आवरण कथा : भारी पड़ेगी चाल
June 17, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

आवरण कथा : भारी पड़ेगी चाल

Written byArchiveArchive
Apr 17, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 17 Apr 2017 15:14:44

 

 

ज्ञानेन्द्र बरतरिया

'मैं पाकिस्तान में भारत का जासूस था'— मोहनलाल भास्कर की यह आत्मकथा हम में से कई लोगों ने पढ़ी होगी। इस आत्मकथा का एक वाकया ध्यान देने लायक है। मोहनलाल भास्कर को जब पाकिस्तान में ट्रेन से एक शहर से दूसरे शहर ले जाया जा रहा था, तो हर स्टेशन पर भारी भीड़ महज इस कारण उन्हें टोंचने और नोंचने के लिए उमड़ पड़ती थी कि कोई हिन्दुस्थानी हाथ लग गया है। आप पाकिस्तान में भारत के जासूस हों या न हों, अगर आप भारत के हैं और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के हत्थे लग गए हैं, तो आपका कत्ल होने के लिए इतना ही काफी है।

पाकिस्तानी फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने कुलभूषण जाधव को फांसी की जो सजा सुनाई है, यह उसी भेडि़यों के झुंड की मानसिकता की अभिव्यक्ति है जो तथाकथित सभ्य और पढ़े-लिखे पाकिस्तानी हैं। वे भी सारा सच समझने के बावजूद अपनी फौज की हरकत पर ऐसे खुश हो रहे हैं, जैसे गिरफ्त में आए हुए एक रिटायर्ड व्यक्ति पर जुल्म ढाने में ही सारी बहादुरी होती है।

यह वह पाकिस्तान है, जिसकी अदालत मजबूरी के सिद्घांत जैसा सिद्घांत खोज निकालती है। सिविल कोर्ट। और वह भी सुप्रीम कोर्ट। और इस सिद्घांत के नाम पर वह सैनिक तख्तापलट को सही ठहरा देती है। यह वह पाकिस्तान है, जिसकी सुप्रीम कोर्ट के सारे जज एक तानाशाह के हुक्म पर प्रॉवीजनल कांस्टीट्यूशनल आर्डर के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं और फिर ईमान की दुहाइयां देते हैं।

और कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा पाकिस्तानी फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने सुनाई है। कोढ़ पर खाज। उस पर भी सजा कुलभूषण जाधव के कबूलनामे के आधार पर सुनाई गई है। और यह कबूलनामा एक शीर्ष पूछताछ दस्ते ने साल भर यातनाएं देकर करवाया है। यह दस्ता यातनाएं देने का विशेषज्ञ है।

सच क्या है? किन हालात में कबूलनामा हुआ? सब गोपनीयता की परतों में छुपा है। यही कारण है कि कबूलनामे पर आधारित फैसलों को दुनिया में कहीं भी स्वीकार नहीं किया जाता है।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान कुलभूषण जाधव के जिस कबूलनामे का हवाला लगातार दे रहा है, उसमें भी कई बार बातें एक दूसरे के विपरीत गई हैं। एक वीडियो में उन्हें यह कहते हुए दिखाया गया है कि वह भारतीय नौसेना से 2022 में रिटायर होंगे। कोई भी खुफिया एजेंसी किसी सेवारत अधिकारी को इस तरह के काम नहीं सौंपती है। इसी तरह की कुछ अन्य विसंगतियां हैं, जो साफ दिखाती हैं कि यह कथित कबूलनामा गढ़ने में पाकिस्तान से कई बार गलतियां हुई हैं।

पाकिस्तान का कहना है कि उसने कुलभूषण जाधव को पिछले वर्ष 3 मार्च को बलूचिस्तान के चमन इलाके से गिरफ्तार किया था (हालांकि जाधव के परिवार का कहना है कि इसके तीन महीने पहले से जाधव से उनकी बात नहीं हो पा रही थी)। दिसम्बर में खुद पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने पाकिस्तान की सीनेट के सामने कहा था कि कुलभूषण जाधव के खिलाफ सबूत के तौर पर पाकिस्तान के पास कुछ नहीं है, जो है, वह सिर्फ उनके बयान हैं।

दरअसल पाकिस्तान के पास (कब्जे में) कुलभूषण जाधव थे, और यही उसके लिए काफी था। भारतीय सूत्रों का लगातार कहना रहा है कि कुलभूषण जाधव ईरान में व्यापार करते थे, और तालिबान का एक गुट उनका अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान के बलूचिस्तान ले आया था, जहां उन्हें आईएसआई के हवाले कर दिया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान दुनिया के हरेक मंच पर कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी का राग अलापता रहा है। कुलभूषण जाधव 

के पास भारतीय पासपोर्ट था, विएना कन्वेंशन और द्विपक्षीय संधि के अनुसार भारतीय दूतावास को कुलभूषण जाधव से मिलने से नहीं रोका जा सकता, लेकिन पाकिस्तान ने इसकी अनुमति कभी नहीं दी। अचानक एक दिन खबर आई कि पाकिस्तानी कोर्ट मार्शन ने, जिसकी सुनवाई के बारे में किसी को कुछ अता-पता नहीं है, कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुना दी है, और पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने इस सजा की पुष्टि भी कर दी है।

अभी कुछ वर्ष पहले ही अमेरिका के एक पूर्व सैनिक रेमंड डेविस को पाकिस्तान ने तब पकड़ा था, जब डेविस ने उसे जान से मारने की कोशिश करने वाले दो पाकिस्तानियों को लाहौर में गोली से उड़ा दिया था। फिर क्या हुआ? पाकिस्तान ने इस्लाम के किसी कानून का हवाला देते हुए, करीब बीस लाख डॉलर ले कर डेविस को रिहा कर दिया था। पूर्व सोवियत संघ और अमेरिका के बीच तनाव के चरम दिनों में भी एक दूसरे के पकड़े गए लोगों की अदला-बदली करना एक आम बात थी।

