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होम भारत

पुष्कर सिंह धामी…पहाड़ सा हौसला

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 9, 2022, 07:15 pm IST
in भारत, उत्तराखंड, साक्षात्कार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थितियां भले दुर्गम-दुरूह हों किन्तु पिछले कुछ कालखंड में राज्य का कायाकल्प होने लगा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विश्वास से भरे हैं। केवल छह माह में साढ़े पांच सौ फैसले लेने वाले ‘सैनिक पुत्र’ पर केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा और जनता की आशाएं टिकी हैं।  देहरादून में जनवरी की ठंड शाम के साथ गहराने लगी है। एक प्रदर्शनी क्रिकेट मैच में चोटिल होने के बाद हाथ में प्लास्टर होने पर भी सहज भाव से सक्रियता, तन्मयता से काम करते पुष्कर सिंह धामी तेजी से आवश्यक फाइलें निपटाते हुए अधिकारियों को निर्देशित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री निवास की यह गहमागहमी बता रही है कि युवा मुख्यमंत्री के साथ देर तक कार्य करने की आदत अब सबको है। उत्तराखंड की राजधानी के इस बदले माहौल में राज्य के समक्ष चुनौतियों, विकासपरक राजनीति, जनता की प्रतिक्रिया और दूरगामी लक्ष्यों पर  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की पाञ्चजन्य के सम्पादक हितेश शंकर और उत्तराखंड ब्यूरो प्रमुख दिनेश मानसेरा ने

आप युवा हैं। अचानक आपको मुख्यमंत्री पद पर आसीन होना पड़ा, जबकि आपको किसी मंत्री पद का भी अनुभव नहीं था?

मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं। उसमें एक सामान्य कार्यकर्ता को कभी भी, कोई भी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। गडकरी जी, मोदी जी इसके उदाहरण हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मुझे जैसा आदेश हुआ, मैंने वो आदेश माना। जब मैं विद्यार्थी जीवन में था, तब लखनऊ विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के काम देखता था, उत्तराखंड बना तो मैंने भारतीय जनता युवा मोर्चे के प्रथम प्रदेशाध्यक्ष के रूप में काम किया। फिर, खटीमा की जनता ने मुझे विधायक बनाया। अब पार्टी ने मुझे मुख्यसेवक बनाया तो सेवा करने का अवसर मिला।
 

मुख्यमंत्री के पद पर आते ही किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

देखिए! हर पल चुनौतियों से रूबरू होना पड़ता है, जन-सेवा करनी है, फैसले लेने होते हैं। हां, मैंने ये जरूर किया कि फैसलों में देरी नहीं की। मैंने ये पहले दिन से ये संकल्प लिया था कि किसी भी समस्या को लटकाओ नहीं, बाद में भी उसका समाधान होना ही है तो अभी क्यों नहीं हल खोजा जाए। हमारी सरकार ने छह महीनों में साढ़े पांच सौ से ज्यादा फैसले लिये और जनता को ये संदेश दिया कि हमारी सरकार तुरंत फैसले लेकर काम करने वाली सरकार है। जनहित में निर्णय लेने के लिए इच्छा शक्ति की जरूरत होती है, वो हमारी सरकार में है।
 

केंद्र और उत्तराखंड सरकार के बीच तालमेल कैसा रहा?

देखिए केंद्र की भाजपा सरकार और उत्तराखंड की भाजपा सरकार को हम डबल इंजन की सरकार कहते हैं। उत्तराखंड बनने के बाद, पिछले पांच वर्षों में पहली बार केंद्र ने एक लाख करोड़ की परियोजनाओं को यहां शुरू किया। आल वेदर रोड, जिसे हम सीमांत क्षेत्रों तक या कहें चारों धामों तक जाने वाली सड़क, लिपु पास तक जाने वाली सड़क, दिल्ली से देहरादून के बीच बनने वाला हाइवे, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन बिछाने जैसे बड़े कार्य यहां हो रहे हैं। ये परियोजनाएं उत्तराखंड की जीवनरेखा बनने जा रही हैं।

 

तीर्थाटन को लेकर प्रधानमंत्री मोदी बेहद गंभीर दिखते हैं?

