शशि थरूर बोले- जनसंख्या का मुद्दा बहाना, भाजपा का मकसद 'समुदाय विशेष' को निशाना बनाना
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शशि थरूर बोले- जनसंख्या का मुद्दा बहाना, भाजपा का मकसद ‘समुदाय विशेष’ को निशाना बनाना

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 20, 2021, 10:59 am IST
inदिल्ली

भाजपा शासित कुछ राज्‍यों द्वारा जनसंख्‍या नियंत्रण को लेकर उठाए जा रहे कदमों से कांग्रेस सहित कुछ दलों के नेता बिलबिलाए हुए हैं। उत्‍तर प्रदेश और असम में जनसंख्‍या नियंत्रण विधेयक पर प्रस्‍तावित मसौदे को लेकर भाजपा की आलोचना करते हुए वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे राष्‍ट्र विरोधी चर्चा करार दिया। उन्‍होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून उठाने के पीछे की भाजपा की मंशा राजनीतिक है और इसका मकसद एक ‘समुदाय विशेष’ को निशाना बनाना है। असदुद्दीन ओवैसी पहले ही इस मसौदे पर सवाल उठा चुके हैं।

शशि थरूर ने कहा कि जनसंख्या को लेकर बहस पूरी तरह से अनुपयुक्त है। 2030 तक भारत के लिए बुजुर्गों की आबादी सबसे बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एक ‘समुदाय विशेष’ को निशाना बनाने के लिए सुनियोजित मकसद से इस मुद्दे को उठा रही है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि उत्तर प्रदेश, असम और लक्षद्वीप में आबादी कम करने की बात हो रही है, जहां हर कोई जानता है कि उनका इरादा किस ओर है। असम में वे कुछ प्रवासी बंगाली मुसलमानों को लेकर चिंतित हैं। लक्ष्‍यद्वीप में 96 प्रतिशत मुसलमान हैं। भारत में ये तीन स्‍थान हैं, जहां भाजपा इस नीति को आगे बढ़ा रही है। हमारी राजनीतिक व्यवस्था में हिंदुत्व से जुड़े तत्वों ने आबादी के मुद्दे पर अध्ययन नहीं किया है। उनका मकसद विशुद्ध रूप से राजनीतिक और सांप्रदायिक है। वे एक समुदाय विशेष को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।’

इससे पहले, वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रस्‍तावित जनसंख्‍या नियंत्रण विधेयक पर एक ट्वीट किया था। उन्‍होंने ट्विटर थ्रेड पोस्‍ट करते हुए केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के हवाले से लिखा था, “मोदी सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के मुताबिक, भारत के कुछ राज्यों को 2031 तक बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए तैयार रहना होगा, न कि बढ़ती जनसंख्या के लिए। यह महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मौजूदा नीतियों, परिवार नियोजन कार्यक्रमों और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों से प्रेरित होगा।” एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने उत्‍तर प्रदेश सरकार की जनसंख्‍या नीति पर कहा था कि योगी सरकार केंद्र के खिलाफ जा रही है। दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा था कि 2000 की जनसंख्‍या नीति के मुताबिक 2018 में कुल जन्‍मदर 3.2 प्रतिशत से घटकर 2.2 प्रतिशत हो गया है। इस गिरावट के कारण देश में दो बच्चों की नीति नहीं आ सकती है।

गहलोत के मंत्री भी ‘समुदाय विरोधी’!
राजस्‍थान में अशोक गहलोत के कैबिनेट मंत्री भी जनसंख्‍या नियंत्रण नीति का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री रघु शर्मा ने हाल ही में कहा था कि हमारा लक्ष्‍य 2025 तक जन्‍मदर 2.1 प्रतिशत तक लाना है। इसके लिए हमें प्रति परिवार एक बच्चे की नीति अपनाने की जरूरत है। शर्मा ने कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत राजस्थान में हर साल लगभग 250,000 नसबंदी की जाती है। नसबंदी के मामले में राजस्थान की गिनती देश के अग्रणी राज्यों में होती है। वहीं, स्वास्थ्य सचिव सिद्धार्थ महाजन ने कहा कि नसबंदी कार्यक्रम में महिलाओं का योगदान लगभग 99 फीसदी है और पुरुषों का योगदान केवल एक प्रतिशत। उन्होंने कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पुरुषों में नसबंदी को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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