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‘स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का पुनर्लेखन आवश्यक’

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास लेखन में सबसे ज्यादा भेदभाव महिला क्रांतिकारियों के साथ किया गया। इनकी भूमिका के कारण साम्राज्यवाद कमजोर पड़ा, लेकिन मार्क्सवादी इतिहासकारों ने इनका कहीं उल्लेख नहीं किया। नेहरूवादी राज ने इनको सम्मान नहीं दिया।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 10, 2022, 11:19 am IST
inदिल्ली
कार्यक्रम की तस्वीर

कार्यक्रम की तस्वीर

भाजपा सांसद सुप्रसिद्ध चिंतक और विचारक राकेश सिन्हा ने आज़ादी के अमृत महोत्सव से जुड़े शहीद नमनांजलि कार्यक्रम में कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। चांदबाई, मतांगनि हाजरा, मालती देवी, एकेम्मा चेरियन जैसी सैकड़ों महिला स्वतंत्रता सेनानियों की उपेक्षा की गयी। साम्राज्यवादी शासन के विरूद्ध लड़ने वाली ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की भूमिका इतिहास की पुस्तकों में नगण्य है। उदाहरण के लिए कर्नाटक के सिंजक्की माकी गांव की महिलाओं ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए थे। कुलीन घरानों को इतिहास में स्थान दिया गया। आम जन के योगदान का कहीं वर्णन नहीं है इसलिए स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का पुनर्लेखन आवश्यक है।

विश्व के सबसे बड़े सामाजिक सांस्कृतिक राष्ट्रीय विचारों के महिला संगठन राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांता कुमारी ने कहा कि अमरत्व अपने कार्यों से प्राप्त होता है। जैसे कि हमारे महान ऋषि वाल्मीकि, उन्होंने रामायण के माध्यम से मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के दर्शन पूरे विश्व को करवाए। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अवसर पर देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वालों के साथ-साथ उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धांजलि दी। वाल्मीकि के कार्यों को शाश्वत और अमर बताया। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता और एकता के मूल में हमारा प्राचीन आध्यात्मिक चिंतन और एकात्म भाव दर्शन है। पिछले पूरे एक वर्ष स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मनाया गया और उसी श्रृंखला में शहीद नमनाजंलि कार्यक्रम किया गया है।

राष्ट्र सेविका समिति ने पिछले वर्ष 14 अगस्त को आज़ादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम की घोषणा की थी और 15 अगस्त से पूरे देश में कार्यक्रमों की रचना की गयी, जिसमें पांच बिंदुओं को मुख्य रूप से केंद्र में रखा गया था– 1857 की क्रांति, भारत विभाजन की विभिषिका, विभिन्न सामाजिक व्यक्तियों की स्वतंत्रता संग्राम में सहभागिता, साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों के माध्यम से जो जन जागरण किया गया और नेता जी सुभाषचंद्र बोस का तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा आंदोलन। राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता हल्देकर ने बताया कि राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर लगभग 4000 वक्ताओं को विचार व्यक्त करने का प्रशिक्षण दिया गया। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य सामाजिक संस्थाओं में कवि सम्मेलन आयोजित किए गए। देश भक्ति गीतों की हस्तलिखित 125 पत्रिकाएं निकालीं गयीं। उन स्वतंत्रता सेनानियों, वीरांगनाओं को सम्मानित किया, जो स्वाधीनता संग्राम से लेकर अमृत महोत्सव तक के साक्षी हैं। उन परिवारों को भी सम्मानित किया जिनके पुरखों ने बलिदान दिया। जिन कारागृहों में स्वतंत्रता सेनानियों को यातनाएं दी गयीं और फांसी पर चढ़ाया गया, वहां भी कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख डॉ शरद रेणु शर्मा ने बताया कि जिन दो पुस्तकों- स्वराज क्रांति और महिलाएं, और गीत अर्धय का विमोचन किया गया ये स्वाधीनता संग्राम के वीरों और वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि है। शरद रेणु ने बताया कि स्वराज और क्रांति पुस्तक के पांच भागों में उन वीरांगनाओं का चयन किया गया है, जिन्होंने अंग्रेजों से युद्ध करके स्वराज क्रांति के बीज बोए, स्वाधीनता के लिए समाज जागरण करके एकता पैदा की, स्वाधीनता संग्राम में अपने प्राणों की बलि दे दी और पांचवे भाग में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाली महिलाओं का वर्णन है। दूसरी पुस्तक गीत अर्धय में सेविकाओं द्वारा लिखे गए अनेक प्रांतीय भाषाओं के देश भक्ति गीतों का संकलन है। शरद रेणु ने कहा ये गीत देश के लिए मर मिटने वाले वीरों, वीरांगनाओं और भारत माता के चरणों में समर्पित है।

आज़ादी के अमृत महोत्सव के समापन के अवसर पर आयोजित शहीद नमनांजलि कार्यक्रम में दिल्ली प्रांत की त्रैमासिक ई पत्रिका अपाला के प्रथम वार्षिक अंक का विमोचन किया गया। दिल्ली प्रांत की सहकार्यवाहिका विदुषी शर्मा ने बताया कि अपाला समिति की सेविकाओं के बीच संवाद और बौद्धिक विमर्श का माध्यम बनी है। विभिन्न समसामयिक विषयों पर समिति भारतीय समाज और भारतीय दृष्टि से अपना विमर्श साझा करती है। प्रांत में समिति की गतिविधियों को एक साथ एक मंच पर लाने में भी अपाला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वार्षिक अंक में विभिन्न क्षेत्रों में सर्वोच्च स्थानों पर पदासीन महिलाओं के लेखों का संकलन समाहित है।

शहीद नमनांजलि कार्यक्रम राष्ट्र सेविका समिति दिल्ली प्रांत ने आयोजित किया। इसमें सांस्कृति कार्यक्रमों में सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अपने गीत संगीत से पूरे सभागार को देश भक्ति के रस में सराबोर कर दिया। जाने माने गीतकार और कवि मनोज मुंतशिर ने अपने काव्य पाठ से नमनांजलि दी। ब्रज क्षेत्र से आए लोक कलाकारों की रास मंडली ने रास नृत्य की सुंदर और आकर्षक प्रस्तुति दी।

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