काजीरंगा की बाढ़: वरदान या अभिशाप
June 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

काजीरंगा की बाढ़: वरदान या अभिशाप

Written byArchiveArchive
Jul 24, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 24 Jul 2017 12:22:33

अपनी अनठी पारिस्थितिकी के कारण काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। ब्रह्मपुत्र नदी से उद्यान के पोखरों-तालाबों को हमेशा पानी मिलता रहता है, लेकिन हर साल आने वाली बाढ़ यहां रहने वाले असंख्य वन्यजीवों के लिए मुसीबतों के साथ मौत भी लेकर आती है

निधि सिंह
ब्रह्मपुत्र उत्तर-पूर्वी भारत की विशाल और सबसे बड़ी नदी है। अरुणाचल के पहाड़ों से जब यह असम के मैदानी इलाकों में उतरती है तो इसके किनारों को एकसाथ देख पाना संभव नहीं रहता। जोरहाट से उतरते ही ब्रह्मपुत्र के दक्षिण में 430 वर्ग किलोमीटर में फैला एक अनोखा पारिस्थितिक तंत्र है, जिसे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है। इसे 1974 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला और 1985 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित कर दिया।
इस राष्ट्रीय उद्यान की पहचान एक सींग वाले गैंडे की वजह से है। इस उद्यान में गैंड़ों की संख्या करीब 2400 है। खास बात यह है कि इस उद्यान में दुनिया के 70 फीसदी एशियाई जल भैंसें (वाटर बफैलो) भी पाई जाती हैं। साथ ही, काजीरंगा उद्यान में करीब 1,000 हाथी और हिरणों की संख्या 800 के आसपास है। इसके अलावा, यहां पक्षियों की 450 प्रजातियां हैं जो बील (पोखर-तालाबों का स्थानीय नाम) और घास के मैदानों में पाई जाती हैं। इनमें 18 प्रजातियां ऐसी हैं जो दुनिया में दुर्लभ हैं।
अपनी पारिस्थितिकी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों की संख्या अधिक होने के पीछे मुख्य वजह है  यहां की बेहतर संरक्षण योजनाएं। काजीरंगा की एक विशेषता यह भी है कि इस इलाके में बहने वाली ब्रह्मपुत्र की दो सहायक नदियां मोरा धन्सरी और दिफ्लू हर साल इस उद्यान में ब्रह्मपुत्र का पानी लाती हैं। उद्यान में 92 स्थायी और 250 मौसमी पोखरों और तालाबों का जाल है जो एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। मानसून के दौरान सहायक नदियां, जो पानी लाती हैं, उससे इन पोखरों-तालाबों की सफाई भी हो जाती है और इन्हें लबालब भर भी देती हैं। इसलिए यहां पानी की कभी किल्लत नहीं होती। इसके अलावा, उद्यान के उत्तर में बहने वाली ब्रह्मपुत्र हर साल अपने साथ मछलियां भी लाती हैं।
हर साल डूब जाता है दो तिहाई हिस्सा
एक तरफ तो बाढ़ काजीरंगा के लिए वरदान साबित होती है, लेकिन दूसरी तरफ यह अभिशाप भी है। मानसून के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी में जब बाढ़ आती है तो उद्यान का 70-80 फीसदी हिस्सा हर साल डूब जाता है। उद्यान के तीन हिस्सों में 10-12 फीट तक पानी भर जाता है। हालांकि उद्यान में 12 फीट ऊंचे 178 शिविर हैं, जहां से वन विभाग के कर्मचारी सालभर वन्यजीवों की निगरानी करते हैं। लेकिन ज्यादा बारिश होने पर ये शिविर भी डूब जाते हैं या बह जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां साल में दो बार बाढ़ आते हैं। असम में 1998 में जो बाढ़ आई थी, वह बहुत विनाशकारी थी। उस समय काजीरंगा में बड़े पैमाने पर तबाही मची थी, जिसमें 652 जानवरों की मौत हो गई थी। इनमें एक सींग वाले 42 दुर्लभ गैंडे भी थे। इसके बाद 2004 और 2012 में भी ऐसी ही बाढ़ आई। 2012 में एक बार जून-जुलाई में बाढ़ आई और जब तक हालात कुछ संभलते, अगस्त में फिर बाढ़ आ गई। उस समय संजीब बोरा काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक थे। बोरा अभी मुख्य वन संरक्षक हैं। वह कहते हैं, ‘‘बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा खतरा छोटे, वृद्ध एवं शारीरिक रूप से कमजोर जानवरों को होता है। ये तेज बहाव का सामना नहीं कर पाते हैं। हालांकि हाथी और गैंडे अच्छे तैराक होते हैं, लेकिन ब्रह्मपुत्र नदी के तेज बहाव के आगे ये भारी-भरकम जानवर भी नहीं टिक पाते हैं। पिछले साल बाढ़ में एक हाथी बह कर बांग्लादेश चला गया था। काफी कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। दोनों ओर के अधिकारियों को इसका दुख था।’’
‘हाईलैंड्स’ की ऊंचाई बढ़ेगी
पश्चिम से पूर्व की ओर ब्रह्मपुत्र के इस उग्र बहाव से बचने के लिए उद्यान प्रशासन ने 111 हाईलैंड बनाएं हैं, जो औसतन 5-6 एकड़ के फैले हुए हैं। कई जगहों पर इन हाईलैंड्स का दायरा 12 हेक्टेयर तक भी है और ऊंचाई 12 फीट है। एक हाईलैंड पर औसतन 50 विशाल जानवर आसानी से रह सकते हैं। लेकिन बदली हुई परिस्थिति में सामान्यतया जलस्तर 12 फीट से अधिक ही रहता है। इस साल बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उद्यान प्रशासन ने हाईलैंड्स की ऊंचाई 12 फीट से बढ़ाकर 16 फीट करने का निर्णय लिया है। संजीब बोरा कहते हैं, ‘‘बाढ़ के दौरान इन हाईलैंड्स पर आपको एक साथ कई तरह के जानवर दिख सकते हैं। हाथी, गैंडे, हिरण, सांप, गोह मुश्किल घड़ी में एक साथ रहते हैं।’’
जानवरों पर चौतरफा मार
काजीरंगा में बाढ़ के समय तो जानवरों की मौत होती ही है, इसके दक्षिण में स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग भी जानवरों को अपना निवाला बना रहा है। सड़क पार करने के दौरान कई जानवर वाहनों के चपेट में आकर मर रहे हैं। संजीब बोरा के शब्दों में, ‘‘जंगल में तो ‘समर्थ ही बचेगा’ वाला नियम चलता है। इस कारण जानवर अपनी स्मरण शक्ति और ज्ञान से अपना बचाव कर लेते हैं। यह अलग बात है कि बाढ़ के बाद कुछ जानवरों को बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है। कई बार बाढ़ से बचने के लिए गोह, सांप जैसे सरीसृप जीव पेड़ों पर चढ़ जाते हैं, जबकि कुछ आबादी का रुख करते हैं और लोगों के घरों में आश्रय लेते हैं। लोग इन्हें देखकर भयभीत हो जाते हैं और इनकी हत्या कर देते हैं।’’ इनसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष पर वर्षों से काम कर रहे शिमंतो गोस्वामी का कहना है कि उद्यान के लिए सबसे खतरनाक स्थिति इसके अंदरूनी हिस्से में इनसानों की बसावट है। उद्यान के अंदर बसे गांव जानवरों के लिए हमेशा खतरा बने रहते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग 37 तथा पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए बने गेस्ट हाउस, होटल भी इनके लिए खतरा हैं। पूरे इलाके की बड़ी आबादी इसी राजमार्ग पर आश्रित है। हालांकि बाढ़ के दौरान उद्यान प्रबंधन पुलिस की मदद से इस राजमार्ग पर होने वाली आवाजाही को नियंत्रण में रखती है।
अधिकारियों की बड़ी चुनौती
बाढ़ के दौरान काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के सुरक्षा दायरे से निकल कर जब हजारों वन्यजीव कार्बी आंगलोंग के खुले और असुरक्षित इलाके में पहुंचते हैं तब उद्यन के 1100 अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए हालात नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं। प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए ऊंची पहाड़ियों पर शरण लेने वाले ये वन्यजीव स्थानीय जनजातीयों के निशाने पर आ जाते हैं। ये जनजातियां खासकर हिरणों का शिकार करते हैं और वन विभाग के कर्मचारी चाह कर भी उन्हें शिकार करने से रोक नहीं पाते।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की खासियत इसके पारिस्थितिक तंत्र के कारण हैं। यहां रहने वाले असंख्य वन्यजीव इसी पर आश्रित हैं। ब्रह्मपुत्र नदी इसके लिए जीवनदायिनी है तो वही इसके लिए काल भी है, जो हर साल अपना विकराल रूप दिखाती है। जब तक इस उद्यान का पारिस्थितिक तंत्र कायम रहेगा, तभी तक यह वन्यजीवों का घर रहेगा। इसलिए जरूरी है कि इस क्षेत्र में इनसानों का दखल नियंत्रित किया जाए। की।    ल्ल

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Mamata Banerjee

ममता बनर्जी का दिया न गिफ्ट चाहिए न कपड़ा, वैद्यनाथ घोष लौटाएंगे उपहार में मिली चीज़ें , जानिए क्यों हैं नाराज?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

India on Iran-US Deal: अमेरिका-ईरान शांति समझौता का PM मोदी ने किया स्वागत

Varanasi buldozer action

वाराणसी: दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण में 5 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर, 180 से ज्यादा निर्माणों पर कार्रवाई जारी

प्रतीकात्मक चित्र

हौसले की उड़ान को हथियारों के पंख

Punjab drugs

पंजाब में नशे का आतंक, घरों पर ‘एह मकान विकाऊ है’ के पोस्टर लगे

प्रतीकात्मक तस्वीर

बदल गया भारतीय सेना का लुक! खत्म हुआ औपनिवेशिक दौर का ड्रेस कोड, जानिए क्या-क्या बदला?

Load More

ताज़ा समाचार

Mamata Banerjee

ममता बनर्जी का दिया न गिफ्ट चाहिए न कपड़ा, वैद्यनाथ घोष लौटाएंगे उपहार में मिली चीज़ें , जानिए क्यों हैं नाराज?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

India on Iran-US Deal: अमेरिका-ईरान शांति समझौता का PM मोदी ने किया स्वागत

Varanasi buldozer action

वाराणसी: दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण में 5 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर, 180 से ज्यादा निर्माणों पर कार्रवाई जारी

प्रतीकात्मक चित्र

हौसले की उड़ान को हथियारों के पंख

Punjab drugs

पंजाब में नशे का आतंक, घरों पर ‘एह मकान विकाऊ है’ के पोस्टर लगे

प्रतीकात्मक तस्वीर

बदल गया भारतीय सेना का लुक! खत्म हुआ औपनिवेशिक दौर का ड्रेस कोड, जानिए क्या-क्या बदला?

उन्नाव साधु हत्याकांड: मुख्य आरोपी इसराइल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया

IIT Bhuvaneshwar AI Model

Explainer: बादल फटने से होने वाली तबाही से बचाएगा नया AI मॉडल, जानिए कैसे करता है काम?

Pakistan propaganda fake news

पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा अकाउंट्स भारतीय सेना के अधिकारी के नाम पर फैलाया झूठ: PIB Fact Check ने खोली पोल

फराज, नईम और शाकिर

फराज, नईम और शाकिर: तीन दिन में तीन गिरफ्तारियां, एटीएस ने ऐसे खोली संदिग्ध नेटवर्क की परतें

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies