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11जून, 2017
आवरण कथा ‘बोलने लगा भारत’ से स्पष्ट है कि आज इंटरनेट के चलते भारतीय भाषाओं का दायरा बढ़ा है और इन्हें प्रयोग करने वाले बढ़चढ़कर उसी भाषा में अपनी बात रख रहे हैं। इससे इंटरनेट की दुनिया में एक परिवर्तन आया है और बड़ी-बड़ी कंपनियों को बदलना पड़ रहा है।
—अनिरुद्ध गंगवार, सतना(म.प्र.)
आम व्यक्ति अब अपनी बात को उसी भाषा में कह रहा है, जिसमें वह पारंगत है। चाहे बात बाजार की हो या नौकरी की। इंटरनेट की दुनिया ने भारतीय भाषाओं के बढ़ते उपभोक्ताओं को देखते हुए अपने नए वेब संस्करण बाजार में उतार दिए हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में इंटरनेट पर और दु्रत गति से भारतीय भाषाओं की स्थिति मजबूत होगी।
—दिनेश राठौर, लाजपत नगर(नई दिल्ली)
उन्माद के अड्डे
रपट ‘सलाफी सोच और घाटी में अलगाववाद’ उन तथ्यों से पर्दा हटाती है जिन्हें सेकुलर मीडिया दबाए रहता है और सच को देश के सामने नहीं आने देता है। यह पाखंड और दोमुंहापन है। गौर किया जाए तो आज घाटी में तेजी के साथ मस्जिदों, मदरसों में वृद्धि हो रही है, जहां सिर्फ और सिर्फ कट्टरपंथ की पाठशाला चलती है। यहां बच्चों के मन में कथित उन्मादी भावनाएं भरी जाती हैं जिनका वे आएदिन घाटी में प्रदर्शन भी करते रहते हैं। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
—मनोहर मंजुल, प.निमाड(म.प्र.)
समाज में आज एक नया वैचारिक प्रदूषण फैल रहा है—अपने को मानवतावादी कहलाने का। लेकिन ये सभी लोेग जो अपने को मानवतावादी कहते हैं, तब कहां गायब हो जाते हैं जब कश्मीर में सेना के जवानों पर पत्थर और गोलियां बरसाई जाती हैं, सरेआम बंगाल में सैकड़ों हिन्दुओं के घरों को आग लगा दी जाती है, मदिरों को तोड़ा जाता है? दरअसल ऐसे सभी लोग पाखंड करते हैं। समाज को इन कथित मानवतावादियों से सचेत रहना होगा और उनका मुंहतोड़ जवाब देना होगा।
—प्रभात, लखनऊ(उ.प्र.)
कश्मीर के संबंध में चीन और पाकिस्तान सदैव से इस मामले को और पेचीदा बनाए रखने के लिए आग को हवा देने के काम में लिप्त हैं। जब भी वहां कुछ होता है,वे विश्वस्तर पर इसका राग अलापने लगते हैं और कश्मीरियों की बात करके उनकी सहानुभूति बटोरने की कोशिश करते हैं। विडम्बना ही है कि अभी तक कश्मीर के लोग भटके अलगाववादियों के झांसे में आ जाते हैं, जो कश्मीर का अहित ही कर रहे हैं। लेकिन अब देश की जनता इस मामले का हल चाहती है और उन देश विरोधी ताकतों के विरुद्ध कार्रवाई होते देखना चाहती है।
—रामकृष्ण, मेल से
कश्मीर पर गोपाल गांधी ने यह कहा था
कांग्रेस की अगुआई में लगभग 60 फीसद विपक्षी दलों ने गोपाल कृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद हेतु प्रत्याशी चुना है। उन्होंने 10 अक्तूबर, 2016 को एक अंग्रेजी दैनिक(द हिन्दुस्तान टाइम्स) में कश्मीर पर अपने विचार रखे थे। उस लेख के दो अंश कुछ इस तरह हैं- ‘‘भारत के लोगों का यह सोचना, कि कश्मीर हमारा हिस्सा है, ने कश्मीरियों को भारत के खिलाफ एकजुट कर दिया है।’’ दूसरा अंश-‘‘भारतीय सेना के कारण कश्मीरी स्वयं को गुलाम कैदी के समान महसूस करते हैं।’’ इन दोनों कथनों से यही निष्कर्ष निकलता है कि उनकी नजर में कश्मीर घाटी और वह भी उसके मात्र पांच आतंक त्रस्त जिले ही संपूर्ण कश्मीर हैं। जम्मू-लद्दाख तथा शेष घाटी का तो कोई वजूद ही नहीं है। दरअसल गांधी पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। यह प्रवृत्ति खतरनाक है। साफ बात ये है कि गांधी पाकिस्तान की ही जबान बोल रहे हैं। सोनिया, राहुल, शरद यादव, अखिलेश, मायावती आदि तमाम विपक्षी नेता, जो गांधी का समर्थन कर रहे हैं, अविलंब कश्मीर संबंधी गांधी के विचारों पर अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक करें। देश जान ले कि जिन गांधी का उन्होंने उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित किया है, उनके कश्मीर पर क्या विचार हैं।
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