ये देश का परम सौभाग्य है कि हमें आदरणीय मोदी जी जैसा प्रधानमंत्री मिला। ये उत्तराखंड का भी सौभाग्य है कि हमें उनका आशीर्वाद मिला, प्रधानमंत्री मोदी जी का केदारनाथ से अटूट भावनात्मक रिश्ता है। उनकी प्रेरणा से बाबा केदारनाथ के आशीर्वाद से दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के काम वहां पूरे हो चुके हैं। अभी एक हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य और चल रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी जी ने यहां रोपवे बनाए जाने की योजना को मंजूरी दे दी है। अब आगे भगवान बद्रीनाथ की नगरी को सजाने-संवारने का काम शुरू हो गया है। मोदी जी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने हिन्दू तीर्थ स्थलों के बारे में सोचा और वहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काम करवाया। काशी इसका एक और उदाहरण है। श्री राम मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है। आप सोचिए, क्या स्वतंत्रता के बाद ऐसा कभी हुआ कि कोई सरकार, कोई प्रधानमंत्री हिन्दू  तीर्थस्थलों के लिए सोचता भी था।

देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत करते पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर और उत्तराखंड ब्यूरो चीफ दिनेश मानसेरा

उत्तराखंड देवभूमि है। यहां भी हर चोटी पर मन्दिर है, देवों का वास है, राज्य सरकार इनके लिए क्या सोचती है?

देखिए, उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने देश की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में देवभूमि उत्तराखंड को विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया है। हमारे यहां पर्यटक भी आते हैं और तीर्थ यात्री भी आते हैं। हमने वन आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दिया है, जैसे टाइगर, क्रोकोडाइल, फिश एंगलिंग, बर्डवाचिंग आदि पर भी फोकस किया है। हमारी सरकार ने साहसिक पर्यटन में रिवर राफ्टिंग, पर्वतारोहण, रॉक क्लाइम्बिंग, पैरा ग्लाइडिंग आदि पर भी ध्यान दिया और इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिल रहा है।

होम स्टे योजना पर राज्य को प्रधानमंत्री की प्रशंसा मिली, क्या खास है इसमें?

होम स्टे ऐसी परियोजना है जो पलायन को रोक सकती है। पहाड़ों में गांवों में लोगों के घर इसलिए खाली हो गए हैं कि लोग मैदानी क्षेत्रों में जाकर बस गए। आज सड़कें अच्छी हो जाने से उन्हीं गांवों के घरों में पर्यटक आकर रह रहे हैं। इन घरों को थोड़ा आधुनिक बना देते हैं तो लोगों का रुझान फिर से गांव की तरफ बढ़ेगा। इसलिए सरकार ने होम स्टे बनाने के लिए अनुदान और कम ब्याज पर ऋण देने की स्कीम शुरू की और उसके शानदार परिणाम सामने आए। ये ही वजह थी कि प्रधानमंत्री से भी राज्य की इस योजना को एक मॉडल योजना के रूप में सराहना मिली।
 

चिकित्सा क्षेत्र में हम काफी पीछे क्यों हैं?

बीती सरकारों ने जो किया, मैं उस पर नहीं जाना चाहता लेकिन हमारी सरकार ने इस विषय पर कुछ बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिये हैं। हमारी योजना है कि हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज हो, नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, अल्मोड़ा जिलों में चल रहे हैं। पिथौरागढ़ के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी शिलान्यास कर गए हैं, उधमसिंहनगर में बन गया है और यहां एम्स का सैटेलाइट सेंटर भी खुलने जा रहा है। हमने निजी क्षेत्र से भी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए संवाद किया है। अगले कुछ सालों में पहाड़ों में चिकित्सा सुविधाएं बेहतर होंगी, ऐसा हमारा संकल्प है और विश्वास भी।
 

कृषि बागवानी की तरफ क्या खास काम हुए?

