लोकपरंपरा भारत की सार्वभौमिक दृष्टि
June 6, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

लोकपरंपरा भारत की सार्वभौमिक दृष्टि

पूर्वोत्तर भारत वह भूभाग है जिसने भारत के प्राचीन मूल्यों, जिसमें मातृशक्ति को ही शक्ति माना गया है, उसी को सरस्वती और लक्ष्मी माना गया है, को लोकपरंपरा के नाते ही सही, जिन्दा रखा है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 8, 2022, 11:24 am IST
in भारत, विश्लेषण, मत अभिमत, केरल, धर्म-संस्कृति

प्राचीन भारत की सभ्यता का तो संदेश ही यही है। शक्ति की पूजा हर जगह हुई लेकिन व्यावहारिक स्तर पर उसे अबला बना दिया गया। पूर्वोत्तर में असम ने और दक्षिण में केरल ने व्यावहारिक तौर पर भी मातृशक्ति को प्राथमिकता दी।

लोकमंथन 2022 के समापन सत्र में मुख्य अतिथि केरल के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि नारी हमारे लिए अबला हो गई थी। कमजोर, शक्तिहीन। पूर्वोत्तर भारत वह भूभाग है जिसने भारत के प्राचीन मूल्यों, जिसमें मातृशक्ति को ही शक्ति माना गया है, उसी को सरस्वती और लक्ष्मी माना गया है, को लोकपरंपरा के नाते ही सही, जिन्दा रखा है।

प्राचीन भारत की सभ्यता का तो संदेश ही यही है। शक्ति की पूजा हर जगह हुई लेकिन व्यावहारिक स्तर पर उसे अबला बना दिया गया। पूर्वोत्तर में असम ने और दक्षिण में केरल ने व्यावहारिक तौर पर भी मातृशक्ति को प्राथमिकता दी।

श्री खान ने कहा कि ‘‘सुंदरता के अंदर ममत्व है… आकर्षण है… शक्ति है। लेकिन दुर्भाग्य है कि शक्ति की कल्पना को हटा दिया गया। ममत्व, आकर्षण बना रहा। लेकिन असम समेत इस देश के कुछ हिस्सों में शक्ति के रूप में उसकी आराधना और पूजा होती रही। हमारे पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने लिखा है – ‘‘अगर आप सभ्य मानव जीवन जीना चाहते हैं तो आवश्यक है कि आप अपने अंदर करुणा की भावना पैदा करें। यह करुणा का भाव स्त्रियों में नैसर्गिक रूप से आता है। पुरुषों को इसकी आवश्यकता है कि वे कोशिश करके यह भाव अपने अंदर पैदा करें।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय सभ्यता का सबसे बड़ा संदेश यह है कि जो खुद तुम्हारे लिए कष्टदायक है, वह कभी दूसरे के साथ मत करना। जिसे हम लोकपरंपरा कह रहे हैं, वह वास्तव में भारत की सार्वभौमिक दृष्टि है। जिनके पास धन रहा है, फौज रही है, वे कभी भारतीय समाज के आदर्श नहीं रहे। भारतीय समाज के आदर्श हमेशा ऋषि-मुनि रहे।

राजाओं में भी आदर्श वे बने, जिन्होंने मर्यादा की रक्षा की है; जिन्होंने भारतीय सभ्यता को, भारतीय प्रज्ञा को नए आयाम के साथ परिभाषित किया है। अपने समय के शानदार महल तो खंडहर होते हुए हजारों मिल जाएंगे, लेकिन रामायण और महाभारत कभी खत्म नहीं होंगे। मतलब जो चीज मानस से पैदा होती है, वह यदि दिलों में घर कर जाए तो समय उसे खत्म नहीं कर पाता।’’

उन्होंने कहा कि गुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने अपने एक भाषण में कहा था कि भारत तब तक सच्ची आजादी प्राप्त नहीं कर सकता, जब तक यह स्वीकार नहीं कर लिया जाएगा कि भारत की बुनियाद मानस में है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने लिखा है कि मुझे भारत की धरती से अगाध प्रेम है। यह प्रेम इसलिए नहीं है कि मैं इस भूभाग में पैदा हुआ हूं। भारत मां के बेटों की चैतन्य आत्मा से जो शब्द निकले, उसको भारत ने विषमतम परिस्थितियों में सुरक्षित रखा। यही कारण है कि भारत से मुझे गहरा प्यार है।

उन्होंने इस्लाम के उदाहरण से अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि यह बात सिर्फ भारतीय परंपरा में नहीं है। मोहम्मद साहब, जो कभी भारत नहीं आए, वे मदीने में बैठकर कहते हैं, ‘‘मैं हिन्दुस्तान की सरजमीं से ज्ञान के शीतल झोंके आते हुए महसूस कर रहा हूं।’’ दुनिया में पांच बड़ी सभ्यताएं हैं।

ईरान की सभ्यता वैभव के लिए, चीन की सभ्यता कौशल एवं शासकों के प्रति आज्ञाकारिता के लिए, रोम की संस्कृति सुंदरता के लिए, तुर्कोंकीसंस्कृति बहादुरी के लिए जानी जाती है। भारत की संस्कृति अकेली है जो अपने ज्ञान और प्रज्ञा के संवर्धन के लिए जानी जाती है।

एकल विद्यालय के संबंध में उन्होंने कहा कि ‘जब मैं नागपुर संघ मुख्यालय गया, तब मैं वहां एकल विद्यालय देखना चाहता था। यह संस्था न सिर्फ भारत के पुनर्जागरण, पुनर्निर्माण का कार्य कर रही है बल्कि उन पापों का भी प्रायश्चित कर रही है जो हमसे हुए हैं। बड़े शहरों के लोगों, सुविधा-संपन्न लोगों को यह विद्यालय यह समझाने में कामयाब हुआ है कि तुम्हारी जिम्मेवारी है कि पूर्वोत्तर भारत के सुदूर गांवों में जाकर उनके बच्चों को पढ़ाओ, उनके घर रहकर उनका खाना खाओ। ज्ञान को साझा करने की भूख एकल विद्यालय पैदा कर रही है। यही तप है।’

अंत में उन्होंने कहा, ‘‘हम जितना भी गर्व करें इस सभ्यता पर, वह कम है। जब विषमतम परिस्थितियां थीं, तब भी सुदूर क्षेत्रों में, हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में इन मान्यताओं को, इन मूल्यों को, इन आदर्शों को बचाकर रखा गया। यह बहुत महत्वपूर्ण है।’’

Topics: भारतीय सभ्यताप्राचीन भारत की सभ्यताईरान की सभ्यता वैभवएकल विद्यालय
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

चित्र सौजन्य - स्वदेश

खिचड़ी और RSS : भारतीय समाज में सामूहिकता, समरसता और सांस्कृतिक एकात्मता का सांकेतिक आख्यान

RSS के 100 साल: संस्कार, सदाचार, सेवा और सत्कार

इंदिरा गांधी सरकार ने गोरक्षकों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया था

गोरक्षा आंदोलन : हिंदू समाज का संगठित स्वाभिमान

RSS Pracharak Snehpal died

आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक स्नेह पाल जी का निधन: सीएम धामी ने बताया आदर्श

 सिंधु नदी प्रणाली, गंगा नदी प्रणाली, लूणी नदी प्रणाली
इसरो के उपग्रह चित्र में सिंधु, गंगा और लूणी नदी के प्रवाह क्षेत्र

सरस्वती नदी : वेदों की बात पर विज्ञान की मोहर

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार: हिंदू एकता और राष्ट्र निर्माण के दूरदर्शी

Load More

ताज़ा समाचार

India US Relations Cold War Mindset PM Modi Foreign Policy

भारत-अमेरिका संबंध और शीतयुद्धकालीन मानसिकता का संकट, मोदी विरोध में राष्ट्रीय संप्रभुता पर सवाल क्यों?

CM Yogi Balrampur 300 crore development projects inauguration mafia

माफिया को चुनकर भेजोगे तो गरीबों का खून चूसेगा: बलरामपुर में CM योगी ने याद किए पुराने दिन, कहा- मुझे गोरखपुर से आकर…

अजीत आगरकर और गौतम गंभीर

इंग्लैंड-आयरलैंड दौरा : चौराहे पर खड़ा भारतीय क्रिकेट

तस्वीर में बाईं ओर सूर्या और दाईं ओर असद

सूर्य चौहान की हत्या और साझी विरासत के यक्ष प्रश्न

मद्रास उच्च न्यायालय

‘स्वयंसेवकों पर नहीं चलेगा मुकदमा’

Punjab law and order farmers thieves tubewell motor UPI

पैसे ले लो पर ट्यूबवैलों की मोटरें न चुराओ : पंजाब में किसानों की चोरों से अपील, सरकार से उठा भरोसा

sambhal baghauch illegal mazar demolished by administration

संभल में प्रशासन का बड़ा एक्शन: अवैध मजार पर चला बुलडोजर, 5 साल से था कब्जा

varanasi urban park bhelupur 130 feet shivling

130 फीट ऊंचा शिवलिंग, 100 करोड़ की लागात: काशी को मिलेगी विश्वस्तरीय सौगात, बनेगा ‘अर्बन पार्क’

दिल्ली विधानसभा के बाहर सांकेतिक उपवास करते लोकतंत्र सेनानी

संपूर्ण क्रांति से आपातकाल तक : लोकतंत्र सेनानियों ने याद किया संघर्ष, सरकार को सौंपा ज्ञापन, 10 हजार ने किए हस्ताक्षर

कोई टोंटी चोरी कर रहा, कोई पानी बहा रहा, ऐसे लोगों को टोकें : सीएम योगी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies