तसलीमा नसरीन : ‘मुल्लाओं का इस्लाम हारेगा’
July 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

तसलीमा नसरीन : ‘मुल्लाओं का इस्लाम हारेगा’

ईरान में महसा अमीनी की हत्या के बाद उग्र हुए हिजाब आन्दोलन ने उस देश को झुलसाकर रख दिया है। मुस्लिम महिलाएं हिजाब फेंक रही हैं, आग लगा रही हैं, बाल काट रही हैं और ईरानी सरकार के सड़े-गले कानून को डटकर चुनौती दे रही हैं

Written byअश्वनी मिश्रअश्वनी मिश्र
Oct 3, 2022, 01:16 pm IST
in भारत, विश्व, साक्षात्कार
तसलीमा नसरीन

तसलीमा नसरीन

ईरान में महसा अमीनी की हत्या के बाद उग्र हुए हिजाब आन्दोलन ने उस देश को झुलसाकर रख दिया है। मुस्लिम महिलाएं हिजाब फेंक रही हैं, आग लगा रही हैं, बाल काट रही हैं और ईरानी सरकार के सड़े-गले कानून को डटकर चुनौती दे रही हैं। आन्दोलन की आग धीरे-धीरे दूसरे देशों तक पहुंच रही है। दुनिया ईरानी महिलाओं के समर्थन में आ खड़ी हुई है। इस्लाम में हिजाब-बुर्का, महिला अधिकार और बढ़ते कट्टरपन जैसे विभिन्न सामयिक विष -यों पर बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन से पाञ्चजन्य के विशेष संवाददाता अश्वनी मिश्र ने विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश

कुरान हिजाब के संदर्भ में क्या कहता है? जो हिजाब ना पहने, क्या वह मुसलमान नहीं है?
देखिए, ऐसा कुछ नहीं है। बहुत से मुसलमान हैं, जो रोजा-नमाज अता करते हैं तो बहुत से ऐसे हैं, जो ऐसा नहीं करते। इसी तरीके से बहुत-सी लड़कियां हैं, जो हिजाब और बुर्का पहनती हैं और बहुत सी ऐसी हैं, जो हिजाब और बुर्का नहीं पहनतीं। बहुत से मुसलमान कुरान और हदीस में लिखे हुए नियमों को नहीं मानते, लेकिन खुद को मुसलमान बोलते हैं। इसी तरीके से हिन्दू, ईसाई और यहूदियों में भी ऐसे लोग हैं, जो अपने पांथिक कायदों को मानते हैं तो बहुत से ऐसे हैं जो नहीं मानते। लेकिन ये सभी अपने को किसी ना किसी मत-पंथ से जोड़े हुए हैं। मैं आपको बताऊं कि मेरे खुद के परिवार में बाबा, भाई और बहुत से रिश्तेदार नमाज नहीं पढ़ते थे। केवल एक बार ईद के समय एक जमात होती है, उसमें सबसे मुलाकात के लिए जाते थे। हकीकत बताएं तो परिवार के बहुत से लोग नमाज कैसे पढ़ी जाती है, यह जानते ही नहीं थे। फिर भी हम अपने आप को मुसलमान बोलते हैं। इसलिए ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हिजाब पहनो तभी मुसलमान और हिजाब-बुर्का नहीं पहनो तो इस्लाम से खारिज। ये सब कट्टरपंथी मुल्लाओं ने शुरू किया है। यही कठमुल्ले दबाव डालते हैं कि हिजाब पहनना पड़ेगा, नमाज पढ़नी होगी, रोजा रखना पड़ेगा। ये सब कट्टरपंथी हैं, जो लड़कियों-महिलाओं और सामान्य मुस्लिम युवाओं को जकड़न में रखना चाहते हैं।

देखिए, इस्लाम सातवीं शताब्दी में पैदा हुआ। उसके बाद बहुत से प्रगतिशील लोग साफ बोलते थे कि ‘कुरान आदमी का लिखा हुआ है, अल्लाह का नहीं’। उस समय भी बहुत से लोगों ने, जो दकियानूसी सोच और कानून थे, उनको बिल्कुल नहीं माना। लेकिन कुछ सदी के बाद इस्लाम धीरे-धीरे कट्टर होने लगा। यहां कट्टरपंथियों की भरमार होने लगी। एक बात गौर करने की है कि कुछ सदी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में सूफी विचारधारा फैलनी शुरू हुई। हिन्दुओं का इस्लाम में कन्वर्जन हुआ। जो भी लोग कन्वर्ट हुए वे नमाज, रोजा, बुर्का जैसा कुछ भी नहीं मानते थे। लेकिन समय के साथ कट्टरपन बढ़ने लगा। आज पाकिस्तान और बांग्लादेश में हमें उसी कट्टरपन का एक रूप दिखाई पड़ता है। यहां के मुल्ला-मौलवी हिजाब, बुर्का, ऊंचे पाजामें, रोजा-नमाज के लिए हरेक पर दबाव डालते हैं। जो ऐसा नहीं करते उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। कुल मिलाकर कट्टरपंथी बनाने के लिए हर तरह के करतब अपनाए जाते हैं। मुझे याद है कि जब मैं छोटी थी, तब हमारे मुहल्ले में एक छोटी मस्जिद हुआ करती थी, लेकिन आज उसी जगह 100 से अधिक मजिस्द हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कट्टरपंथी बढ़ गए हैं। पहले मस्जिदों में कोई नौजवान नहीं जाता था। केवल वृद्ध जाते थे, वह भी हमजोली के अन्य लोगों से मुलाकात के बहाने। पर आज अधिकतर नौजवान मस्जिद जाते हैं, जिसके चलते रास्ते तक बंद हो जाते हैं। हकीकत मेें ये सब इस्लामीकरण के हिस्से हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश में तो भयानक स्थिति है ही, दुनिया भर में कमोबेश यही स्थिति बनती जा रही है। इस सबको देखकर ही जो उदार और सहिष्णु मुसलमान हैं, वे बड़ी संख्या में इस्लाम छोड़ रहे हैं, क्योंकि वे कट्टरपंथ और मुल्ला-मौलवियों के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं।

ईरान में उठे हिजाब विवाद को एक महिला के नाते आप कैसे देखती हैं?
मैं ईरान के हिजाब विरोधी आन्दोलन का समर्थन करती हूं। यह बहुत जरूरी था, क्योंकि ईरानी महिलाएं लंबे समय से इसके खिलाफ लड़ती चली आ रही हैं। मेरा मानना है कि जिस किसी महिला-लड़की का हिजाब-बुर्का पहनने का मन है, वह पहने। लेकिन अगर किसी का उन्हें पहनने का मन नहीं है तो उस पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए। ईरान के इस पूरे आंदोलन में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया भर में ईरानी सरकार के इस जुल्म की आलोचना हो रही है और हिंसा पर तुरंत लगाम लगाने के लिए आवाजें उठ रही हैं। देखिए, 21वीं सदी में अगर कोई यह कहे कि महिला को हिजाब पहनना पड़ेगा तो ये अत्याचार तो है ही, उस मजहब के चेहरे को भी उजागर करता है। मैं व्यक्तिगत तौर पर ईरानी महिलाओं के इस आंदोलन में उनके साथ हूं, क्योंकि वे अपनी स्वतंत्रता, अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। वे सरकार के सड़े कानूनों और जघन्य हिंसा के खिलाफ अपने बाल काट रही हैं, हिजाब को फेंक रही हैं और जला तक रही हैं। अब महिलाएं जुल्म नहीं सहने वालीं। ऐसा आंदोलन निश्चित रूप से अभूतपूर्व है। बावजूद इसके जो लड़कियां हिजाब पहनती हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए। मैं मानती हूं कि महसा अमीनी की हत्या ईरान में एक नया सवेरा लाएगी और कट्टरपंथ को झुकना ही पड़ेगा।

ईरान में महिलाएं हिजाब के खिलाफ हैं जबकि भारत की मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनने के लिए लड़ रही हैं। इस पर क्या कहेंगी?
मजे की बात ये है कि यही लोग कहते चले आ रहे हैं कि भारत में ‘मुसलमानों की स्वतंत्रता बाधित’ है। अब इनसे यह पूछना चाहिए कि अगर तुम हिजाब के खिलाफ बोल पा रही हो, आन्दोलन कर पा रही हो, तो फिर स्वतंत्रता कैसे बाधित हुई? भारत में लोकतंत्र है, तभी तो आवाज उठ रही है। लेकिन जहां शरिया कानून है, इस्लामी राज है, वहां तो जो मुल्ला चाहते, वह करना पड़ता। वहां हिजाब ‘पसंद’ नहीं, ‘अनिवार्यता’ होती है। ऐसे लोगों को यह पता होना चाहिए कि जब तक लोकतंत्र है, तब तक कुछ भी बोल लो, लेकिन इस्लामी राज में तो हिजाब, बुर्का बाध्यता ही है। और वहां तब यही लोग कुछ बोल भी नहीं पाते। इसलिए मुस्लिम महिलाओं को अपने अधिकारों को समझना होगा। उन्हें नारकीय जीवन जीना है या फिर स्वतंत्रता से भरा। रही बात भारत में बुर्का-हिजाब पहनने के लिए जो महिलाएं लड़ाई लड़ रही हैं, तो मैं उन महिलाओं से कहना चाहती हूं कि आप अपने घर, मदरसा में कुछ भी पहनिए। किसी को कोई ऐतराज नहीं होगा। लेकिन स्कूल, सार्वजनिक स्थान, विश्वविद्यालय आदि में हिजाब-बुर्का नहीं होना चाहिए। आपको ऐसे स्थानों पर अपनी पहचान जाहिर करनी ही पड़ेगी। क्योंकि कोई बुर्का-हिजाब पहने अंदर क्या ला रहा है, कोई हथियार लिए हुए हो, पुरुष है या महिला, इसकी पहचान तो करनी ही पड़ेगी। मैं निश्चित रूप से कह सकती हूं कि जो भी लड़कियां हिजाब-बुर्का के पक्ष में आन्दोलन कर रही हैं, उनका पूरी तरह से ब्रेनवॉश किया गया है। मुल्लाओं द्वारा उन्हें बहकाया गया है कि बुर्का और हिजाब ही मुस्लिम महिलाओं की पहचान हैं। एक मुस्लिम महिला के नाते मैं इन लड़कियों को यह बताना चाहती हूं कि बुर्का और हिजाब आपकी पहचान नहीं हैं। जिसकी भी ये पहचान है, वह बहुत ही खराब है। मुस्लिम लड़कियां पढ़-लिखकर इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक बनें, यह पहचान है। अगर मुस्लिम लड़कियां जागरूक नहीं हुर्इं तो वे सिर्फ ‘बच्चा पैदा करने की मशीन’ और यौन संबंध बनाने की वस्तु के अलावा और कुछ नहीं होंगी।

दुनिया के कई देश हिजाब के विरोध में उतरीं ईरानी महिलाओं के समर्थन में खड़े हैं। लेकिन भारत का प्रगतिशील खेमा खामोश है?
ये सभी पाखंडी हैं। ये वही लोग हैं जो कट्टरपंथ के खिलाफ कभी नहीं बोलते। ये सिर्फ चुने हुए कुछ विषयों पर ही बोलते देखे जाते हैं। मैं कहती हूं कि कट्टरपंथ कहीं का भी हो, खराब है। आज ईरान की महिलाओं ने कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाई है। मैं इस आवाज के साथ हूं।

इस्लाम में महिलाओं की आजादी का क्या मतलब है?
मैं तो मुस्लिम समुदाय की ही महिला हूं, लेकिन मेरे साथ क्या हुआ? मेरी आजादी को कैसे कुचला गया, आज यह किसी से छिपा नहीं है। इससे समझ सकते हैं कि इस्लाम में कितनी आजादी है। मैं आज की मुस्लिम लड़कियों को यह कहना चाहती हूं कि आगे बढ़ें, जो मजहब तुम्हें गुलाम बनाता है, तुम्हारे पैरों को बेड़ियों में जकड़ता है, सड़े-गले कानूनों को मानने के लिए बाध्य करता है, बिल्कुल ऐसी किसी भी चीज को मत मानो। अपने दिमाग का इस्तेमाल करो और पंख लगाकर उड़ो। मजहब में जो भी गलत है, उसकी आलोचना करनी ही चाहिए। और जो इसके उलट जाता है, वह खत्म हो जाता है। आज यही कारण है कि लोग बहुत बड़ी तादाद में इस्लाम को छोड़ रहे हैं।

दुनिया आज 21वी सदी में है। लोग आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन इस्लामी देशों में वही सड़े-गले कानून और चाल-चलन को अपनाया जा रहा है। ऐसे में मुसलमान कैसे दुनिया से कदमताल कर पाएंगे?
आज ईराक, ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश का हाल सबके सामने है। क्या ये देश दुनिया के साथ कमदताल कर पा रहे हैं? हकीकत में कहें तो उलटे इन देशों के मुल्ला-मौलवी दुनिया को अपने देश की तरह बनाने पर तुले हैं। ये इस्लामी देशों के कानून को दूसरे देशों पर थोपना चाहते हैं। हरेक इस्लामी देश में कई-कई जिहादी संगठन हैं, जो खून-खराबे में लिप्त हैं। यही कारण है कि यूरोप में बहुत से लोग इस्लाम छोड़ रहे हैं। दुनिया को चाहिए कि जो भी देश ऐसा कर रहे हैं, उनके साथ व्यापार बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इन देशों में ना तो मानवाधिकार होते हैं, ना ही लोकतंत्र। यहां अराजकता के सिवा कुछ नहीं होता। इसलिए सहिष्णु देशों को ऐसे कट्टरपंथी देशों से पूरी तरह से संबंध तोड़ लेना पड़ेगा। लेकिन यह बहुत ही मुश्किल है। क्योंकि सऊदी अरब में बड़ी संख्या में मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है, लेकिन अमेरिका सहित यूरोप फिर भी उसके साथ व्यापार करता है।

तमाम चीजों के बीच आप जैसे बुद्धिजीवी भी हैं। जो सही को सही और गलत को गलत कहते हैं। 21वीं सदी में कौन-सा इस्लाम जीतेगा, उदार इस्लाम या मुल्लाओं का इस्लाम?
यह कहते हुए मुझे बहुत तकलीफ होती है कि आज तक तो मुल्लाओं का ही इस्लाम जीतता आया है। उदार इस्लाम को मानने वाले तो मरते आए हैं। मुझे ही लें, मैं निर्वासित हूं। इसी तरह से बहुत से लेखकों, ब्लागरों और प्रगतिशील लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। जेल में डाल दिया। लेकिन मुझे भरोसा है कि आज नहीं तो कल जब लोग जागरूक होंगे, गलत को गलत समझेंगे तो निश्चित तौर पर उदार इस्लाम ही जीतेगा और मुल्लाओं का इस्लाम हारेगा। क्योंकि दुनिया में कट्टरता की कोई जगह नहीं है। इसलिए इस्लाम को भी उदार होना ही पड़ेगा और अपनी आलोचना सुननी पड़ेगी।

मदरसों की तालीम इस्लाम को कितना गर्त में गिराएगी?
मदरसों पर निश्चित रूप से नियंत्रण में करना पड़ेगा, क्योंकि उससे निकले हुए बच्चे ही मौलवी बनते हैं और मुस्लिम समाज को गलत दिशा में ले जाते हैं। आज इस्लाम का जो कट्टर रूप दिखता है, उसमें मदरसों भूमिका है। यहां बच्चों का ब्रेनवॉश किया जाता है। मैं बिलकुल मदरसों के खिलाफ हूं। मेरा मानना है कि मदरसों को आधुनिक रूप देकर यहां के बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो इन पर ताला जड़ देना चाहिए।

Topics: ईरान में महिलाएं हिजाब के खिलाफभारत की मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनने के लिए लड़ रहीइस्लाम में महिलाओं की आजादीउदार इस्लाम या मुल्लाओं का इस्लाम?तसलीमा नसरीनईरान में महसा अमीनी की हत्याईरान में हिजाब विवाद
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के उभरने का खामियाजा भुगतेंगी महिलाएं : तसलीमा नसरीन

ईरान में हिजाब का विरोध करना शाहिदी को पड़ा भारी, फोर्स ने पीट पीटकर की हत्या

तसलीमा नसरीन ने जताई रुश्दी की तरह हमले की आशंका, पाकिस्तान के इस मजहबी नेता पर लगाया आरोप

Load More

ताज़ा समाचार

ममता बनर्जी

ममता बनर्जी से कांग्रेस की बड़ी मांग, कहा- पहले मानिए कांग्रेस छोड़ना आपकी गलती थी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गोविंददेव गिरी का बड़ा दावा, जानिए क्या बोले?

Suprime Court

क्या अंग्रेजी भारतीय भाषा है? त्रिभाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, जानिए पूरा मामला

15 जुलाई का पंचांग

15 जुलाई का पंचांग: जानें ग्रहों की स्थिति, तिथि, नक्षत्र और शुभ समय

Today Weather

Today Weather: यूपी-बिहार समेत 22 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट,, जानिए आपके राज्य का हाल

उदयपुर में अक्षय कुमार

“यहां सच्चे राष्ट्रभक्त तैयार हो रहे” : वनवासी कल्याण आश्रम पहुंचे अक्षय कुमार, छात्रावास निर्माण के लिए दिए 1 करोड़

Aaj Ka Rashifal 15 July: बुधादित्य और सर्वार्थ सिद्धि योग से खुलेगी किस्मत, 15 जुलाई का राशिफल

Explainer। मेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश ‘नमो भारत कॉरिडोर’ को समझिये, दिल्ली से 180 मिनट में गंगा स्नान…

16 जुलाई की अर्धरात्रि से ग्रहों के राजा सूर्य बदलेंगे चाल, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, चार को रहना होगा सतर्क

खराब खाद्य पदार्थों को लेकर होटलों पर कार्रवाई (फोटो- एआई द्वारा निर्मित)

मुंबई: भेंडी बाजार में शालिमार हॉस्पिटैलिटी, नूर मोहम्मदी और रहमानिया रेस्टोरेंट के लाइसेंस निलंबित, रसोई में कीड़े

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies