एफएटीएफ ने बयान जारी करके बताया है कि पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार आतंकवाद के विरुद्ध 34 सूत्रीय एजेंडे में से चार को पूरा करने में नाकाम साबित हुई है। पीटीआई की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान उस वक्त तक 'ग्रे लिस्ट' में बना रहेगा जब तक कि वह यह साबित नहीं कर देता कि आतंकी सरगना हाफिज सईद तथा मसूद अजहर के विरुद्ध वह ठोस और भरोसे लायक कार्रवाई कर रहा है। इस वित्तीय कार्रवाई कार्य बल के प्रमुख मार्कस प्लेयर का कहना है कि कार्य बल की ऑनलाइन बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही बनाए रखने का फैसला लिया गया है। बैठक में एफएटीएफ के 205 सदस्य, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा संयुक्त राष्ट्र संघ सहित अनेक पर्यवेक्षक संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे। संभवत: पाकिस्तान अब अगले साल अप्रैल तक एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ में ही बना रहेगा।
मार्कस का यह भी कहना है कि पाकिस्तान आतंकियों तक पैसे की पहुंच रोकने के लिए जो भी कदम उठाए वे पारदर्शी होने चाहिए। पाकिस्तान सरकार संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित आतंकवादी सरगनाओं तथा उनके साथियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करे। पाकिस्तान साफ तौर पर दिखाए कि वह हाफिज सईद तथा मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों तथा उनकी अगुआई वाले गुटों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई कर रहा है। उल्लेखनीय है कि ये दोनों आतंकवादी भारत की भी मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में शामिल हैं। भारत सरकार ने अनेक बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधित आतंकवादियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का दबाव बनाया है।
एफएटीएफ कश्मीर पर पाकिस्तान के सबसे बड़े हिमायती तुर्की पर भी कड़ी कार्रवाई कर सकती है। इस वित्तीय कार्य बल ने तुर्की को भी ग्रे लिस्ट में जोड़ दिया है। जॉर्डन तथा माली, इन दो देशों को भी इसी निगरानी सूची में रखा गया है। जबकि मारीशस तथा बोत्सवाना इस सूची से बाहर आ गए हैं।