उत्तराखंड के तराई इलाके का बासमती दुनिया भर में मशहूर है। गन्ना, गेहूं की भी पैदावार अच्छी है, पहाड़ों में हमने सेब के बागान लगाने की योजना शुरू की है। हम पहाड़ के उत्पादों की आर्गेनिक खेती कर रहे हैं, जिसकी बहुत मांग भी है। हमारे मसाले, हमारी चाय, हमारे औषधीय बेल-पौधों की मांग बराबर बनी हुई है। हमारे साथ दिक्कत यही है कि पहाड़ों में बंदर तथा कुछ अन्य जंगली जानवरों की वजह से कुछ लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है। हमने उनसे कहा है कि आप कीवी उगाएं जो बंदर नहीं खाता। ऐसी बहुत से विकल्प हैं। हमने पूर्वी राज्यों और हिमाचल से संवाद कर कई विकल्प किसानों को दिए हैं और अब तो सौर ऊर्जा को भी बंजर खेतों में लगा कर लोग पैसा कमाने लगे हैं।

 ऊर्जा सेक्टर में कितना विकास हुआ है?

ऊर्जा क्षेत्र में जल विद्युत परियोजनाएं हमारे जल संसाधनों पर बन रही हैं। केंद्र सरकार भी इसमें भरपूर मदद कर रही है। हम ऊर्जा क्षेत्र से राज्य की आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के लिए बिजली-पानी देने वाली यमुना नदी पर बनने वाली लखवाड़ जलविद्युत परियोजना का शिलान्यास किया है। अगले कुछ सालों में हमारी विद्युत उत्पादन क्षमता चार हजार मेगावाट से बढ़ कर दस हजार मेगावाट तक हो जाएगी। हम चालीस हजार मेगावाट के बिजली उत्पादन की क्षमता वाले प्रदेश में रहते हैं और इस ओर तेजी से काम चल रहा है। चालीस वर्षों से जलविद्युत परियोजनाओं पर पिछली सरकारों ने काम नहीं किए। हमने उन फाइल को निकाल कर आज के हिसाब से उनपर विस्तृत रिपोर्ट बना कर केंद्र को भेजी है। लखवाड़ और जमरानी योजना इसका उदाहरण हैं।
 

उत्तराखंड में हर तीसरे परिवार का संबंध सेना से है। आपकी सरकार ने भूतपूर्व सैनिकों के लिए क्या सोचा है?

उत्तराखंड सरकार ने अपने देश के रक्षकों के लिए अपने जवानों के परिवारों के सम्मान की परंपरा शुरू की है। सीमाओं की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले करीब बाईस सौ शहीदों के घर-आंगन की मिट्टी लाकर उनके सम्मान के लिए देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण हो रहा है। ये उत्तराखंड का पांचवां धाम होगा। ये भी एक प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना है। हमने राज्य में भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए अलग से एक मंत्री नियुक्त किया है। केंद्र ने एक रैंक एक पेंशन स्कीम को लागू किया है। हमारी सरकार सैनिकों का सम्मान करना जानती है। मैं एक सैनिक पुत्र हूं, मेरे भीतर राष्ट्रवाद है, हम हमेशा देश के लिए सोचने वाले लोग हैं।
 

राष्ट्रभाव और हिंदुत्व को लेकर आपकी क्या राय है?

