किसान आंदोलन से किसान और किसानी लापता
August 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

किसान आंदोलन से किसान और किसानी लापता

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 4, 2021, 01:11 pm IST
inभारत

इस आंदोलन पर अब राकेश टिकैत का ही दबदबा दिखाई देने लगा है। बाकी किसान नेताओं का कहीं कोई अता पता नहीं है। टिकैत अपने हिसाब से आंदोलन को चला रहे हैं और वह भी विशुद्ध रूप से राजनीतिक एजेंडे के साथ

किसान आंदोलन की आड़ में गणतंत्र दिवस की शर्मनाक हिंसा रूपी तूफान के बाद स्वयंभू आंदोलन से सभी मुद्दे उड़ गए, अब केवल एक टिकैत नामक मुद्दा बचा दिख रहा है। वह टिकैत जो मई, 2024 यानि लोकसभा चुनावों तक धरना देने, चुनावी राज्यों में जाकर भाजपा का विरोध करने की बात करते हैं। लेकिन हाल ही में 2 मार्च को गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा ने सभी 31 जिला पंचायतों के साथ ही 231 तालुका पंचायतों में से 196 में और 81 नगरपालिकाओं में से 74 में स्पष्ट बहुमत ले निकाय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की। कृषि कानूनों के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हुए उपचुनावों सहित अनेक प्रदेशों के ग्रामीण इलाकों में भाजपा को मिली जीत ने बता दिया कि देश का असली किसान किसके साथ है और किसान नेताओं के उजागर हुए राजनीतिक एजेंडे से भी साफ हो गया है कि आंदोलन से तीन कृषि कानून, एमएसपी पर कानून व सभी तरह के किसानी मुद्दों सहित सबकुछ उड़ गया है। आंदोलन में शेष केवल मोदी व भाजपा विरोध की राजनीति रह गई जिसके प्रतीक भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत बनते जा रहे हैं।
लाल किले की घटना और ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन का हश्र भी शाहीनबाग जैसा होता दिखाई दिया। हिंसा के दूसरे दिन ही दो किसान संगठन आंदोलन से अलग हो गए। कुछ किसान संगठनों ने हिंसा के लिए सरकार पर ही आरोप लगाये। इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो देश जानता है, लेकिन आंदोलन मार्ग भटक चुका, यह सच साबित हो चुका है। देश की राजधानी में हुई खुलेआम हिंसा ने किसान आंदोलन और उनकी जायज मांगों के प्रति आम आदमी की सहानुभूति को खो पूरी तरह दिया।
आंदोलनकारी किसान संगठन शुरू से कृषि कानून खत्म करने जैसा अतिवादी सिरा पकड़े हुए थे, जिसे मोदी तो क्या कोई भी संवैधानिक सरकार शायद ही स्वीकार करती। आंदोलन के संचालक किसान नेताओं को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के उस प्रस्ताव पर सकारात्मक ढंग से विचार करना था, जिसमें कृषि कानूनों को डेढ़ साल स्थगित करने की बात कही गई थी। यह सही है कि किसान आंदोलन के कारण सरकार दबाव में थी। आंदोलन की इसी शक्ति ने किसान नेताओं को मुगालते में ला दिया। वरना गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड करने का कोई औचित्य नहीं था।
अतीत पर नजर डालें तो इस देश में ज्यादातर बड़े और निर्णायक किसान आंदोलन आजादी के पहले भी हुए और बाद में भी। आजादी के बाद दो ऐसे बड़े किसान आंदोलन हुए जिन्होंने देश की राजनीतिक धारा को प्रभावित करने का काम किया। ये दोनो आंदोलन भी वामपंथियों ने ही खड़े किए थे। पहला था 1947 से 1951 तक हैदराबाद रियासत में सांमती अर्थव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन। दूसरा बड़ा किसान आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल में नक्सली आंदोलन के रूप में हुआ। इसके परिणामस्वरूप बंगाल में भूमि सुधार लागू हुए, लेकिन हिंसक होने के कारण यह आंदोलन जल्द ही सहानुभूति खो बैठा ठीक मौजूदा किसान आंदोलन की तरह। इसके बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत ने अस्सी और नब्बे के दशक में कई किसान आंदोलन किए। उन्होंने 1988 में उन्होंने पांच लाख किसानों के साथ एक सप्ताह तक दिल्ली के बोट क्लब पर धरना दिया और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी थी। लेकिन मौजूदा किसान आंदोलन पूरी तरह पथभ्रष्ट दिखने लगा है।
बेशक, नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के मन में संशय हो सकते हैं, जिनके समाधान कारक उत्तर तो इन कानूनों के व्यवहार मे आने के बाद ही मिल सकते थे। फिर भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इन कानूनों को आधार बनाकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया गया। यहां तक कि इन कानूनों के पास होने के बाद राकेश टिकैत सहित कई किसान नेताओं ने इन कानूनों का यह कहते हुए स्वागत किया कि उनकी बरसों की मेहनत सफल हुई और सरकार ने उनकी सुन ली है। लेकिन एकाएक उन्हीं मुखों से इन कानूनों के काला कानून होने की बात सुन कर देश दंग रह गया। हालांकि यह बात अलग है कि न तो कोई किसान नेता और न ही विपक्ष अभी तक यह बता पाया कि इन तीन काले कानूनों में काला क्या है ?
इस आंदोलन पर अब राकेश टिकैत का ही दबदबा दिखाई देने लगा है। बाकी किसान नेताओं का कहीं कोई अता पता नहीं है। टिकैत अपने हिसाब से आंदोलन को चला रहे हैं और वह भी विशुद्ध रूप से राजनीतिक एजेंडे के साथ। किसान मोर्चा अपना मंच किसी राजनेता से सांझा न करने के दावे करते थे परंतु टिकैत अपने प्रिय व हितैषी नेताओं की खूब सार्वजनिक आवाभगत कर रहे हैं। उन्हें मंच पर पूरा समय और सम्मान दिया जा रहा है। केवल इतना ही नहीं टिकैत सरेआम सरकार को धमका भी रहे हैं और सत्ता परिवर्तन की धमकी भी दे रहे हैं। टिकैत ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के एक बयान के जवाब में कहा कि जब लोग जमा होते हैं तो सरकारें बदल जाती हैं। उन्होंने कहा कि अगर तीन नए कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया गया तो सरकार का सत्ता में रहना मुश्किल हो जाएगा। टिकैत सोनीपत जिले के खरखौदा की अनाज मंडी में किसान महापंचायत में को संबोधित कर रहे थे। ज्ञात रहे कि श्री तोमर ने ग्वालियर में कहा था कि केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों से बात करने को तैयार है लेकिन, महज भीड़ जमा हो जाने से कानून रद्द नहीं होंगे। इस पर राकेश टिकैत ने कहा, ‘राजनेता कह रहे हैं कि भीड़ जुटाने से कृषि कानून वापस नहीं हो सकते, जबकि उन्हें मालूम होना चाहिए कि भीड़ तो सत्ता परिवर्तन का भी सामर्थ्य रखती है। यह अलग बात है कि किसानों ने अभी सिर्फ कृषि कानून वापस लेने की बात की है, सत्ता वापस लेने की नहीं। टिकैत ने कहा, ‘सरकार को मालूम होना चाहिए कि अगर किसान अपनी उपज नष्ट कर सकता है तो आप उनके सामने कुछ नहीं हो। टिकैत हरियाणा, दिल्ली के आसपास, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महापंचायतें करके जिस तरह लोगों के बीच ब्यानबाजी कर रहे हैं उससे साफ हो जाना चाहिए कि पूरे आंदोलन में किसान तो केवल कंधा हैं और उस पर बंदूक रख कर चांदमारी विपक्ष कर रहा है।
दूसरी ओर केंद्र के साथ टकराव के मार्ग पर चल रहे राज्यों महाराष्ट्र व पश्चिमी बंगाल को लेकर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिक्खस फार जस्टिस (एसजेएफ) ने इनसे अपील की है कि वे भारत से अलग हो जाएं। ज्ञात रहे कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आई.एस.आई. के गुप्त एजेंडे पर चल रहा यह संगठन किसान आंदोलन के दौरान भी काफी सक्रिय रहा और किसानों को हिंसा के लिए भड़काता रहा है। किसान आंदोलन में एक अन्य खालिस्तानी संगठन ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ का नाम भी सामने आया जिसका संचालक कनाडा का निवासी मो. धालीवाल है। हाल ही में सामने आया टूल किट प्रकरण का सूत्रधार भी यही संगठन है। टूलकिट एक तरह की गाइडलाइन है जिसके जरिए ये बताया जाता है कि किसी काम को कैसे किया जाए। ज्ञात रहे कि किसान आंदोलन को लेकर पूरी दुनिया में सोशल मीडिया पर अभियान चला था, जिसका उद्देश्य हिंसा को बढ़ावा देना और भारत की छवि को तार-तार करना था। इस दस्तावेज का जुड़ाव ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ नामक खालिस्तानी समर्थक समूह से होने का पता चला। इस ‘टूलकिट’ का मकसद भारत सरकार के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जंग छेडऩा था।
हरित क्रांति का क्षेत्र कहे जाने वाले पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है उनका इस कथित किसान आंदोलन में जिक्र तक नहीं। देश का यह उपजाऊ मैदान निरंतर सूख रहे भू-जल, खतरनाक स्तर पर पहुंचे रासायनिक खादों के प्रयोग, धरती की कम हो रही उर्वरा शक्ति, बिगड़ रहे पर्यावरण, इन्हीं कारणों से समाज में फैल रही कैंसर जैसी घातक बिमारियों जैसी समस्याओं से सर्वाधिक परेशान है परंतु किसान आंदोलन में इनका जिक्र तक नहीं मिलता। पंजाब के किसान कर्ज के बोझ तले दब कर आत्महत्याएं कर रहे हैं और केंद्र सरकार जब इन्हीं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें फसलों की खरीद के वैकल्पिक नए अवसर प्रदान करना चाहती है तो यही कथित किसान नेता उसका विरोध करते दिखाई दे रहे हैं, वह भी विपक्ष के राजनीतिक एजेंडे और देश विरोधी शक्तियों की साजिशों का जाने-अनजाने में हितपोषण करते हुए। देश व देश के किसानों के लिए इससे ज्यादा दुर्भाग्य की क्या बात हो सकती है ?

