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दिल्ली और बिहार के बेपेंदी के ‘लोटे’

Written byArchiveArchive
Apr 2, 2018, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 02 Apr 2018 13:25:24

दिल्ली में केजरीवाल की माफी नहीं चुक रही, तो बिहार में लालू की सजाएं

 अरुणेन्द्र नाथ वर्मा

दिल्ली वाला ‘जादूगर’ लोगों के  सिर पर टोपी पहना कर हाथ में जादुई झाडूÞ फिराता हुआ तमाम कारनामे दिखाता रहता है। उसके लोटे में क्षमायाचना की अजस्र धार छुपी रहती है। बिहार के लोटे में अदालतें रह-रहकर जेल की सजा भरती रहती हैं, कभी तीन साल की तो कभी पांच साल की।
विश्वविख्यात जादूगर पी. सी. सरकार और गोगिया पाशा क्या गये, जादूगरी की कला सिरे से गायब हो गई। वैसे ही, जैसे बड़े से बक्से में बंद सुंदर सहायिका उनके चुटकी बजाने भर से गायब हो जाती थी। अपने  रहस्यपूर्ण और भयावही जादू के खेल में जादू सम्राट अपनी धारदार तलवार से एक ऊंची मेज पर चित लेटी सुन्दरी के दो टुकड़े कर देते थे और फिर ‘छु…काली कलकत्ते वाली’ बुदबुदाते हुए शरीर के दोनों टुकड़ों को जोड़ भी देते थे। ऐसी दिल दहलाने वाली करामातें उनका तुरुप का पत्ता थीं। इन्हें दिखाने के पहले जोर-शोर से बैंड बजता, मंच रंगीन रोशनी के वृत्तों से जगमगाता और दर्शक सांस रोक कर जीवन-मृत्यु के उस खेल का इंतजार करते।
लेकिन पूरा कार्यक्रम इन तुरुप के पत्तों के बल पर  ही नहीं चलता था। इन हैरतनाक कारनामों के बीच जादूगर कुछ जादू ‘साइड शो’ की तरह भी दिखाते थे। ऐसा ही एक करिश्मा था ‘वाटर आॅफ इंडिया’। इसमें जादूगर एक लोटे को उलट कर दिखाता था कि वह बिल्कुल खाली है। फिर वह उसे किसी मेज पर रखकर दूसरी करामातों के बारे में बातें करता। दर्शकों की निगाहें उसी पर रहतीं, तभी अचानक सहज भाव से वह उस खाली लोटे को हवा में ऊंचा उठा कर ढेर-सा पानी नीचे रखी बाल्टी में गिरा कर बताता कि ‘वाटर आॅफ इंडिया’ की धार कभी सूखती नहीं। दर्शक ताली बजाते और जादूगर किसी दूसरे जादू की तैयारी में जुट जाता। बीच-बीच में वह लोटे को अनेक बार उलट कर इतना पानी बहाता कि अंत में बाल्टी ‘वाटर आॅफ इंडिया’ से भर जाती।
समय के साथ ये तमाम हैरतअंगेज करतब भी गायब हो गए। लेकिन ‘वाटर आॅफ इंडिया’ वाला करतब आज भी दिल्ली और बिहार के दो ‘जादूगरों’ के सहारे जिंदा है। दिल्ली वाला ‘जादूगर’ लोगों के सिर पर टोपी पहना कर हाथ में जादुई झाडूÞ फिराता हुआ तमाम कारनामे दिखाता रहता है। उसके लोटे में क्षमायाचना की अजस्र धार छुपी रहती है। वह अन्य कारनामों के बीच लौट-लौट कर सहज ढंग से लोटा भर क्षमायाचना उड़ेलता है और फिर दूसरे कारनामों की तैयारी में जुट जाता है। इस तरह वह जाने कितनी बार लोटे-लोटे भर माफियां बहा चुका है और जाने कितनी बार और बहाएगा। उधर बिहार वाले ‘जादूगर’ के लोटे का करिश्मा इससे ठीक उलटा है। जहां दिल्ली का लोटा कभी खाली नहीं होता वहीं बिहार का लोटा कभी भरता नहीं। बिहार के लोटे में अदालतें रह-रहकर जेल की सजा भरती रहती हैं, कभी तीन साल की तो कभी पांच साल की। इतनी सारी सजाओं के बावजूद लोटा है कि भर कर नहीं देता। लोटे की अनदेखी करके वह दूसरा ‘जादूगर’ सहज भाव से ‘बच्चा लोग ताली बजाओ’ कहकर जेल की सलाखों के पीछे से चुनाव जीतने और आकाशबेल पर चढ़ने का जादू दिखाने में व्यस्त हो जाता है। ‘वाटर आॅफ इंडिया’ के इस नए संस्करण में एक ‘जादूगर’ के लोटे से निकली माफी-नौटंकी कभी चुकती नहीं और दूसरे का लोटा भरी जा रही सजा से कभी भरता नहीं।    

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