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निवेश से बहार

Written byArchiveArchive
Feb 19, 2018, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 19 Feb 2018 11:11:50


उत्तर प्रदेश में 21-22 फरवरी को आयोजित होने जा रहे निवेशक सम्मेलन-2018 से राज्य सरकार को एक लाख करोड़ रुपये का निवेश मिलने का विश्वास है। प्रदेश में निवेश का माहौल बनाने के लिए कानून-व्यवस्था में सुधार के साथ नई औद्योगिक नीति के जरिए एकल खिड़की प्रणाली लागू

सुनील राय

उत्तर  प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार 21-22 फरवरी को राजधानी लखनऊ में निवेशक सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। निवेशक सम्मेलन-2018 की सफलता को लेकर मुख्यमंत्री बहुत आशान्वित हैं। कई बड़े औद्योगिक घरानों की दिलचस्पी को देखते हुए राज्य सरकार को विश्वास है कि निवेशक सम्मेलन में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा। इस सम्मेलन की तैयारियां काफी पहले से शुरू हो गई थीं। इसे लेकर राज्य सरकार ने देश के कई शहरों में रोड शो आयोजित कर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं तलाशी थीं। मुख्यमंत्री ने भी इस सम्मेलन में कारोबारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दिसंबर में मुंबई में रोड शो किया था। इसी तरह राज्य के कैबिनेट मंत्रियों ने दूसरे शहरों में रोड शो किए थे। निवेशक सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

  1. 25 करोड़ रोजगार होंगे सृजित
    खास बात यह है कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम चल रहा है और लक्ष्य का 75 प्रतिशत काम पूरा भी कर लिया गया है। राज्य सरकार और निवेशकों के बीच 270 से अधिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। राज्य सरकार का मानना है कि निवेश के जरिये ही सूबे को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है। साथ ही, निवेश से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अगर राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश होता है तो अगले पांच वर्षों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा। यानी 25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और एक करोड़ लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।  निवेशक सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी, अडाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अडाणी, आदित्य बिड़ला समूह के कुमार मंगलम बिड़ला, टाटा सन्स के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन, एस्सेल समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा एवं जीएमआर समूह के अध्यक्ष जी.एम. राव मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, जापान, नीदरलैंड, फिनलैंड, चेक गणराज्य और स्लोवाकिया सहित अन्य देश, प्रवासी भारतीय तथा केंद्र सरकार के 18 मंत्री भी मौजूद रहेंगे। प्रधानमंत्री खासतौर से उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे।
  2. बढ़ती दिलचस्पी
    निवेशक सम्मेलन को सफल और कारगर बनाने के लिए रोड शो कार्यक्रम तैयार किए गए और योजनाबद्ध तरीके से देश के प्रमुख शहरों में रोड शो किए गए। इसमें मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त सहित प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों ने उद्योगपतियों से मुलाकात की और कंपनी प्रतिनिधियों के साथ रोड शो किया। माना जा रहा है कि दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, अमदाबाद और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में यह प्रयोग काफी सफल रहा। पहला रोड शो 8 दिसंबर, 2017 को नई दिल्ली में हुआ। इसमें मारुति, लावा, डाइकिन, इंटेक्स, सीएफएलडी, हीरो फिनकार्प, जे.के. सीमेंट, सबरोस लि. और महिंद्रा डिफेंस के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अनूप चंद्र पांडेय ने निवेशकों और उद्यमियों के साथ एक बैठक भी की थी, जिसमें पर्यटन, कपड़ा, सौर ऊर्जा, उड्डयन, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिल्म निर्माण, डेयरी उत्पादन आदि क्षेत्रों में निवेश तथा उद्यम स्थापना पर विचार-विमर्श किया गया था। बैठक में इंडोनेशिया, मॉरीशस सहित 25 देशों के राजदूत भी थे।
    22 दिसंबर, 2017 को मुंबई में आयोजित रोड शो की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली, जिसमें 200 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। साथ ही, मुख्यमंत्री ने रतन टाटा, एन. चंद्रशेखर,  सुभाष चंद्रा, मुकेश अंबानी, सन फार्मा के अध्यक्ष दिलीप सांघवी, एल एंड टी के समूह प्रबंध निदेशक एस.एन. सुब्रमण्यम तथा प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी शैलेंद्र राय, महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक डॉ. पवन गोयनका, मोदी इंटरप्राइजेज के अध्यक्ष के.के. मोदी, हिंदुजा समूह के अध्यक्ष (यूरोप) अशोक हिंदुजा व प्रकाश हिंदुजा (भारत), टोरेंट के अध्यक्ष सुधीर मेहता, बजाज इलेक्ट्रिकल्स लि. के मुख्य प्रबंध निदेशक शेखर बजाज आदि प्रमुख उद्योगपतियों के साथ बैठक भी की। अमदाबाद में 18 जनवरी को आयोजित रोड शो में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा शामिल रहे। इसमें 200 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया। साथ ही, उन्होंने अरविंद मिल्स के अध्यक्ष कुलीन लालभाई, टोरेंट पावर के अध्यक्ष दीपक दलाल, कैडिला फार्मा के अध्यक्ष पंकज पटेल सहित कई उद्योगपतियों के साथ मुलाकात की। इसी तरह कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में भी रोड शो किए।
  3. उद्योगों को मिलेंगी सुविधाएं
    राज्य के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय बताते हैं, ‘‘उत्तर प्रदेश देश की सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जहां 20 करोड़ से अधिक उपभोक्ता हैं। सूबे में 8,949 किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क है जो माल ढुलाई के लिए बेहतर सुविधा प्रदान करता है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा) और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (अमृतसर – कोलकाता औद्योगिक गलियारा) राज्य से होकर गुजरते हैं, जिसकी वजह से कंपनियों के लिए माल बंदरगाह तक पहुंचाना काफी आसान होगा। इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा में इन दोनों फ्रेट कॉरिडोर का इंटरसेक्शन, गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर और कुशीनगर में जल्द ही हवाईअड्डे भी बनकर तैयार हो जाएंगे जिससे पर्यटन और औद्योगिक विकास में तेजी आएगी। उद्योगों को उचित दर पर भूमि उपलब्ध कराने के साथ 24 घंटे बिजली व जलापूर्ति कराई जाएगी।’’
    निवेशक सम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य निवेश के जरिये राज्य को समृद्ध बनाने के साथ राज्य के बारे में बनी गलत धारणाओं को दूर कर छवि को बेहतर बनाना है। सरकार का यह प्रयास भी है कि उद्योग नीति में किए गए सुधार और उद्योग के लिए बेहतर माहौल से निवेशकों को अवगत कराया जाए। निवेश का माहौल तैयार करने के लिए अपराधियों की नकेल भी कसी जा रही है।  