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

रणधीर जायसवाल

मक्का रक्षा समझौते का हो रहा विश्लेषण, भारत अपने हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध

रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय

अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य और अभिन्न अंग, यह स्वयंसिद्ध और निर्विवाद वास्तविकता है : विदेश मंत्रालय

कन्वर्जन (प्रतीकात्मक चित्र)

पुणे : जबरन ईसाई कन्वर्जन के आरोप में ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ मामला दर्ज

पुलिस की गिरफ्त में आए ये चारों साइबर अपराधी

साइबर ठगी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश, जामताड़ा गैंग का मास्टरमाइंड जहुरुल अंसारी गिरफ्तार, हजारों लोगों को बनाया निशाना

विशाल जनभागीदारी-हजारों की संख्या में रत्नागिरि के नागरिक, छात्र और ‘जेन-जी’ युवा पदयात्रा में शामिल हुए

राष्ट्रहित में मौन हुंकार

कार्यक्रम को संबोधित करते श्री अतुल लिमये

देश सर्वोपरि की भावना के साथ आगे बढ़ें युवा : अतुल लिमये

Load More

ताज़ा समाचार

रणधीर जायसवाल

मक्का रक्षा समझौते का हो रहा विश्लेषण, भारत अपने हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध

रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय

अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य और अभिन्न अंग, यह स्वयंसिद्ध और निर्विवाद वास्तविकता है : विदेश मंत्रालय

कन्वर्जन (प्रतीकात्मक चित्र)

पुणे : जबरन ईसाई कन्वर्जन के आरोप में ब्रिटिश नागरिक के खिलाफ मामला दर्ज

पुलिस की गिरफ्त में आए ये चारों साइबर अपराधी

साइबर ठगी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश, जामताड़ा गैंग का मास्टरमाइंड जहुरुल अंसारी गिरफ्तार, हजारों लोगों को बनाया निशाना

विशाल जनभागीदारी-हजारों की संख्या में रत्नागिरि के नागरिक, छात्र और ‘जेन-जी’ युवा पदयात्रा में शामिल हुए

राष्ट्रहित में मौन हुंकार

कार्यक्रम को संबोधित करते श्री अतुल लिमये

देश सर्वोपरि की भावना के साथ आगे बढ़ें युवा : अतुल लिमये

बद्रीनाथ धाम

चारधाम यात्रा : 114 दिनों में दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख पार, पिछले साल के मुकाबले 4.68 लाख अधिक श्रद्धालु पहुंचे

अस्पताल

निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगेगी लगाम, 3-स्टार होटल से महंगा नहीं होगा अस्पताल का कमरा, संसदीय समिति ने की सिफारिश

विभाजन की विभीषिका? भारत ने खोया मुल्तान स्थित प्रह्लादपुरी मंदिर

झारखंड के कोने-कोने से पहुंचे छात्र, बोले- मांगें नहीं मानीं तो भर जाएगा पूरा मैदान

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies