क्रांति-गाथा-44 - वीरों का दर्प, विजय का गर्व
July 16, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

क्रांति-गाथा-44 – वीरों का दर्प, विजय का गर्व

Written byArchiveArchive
Oct 2, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 02 Oct 2017 10:11:56

पाञ्चजन्य ने 1968 में क्रांतिकारियों पर केंद्रित विशेषांकों की शंृखला प्रकाशित की थी। दिवंगत श्री वचनेश त्रिपाठी के संपादन में निकले इन अंकों में देशभर के क्रांतिकारियों की शौर्य गाथाएं थीं। पाञ्चजन्य पाठकों के लिए इन क्रांतिकारियों की शौर्य गाथाओं को नियमित रूप से प्रकाशित कर रहा है। प्रस्तुत है 22 जनवरी ,1968 के अंक में प्रकाशित किरणचन्द्र दास के आलेख की समापन कड़ी:-

भगतसिंह और दत्त भी लाये गए
संभवत: वह उनके अनशन का 43वां दिन था जिस दिन मैं उनकी उस गहन मुस्कान का अर्थ समझ सका जिसके द्वारा उन्होंने हम लोगों का प्रथम दिन स्वागत किया था। उनकी अवस्था उस दिन बहुत ही अधिक चिंताजनक हो गई थी। सरदार भगतसिंह तथा श्री बटुकेश्वर दत्त लाहौर सेंट्रल जेल से उनके पास लाये गये कि वह उन्हें आंतों की सफाई के लिए एनिमा लेने पर राजी कर सकें। बटुदा ने उन्हें बंगाली भाषा में ही समझाया कि उन्हें यह बात इस शर्त पर मान लेनी चाहिए कि इसकी सारी जिम्मेदारी उन दोनों (सरदार तथा बटुदा) पर हो। यदि वह ऐसा नहीं करते तो इतने निकट संपर्क में आने का सुयोग हाथ से निकल जााएगा और वह बहुत सी आवश्यक बातों पर विचार-विमर्श न कर सकेंगे जिन्हें उन्हें मिलकर एक-दूसरे के मन्तव्य से निश्चित करना है। ऐसी स्थिति में यतीन्द्रदास ने एनिमा लेना स्वीकार कर लिया।

यतीनदा ने वशिष्ठ की गाय की कथा सुनाई
दूसरे दिन बहुत सवेरे ही मेरे भाई ने अपने सभी साथियों को सहसा ही अपने चारों ओर एकत्रित किया और बहुत ही क्षीण तथा कांपते हुए स्वर में हम लोगों को महर्षि वशिष्ठ की गाय की कथा सुनाई जिससे हम आज भी शिक्षा ले सकते हें। विश्वामित्र के उद्देश्य को यदि पूरा नहीं होने दिया तो सैनिक शक्ति ने, केवल निष्क्रिय विरोध से गाय की रक्षा हो सकना संभव न था। उस कथा से सारांश यह निकला कि उस समय भारत में अंग्रेजी शासन सत्ता से मुक्ति पाने का मार्ग सविनय अवज्ञा का नहीं वरन सशस्त्र क्रांति का था।
यतीन्द्रदास और भगतसिंह दोनों ने ही यह अनुभव किया कि जब तक सरकार को आतंकित नहीं किया जाएगा तब तक वह वास्तविकता की ओर से आंखें मूंदे रहेगी। यतीन्द्र ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उस ऐतिहासिक भूख-हड़ताल के रूप में चरम कोटि की तपस्या तथा आत्मोसर्ग का व्रत लिया और इस भूख-हड़ताल का अंत हुआ लाहौर की बोर्स्टल जेल में 63 दिन के उपवास के उपरांत 13 सितंबर 1929 के दिन स्वयं उनके जीवन के अंत के साथ। उनके अन्य वीर क्रांतिकारी साथी सरदार भगतसिंह, राजगुरु तथा सुखदेव 23 मार्च सन 1931 को हंसते हुए फांसी पर झूल गये।
13 सितंबर 1929 का प्रभात हुआ। प्रात: की सुरभित मंद समीकरण कण-कण में प्राणों का संचार करने लगा, वृक्षों की डालों के बीच-बीच से नीले आकाश का वितान झांकने लगा, बादलों के टुकड़े रुई के धुने हुए पहलों की भांति इधर-उधर गगन-मंडल में विच्छिन्न पड़े दिखलायी दे रहे थे। और प्रकृति के इन जीवनदायी वरदानों के बीच चमक उठीं क्रूर तथा लज्जाहीन बोर्स्टल जेल की दीवालें।

