‘हमने अपने महान पुरखों को भुला दिया है’
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‘हमने अपने महान पुरखों को भुला दिया है’

Written byArchiveArchive
May 22, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 22 May 2017 12:17:24

‘उत्तर प्रदेश सरकार महाराजा सुहेलदेव, लखनऊ  के महाराजा लाखन पासी, महारानी लक्ष्मीबाई और महारानी झलकारी बाई समेत जिन महापुरुषों का देश के उत्थान में योगदान रहा, उन्हें पुस्तकों में शामिल करेगी और हमने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।’ उक्त वक््तव्य  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरक्ष पीठाधीश्वर श्री योगी आदित्यनाथ ने दिया। वे गत दिनों विश्व हिन्दू परिषद द्वारा महाराजा सुहेलदेव के विजयोत्सव पर लखनऊ के कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने राजनीतिक स्वार्थों के लिए भारत के वास्तविक इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया और जान-बूझकर सच को दबाकर रखा। आजादी के बाद से ही यह शरारत शुरू हो गयी थी। महाराज सुहेलदेव महान थे। उन्होंने आस-पास के 27 राजाओं को संगठित कर सैय्यदी सालार मसूद की तीन लाख की सेना को मौत के घाट उतारा था। इसके बावजूद इतिहास में जो सम्मान महाराजा सुहेलदेव को मिलना चाहिए, वह नहीं मिला। महापुरुषों की प्रेरणा ही देश व धर्म की रक्षा कर पाती है और समाज को एक दिशा देती है। हमने अपने महान पुरखों को भुला दिया है और इसका परिणाम भी समाज को भुगतना पड़ा है। जो लोग गजनी, गोरी, बाबर और अलाउद्दीन खिलजी के साथ अपना संबंध जोड़ेंगे, उनके लिए यहां कोई स्थान नहीं है। इस मौके पर प्रमुख रूप से उपस्थित विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री श्री विनायक राव देशपाण्डे ने कहा कि एक हजार साल पहले भारत में जातियां नहीं थीं। 12 वीं सदी के बाद जातियों का उल्लेख मिलता है। इससे पहले के किसी भी साहित्य में जातियों का जिक्र नहीं आता। पांच सौ साल पहले जो क्षत्रिय थे, वे आज अनुसूचित जाति के कैसे हो गये? आज जो अनुसूचित जाति के लोग हैं, वे धर्मयोद्धा हैं। वे मुगलों से संघर्ष में जब परास्त हुए तो उन्होंने गंदगी उठाना स्वीकार किया, लेकिन धर्म नहीं छोड़ा।     ल्ल प्रतिनिधि
भारतीय पंथों से घृणा की प्रवृत्ति खतरनाक
‘जो भारतीय मत-संप्रदाय (कबीरपंथी-दादूपंथी-रामानंदी आदि) हैं, उनमें कोई टकराव नहीं है और उनसे कोई खतरा भी नहीं। लेकिन जो बाहर से मत-पंथ भारत में आये, वे दूसरे धर्म-संप्रदायों को हेय व त्याज्य मानते हैं। यहां तक कि उन्हें मिटा देना चाहते हैं, यह प्रवृत्ति खतरनाक है।’’ उक्त बातें राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह ड़ॉ. कृष्ण गोपाल ने कहीं। वे अखिल भारतीय संस्कृति समन्वय संस्थान, जयपुर एवं मानसरोवर स्थित संस्कृति कॉलेज द्वारा संस्कृति कॉलेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि दो ऐसे मत-मजहब हैं जिनकी जनसंख्या बढ़ने पर चिंता होती है। ऐसे ही आजादी के पश्चात इंदिरा गांधी ने भी कन्वर्जन पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। अन्य मत सभी मतों का सम्मान करते हैं। प्रत्येक भारतीय मत समुदाय में सामंजस्य की स्थापना की कोशिश करता है, जो ऐसा नहीं करता। वह अभारतीय है। आज हिन्दुस्थान में अधिकतम मुस्लिमों-ईसाइयों के पूर्वज हिन्दू थे, यदि इन लोगों को अपने पूर्वजों की जानकारी प्राप्त हो जाए तो वे पुन: हिन्दू धर्म के प्रति जागृत हो जाएंगे।    ल्ल प्रतिनिधि
‘संघ को समझना है तो प्रत्यक्ष कार्य करना पड़ेगा’

