साबरमती संवाद में गूंजा राष्ट्रीय स्वर, किरेन रिजिजू बोले- अब राजनीति में उम्र नहीं ऊर्जा मायने रखती है
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होम भारत गुजरात

साबरमती संवाद में गूंजा राष्ट्रीय स्वर, किरेन रिजिजू बोले- अब राजनीति में उम्र नहीं ऊर्जा मायने रखती है

स्वस्ति वाचन से शुरू हुआ कार्यक्रम, केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री किरेन रिजिजू, भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल कानितकर, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट, भाजपा नेता कपिल मिश्रा और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, रामकथा मर्मज्ञ रमेश भाई ओझा ने अपने विचार रखे

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 17, 2022, 10:48 am IST
in गुजरात, पाञ्चजन्य इवेंट

अमदाबाद (गुजरात) में सोमवार से दो दिवसीय साबरमती संवाद शुरू हो गया है। नवरंगपुरा में साबरमती के किनारे दिनेश हाल में इस संवाद में राष्ट्रीय स्वर गूंज रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत स्वस्ति वाचन और दीप प्रज्वलन कर की गई।

प्रथम सत्र में केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने अपने विचार रखे इस सत्र में कानून और न्याय व्यवस्था पर खुलकर चर्चा की, इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के लिए काम करना है। प्रधानमंत्री जी ने अपनी टीम का हिस्सा बनाया है, जो दायित्व दिया उसे पूरा करना है। प्रधानमंत्री जी की सोच के साथ ही एलाइन करते हुए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि देश के लिए इतना काम करने की जरूरत है, कि हम पूरा समय दें, तो भी नहीं हो पाता। नरेंद्र मोदी जी की सरकार में मंत्रियों, सांसदों को बिल्कुल छुट्टी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे अपने हिसाब से एक डिपार्टमेंट अगल होगा, दूसरा डिपार्टमेंट की सोच अलग होगी, यह बिखराव वाली सरकार नहीं है। यह एक मजबूत और एक दिशा में चलने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि राजनीति में उम्र मायने नहीं रह गई है। 35 साल वाले भी दुनियां में प्रधानमंत्री बन रहे हैं, और 80 साल वाले भी बन रहे हैं। अब राजनीति में ऊर्जा मायने रखती है।

उन्होंने कानून व्यवस्था पर कहा कि हमारी समाज की सोच से यह सारी चीजें उत्पन्न होती है, हम लोग अगर अपने-अपने दायरे में रहे और अपने काम में ही हम ध्यान रखें, तो इस तरह की समस्या नहीं आती है।संविधान हमारा सबसे सीक्रेट डॉक्यूमेंट है, और संविधान से ही हमें अपने अधिकार प्राप्त होते हैं। कई ऐसी चीजें हैं, जो संविधान में लिखित रूप से उसका कोई उजागर नहीं किया गया है। हमारे जो तीन स्तंभ हैं, न्याय पालिका, कार्यपालिका और विधायिका तो  वो अपने दायरे में बिल्कुल बंधे हुए हैं। और अगर वो इधर उधर भटकता है तो फिर न्यापालिका उसको सुधारती है, हमारे यहां बहुत वाइव्रेट डेमोक्रेसी है। मोदी जी के नेतृत्व में कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे ज्यूडिसरी को नुकसान हो। ज्यूडिसरी की अथॉरिटी को चेलेंज करें ऐसा हमने कार्य नहीं किया। लेकिन जब हम कुछ सुधार लाना चाहते हैं, तो वह सुधार के साथ देश की भावना जुड़ना जरूरी है, क्योकिं देश के लोगों के समर्थन की आवश्यकता होती है। जब देश और देश में जो व्यवस्था है, न्यायपालिका को एक तरह से नियंत्रित करने के लिए, अपने सीमा में बांधने के लिए अगर व्यवस्था नहीं होती है, तो सवाल ज्यूडिसर एक्टीविज्म शब्दों का इस्तेमाल होता है।

उन्होंने कहा कि मेरी जब भी ज्यूडिसरी के साथ, जजों के साथ वार्ता होती है। तो मैं बहुत फ्री एंड फ्रंट तरीके से उनको कहता हूं, कि आपको जो भी कहना का है, वो अगर आप अपने ऑडर के जरिए कहें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। ना कि टिप्पणियों से। चर्चा में उन्होंने आगे कहा कि आज न्याय देने से ज्यादा जज इस पर ज्यादा ध्यान लगाते हैं, कि अगला जज किसे बनाना है।

दूसरे सेशन में शिक्षा, षड़यंत्र और समाधान पर चर्चा करते हुए, भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल कानितकर ने कहा, कि देश में हाल ही में लागू की गई शिक्षा नीति असल में 1835 के बाद बदली गई है, चाहे लोग उसे 34 साल बाद बदली हुई शिक्षा नीति बोलें। असल में यह 185 साल के बाद आई शिक्षा नीति है। 1835 जो शीर्षासन हुआ, उसके बीज बिन्दु लिए ये शिक्षा नीति आई है।

नई शिक्षा नीति के आयामों के सवाल पर जवाब देते हुए, मुकुल कानितकर ने कहा कि एक बहुत बड़ी क्रांति का आरंभ हो गया है। भारतीय भाषाओं में जो शिक्षा वाला जो विषय है, उसका इम्प्लीमेंट हो गया है, कल ही अमित शाह जी ने मेडिकल की पुस्तकों का मध्य प्रदेश में प्रकाशन किया है। जब भारतीय भाषाओं में डॉक्टर बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे तो इस भारत की प्रतिभा खुलकर के बाहर आएगी। और फिर पेटेंट में हम पीछे नहीं रहेंगे। पेटेंट रजिस्ट्रेशन बहुत सरल हो जाएगा। दिन भारतीय भाषाओं में हम इंजीनियरिंग, मेडिसिन और बाकी सारे प्रॉफेशन सिखाना शुरू करेंगे, तो यह  एक मुद्दा भी इम्प्लीमेंट हो जाए, तो चमत्कार हो जाएगा।

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि आज भी भारत में 10 हजार से ज्यादा अच्छे गुरुकुल कार्य कर रहे हैं। हमें अपने दिमाग से मैकाले को निकालना होगा। वहीं उन्होंने कहा कि देश का पतन धर्म के कारण नहीं , धर्म को छोड़ देने के कारण हुआ। उन्होंने कहा कि आज विदेश में पढ़ने के लिए भारत में दूतावासों के बाहर लंबी लाइन लगती है , अब विदेशों में भारतीय दूतावास के बाहर भारत के विश्वविद्याल में पढ़ने के लिए भारत का वीजा लेने के लिए लाइन लगेगी। ये नई शिक्षा नीति के कारण होगा।

मुकुल कानितकर ने कहा कि अमेरिका के 8वी के 78% बच्चे ठीक से अंग्रेजी नहीं जानते और आप अगर अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए अमेरिका भेज रहे हो तो उससे बड़ी मूर्खता कुछ नहीं है।

इस दौरान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर चर्चा करते हुए कहा कि जब से हमारे देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नरेंद्र मोदी जी आए हैं, तब से इन सात-आठ सालों के अंतर्गत पूरी तरह से कायाकल्प हुआ है। आत्मनिर्भता में हम काफी आगे बढ़ गए हैं। जहां हमारा एक्पोर्ट बहुत न्यून था। आप अगर 2013-14 देंखे और उसके बाद के 8-10 सालों को देंखे तो वहां इतिहास कायम हुआ है। अड़तीस हजार पांच सौ करोड़ रुपए तक हम एक्सपोर्ट कर चुके हैं। आज की तारीख में यह आंकड़ा और भी बढ़ गया होगा दो, तीन दिन पहले।

चर्चा में उन्होंने कहा कि हमने अपने हर क्षेत्र में कैसे हम आत्मनिर्भर बने इसके बारे में कड़ी मेहनत की है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि कभी-कभी बड़ा अजीब लगता है, इससे पहले भी तो कई लोग प्रधानमंत्री हुए है, अगर अटल जी के पीरियड को छोड़ दें क्योंकि बहुत कम पीरियड था, जिसमें आपको पता है, कि पोखरण में विस्फोट हुआ, हमसे सारे देशों ने, दुनिया ने संबंध तोड़ दिए थे। अटल जी का संक्षेप में एक धेय वाक्य था, कि मेरे देश की जनता नमक के साथ रोटी खा लेंगे, लेकिन हम दबेंगे नहीं, और बाद में जो हमारे ऊपर रोक लगाई गई थी, वह उन्हें छोड़नी पड़ी। और मोदी जी के आने के बाद पूरी तरह से कायाकल्प हो गया है।

आगे के सेशन में चर्चा करते हुए बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने अभी जेल हुई नहीं है, मगर जेल के ताले टूटेंगे, यह प्रचार है या राजनीति है, इस पर जवाब देते हुए कहा कि गुजरात में आकर लोग बड़े बड़े वादे कर रहे हैं, यह वो लोग हैं, जिस राज्य में शिक्षा मंत्री ही शराब मंत्री है, अगर आना है तो यहा सिखाने के लिए नहीं सीखने के लिए आओ। उन्होंने कहा कि सावरमती के किनारे खड़े होकर यमुना को साफ कैसे करना है, ये सीखने आओ, यहां ये सिखाने मत आओ कि नदियों के किनारे रोहिंग्या और बांग्लादेसी बस्तियां कैसे बसाई जाती है, आगे उन्होंने कहा कि इस देश में आंदोलन अगर सीखना है, तो अमूल से सीखो कॉ-ऑपरेटिव आंदोलन बना के लाखों लोगों का जीवन बदलना सिखा दिया, विकास अगर सीखना है तो गुजरात के मॉडल से सीखो। राष्ट्रवाद अगर सीखना है तो गुजरात के वोटरों से सीखो।

उन्होंने आगे कहा कि गुजरात में जय श्री कृष्णा, दिल्ली में कौन कृष्णा ?  गुजरात में जय श्री राम, दिल्ली में कौन राम ? गुजरात में हर हर महादेव, दिल्ली में कौन महादेव ? मतलब इस प्रकार क्यों, क्या बोला राजेंद्र पाल गौतम आज भी आम आदमी पार्टी का विधायक है, आज भी आम आदमी पार्टी का सदस्य है, उसे पार्टी से नहीं निकाला गया, केवल वडोदरा की जनता ने उस दिन जो आक्रोश दिखाया उसी के कारण अगले दिन मंत्री पद से इस्तीफा दिया, अगर वो गलत है तो पार्टी से क्यों नहीं निकाला जा रहा, विधायक के पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने चर्चा में आगे कहा कि भारत में कानून का राज है, तो जिस चीज का राज है, अगर वो अच्छा होगा। क्योंकि कानून का राज है, तो कानून अच्छा होगा तो राज अच्छा होगा। कानून खराब होगा, तो राज खराब होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर कितना ही अच्छा हो अगर दवा अच्छी नहीं होगी, तो बीमारी जल्दी खत्म नहीं होगी, मिस्त्री बहुत अच्छा हो लेकिन अगर सीमेंट, बालू अच्छी नहीं हुई, तो घर बहुत अच्छा नहीं बन पाएगा। ड्राइवर बहुत अच्छा हो, लेकिन गाड़ी का इंजन खराब हो तो यात्रा सुरक्षित नहीं होगी। भगवान की कृपा से इतने वर्षों बाद हमें इतने अच्छे शासक मिले माननीय प्रधानमंत्री के रूप में जो इतने त्यागी, मेहनती, ईमानदार है। उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार से सर्वोत्म प्रधानमंत्री मिले, वैसे ही हमारा प्रत्येक नियम, कानून भी सर्वोत्म होना चाहिए। जैसे शासक हमारे इतने अच्छे हैं, उसी रेशियो में हमारा कानून अच्छा हो जाए, तो यहां की व्यवस्था बहुत तेजी के साथ बदलेगी।

माइक्रोसॉफ्ट भारत के निदेशक बालेंदु शर्मा दाधीच ने चर्चा में तकनीक की ताकत और भारत की ताकत को लेकर कहा कि उद्यम करने से ही परिणाम मलते हैं, सोचने या लंबी योजनाएं बनाने या कल्पना करने से परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं। परिणाम अगर प्राप्त होता है, तो कुछ करने से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा यदि कोई शेर सो रहा है, तो कोई मृग उसके मुंह में नहीं चला जाता, उसके लिए उसे परिश्रम करना होता है, उसको पुरुषार्थ करना पढ़ता है, तो आज का जो ये दौर है, जिसमें हम ये देख रहे हैं, कि विभिन्न क्षेत्रों में देश आगे बढ़ रहा है, प्रगति की नई इबारत लिख रहा है, नए आयाम और नए सोपान रच रहा है। और नई दिशाएं साकार कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि आज देश में कुछ न कुछ ऐसा किया जा रहा है, जिसकी वजह से यह परिणाम सामने आ रहे हैं। और ये जो परिणाम है, वो अनेक क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी या प्रॉद्योगिकी के क्षेत्र में भी परिणाम पूरी तरह से स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। और उसकी वजह स्पष्ट है, क्योंकि यहां पर नीति भी है, और नियत भी, यहां पर एक दृष्टि भी है, और दृष्टिकोण भी और जो यहां का विजन है, वो व्यापक है, भारत की जड़ों से आकांक्षाओं से जुड़ा हुआ विजन है, जिसको लेकर आज की सरकार आगे बढ़ रही है।जिसका प्रभाव हमें हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।

चर्चा में आगे विश्व विख्यात कथावाचक पूज्य भाईश्री रमेश भाई ओझा ने कहा कि चर्चा में आगे विश्व विख्यात कथावाचक पूज्य भाईश्री रमेश भाई ओझा ने कहा कि धर्म, अर्थ और काम इन तीनों का व्यक्ति अगर सही रूप से संपादन करता है, तभी उसे मोक्ष मिलता है। धर्म स्वीकार करने की चीज है, लादने की नहीं।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, अखिल भारतीय संगठन मंत्री (भारतीय शिक्षा मंडल) श्री मुकुल कानिटकर, केंद्रीय खेल एवं युवा मंत्री श्री अनुराग ठाकुर, केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री किरेन रिजिजू, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव श्री चम्पत राय, पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला, आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं प्रख्यात अभिनेत्री श्रीमती रूपा गांगुली, रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट, गुजरात के गृह राज्यमंत्री श्री हर्ष संघवी, अमूल के प्रबंध निदेशक श्री आरएस सोढ़ी, रामकथा मर्मज्ञ श्री रमेश भाई ओझा, माइक्रोसॉफ्ट भारत के निदेशक श्री बालेंदु शर्मा दाधीच, आंतरिक सुरक्षा मामलों के जानकार श्री विनय कुमार सिंह, भाजपा नेता श्री कपिल मिश्रा और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्री अश्विनी उपाध्याय, सामाजिक कार्यकर्ता काजल हिंदुस्तानी, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर विजय पटेल सत्र के मुख्य वक्ता रहे।

अब तक के इस सुदीर्घ सफर में देश के साथ ही, पाञ्चजन्य ने भी कंटकों भरा पथ पार किया है, बाधाओं को साहस से परास्त किया है। अपने स्वरूप, प्रस्तुति, संयोजन में सतत निखार लाते हुए, पाञ्चजन्य ने अपने व्याप को परिश्रमपूर्ण प्रयासों से बढ़ाया है। आज देश के सर्वदूर क्षेत्रों को स्पर्श करते हुए पाञ्चजन्य ने अपना जयघोष सागरपार तक पहुंचाया है। और सिर्फ पत्रिका के रूप में ही नहीं, सोशल मीडिया के विभिन्न क्षेत्रों में भी साप्ताहिक ने 40 लाख से अधिक पाठकों तक अपनी पहुंच बनाई है। सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर आज पाञ्चजन्य ‘भारत की बात’ सफलता से गुंजा रहा है।

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