अंतिम दिन
उस अंतिम दिन यतीन्द्रदास की ध्यानमग्नता जैसे और भी अधिक गंभीर हो उठी। ऐसा लग रहा था मानों उनकी आत्मा एक अलौकिक आनंद की अनुभूति कर रही हो। उनकी श्वास की गति अत्यधिक मंद पड़ गयी और जब-तब एक हल्की सी सिहरन उनके शरीर में हो उठती थी परंतु उनके नेत्रों में चमक उठी थी उषा की स्वर्णिम आभा जिसकी उद्दीप्ति क्षण-प्रति-क्षण बढ़ती जा रही थी। उनके आनन पर आंतरिक आनंद की वही आभा थी जो कुछ दिन पूर्व उस समय थी जब उन्होंने सरदार भगत सिंह से अपने यह अंतिम शब्द कहे थे 'मैंने ब्रिटिश शासन को पराजित करने का संकल्प कर लिया है।'
उनकी वह स्मितता कितनी भव्य और अन्तरतम को छू देने वाली थी वह अुनभव करने की बात थी वर्णन की नहीं। उनका खाट पर पड़ा कृश शरीर तेजपुञ्ज लगने लगा था। उनकी दृष्टि में वीरों का दर्प तथा विजय का गर्व था। उनके मानस पर बस एक ही विचार छाया हुआ था 'मेरी सफलता अथवा असफलता पर अपना अभिमत देनेवाला एक निष्पक्ष निर्णेता बड़ी ही सतर्क दृष्टि से जीवन के प्रत्येक क्षण का मूल्यांकन कर रहा है और वह प्रमाणपुरुष है स्वयं मेरा अन्त:करण।'
दोपहर होते-होते उनकी हालत सहसा बिगड़ने लगी जिसे देखकर उनके समस्त साथियों ने समवेत स्वर में 'वन्देमातरम्' का गीत गाना आरंभ कर दिया। मध्याह्न में लगभग 12 बजकर 55 मिनट पर वे परम शांति के साथ चिरनिद्रा में विलीन हो गये।
अनुवादक- श्री देवीशंकर मिश्र 'अमर'

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

India China South China Sea UNCLOS Stand Chinese Ambassador Xu Feihong Global Times Frustrated

साउथ चाइना सी पर भारत के कड़े रुख से बौखलाया ड्रैगन! चीनी राजदूत और ग्लोबल टाइम्स ने उगला जहर, मिला दोटूक जवाब

Vande Mataram 150 Years Celebration Sangeet Natak Akademi National Theatre Festival Artists 2026

4,000+ कलाकार, 450+ संस्थाएं : कश्मीर से कन्याकुमारी 39 भाषाओं में एक साथ गूंजा वंदेमातरम्

Maulana Jarjis Ansari FIR Lucknow Lord Krishna Statement Ayodhya Mahant Vishnu Das Reward

“भगवान कृष्ण मुस्लिम थे…” वाले बयान पर भड़का आक्रोश! मौलाना जर्जिस पर FIR दर्ज, अयोध्या से 10 लाख का इनाम घोषित!

PM Modi Punjab Visit Sant Guru Ravidas Express Vande Bharat Sleeper Dera Sachkhand Ballan Political Equation

पीएम मोदी का पंजाब दौरा: पंजाब और काशी के बीच बनेगा आस्था व संस्कृति का नया सेतु, जानिए कैसे बदलेगा राजनीतिक समीकरण!

ममता राज में दुर्गा पूजा की पवित्रता से हुआ समझौता…BJP नेता शमीक भट्टाचार्य ने खोली TMC की पोल

देवी तारा

गुप्त नवरात्र:  देवी तारा, जो भगवान शिव की माता के रूप में जानी जाती हैं

Load More

ताज़ा समाचार

India China South China Sea UNCLOS Stand Chinese Ambassador Xu Feihong Global Times Frustrated

साउथ चाइना सी पर भारत के कड़े रुख से बौखलाया ड्रैगन! चीनी राजदूत और ग्लोबल टाइम्स ने उगला जहर, मिला दोटूक जवाब

Vande Mataram 150 Years Celebration Sangeet Natak Akademi National Theatre Festival Artists 2026

4,000+ कलाकार, 450+ संस्थाएं : कश्मीर से कन्याकुमारी 39 भाषाओं में एक साथ गूंजा वंदेमातरम्

Maulana Jarjis Ansari FIR Lucknow Lord Krishna Statement Ayodhya Mahant Vishnu Das Reward

“भगवान कृष्ण मुस्लिम थे…” वाले बयान पर भड़का आक्रोश! मौलाना जर्जिस पर FIR दर्ज, अयोध्या से 10 लाख का इनाम घोषित!

PM Modi Punjab Visit Sant Guru Ravidas Express Vande Bharat Sleeper Dera Sachkhand Ballan Political Equation

पीएम मोदी का पंजाब दौरा: पंजाब और काशी के बीच बनेगा आस्था व संस्कृति का नया सेतु, जानिए कैसे बदलेगा राजनीतिक समीकरण!

ममता राज में दुर्गा पूजा की पवित्रता से हुआ समझौता…BJP नेता शमीक भट्टाचार्य ने खोली TMC की पोल

देवी तारा

गुप्त नवरात्र:  देवी तारा, जो भगवान शिव की माता के रूप में जानी जाती हैं

Explainer। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में क्या खास? 682 सीटें और 10 कोच…75 KM/H की रफ्तार

Explainer: भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप, MODI की टेक क्रांति, बूम पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग

Puri Jagannath Rath Yatra 2026 Crowd Gives Way To Ambulance RSS Volunteers Service Human Corridor

यही है सनातन धर्म: पुरी रथयात्रा में लाखों की भीड़, पलभर में मिला एम्बुलेंस को रास्ता, RSS स्वयंसेवकों ने पेश की मिसाल

Akshay Kumar Donation Tribal Girls Hostel Udaipur Vanvasi Kalyan Parishad Aruna Bhatia Smriti

अक्षय कुमार का बड़ा काम: उदयपुर में माता अरुणा भाटिया के नाम पर बनेगी जनजाति कन्या छात्रावास की इमारत!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies