पुलवामा हमले के 100 घंटे के भीतर कश्मीर से आतंकियों का किया था सफाया, लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों की यह बात रहेगी याद- 'कितने गाजी आए, कितने गए'
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पुलवामा हमले के 100 घंटे के भीतर कश्मीर से आतंकियों का किया था सफाया, लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों की यह बात रहेगी याद- ‘कितने गाजी आए, कितने गए’

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 31, 2022, 06:51 am IST
in भारत, दिल्ली
लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों (फोटो सौजन्य ट्विटर)

लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों (फोटो सौजन्य ट्विटर)

लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों सेना में 39 साल सेवा देने के बाद हुए कार्यमुक्त, कश्मीर के स्थानीय आतंकियों को वापस मुख्यधारा में लौटने के लिए अभियान चलाया

कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए सबसे अच्छे जनरलों में से एक लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लों भारतीय सेना की 39 वर्ष सेवा के बाद सोमवार को कार्यमुक्त हो गए। पुलवामा हमले के बाद उनका बयान- 'कितने गाजी आए, कितने चले गए' आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कश्मीर में शांति वापस लाने के लिए कई ऑपरेशन शुरू किए और आतंकियों को संदेश दिया कि जो भी बंदूक उठाएगा, उसे मार दिया जाएगा। उन्होंने ही कश्मीरियों में भारतीय सेना के प्रति मित्र के रूप में भरोसा जताया और स्थानीय आतंकियों को वापस मुख्यधारा में लौटने के लिए अभियान चलाया।

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों 9 मार्च, 2020 से रक्षा खुफिया एजेंसी के महानिदेशक और सीडीएस के तहत डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (इंटेलिजेंस) भी रहे हैं। जनरल ढिल्लों ने आखिरी बार लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट से पद ग्रहण करते हुए भारतीय सेना के XV कोर के 48वें कमांडर के रूप में कार्य किया। वह पुलवामा हमले के दौरान श्रीनगर की 15वीं कोर के जीओसी थे और खुले तौर पर कहा था कि इस हमले में 100% पाकिस्तानी सेना शामिल थी। उन्होंने पुलवामा हमले के 100 घंटे के भीतर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सफाया किया था। पुलवामा हमले के बाद हुई प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा -'कितने गाजी आए, कितने चले गए'। उनके यह शब्द आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।

He is a Jolly Good Fellow

Hope So ?

Jai Hind ?? pic.twitter.com/de3Btq0yl4

— KJS DHILLON?? (@Tiny_Dhillon) January 31, 2022

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कश्मीर में शांति वापस लाने के लिए कई ऑपरेशन शुरू किए और आतंकियों को संदेश दिया कि जो भी बंदूक उठाएगा, उसे मार दिया जाएगा। उन्होंने ही पत्थरबाज युवकों और स्थानीय आतंकवादियों की माताओं से अपील की कि वे अपने बेटों से बात करके उन्हें वापस मुख्यधारा में लौटने के लिए समझाएं। उन्होंने मुठभेड़ों के दौरान भी माताओं से उनके भटके बेटों से बात करवाकर 'वापसी' के लिए राजी किया। इस अभियान के तहत सैकड़ों युवा आतंकवाद को त्यागकर अपने परिवार में लौटे। उन्होंने कश्मीरियत, कश्मीर की समन्वित संस्कृति के सार और महत्व पर जोर दिया। इसलिए कश्मीर के लोगों में उनके प्रति प्यार बढ़ा और वह कई कश्मीरी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। इस तरह के उनके समर्पित प्रयासों से कश्मीर में शांति और विकास में मदद मिली।

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने आम जनता को उनकी सुरक्षा का आश्वासन देने के लिए बड़े पैमाने पर सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना स्थानीय कश्मीरी लोगों के साथ है और हमेशा उनके साथ मित्रवत रहती है।उन्होंने 'तालीम से तरक्की' अभियान चलाकर प्रतिभा दिखाने के लिए विभिन्न युवा कार्यक्रम आयोजित किए। वह दूरदराज के इलाके में पहुंचे और उन्होंने आर्मी गुडविल स्कूल, सुपर 50, इंजीनियरिंग और मेडिकल के लिए सुपर 30 कोचिंग में शामिल होने के लिए शिक्षा पर जोर दिया। शिक्षकों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि मिट्टी तो मिट्टी होती है, लेकिन जब कुम्हार का हाथ लगता है तो वही मिट्टी एक भगवान की मूर्ति बन जाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों को दिसंबर 1983 में राजपूताना राइफल्स में कमीशन दिया गया था। उन्हें जम्मू और कश्मीर की गहरी समझ है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स के सेक्टर कमांडर और चिनार कॉर्प्स के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ के साथ 1988 से पांच कार्यकालों तक वहां सेवा की। चिनार कॉर्प्स कमांडर के रूप में कार्यभार संभालने से पहले उन्हें 21 सितंबर, 2019 को राजपूताना राइफल्स की रेजिमेंट के कर्नल के रूप में नियुक्त किया गया था।

जम्मू-कश्मीर से फरवरी, 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ सुनिश्चित किया कि कश्मीर में कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने आवश्यक वस्तुएं, दवाएं आसानी से उपलब्ध कराने और अस्पताल, स्कूल खोले रखने के इंतजाम किये। उन्होंने स्थानीय युवकों से आतंकी गतिविधियों में शामिल न होने और अपनी जान जोखिम में न डालने का अनुरोध किया।जनरल ढिल्लों के नेतृत्व में सेना की टीम स्थानीय लोगों से बात करने के लिए घर-घर गई क्योंकि फोन सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। उनके इस अभियान से स्थानीय लोगों ने सेना पर मित्र के रूप में भरोसा करना शुरू कर दिया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने विभिन्न सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से सेना को टैग करके सीधे उन्हें मदद के लिए बुलाया।

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज, दिल्ली से स्नातक किया। लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों को दिसंबर 1983 में राजपूताना राइफल्स में कमीशन दिया गया था। उन्हें जम्मू और कश्मीर की गहरी समझ है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स के सेक्टर कमांडर और चिनार कॉर्प्स के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ के साथ 1988 से पांच कार्यकालों तक वहां सेवा की। चिनार कॉर्प्स कमांडर के रूप में कार्यभार संभालने से पहले उन्हें 21 सितंबर, 2019 को राजपूताना राइफल्स की रेजिमेंट के कर्नल के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने सीपी करियप्पा राजपूताना राइफल्स की रेजिमेंट के कर्नल के रूप में भी कार्य किया है।

(सौजन्य सिंडिकेट फीड)
 

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