नागपुर के रेशिमबाग स्थित डॉ़ हेडगवार स्मृति भवन परिसर के महर्षि व्यास सभागृह में तृतीय वर्ष, संघ शिक्षा वर्ग का पिछले दिनों शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले की गरिमामय उपस्थिति रही। प्रथम सत्र में उन्होंने कहा कि संघ से जुड़ने के पश्चात् सभी स्वयंसेवक स्वप्न देखते हैं कि संघ शिक्षा, तृतीय वर्ष पूर्ण की जाए। परन्तु यह सौभाग्य सभी को प्राप्त नहीं होता। लाखों स्वयंसेवकों में से चुने हुए हजार स्वयंसेवक ही इस साधना के पुजारी बन पाते हैं। यह वर्ग इसलिए भी खास है क्योंकि नागपुर की इसी भूमि से आद्य सरसंघचालक डॉ़ हेडगेवार जी ने संघ कार्य को अवतरित किया और पूज्य गुरु जी की तपस्या यहां के कण-कण में व्याप्त है। संघ को यदि जानना है तो संघ के विषय में किताबें पढ़ना, किताबें लिखना, अनुसंधान करना पर्याप्त नहीं है। संघ को जानना-समझना है तो संघ का प्रत्यक्ष कार्य करना पड़ेगा। उन्होंने कहा संघ का वर्ग कोई इवेंट मैनेजमेंट नहीं है, इस वर्ग के क्षण-क्षण को, कण-कण को अपने अंतर्मन में समाहित कर स्वयंसेवकत्व की अनुभूति करें, ऐसे प्रशिक्षणों से हम शारीरिक के साथ-साथ वैचारिक रूप से भी मजबूत होते है। ये राष्टÑ क्या है? हिन्दू राष्ट्र क्या है? संघ का कार्य, क्यों, कैसे? ऐसे अन्यान्य मूल प्रश्नों का निराकरण प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से होता है। शरीर तो स्वस्थ है, पर अपने मन को भी स्वस्थ, चुस्त और संवेदनशील बनाने की साधना यह प्रशिक्षण वर्ग है। उन्होंने कहा कि अलग भाषा, अलग पहनावा, अलग खानपान, पर फिर भी एक हो कर, राष्टÑ के लिए समर्पित हो कर, जब आप यह प्रशिक्षण पूर्ण करेंगे तो आप स्वत: ही अखिल भारतीय व्यक्तित्व  बन जाते हैं। परिवर्तनशील भारत में आज भी जीवन मूल्यों को आखिर कैसे संरक्षित रखा जा सकता है, इस पर कई देश आश्चर्यचकित हैं, कुछ शोध कर रहे हैं। सम्पूर्ण विश्व की नजर संघ पर है। यह एक राष्टÑीय अभियान है और इसी कड़ी में आप इस वर्ग का हिस्सा बन कर अलग-अलग स्तर पर अपने व्यक्तित्व का निर्माण करेंगे। तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण वर्ग का यह कालखंड आप शिक्षार्थियों के जीवन का स्वर्णिम कालखंड बने और यह साधना करके आप राष्टÑहित में उपयोगी सिद्ध हों और अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते रहें।
‘कड़े कदम उठाए केरल प्रशासन’
केरल के कन्नूर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की कम्युनिस्ट गुंडों द्वारा हत्याओं का सिलसिला लगातार जारी है। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक और स्वयंसेवक कक्कमपारा मंडल कार्यवाह चूराकुड्डू बीजू को पहले अगवा किया गया, फिर बाद में उनकी नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। दरअसल बीजू पहले से ही कम्युनिस्ट हत्यारों के निशाने पर थे और लंबे समय से उनके खिलाफ राजनीति षड्यंत्र चलाया जा रहा था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बीजू की हत्या की भर्त्सना करता है। रा.स्व.संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन वैद्य की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि केरल में जो भी चल रहा है, उसे पूरी तरह से सरकार का संरक्षण प्राप्त है। साथ ही केरल का प्रशासन इन हत्यारों पर जिस तरह से खामोश है, उससे उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मांग करता है कि प्रशासन सभी हत्याओं पर तत्काल कड़ा कदम उठाए और पूरे कन्नूर में शांति व्यवस्था का वातावरण स्थापित करे।     प्रतिनिधि

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