विदेश/ पाकिस्तान में जनगणनासवालों का अंबार
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विदेश/ पाकिस्तान में जनगणनासवालों का अंबार

Written byArchiveArchive
Sep 18, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 18 Sep 2017 10:56:11

पाकिस्तान में 1998 यानी 19 वर्ष बाद 2017 में जनगणना हुई है। इसकी अंतिम रपट अप्रैल, 2018 तक आएगी। कुछ दिन पहले जो आंकड़े जारी किए गए हैं, उनका जमकर विरोध हो रहा है
 संतोष वर्मा
पाकिस्तान के जनगणना विभाग ने गत दिनों वहां की जनसंख्या के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की आबादी 2077.7 लाख  यानी लगभग 21 करोड़ हो गई है। 1998 के बाद से जनसंख्या में 57 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 1998 से 2017 की अवधि के दौरान वार्षिक वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि खैबर पख्तूनवा, बलूचिस्तान और संघीय प्रशासित वनवासी क्षेत्रों (फाटा) की जनसंख्या वृद्धि दर में तेजी आई है, वहीं दूसरी ओर पंजाब और सिंध में जनसंख्या वृद्धि दर में तुलनात्मक रूप से कमी आई है।
शहरी-ग्रामीण अनुपात में इस्लामाबाद (जो कि देश की दूसरी सबसे शहरीकृत इकाई है) को छोड़कर सभी प्रशासनिक इकाइयों में वृद्धि देखी गई है। सर्वाधिक शहरी आबादी सिंध में निवास करती  है। वहां की 52 प्रतिशत जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करती है और इस प्रकार इसने पाकिस्तान के सबसे अधिक  शहरीकरण वाले इलाके के रूप में इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र को पीछे छोड़ दिया  है।
अंतिम परिणामों के अनुसार लगभग  36.4 प्रतिशत पाकिस्तानी जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करती है। इस जनगणना के अनुसार बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे कम शहरीकरण वाला प्रांत है। उल्लेखनीय है कि 1998 से बलूचिस्तान की जनसंख्या में  लगभग 3.37 प्रतिशत की  औसत वार्षिक वृद्धि हुई है। वहीं दूसरी ओर पंजाब की औसत वार्षिक वृद्धि दर 2.13 प्रतिशत रही, जो पूरे पाकिस्तान में सबसे कम है। जबकि सम्पूर्ण पाकिस्तान की वार्षिक औसत वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत के स्तर पर रही है।
पंजाब में तेजी
इस जनगणना के अनुसार इस बार पाकिस्तान की जनसंख्या में 1998 की जनगणना से 57 प्रतिशत और 1981 की जनगणना से 146.6 प्रतिशत की समग्र वृद्धि हुई। आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान के प्रांतों में पंजाब की जनसंख्या 11 करोड़ के साथ उच्चतम स्तर पर रही, जबकि सिंध इसके बाद  चार करोड़ 70 लाख की आबादी के साथ दूसरे स्थान पर है।  तीन करोड़ की आबादी के साथ खैबर पख्तूनवा तीसरे, और एक करोड़, 20 लाख की आबादी के साथ बलूचिस्तान चौथे स्थान पर है।  संघ शासित क्षेत्र फाटा की जनसंख्या लगभग 50 लाख है, वहीं इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र की आबादी 20 लाख के लगभग है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान में करीब तीन करोड़, 20 लाख घरों में 10 करोड़, 60 लाख पुरुष, 10 करोड़ 10 लाख महिलाएं और 10,418 उभय लिंगी जनसंख्या विद्यमान है। पंजाब सबसे घनी आबादी वाल प्रांत है, जहां  11 करोड़ लोग रहते हैं।
1998 से 2017 तक की सर्वाधिक औसत वार्षिक वृद्धि दर इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में 6.95 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर न्यूनतम औसत वार्षिक वृद्धि दर पंजाब की ग्रामीण आबादी में 1.81 प्रतिशत वृद्धि के रूप में दर्ज की गई।
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार कुल लिंग- अनुपात 105.07 दर्ज किया गया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 103.72 एवं शहरी क्षेत्रों में 107.47 है । खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान का निम्नतम लिंगानुपात दर्ज किया गया था, जिसमें ग्रामीण खैबर पख्तूनख्वा में 101.6 और खैबर पख्तूनख्वा के शहरी क्षेत्रों  में 107.83 दर्ज किया गया। पाकिस्तान में उच्चतम लिंगानुपात इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र  में 111.04 के स्तर पर  मौजूद है; ग्रामीण क्षेत्रों में 108.41, और शहरी क्षेत्रों में आश्चर्यजनक रूप से 113.68 के खतरनाक स्तर तक पर पहुंच गया है। अगर सरल शब्दों में कहें तो प्रति  113.68 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या मात्र 100 है।
इस जनगणना में उभयलिंगी लोगों की संख्या 10,418 बताई गई है। दिलचस्प बात यह है कि ‘फाटा’ के शहरी क्षेत्र में एक भी व्यक्ति उभयलिंगी नहीं पाया गया है। अस्थायी परिणाम वर्ष 1998 की तुलना में जनसंख्या में 57 प्रतिशत की समग्र वृद्धि दिखाते हैं, जबकि 1981 की जनगणना के बाद जनसंख्या में 146.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर और पंजाब और सिंध प्रांत में जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आई है, जबकि खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और ‘फाटा’ प्रांतों में जनसंख्या में वृद्धि देखी गई है।
 जनगणना का इतिहास
पाकिस्तान में 1951 में पहली और 1961 में दूसरी जनगणना हुई थी। राजनीतिक अशांति के कारण 1971 की जगह 1972 में तीसरी जनगणना हुई। 1981 में चौथी और 1991 में पांचवीं जनगणना हुई थी।
पिछली जनगणना 19 वर्ष पूर्व मार्च  1998 में हुई थी। इस जनगणना में सेना ने जनगणना अधिकारियों को सहायता प्रदान की।
छिपा संदेश
चूंकि पाकिस्तान में अगले वर्ष चुनाव होने वाले हैं।  ऐसे में इन आंकड़ों का महत्व और बढ़ जाता है। जनसंख्या के आंकड़े राजनीतिक मानचित्र को नई तरह से परिभाषित कर सकते हैं। संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए भी रणनीति बनाई जा सकती है। इस बार की जनगणना की खास बात यह रही कि लोगों से कहा गया था कि यदि किसी ने गलत जानकारी दी तो उसे छह महीने की जेल और 50,000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।  
जनगणना पर आशंकाएं
विपक्ष ने इस जनगणना को लेकर अनेक गंभीर आशंकाएं व्यक्त की हैं और इसके पक्ष में कुछ तार्किक और उचित कारण भी दिए हैं। सर्वप्रथम, 1998 में कराची की आबादी 98 लाख थी। 19 साल बाद उसकी आबादी लगभग डेढ़ करोड़ हो गई है। यानी कराची की आबादी 2.2 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है। इसका मतलब यह है कि पूरे देश में आबादी 2.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि उसके सबसे बड़े शहर और वाणिज्यिक केंद्र की विकास दर पूरे देश के औसत के मुकाबले कम रही। इसके विपरीत, लाहौर में राष्ट्रीय वृद्धि दर की तुलना में कहीं अधिक वार्षिक वृद्धि दर से अर्थात चार प्रतिशत से भी अधिक तेजी से जनसंख्या में वृद्धि हुई और पिछली जनगणना के बाद से आकार में लगभग दोगुनी हो गई है। यही हाल अन्य प्रांतों का भी है। वहीं उभयलिंगी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों ने जनगणना के परिणामों को खारिज  कर दिया है।
विपक्ष के मुद्दे
पाकिस्तान के लगभग समस्त विपक्षी दलों ने जनगणना के आंकड़ों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ  पीपीपी नेता नवाब यूसुफ तलपुर ने अधिकारियों पर आरोप लगाया हैं कि वे एक पूर्व योजना के तहत गलत आंकड़े जारी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परिणाम मनमाने तरीके से गढ़े गए हैं और और सिंध की आबादी को जान-बूझ कर कम से कम एक करोड़ तक कम कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर पंजाब की आबादी को एक करोड़ तक बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि काउंसिल आॅफ कॉमन इंटरेस्ट (सीसीआई) में पंजाब को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देना इसी षड्यंत्र का हिस्सा था।
  अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के नेता बुशरा गोहर ने भी जनगणना के परिणाम पर असंतोष  व्यक्त किया। उन्होंने 26 अगस्त को ट्वीट करते हुए कहा कि ‘‘अकेले उत्तरी वजीरिस्तान से लगभग 20 लाख पंजीकृत आईडीपी थे। उसके बावजूद ‘फाटा’ की आबादी सिर्फ 5 मिलियन कैसे हो सकती है?’’
एमक्यूएम नेता डॉ फारुक सत्तार ने भी परिणामों को खारिज करते हुए परिणामों को ‘धांधली’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कराची की आबादी को बहुत ही कम दर्शाया गया है। उनके अनुसार कराची की जनसंख्या तीन करोड़ से कम नहीं हो सकती है। पाकिस्तान  तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के एमएनए मुराद सईद ने तात्कालिक परिणामों को बकवास करार दिया है। उन्होंने ट्विटर पर अपनी आशंकाएं व्यक्त करते हुए कहा कि जनगणना के परिणाम के अनुसार 1998 से जनसंख्या में 57 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि नीति तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान, हम 2.05 प्रतिशत जनसंख्या वृद्धि अनुमानों के साथ काम कर रहे थे,  लेकिन इस जनगणना ने बताया कि यह वृद्धि 2.4 प्रतिशत की है।   
मुंह छुपाती  सरकार
पाकिस्तान के मुख्य जनगणना आयुक्त आसिफ बाजवा ने 29 अगस्त को राजनीतिक दलों द्वारा हालिया जनगणना के परिणामों के ऊपर लगा आक्षेपों को नकारते हुए दावा किया कि ‘हर व्यक्ति’ का सत्यापन सुनिश्चित किया गया है। बाजवा ने समिति को बताया कि विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों को जनगणना में शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि अंतिम जनगणना रपट अप्रैल, 2018 तक तैयार की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर सीनेट की समिति ने 1,68,943 विकास खंडों में से एक प्रतिशत में जनगणना के बाद किए जाने वाले सर्वेक्षण की  मांग की है और यह भी कहा है कि  सर्वेक्षण करने वाले विकास खंडों को प्रांतीय सरकारों द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
पाकिस्तान की इस जनगणना से यह तो स्पष्ट है कि इस जनगणना ने जवाब देने की तुलना में प्रश्न अधिक उठाए हैं। इसलिए यह स्वाभाविक है कि इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए जाने चाहिए। सरकार और सेना की विश्वसनीयता भी संदेह के घेरे में है। और पाकिस्तान में यह आम धारणा है कि इस दोषपूर्ण प्रक्रिया जनसंख्या के आंकड़े एक साजिश का परिणाम हैं। इसका उद्देश्य पंजाब प्रांत को अधिक शक्ति प्रदान करना है, भले ही अन्य राज्यों की अनदेखी की जाती रहे। यह दुनियाभर में यह एक सुस्थापित  तथ्य है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार पर पंजाब का वर्चस्व है और रहा है।      ल्ल    

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