। अग्निपथ योजना से चार साल बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी जवानों के लिए कोई बैक अप प्लान नहीं है। सेना से रिटायर एक याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि फील्ड के विशेषज्ञ और उप-सेनाध्यक्षों तक ने इस योजना को भारतीय सेना के लिए नुकसानदेह बताया है। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि वो इस मसले पर केंद्र से निर्देश लेंगी।

इस मामले में केंद्र सरकार ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा था कि अग्निपथ योजना में कोई कानूनी कमी नहीं है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत होने के साथ-साथ ये सेना की जरूरतों के मुताबिक होगी। केंद्र सरकार ने हलफनामे में कहा है कि देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ देश अंदर और बाहर के दुश्मनों से लड़ने के लिए भारतीय सेना की औसत आयु 32 साल से 26 साल हो जाएगी और सेना तकनीकी रूप से भी ज्यादा दक्ष होगी। अग्निपथ योजना मेरिट के आधार पर और पारदर्शी तरीके से होगी। अग्निवीर देश के साथ-साथ समाज के लिए संसाधन साबित होंगे।

अग्निपथ योजनाओं को लेकर दायर याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 19 जुलाई को अपने पास और दूसरे हाई कोर्ट में लंबित केस दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट पहले से भारतीय नौसेना के उस विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें अभ्यर्थियों को 12वीं में मिले मार्क्स कट-ऑफ बढ़ाकर चयन करने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारतीय नौसेना में चयन के लिए जो मापदंड बनाए गए हैं, उसका ये विज्ञापन उल्लंघन करता है।

अग्निपथ योजना को लेकर एयरफोर्स में चयनित 20 अभ्यर्थियों ने भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनकी याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना से प्रभावित हुए बिना उन्हें एयरफोर्स में ज्वाइन करने का आदेश जारी किया जाए। एयरफोर्स में चयनित अभ्यर्थियों का एयरफोर्स की X और Y ट्रेड में नियुक्ति के लिए 2019 में चयन हुआ था, लेकिन उन्हें ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला है। याचिका में मांग की गई है कि एयरफोर्स की 2019 का एनरॉलमेंट सूची प्रकाशित की जाए और उन्हें ज्वाइनिंग करायी जाए। एयरफोर्स की आधिकारिक वेबसाइट में कहा गया कि कोरोना की वजह से उनकी ज्वाइनिंग नहीं हो रही है, लेकिन अब केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना की वजह से उनकी ज्वाइनिंग पर असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में अग्निपथ योजना को लेकर तीन याचिकाएं दाखिल की गई थीं। एक याचिका वकील हर्ष अजय सिंह ने दायर की है। याचिका में सरकार को इस योजना पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी खजाने पर बोझ कम करने की कवायद में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता ना हो। चार साल बाद रिटायर हुए अग्निवीर बिना किसी नौकरी के गुमराह हो सकते हैं।

अग्निपथ योजना को लेकर दूसरी याचिका वकील मनोहर लाल शर्मा ने और तीसरी याचिका वकील विशाल तिवारी ने दायर की थी। मनोहर लाल शर्मा की याचिका में अग्निपथ योजना को चुनौती देते हुए कहा गया था कि ये योजना बिना संसद की मंजूरी के लाई गई है। वकील विशाल तिवारी की याचिका में अग्निपथ योजना का सेना पर पड़ने वाले प्रभाव और उसके खिलाफ हुई हिंसा और तोड़फोड़ की जांच की मांग की गई थी।

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