मैंने पहले भी कहा कि मैं एक सैनिक पुत्र हूं, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व मेरे संस्कारों में है। ये मेरी रगों में है, मेरे खून में रमा है। हिंदुत्व एक जीवन दर्शन है, जो भी उत्तराखंड का मूल निवासी है, वो हिंदुत्व को बेहतर तरीके से जानता है। हमारा राज्य देवभूमि है, इसीलिए हम जिस भी क्षेत्र में जाते हैं, वहां के स्थानीय देवी-देवताओं और मन्दिरों में शीश जरूर नवाते हैं। आजादी के बाद पहली बार हमारे तीर्थस्थलों का इस प्रकार से विकास हो रहा है। न केवल चारों धाम,  बल्कि यहां पहुंचने तक के मार्गों पर भी सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। भाजपा सरकार ने नमामि गंगे के तहत गंगा को साफ रखने, हरिद्वार शहर में सीवर का गंदा पानी गंगा में जाने से रोकने और घाटों का पुख्ता निर्माण करने का काम किया है। ये ही हिंदुत्व दर्शन है। भव्य और दिव्य केदारपुरी आज सबके सामने है और अगले दो वर्षों में बदरीनाथ धाम को लेकर भी एक व्यापक योजना पर काम जारी है। हम हिंदुत्व की सोच वाले दल हैं, हमें ऐसे किसी से भी सीख लेने की जरूरत नहीं है जिनका हिन्दू प्रेम चुनाव के समय ही जागता हो और जो हिन्दू और हिंदुत्व की उचित व्याख्या तक ना कर पाता हो। हमारे भीतर हिंदुत्व का भाव भी है और संस्कार भी।
 

उत्तराखंड में जनसंख्या असंतुलन के संदर्भ में सशक्त भू-कानून को लेकर युवाओं ने सोशल मीडिया में आवाज उठाई है। इसपर आपकी सरकार क्या सोचती है?

ये बड़ा गंभीर विषय है। हमने भी महसूस किया है कि मैदानी जिलों में जनसंख्या असंतुलन होने लगा है। हमने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और एक समिति भी बना दी है। ये समस्या पहाड़ों में भी होने लगी है कि बाहरी राज्यों के लोग पहाड़ों में आकर भूमि की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। संत समाज ने भी देवभूमि की संस्कृति की रक्षा के लिए आवाज हम तक पहुंचाई है। हमारी सरकार इस पर गम्भीर है और हमारी सरकार राज्य में एक सशक्त भू-कानून बनाने के पक्ष में है।

शिक्षा क्षेत्र में सरकार क्या सोचती है?

उत्तराखंड सरकार ने केंद्र द्वारा बनाई गई नई शिक्षा नीति को लागू करने में अग्रिम पंक्ति में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। कोविड काल की वजह से ये समय डिजिटल शिक्षा का है। हमने हाल ही में दो लाख साठ हजार विद्यार्थियों को मोबाइल टैबलेट देने के लिए उनके खातों में पैसा ट्रांसफर किए हैं, जिस से बच्चे अपनी पसंद का टैबलेट खरीद कर उसका प्रमाण विद्यालय प्रबंधन को देंगे। हम सरकारी विद्यालयों का स्तर सुधार रहे हैं और निजी क्षेत्रों को मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय खोले जाने की अनुमति दे चुके हैं। देहरादून शिक्षा का हब बन गया है। मैं आपको ध्यान दिलाना चाहता हूं कि पन्तनगर कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को देश में सर्वश्रेष्ठ सरकारी शिक्षा संस्था होने की रेटिंग मिली है, आईआईटी रुड़की, आईएमए देहरादून, एफआरआई, सर्वे आफ इंडिया, विवेकानंद पर्यावरण संस्थान, आर्यभट्ट अंतरिक्ष संस्थान, निफ्ट श्रीनगर, आईएमएम काशीपुर ऐसे कई शिक्षण संस्थान हैं, जहां देश-विदेश के हजारों बच्चों के भविष्य को तराशने की शिक्षा मिल रही है। हमारी डबल इंजन की सरकार ने राज्य में खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया है और हम शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

 


मैंने 500 से अधिक जन सरोकारी निर्णय लिये हैं। ये केवल निर्णय मात्र नहीं हैं बल्कि इनमें से कई का शासनादेश भी जारी हो चुका है। प्रदेश को लेकर हमारी नीति और नीयत, दोनों एकदम स्पष्ट हैं।  हम ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ अंत्योदय के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने पर हम प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बना दें।


नजूल भूमि नीति पर क्या कहेंगे?

भारत-पाक विभाजन के दौरान वहां से आए लाखों हिन्दू पंजाबी सिख भाइयों को उत्तराखंड के तराई भावर क्षेत्र में बसाया गया था। इन्हें नजूल भूमि लीज पर जमीन दी गई लेकिन मालिकाना हक नहीं दिया गया। जब हम उत्तर प्रदेश राज्य में शामिल थे, उस वक्त कल्याण सिंह सरकार ने इन लोगों को भूमि का एक निर्धारित शुल्क जमा करवा कर मालिकाना हक दिया गया था, उत्तराखंड बनने के बाद ये योजना लागू नहीं हुई। हमने ये योजना फिर से शुरू करवाई ताकि यहां काबिज लोग अपनी भूमि के मालिक बन सकें। अब वे अपनी भूमि पर बैंक से ऋण ले सकेंगे, जमीन की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे और इससे सरकार को राजस्व भी प्राप्त होगा।

 

राज्य में बंगालियों को पूर्वी बंग्लादेशी कहने का विषय क्यों उठा?

देखिए मैं स्पष्ट कर देता हूं कि उत्तराखंड में दो तरह के हिन्दू बंगाली समुदाय रहते हैं। एक वो जो 1947 में बंटवारे के वक्त भारत आए, जिन्हें तराई में बसाया गया और एक वो जो 1971 में पूर्वी पाकिस्तान से बंग्लादेश बनने के दौरान वहां से शरणार्थी बनकर यहां आएं। जो 1971 में आए उन्हें भारत के नागरिकता दस्तावेजों में ‘पूर्वी पाकिस्तानी’ के नाम से ही पहचान दी गई। जब मोदी सरकार ने राष्ट्रीय नागरिकता कानून में संशोधन किया तो उत्तराखंड सरकार ने यहां के बंगाली हिंदुओं का विषय केंद्र के सम्मुख रखा, जिस पर निर्णय हुआ और अब इन बंगाली हिंदुओं के दस्तावेजों से 'पूर्वी पाकिस्तान' शब्द हटा दिया गया और इन्हें भारत का नागरिक माना गया। आज ये एक बड़ा वर्ग है और सरकार के इस निर्णय से ये वर्ग बेहद उत्साहित है।

 


बाबा केदारनाथ के आशीर्वाद से दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के काम वहां पूरे हो चुके हैं। अभी एक हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य और चल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी ने यहां रोपवे बनाए जाने की योजना को मंजूरी दे दी है। अब आगे भगवान बदरीनाथ की नगरी को सजाने-संवारने का काम शुरू हो गया है। 


राजधानी को लेकर हमेशा विवाद क्यों रहा है?

हमारी सरकार ने गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है। कांग्रेस ने सिर्फ बातें ही की हैं। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी दो राजधानियां हैं। गैरसैण में सचिवालय, मंत्रालय आवास और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।

 

आखिरी प्रश्न, विधानसभा चुनाव नजदीक है। आप किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे?

उत्तराखण्ड के मुख्य सेवक के तौर पर मुझे समय भले ही कम मिला लेकिन जितना भी समय मिला, उसमें  मैंने 500 से अधिक जन सरोकारी फैसले लिये हैं। ये फैसले केवल फैसले मात्र नहीं हैं बल्कि इनमें से कई का शासनादेश भी जारी हो चुका है। प्रदेश को लेकर हमारी नीति और नीयत, दोनों एकदम स्पष्ट हैं।  हम 'विकल्प रहित संकल्प' के साथ अंत्योदय के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने पर हम प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बना दें। उत्तराखण्ड के विकास को लेकर हमने सभी विभागों से अगले दस वर्षों का रोड मैप मांगा है और हम अपने इन्हीं संकल्पों को लेकर जनता के बीच जाएंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि जनता हमें पिछली बार से भी ज्यादा अपना आशीर्वाद देगी और राज्य में एक बार फिर से कमल खिलेगा। 

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