निवेशकों के अनुकूल नीति

नई औद्योगिक नीति के तहत राज्य सरकार उद्योगों को भूमि, तकनीक सहित अन्य सुविधाएं देगी। बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण की भी बात कही गई है, जिससे उद्यमियों को अपना उत्पाद दिल्ली भेजने में सहूलियत होगी। राज्य सरकार को विश्वास है कि सम्मेलन प्रदेश में विकास के विश्वास का प्रकाश भरेगा। 

एकल खिड़की प्रणाली लागू

सरकार ने प्रदेश में कारोबार को सुगम बनाने के लिए एकल खिड़की प्रणाली लागू की है। साथ ही, श्रम कानूनों में बदलाव किए गए हैं और करीब 1,200 गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त करने की भी घोषणा की गई है। इसके अलावा, भौतिक पत्रावलियों की जगह ई-पत्रावलियों को तरजीह देने पर भी विचार किया जा रहा है।

सम्मेलन का हर सत्र खास

निवेशक सम्मेलन का पहला सत्र बुनियादी ढांचे के विकास पर होगा। इसके बाद उत्पादन में अहम भूमिका निभाने वाले क्षेत्रों, पर्यटन, औद्योगिक विकास एवं वातावरण, नवीकरणीय ऊर्जा, हैंडलूम व टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स एवं बायो टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र की प्रगति, कृषि, खाद्य एवं प्रसंस्करण के साथ अंतिम सत्र दुग्ध क्षेत्र पर होगा। दूसरे दिन सूचना एवं प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, औद्योगिक क्रांति के लिए तैयार होता प्रदेश, चमड़ा उद्योग, अप्रवासी भारतीय, बैंकिंग तथा अंत में ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र’ पर सत्र होंगे।

सम्मेलन में एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें शीर्ष औद्योगिक घरानों, केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के 1200 स्टॉल होंगे। इस प्रदर्शनी के माध्यम से राज्य की औद्योगिक शक्ति का प्रदर्शन किया जाएगा।

