| दिंनाक: 29 May 2017 15:14:14 |
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-आशीष कुमार अंशु
पिछले दिनों नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में मीडिया स्कैन द्वारा 'वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय पत्रकारिता' सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें पत्रकारिता एवं लेखन क्षेत्र से जुड़े अनेक वरिष्ठ लोगों ने भाग लिया।
बस्तर संभाग के पूर्व आईजी एसआरपी कल्लूरी ने अपने वक्तव्य में कहा, ''आईबी रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ बस्तर से 1,100 करोड़ रुपए की उगाही होती है। पर यह सारा पैसा उन नक्सलियों के पास नहीं जाता जो जंगल में रहकर लड़ते हैं या फिर बंदूक चलाते हैं। यह पैसा इनके शहरी नेटवर्क, एनजीओ और यहीं से कथित मानवाधिकारों की वकालत करने एवं शैक्षिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के पास जाता है। ये सभी कहते हैं कि हम यह पैसा 'समाजसेवा' पर खर्च करते हैं। पर ऐसे लोग एक भी ऐसा परिवार पूरे बस्तर में नहीं दिखा सकते जिसका उद्धार इनकी वजह से हुआ हो। यह पैसा नक्सलियों के मुकदमे लड़ने में खर्च किया जाता है। जहां-जहां ऐसे लोग पहुंचना शुरू करते हैं, वहां सुरक्षा बलों पर बलात्कार, डकैती और हत्या के आरोप लगाते हैं।''
हालांकि सेकुलर मीडिया एवं मुट्ठीभर वामपंथियों ने कल्लूरी के संस्थान में आने और कार्यक्रम के शुभारंभ में हवन-पूजन करने को लेकर विरोध किया लेकिन वह सब निरर्थक साबित हुआ। सेमिनार के उद्घाटन सत्र में दिल्ली प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. योगेश सिंह, जनजातीय समाज के बीच झारखंड में काम करने वाली संस्था विकास भारती के संस्थापक अशोक भगत और हरिद्वार में कुष्ठ रोगियों के बीच लंबे समय से काम कर रही संस्था दिव्य ज्योति सेवा मिशन के प्रमुख आशीष गौतम उपस्थित रहे।
इस मौके पर अशोक भगत ने कहा कि आज की रिपोर्टिंग की वजह से जनजातीय लोग और नक्सली पर्यायवाची बना दिए गए हैं। दिल्ली में बैठे लोगों की नजर में जनजातीय लोगों का अलग से कोई अस्तित्व ही नहीं है। डॉ. योगेश सिंह ने अपने वक्तव्य में भारतीय शिक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
संस्थान के महानिदेशक के.जी सुरेश ने मीडिया के अंदर स्वच्छन्दता में बदलती स्वतंत्रता के प्रति चिन्ता जाहिर की। फायनेंशियल क्रॉनिकल के संपादक के.ए बदरीनाथ, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि. में प्राध्यापक डॉ. अरुण भगत, हरियाणा सरकार में सूचना आयुक्त भूपेन्द्र धरमानी और दिल्ली सरकार में अधिकारी नलिन चौहान ने भी विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखे। एक सत्र में जवाहर लाल नेहरू विवि. के सहायक प्रोफेसर डॉ. बुद्ध सिंह ने जेएनयू के अंदर अंदर चल रहे अपराधों पर बात की जिस पर अब देशव्यापी चर्चा होने लगी है। उन्होंने अपने भाषण में यह भी बताया कि कैसे वामपंथी प्रोफेसर और छात्र वामपंथ अपराध पर पहरेदारी करने का काम यहां करते हैं।
जम्मू-कश्मीर से जुड़े सत्र में वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री श्री जवाहर लाल कौल, जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र के निदेशक श्री अरुण कुमार और सेवानिवृत्त कर्नल जयबंस सिंह मौजूद थे। सत्र को संबोधित करते हुए श्री अरुण कुमार ने कहा कि कश्मीरियत शब्द को दिमाग से निकाल देना चाहिए। हमारी अपनी संस्कृति है, हमारे कुछ मूल्य हैं जो जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, कच्छ से लेकर कामरूप तक समान रूप से प्रवाहित हैं। जम्मू-कश्मीर उससे अलग नहीं है। वहीं पद्मश्री जवाहर लाल कौल ने कहा कि घाटी में एक ही खबर को सभी अखबार और चैनल दिखाने को बाध्य हैं। वहां खोजी खबर के लिए कोई जगह नहीं है। यह सब अलगाववादियों के दबाव में होता है। कर्नल जयबंस सिंह का कहना था कि जम्मू-कश्मीर के बिगड़ते हालात के लिए समाचार पत्र भी जिम्मेदार हैं। श्री सिंह ने सवाल उठाया कि डीएवीपी का विज्ञापन आता नहीं। राज्य सरकार बहुत कम विज्ञापन देती है, फिर इतने सारे समाचार पत्र चल कैसे रहे हैं? ये किसकी मदद से बचे हुए हैं? अंतिम सत्र इतिहास पुनर्लेखन से जुड़ा था। इसमें प्रमुख रूप से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास से अतुल कोठारी, दिल्ली इंस्टीट्यूट फॉर हेरिटेज मैनेजमेंट से आनंद वर्धन, भाषाविद् प्रमोद दुबे और प्रसिद्ध इतिहासकार कुसुम लता केडिया उपस्थित रहीं। ल्ल