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नेपाल में वामपंथी दलों को फिर से मिलाने में जुटा चीन

Written byपंकज दासपंकज दास
Jun 26, 2022, 08:00 am IST
in विश्व

नेपाल में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव के बीच चीन फिर हुआ सक्रिय। आम चुनाव से पहले नेपाल पर अपनी पकड़ फिर से मजबूत करना चाहता है चीन। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाईना के विदेश विभाग के प्रमुख लियु जिआनचाओ ने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के बडे नेताओं से वीडियो कान्फ्रेंस से की बातचीत

नेपाल की वर्तमान सरकार द्वारा एक के बाद एक झटका दिए जाने से बौखलाए चीन ने एक बार फिर नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच एकता कराने की कवायद तेज कर दी है। नेपाल में अपनी पकड़ कमजोर होता देख चीन ने नेपाल में आम चुनाव से ठीक पहले सभी बड़ी वामपंथी शक्तियों को एक होकर चुनाव में जाने का निर्देशात्मक सुझाव दिया है।

पिछले 24 घंटे में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाईना के विदेश  विभाग के प्रमुख लियु जिआनचाओ ने नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के बडे नेताओं से वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए बैठक कर समान विचारधारा वाले दल के साथ फिर चुनाव में जाने के लिए दबाब डाला है। 24 जून को चीनी प्रतिनिधि मंडल ने माओवादी अध्यक्ष प्रचण्ड से, शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और शनिवार को जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव के साथ लम्बी बैठक की।

नेपाली नेता इन मुलाकातों को छुपाते रहे, लेकिन चीन के तरफ से इन बैठकों का खुलासा कर दिया गया है। अपने आधिकारिक बयान में सीपीसी के विदेश विभाग ने कहा है कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना और नेपाल के वामपंथी दलों के बीच समान विचारधारा होने के कारण एक अलग प्रकार का संबंध है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी नेपाल के कम्युनिस्ट दलों के साथ हमेशा ही अच्छे और सुदृढ संबंध स्थापित करने के लिए तैयार है।

चीन ने अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम को रद्द किए जाने के लिए कम्युनिस्ट दलों की भूमिका की प्रशंसा करते हुए विदेश विभाग प्रमुख ने चीन के खिलाफ नेपाल की भूमि प्रयोग नहीं होने देने के प्रतिबद्धता की प्रशंसा की है। दो दिन पहले ही चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीजिंग में नियमित पत्रकार सम्मेलन में इस बात की प्रशंसा की थी कि नेपाल ने अमेरिकी परियोजना को ठुकरा कर एक स्वतंत्र, सार्वभौम और अच्छे पडोसी देश होने का परिचय दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने जिस तरह से दबाब बनाकर नेपाल को चीन के खिलाफ बने इंडो पैसेफिक स्ट्रेटेजी के तहत लाने का प्रयास किया था और जबरन एमसीसी पास करवाया था, वह वाकई में एक गलत निर्णय था।

नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टियों के प्रमुख नेताओं के साथ बातचीत में सीपीसी विदेश विभाग प्रमुख ने कहा कि नेपाल में कम्युनिस्ट दलों की एकता और कम्युनिस्ट दलों की सरकार ही चीन के हित की बात करती है और चीन के संवेदनशील और सुरक्षा मसलों को गम्भीरतापूर्वक देखती है।

नेपाल के तरफ से अब तक बेल्ट एंड रोड परियोजना में कोई भी काम आगे नहीं बढ पाने के कारण नेपाल में अनुकूल सरकार का नहीं होना है। विदेश विभाग प्रमुख ने बताया कि चीन बीआरआई के तहत विकास परियोजनाओं को आगे बढाना चाहता है। और इसके लिए नेपाल में समान विचारधारा और अनुकूल सरकार होना बहुत जरूरी है।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी विदेश विभाग के प्रतिनिधियों ने नेपाली कम्युनिस्ट नेताओं से कहा कि बीजिंग की इच्छा है कि नेपाल के सभी वामपंथी दल एकजुट होकर चुनाव लडे। इसके लिए चीन हरसंभव मदद करने के लिए तैयार है।

पांच साल पहले नेपाल में हुए आम चुनाव से ठीक पहले चीन की ही पहल पर दो बडी कम्युनिस्ट पार्टियां नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (एमाले) और माओवादी के बीच एकता की घोषणा हुई थी। दोनों दलों ने मिलकर पिछले चुनाव में दो तिहाई के करीब बहुमत प्राप्त किया था। इतना ही नहीं नेपाल के 7 में से 6 प्रदेशों में कम्युनिस्ट दलों की प्रचण्ड बहुमत की सरकार बनी थी।

इस समय नेपाल पूरी तरह से अमेरिकी प्रभाव में आ गया है और अमेरिका नेपाल को इंडो पैसेफिक मे ही नहीं बल्कि अमेरिकी सेना के साथ स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम में भी जोड दिया है जिसके कारण चीन, नेपाल की वर्तमान सरकार से काफी नाराज है। अमेरिका की यह रणनीति चीन को घेरने के लिए ही है

एक बार फिर आम चुनाव से पहले चीन नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टियों को एक करने में जुट गया है। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के विभाजन के बाद न सिर्फ केंद्र में ओली की सरकार गिर गई, बल्कि 6 में से 5 राज्यों की सरकारें भी गिर गई थी। अमेरिका का दबदबा बढ गया था और नेपाल चीन को एक के बाद एक झटके दे रहा था।

नेपाल ने बीआरआई से अपने को अलग कर लिया। चीन के साथ सीमा विवाद सामने आ गया। चीन के पास रहे नेपाल के दो बडे हाइड्रोपावर पावर प्रोजेक्ट्स छीन लिए गए और नेपाल के एकमात्र एक्सप्रेस-वे के निर्माण से भी चीनी कंपनी को बाहर कर दिया गया था।

इस समय नेपाल पूरी तरह से अमेरिकी प्रभाव में आ गया है और अमेरिका नेपाल को इंडो पैसेफिक मे ही नहीं बल्कि अमेरिकी सेना के साथ स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम में भी जोड दिया है जिसके कारण चीन, नेपाल की वर्तमान सरकार से काफी नाराज है। अमेरिका की यह रणनीति चीन को घेरने के लिए ही है।

Topics: वीडियो कॉन्फ्रेंसइंडो पैसिफिक स्ट्रेटेजीनेपालचीन(बीआरआई)हाइड्रोपावर पावर प्रोजेक्ट्सएकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादीनेपाली कम्युनिस्टआम चुनाव
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