‘‘राज्य की छवि बदलेगा यह सम्मेलन’’
उत्तर प्रदेश में पिछले 15 साल से अराजकता-असुरक्षा का वातावरण था। जर्जर काननू-व्यवस्था और अपने स्वार्थ के लिए शीर्ष पदों पर बैठे लोगों द्वारा जनहित के मुद्दों की अनदेखी प्रदेश की कार्यशैली का हिस्सा बन चुके थे। मायावती ने अपने शासनकाल में पार्क बनवाने को ही प्राथमिकता दी, जबकि समाजवादी पार्टी कुनबे के विवाद में ही उलझी रही। राज्य में बिजली, पानी, सिंचाई जैसी बड़ी समस्याएं भी थीं, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इन्हें कभी गंभीरता से नहीं लिया। इन सब कारणों से प्रदेश में उद्योग नहीं पनपा। 11 महीने पहले बनी योगी आदित्यनाथ सरकार ने न केवल राज्य की छवि सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए, बल्कि उद्योग जगत के बीच विश्वास पैदा करने का काम किया है। यह विश्वास और बढ़े इसके लिए हमने राज्य में निवेशक सम्मेलन आयोजित किया है। इसके लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। यकीनन यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती छवि को बदलने का काम करेगा।
(उ.प्र. के औद्योगिक विकास मंत्री श्री सतीश महाना से निशांत कुमार की बातचीत पर आधारित)

नीतियां निवेशकों के अनुकूल : अनूप चंद्र
राज्य सरकार ने कर्मठ एवं ईमानदार छवि वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी  तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय को निवेशक सम्मेलन-2018 का दायित्व सौंपा है। वह इसे सफल बनाने के लिए बीते 5 माह से लगातार 15 घंटे काम कर रहे हैं। प्रस्तुत हैं अनूप चंद्र पांडेय से पाञ्चजन्य की बातचीत के

प्रमुख अंश –
सरकारी कार्यालयों में फाइलों का दबे रहना अड़चन पैदा करता है। इस ‘बाबू राज’ से छुटकारा कैसे दिलाएंगे?
एकल खिड़की प्रणाली लागू होने के बाद फाइल आगे बढ़ाने के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। निवेशकों को किसी भी प्रकार की मंजूरी, अनुमोदन, अनापत्ति प्रमाणपत्र आदि अब आॅनलाइन दिए जाएंगे। उन्हें इसके लिए किसी कर्मचारी या अधिकारी से मिलने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा,  केंद्रीयकृत निगरानी प्रणाली निवेशकों को उच्च गुणवत्ता और समयबद्ध तरीके से अधिक उत्तरदायी सेवाएं प्रदान करेगी। यही नहीं, ये सेवाएं ठीक से मिल रही हैं या नहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इसकी निगरानी भी की जाएगी।  
कानून-व्यवस्था के मामले में पहले और अब के उत्तर प्रदेश में क्या स्थति है?
जहां तक स्थिति की बात है तो पेशेवर अपराध में कमी आई है। अपराधियों के मन में पुलिस का डर पनपा है।
निवेश की दृष्टि से यह सम्मेलन कितना सफल होगा? किसानों को क्या फायदा होगा?
अभी तक 270 से ज्यादा एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। ये सभी धरातल पर उतरेंगे। इससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा। साथ ही, प्रदेश में उद्योग के लिए एक नया वातावरण दिखेगा। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि हमने सम्मेलन की तैयारी बहुत पहले ही शुरू कर दी थी। एक-एक उद्योग के पीछे गंभीर प्रयास किए गए हैं। साथ ही, जिन क्षेत्रों पर जोर दिया गया है, उनमें कृषि, दुग्ध एवं खाद्य प्रसंस्करण प्रमुख हैं ताकि किसानों की आय दोगुनी
हो सके।
सम्मेलन के सत्रों की खासियत क्या है? इसमें कितने निवेशकों के आने की उम्मीद है?
सम्मेलन में इस बात का ध्यान रखा गया है कि जिस विषय पर सत्र है, उससे जुड़े केंद्रीय मंत्री उपस्थिति रहें। जैसे-औद्योगिक नीति के सत्र में केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु और अप्रवासी भारतीयों के सत्र में जनरल वी.के. सिंह उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन में नीदरलैंड, जापान, फिनलैंड, स्लोवाकिया, थाईलैंड  सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों सहित पांच हजार लोग आएंगे। जिस स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम होगा, वहां पर 2500 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी।

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