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विमर्श का आनंद

मीडिया महामंथन

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Rajpal Singh Rawat
May 28, 2022, 11:32 am IST
in भारत, दिल्ली, पाञ्चजन्य इवेंट

मीडिया महामंथन के दौरान अतिथियों ने विमर्श के साथ-साथ मिलने-जुलने और सेल्फी एवं तस्वीरें खींचने-खिंचवाने का भरपूर आनंद लिया। इस नौ सत्रीय कार्यक्रम में लगातार भीड़ रहने के बावजूद अव्यवस्था उत्पन्न न होने और विभिन्न सत्रों में बोट न होने के लिए अतिथियों ने कार्यक्रम की रूपरेखा को सराहा

रविवार की सुबह… 22 मई… लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशन पर आटो चालक आगंतुकों को आईटीडीसी के होटल अशोका ले जाने को तत्पर दिख रहे थे। सुबह से ही गहमागहमी थी। अवसर थाका। कार्यक्रम साढ़े नौ बजे से प्रारंभ होना था परंतु लोग साढ़े आठ बजे से ही पहुंचने लगे थे। भारत प्रकाशन की पत्रिकाओं पाञ्चजन्य और आर्गनाइजर के बंधु अपने दायित्वों के निर्वहन में जुटे थे।

एक किशोर पहुंचता है… थोड़ा सकुचाया हुआ, संकोच साफ दिख रहा था। वह होटल में प्रवेश कर कार्यक्रम स्थल कन्वेशन हॉल की ओर बढ़ता है। तभी रास्ते में दिखते हैं ठहाका लगाते, कुर्सी पर बैठे अटल जी। दरअसल वह अटल जी का कटआउट था जिसके पीछे पाञ्चजन्य और आॅर्गनाइजर के महत्वपूर्ण संस्करणों का कोलाज लगा था। यह एक सेल्फी प्वाइंट था। उस किशोर ने आयोजन में जुड़े कर्मियों से पूछा, मैं अटल जी के साथ फोटो खिंचवा सकता हूं। सहमति मिलने पर उसने पास पड़ी कुर्सी पर बैठ अटल जी से बातचीत की मुद्रा में तस्वीर खिंचवाई है। इसी के साथ चेहरे पर प्रसन्नता बिखर गई। यह स्थिति कमोबेश हर आगंतुक के साथ रही। क्या बड़े, क्या बुजुर्ग, क्या पुरुष, क्या स्त्री… अटल जी के साथ सेल्फी की होड़ लगी रही।

मीडिया महामंथन को लेकर लोगों में इतनी औत्सक्य था कि सुबह के नौ बजते-बजते सभागार के बाहर लोग बड़ी संख्या में जमा हो गए। मीडिया महामंथन में देशभर से ‘पाञ्चजन्य’ के पाठक, लेखक और शुभचिंतक पधारे। पंजीयन और कुछ अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद लोग अंदर गए। एक के बाद एक सत्र… एक मिनट तक की फुर्सत नहीं। परंतु कहीं कोई हड़बड़ी नहीं… अराजकता नहीं। लोग बैठे रहे, वक्ताओं को सुनते रहे, प्रश्न पूछते रहे, अन्य आगंतुकों में परिचितों को देख मिलते रहे।

जब कोई वक्ता अपना सत्र पूरा होने पर वापस आता तो उसके प्रशंसकों की भीड़ उसके साथ हो लेती। मुख्यद्वार से पूर्व वक्ता की बाइट लेने के लिए मीडियाकर्मियों की भीड़ लग जा रही थी। उसे होटल के द्वार तक छोड़ने के बाद भीड़ फिर सभागार में लौट आ रही थी। सभागार में आमतौर पर चार-साढ़े चार सौ अतिथियों की भीड़ पूरे कार्यक्रम के दौरान बनी रही। इसके अलावा गलियारे में भी आगंतुकों की आवाजाही लगातार बनी रही। लोगों को तब आश्चर्यमिश्रित आनंद की अनुभूति भी हुई जब उनके निकलते समय उनके इस संस्मरण को और खुशनुमा बनाने के लिए भारत प्रकाशन की एक टीम उन्हें उपहार वितरित करती मिली।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह केवल इसी कार्यक्रम की खातिर दिल्ली आए थे। उन्होंने कहा, ‘‘यह कार्यक्रम पाञ्चजन्य को एक नई पहचान दिलाने और नए-नए पाठकों तक पहुंचाने में विशेष भूमिका निभाएगा।’’ कार्यक्रम के आखिर में वाराणसी के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए रवाना होने से पूर्व वे बोले, बड़े दिनों बाद ऐसा कार्यक्रम हुआ है। सुबह से शाम तक नौ सत्र। लेकिन कोई भी आदमी बोर नहीं हुआ।

महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट स्टडीज में जन संचार के एसोसिएट प्रोफेसर उमेश पाठक अपने साथियों के साथ एक मेज पर निरंतर बैठे हुए वक्ताओं को सुनते रहे। कहा, इतने लोग आ-जा रहे हैं परंतु सभागार में भीड़ कम नहीं हो रही। ग्रेटर नोएडा से आई अनुवादक और लेखिका आराधना शरण ने कहा कि इतने बड़े कार्यक्रम में थोड़ी-बहुत अराजकता हो जाती है। परंतु यहां सब कुछ बहुत व्यवस्थित है। न्यूज 18 में संपादक डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह आईआईएमसी के कुछ अध्यापकों और पत्रकारों के साथ व्यस्त दिखे। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आलोक पुराणिक भी थे। कार्यक्रम पर बातचीत होने लगी तो इन लोगों ने कहा कि कार्यक्रम का फॉर्मेट ऐसा है कि लगातार मौजूद रहने का मन कर रहा है। वक्ताओं के साथ ही विभिन्न पुराने परिचितों से मिलना संभव हो पा रहा है।
उधर कुछ युवतियां सभागार से निकल कर होटल के गलियारे में टहल रही थीं। वे पाञ्चजन्य की होर्डिंग के साथ फोटो खिंचवाने को उत्सुक थीं। काफी युवक-युवतियां गलियारों में सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते दिखे। फिर सभागार में आ जाते और वक्ताओं को सुनने लगते।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी तो इस कार्यक्रम के लिए इतने उत्साहित थे कि उन्होंने चलने से पहले फोन करके कहा, ‘‘मैं घर से निकल रहा हूं, 15 मिनट में पहुंच जाऊंगा।’’ ठीक 15 मिनट में वे पहुंच भी गए। थोड़ी देर कार्यक्रम में रुकने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘वर्षों बाद पाञ्चजन्य एक शानदार कार्यक्रम कर रहा है। यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। पाञ्चजन्य की पूरी टीम को बधाई।’’

सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने भी इस कार्यक्रम के लिए पाञ्चजन्य की टीम को बधाई दी। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति डॉ. सुनील जोशी कार्यक्रम में समय से पूर्व पहुंच गए थे। उन्होंने कहा, ‘‘बहुत अच्छा लग रहा है। पहले इस तरह के कार्यक्रम बड़े मीडिया घराने वाले करते थे, लेकिन पाञ्चजन्य ने पहली बार ऐसा कार्यक्रम कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।’’

ग्रेटर नोएडा से आए आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नितिन अग्रवाल तो अपने कुछ साथियों के साथ आए थे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पहली बार पाञ्चजन्य के किसी कार्यक्रम में आया हूं। मेरी कल्पना से भी अच्छा कार्यक्रम हुआ। ऐसे कार्यक्रम साल में एक बार अवश्य हों।’’ द्वारका से पधारे बैंकर गणेश पांडे इस बात से प्रभावित थे कि पाञ्चजन्य अपना अमृत महोत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आज के युग में किसी वैचारिक पत्रिका के लिए 75 वर्ष की यात्रा पूरी करना बहुत बड़ी उपलब्धि है।’’

पत्रकार केशव कुमार कहते हैं, ‘‘आज केवल पाञ्चजन्य ही नहीं, पूरे मीडिया जगत के लिए अच्छा दिन है। इस कार्यक्रम से और मीडिया संस्थान प्रेरणा लेंगे।’’ अशोका होटल के एक अधिकारी पवन कुमार ने कहा,‘‘पाञ्चजन्य के प्रचार-प्रसार के नजरिए से यह कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होगा।’’ नोएडा से आए सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक प्रवीण शर्मा भी इस कार्यक्रम से बहुत प्रसन्न दिखे। उन्होंने कहा, ‘‘पाञ्चजन्य को आम पाठकों तक पहुंचाने के लिए यही सही समय है। इस कार्यक्रम के बाद निश्चित रूप से नए पाठक जुड़ेंगे।’’
साहिबाबाद से आए सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रप्रकाश ने कहा,‘‘इस कार्यक्रम से पाञ्चजन्य की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देगी।’’ दिल्ली के मयूर विहार में रहने वाले पाञ्चजन्य के पाठक और भाजपा कार्यकर्ता दीपेश कुमार ने कहा, ‘‘पहले ऐसे कार्यक्रम बड़े अखबार या चैनल वाले करते थे। तब लगता था कि पाञ्चजन्य ऐसा कार्यक्रम क्यों नहीं कर रहा है? इसलिए इस कार्यक्रम से पाञ्चजन्य का हर पाठक स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।’’ ल्लविवार की सुबह… 22 मई… लोक कल्याण मार्ग मेट्रो स्टेशन पर आॅटो चालक आगंतुकों को आईटीडीसी के होटल अशोका ले जाने को तत्पर दिख रहे थे। सुबह से ही गहमागहमी थी। अवसर था भारत प्रकाशन के मीडिया महामंथन कार्यक्रम का। कार्यक्रम साढ़े नौ बजे से प्रारंभ होना था परंतु लोग साढ़े आठ बजे से ही पहुंचने लगे थे। भारत प्रकाशन की पत्रिकाओं पाञ्चजन्य और आॅर्गनाइजर के बंधु अपने दायित्वों के निर्वहन में जुटे थे।

एक किशोर पहुंचता है… थोड़ा सकुचाया हुआ, संकोच साफ दिख रहा था। वह होटल में प्रवेश कर कार्यक्रम स्थल कन्वेशन हॉल की ओर बढ़ता है। तभी रास्ते में दिखते हैं ठहाका लगाते, कुर्सी पर बैठे अटल जी। दरअसल वह अटल जी का कटआउट था जिसके पीछे पाञ्चजन्य और आॅर्गनाइजर के महत्वपूर्ण संस्करणों का कोलाज लगा था। यह एक सेल्फी प्वाइंट था। उस किशोर ने आयोजन में जुड़े कर्मियों से पूछा, मैं अटल जी के साथ फोटो खिंचवा सकता हूं। सहमति मिलने पर उसने पास पड़ी कुर्सी पर बैठ अटल जी से बातचीत की मुद्रा में तस्वीर खिंचवाई है। इसी के साथ चेहरे पर प्रसन्नता बिखर गई। यह स्थिति कमोबेश हर आगंतुक के साथ रही। क्या बड़े, क्या बुजुर्ग, क्या पुरुष, क्या स्त्री… अटल जी के साथ सेल्फी की होड़ लगी रही।

मीडिया महामंथन को लेकर लोगों में इतनी औत्सक्य था कि सुबह के नौ बजते-बजते सभागार के बाहर लोग बड़ी संख्या में जमा हो गए। मीडिया महामंथन में देशभर से ‘पाञ्चजन्य’ के पाठक, लेखक और शुभचिंतक पधारे। पंजीयन और कुछ अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद लोग अंदर गए। एक के बाद एक सत्र… एक मिनट तक की फुर्सत नहीं। परंतु कहीं कोई हड़बड़ी नहीं… अराजकता नहीं। लोग बैठे रहे, वक्ताओं को सुनते रहे, प्रश्न पूछते रहे, अन्य आगंतुकों में परिचितों को देख मिलते रहे।

जब कोई वक्ता अपना सत्र पूरा होने पर वापस आता तो उसके प्रशंसकों की भीड़ उसके साथ हो लेती। मुख्यद्वार से पूर्व वक्ता की बाइट लेने के लिए मीडियाकर्मियों की भीड़ लग जा रही थी। उसे होटल के द्वार तक छोड़ने के बाद भीड़ फिर सभागार में लौट आ रही थी। सभागार में आमतौर पर चार-साढ़े चार सौ अतिथियों की भीड़ पूरे कार्यक्रम के दौरान बनी रही। इसके अलावा गलियारे में भी आगंतुकों की आवाजाही लगातार बनी रही। लोगों को तब आश्चर्यमिश्रित आनंद की अनुभूति भी हुई जब उनके निकलते समय उनके इस संस्मरण को और खुशनुमा बनाने के लिए भारत प्रकाशन की एक टीम उन्हें उपहार वितरित करती मिली।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह केवल इसी कार्यक्रम की खातिर दिल्ली आए थे। उन्होंने कहा, ‘‘यह कार्यक्रम पाञ्चजन्य को एक नई पहचान दिलाने और नए-नए पाठकों तक पहुंचाने में विशेष भूमिका निभाएगा।’’ कार्यक्रम के आखिर में वाराणसी के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए रवाना होने से पूर्व वे बोले, बड़े दिनों बाद ऐसा कार्यक्रम हुआ है। सुबह से शाम तक नौ सत्र। लेकिन कोई भी आदमी बोर नहीं हुआ।

महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज में जन संचार के एसोसिएट प्रोफेसर उमेश पाठक अपने साथियों के साथ एक मेज पर निरंतर बैठे हुए वक्ताओं को सुनते रहे। कहा, इतने लोग आ-जा रहे हैं परंतु सभागार में भीड़ कम नहीं हो रही। ग्रेटर नोएडा से आई अनुवादक और लेखिका आराधना शरण ने कहा कि इतने बड़े कार्यक्रम में थोड़ी-बहुत अराजकता हो जाती है। परंतु यहां सब कुछ बहुत व्यवस्थित है। न्यूज 18 में संपादक डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह आईआईएमसी के कुछ अध्यापकों और पत्रकारों के साथ व्यस्त दिखे। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आलोक पुराणिक भी थे। कार्यक्रम पर बातचीत होने लगी तो इन लोगों ने कहा कि कार्यक्रम का फॉर्मेट ऐसा है कि लगातार मौजूद रहने का मन कर रहा है। वक्ताओं के साथ ही विभिन्न पुराने परिचितों से मिलना संभव हो पा रहा है।
उधर कुछ युवतियां सभागार से निकल कर होटल के गलियारे में टहल रही थीं। वे पाञ्चजन्य की होर्डिंग के साथ फोटो खिंचवाने को उत्सुक थीं। काफी युवक-युवतियां गलियारों में सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते दिखे। फिर सभागार में आ जाते और वक्ताओं को सुनने लगते।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी तो इस कार्यक्रम के लिए इतने उत्साहित थे कि उन्होंने चलने से पहले फोन करके कहा, ‘‘मैं घर से निकल रहा हूं, 15 मिनट में पहुंच जाऊंगा।’’ ठीक 15 मिनट में वे पहुंच भी गए। थोड़ी देर कार्यक्रम में रुकने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘वर्षों बाद पाञ्चजन्य एक शानदार कार्यक्रम कर रहा है। यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। पाञ्चजन्य की पूरी टीम को बधाई।’’

सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने भी इस कार्यक्रम के लिए पाञ्चजन्य की टीम को बधाई दी। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति डॉ. सुनील जोशी कार्यक्रम में समय से पूर्व पहुंच गए थे। उन्होंने कहा, ‘‘बहुत अच्छा लग रहा है। पहले इस तरह के कार्यक्रम बड़े मीडिया घराने वाले करते थे, लेकिन पाञ्चजन्य ने पहली बार ऐसा कार्यक्रम कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।’’

ग्रेटर नोएडा से आए आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नितिन अग्रवाल तो अपने कुछ साथियों के साथ आए थे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पहली बार पाञ्चजन्य के किसी कार्यक्रम में आया हूं। मेरी कल्पना से भी अच्छा कार्यक्रम हुआ। ऐसे कार्यक्रम साल में एक बार अवश्य हों।’’ द्वारका से पधारे बैंकर गणेश पांडे इस बात से प्रभावित थे कि पाञ्चजन्य अपना अमृत महोत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आज के युग में किसी वैचारिक पत्रिका के लिए 75 वर्ष की यात्रा पूरी करना बहुत बड़ी उपलब्धि है।’’

पत्रकार केशव कुमार कहते हैं, ‘‘आज केवल पाञ्चजन्य ही नहीं, पूरे मीडिया जगत के लिए अच्छा दिन है। इस कार्यक्रम से और मीडिया संस्थान प्रेरणा लेंगे।’’ अशोका होटल के एक अधिकारी पवन कुमार ने कहा,‘‘पाञ्चजन्य के प्रचार-प्रसार के नजरिए से यह कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होगा।’’ नोएडा से आए सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक प्रवीण शर्मा भी इस कार्यक्रम से बहुत प्रसन्न दिखे। उन्होंने कहा, ‘‘पाञ्चजन्य को आम पाठकों तक पहुंचाने के लिए यही सही समय है। इस कार्यक्रम के बाद निश्चित रूप से नए पाठक जुड़ेंगे।’’
साहिबाबाद से आए सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रप्रकाश ने कहा,‘‘इस कार्यक्रम से पाञ्चजन्य की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देगी।’’ दिल्ली के मयूर विहार में रहने वाले पाञ्चजन्य के पाठक और भाजपा कार्यकर्ता दीपेश कुमार ने कहा, ‘‘पहले ऐसे कार्यक्रम बड़े अखबार या चैनल वाले करते थे। तब लगता था कि पाञ्चजन्य ऐसा कार्यक्रम क्यों नहीं कर रहा है? इसलिए इस कार्यक्रम से पाञ्चजन्य का हर पाठक स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।’’

Topics: मीडिया मंथनमीडिया महामंथन कार्यक्रमenjoy the discussionमीडिया महामंथनभारत प्रकाशन
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