भारत के विदेश मंत्रालय ने 3 फरवरी को स्पष्ट कर दिया कि चीन स्थित भारतीय राजदूत बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक खेलों के उद्घाटन और समापन समारोह में भाग नहीं लेगा। भारत ने कहा है कि गलवान संघर्ष में शामिल चीनी कमांडर को मशाल थमाकर चीन ने खेलोें का राजनीतिकरण किया है। उल्लेखनीय है कि चीन के तानाशाह ने बड़ी साजिश रचते हुए चीन की सेना पीएलए के उस रेजिमेंटल कमांडर क्यूई फैबाओ को ओलंपिक की मशाल थमाई है जो गलवान में जून 2020 में हुए संघर्ष में सिर पर चोट लगने से घायल होकर मैदान छोड़ गया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारत बीजिंग ओलिंपिक में गलवान संघर्ष में शामिल सैनिक को मशालवाहक बनाने की कड़ी भर्त्सना करता है। बागची ने कहा कि 'हमने इस मुद्दे पर रिपोर्ट देखी है। ये वास्तव में अफसोस की बात है कि चीनी पक्ष ने ओलंपिक जैसे आयोजन का राजनीतिकरण करने का रास्ता चुना है। मैं बता देना चाहता हूं कि भारतीय दूतावास में हमारे चार्ज डी’अफेयर्स बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक खेलों के उद्घाटन या समापन समारोह में भाग नहीं लेंगे।'
दूरदर्शन की तरफ से भी कहा गया है कि वह बीजिंग ओलंपिक के उद्घाटन और समापन समारोहों का बहिष्कार करेगा। प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर वेमपति ने 3 फरवरी को ट्वीट करके कहा कि दूरदर्शन का डीडी स्पोर्ट्स चैनल बीजिंग में आयोजित होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेलों के उद्घाटन तथा समापन समारोह का प्रसारण नहीं करेगा।
दूरदर्शन करेगा बहिष्कार
इधर दूरदर्शन की तरफ से भी कहा गया है कि वह बीजिंग ओलंपिक के उद्घाटन और समापन समारोहों का बहिष्कार करेगा। डीडी स्पोर्ट्स चैनल पर भी इसका प्रसारण नहीं किया जाएगा। प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर वेमपति ने 3 फरवरी को ट्वीट करके कहा कि दूरदर्शन का डीडी स्पोर्ट्स चैनल बीजिंग में आयोजित होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेलों के उद्घाटन तथा समापन समारोह का प्रसारण नहीं करेगा।
अमेरिका ने किया विरोध
बता दें कि चीन की इस हरकत का अमेरिका ने भी विरोध करते हुए चीन की निंदा की है। बाइडन प्रशासन ने बीजिंग की इस हरकत को शर्मनाक बताया है। अमेरिकी सीनेट की विदेशी मामलों की समिति के सदस्य जिम रिक़ ने चीन की तीखी आलोचना करते हुए उसकी इस हरकत को 'शर्मनाक' बताया दिया है। जिम ने ट्वीट करके कहा, 'अमेरिका उइगरों की स्वतंत्रता तथा भारत की सम्प्रभुता का समर्थन करना जारी रखेगा।' इतना ही नहीं, पश्चिम के अनके देश भी उइगरों और तिब्बतियों के विरुद्ध चीन की दमनकारी नीतियों के चलते बीजिंग ओलंपिक खेलों के कूटनीटिक बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं।