लेकिन कुलभूषण जाधव का मामला और संगीन नजर आ रहा है। पाकिस्तान किस आग से खेल रहा है, यह साफ नजर आ रहा है। लेकिन यह अभी बहुत साफ नहीं है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। रक्षा क्षेत्र और पाकिस्तान के विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर उभरते कुछ संभावित परिदृश्यों पर विचार करें –

ल्ल  बलूचिस्तान : बलूचिस्तान में भारी पैमाने पर नरसंहार कर रही पाकिस्तानी सेना ने कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी बलूचिस्तान से दर्शायी थी। सबसे पहले बलूचिस्तान के ही नेताओं ने यह स्पष्ट किया था कि बलूचिस्तान से ऐसी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। कुलभूषण जाधव को फांसी की खुली घोषणा करने के तुरंत बाद बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का दमन चक्र तेज होना कई संकेत दे रहा है।

ल्ल  विदेशी इशारा : जिस तत्परता से पाकिस्तानी सेना ने अपने ही लाडले सरताज अजीज की बातों पर पानी फेरा है, जिस तत्परता से जनरल कमर जावेद बाजवा ने जाधव को मृत्यु दंड देने की मंजूरी दी है, उससे एक सवाल उठा है। क्या पाकिस्तानी फौज अब खुद-मुख्तार नहीं रह गई है? क्या वह किसी और देश के इशारे पर काम कर रही है? ऊपर लिखे बलूचिस्तान के पहलू को फिर से देखें, यह ध्यान करें कि ग्वादर से लेकर चीन की सीपीईसी (चीनी आर्थिक गलियारा) तक सब अशांत बलूचिस्तान में ही पड़ते हैं, तो इशारा काफी हो जाता है।

ल्ल  अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही इस्रायल की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। सीरिया की स्थिति नाजुक बनी हुई है। पाकिस्तानी सेना एक व्यापक सुन्नी सैनिक गठजोड़ का नेतृत्व करने की दिशा में बढ़ रही है। ऐसे में एक तरफ पाकिस्तान के सामने यह बाध्यता बन रही है कि वह भारत के खिलाफ एक बेहद उत्सुक प्यादे के रूप में अपनी उपयोगिता दुनिया के आगे पेश करे। दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के सामने यह मजबूरी बन रही है कि वह नवाज शरीफ सरकार को भारत के साथ संबंध सुधारने का मौका न दे, जो कि इन नाजुक दिनों में नागरिक सरकार के लिए आसान हो सकता है। 

ल्ल  भारत पर दबाव : पाकिस्तान के कब्जे में इस समय भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक हैं। यही स्थिति भारत की भी है। लेकिन कुलभूषण जाधव का वीडियो पेश करके, उसे भारत के बेहद उतारू टीवी चैनलों पर पेश करवा कर और एक भारतीय को बिना सबूत फांसी देने की बात करके उसने भारत के भीतर वह वातावरण स्थापित कर लिया है, जिसमें भारत सरकार के सामने कुछ न कुछ करने का प्रत्यक्ष जनदबाव बने। वह दबाव देखा भी जा सकता है। संसद में सरकार ने वादा किया है कि वह कुलभूषण जाधव को छुड़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। ऐसे में सौदेबाजी में पाकिस्तान की स्थिति मजबूत हो जाती है। उसे पहले से पता है कि अब भारत सरकार कुलभूषण जाधव को छोड़ने के अलावा कोई और मांग नहीं रख सकेगी, जबकि इसके एवज में पाकिस्तान कुछ ऐसी मोटी वसूली कर सकेगा, जिसको लेकर पाकिस्तान की सरकार पर कोई जनदबाव फिलहाल नहीं है। यहां तक कि जिस पाकिस्तानी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल के नेपाल के लुम्बिनी से गायब होने की बात मीडिया में आ रही है, भारत ने ऐसा कुछ नहीं किया है कि वह शख्स मीडिया के जरिए पाकिस्तान सरकार, वहां की जनता या फौज के लिए कोई बड़ा मसला बन सके।

जो भी हो, जाधव फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे में है, और भारत सरकार उन्हें छुड़ाने के लिए भारी आंतरिक राजनीतिक दबाव में है। कमांडर स्तर पर रहे पूर्व अधिकारी जमीनी स्तर के जासूसों का काम नहीं करते। करें, तो भी अपना पासपोर्ट और ईरान का वीजा हाथ में लेकर नहीं चलते। और कम से कम ईरान का वीजा लेकर पाकिस्तान नहीं पहुंच जाते हैं।

माने, झूठ की लंबी दीवारें पाकिस्तानी सेना ने खड़ी की हुईं हैं। ये दीवारें पाकिस्तानी सेना को किस खतरे से बचा सकेंगी, यह देखने लायक बात होगी। ऐसा मानने के कई कारण हैं। भारत ने कई स्तर की हवाई सुरक्षा सुनिश्चित कर ली है या करता जा रहा है। माने, पाकिस्तान की कोई भी सैनिक धमकी, परमाणु धमकी भारत पर काम नहीं कर सकेगी। उधर, याद करें, चाबहार बंदरगाह को लेकर रूस से लेकर अमेरिका तक सारी ताकतों ने भारत का समर्थन किया है। इसका अर्थ यह हुआ कि बलूचिस्तान को लेकर पाकिस्तान का जो भी दाव उसके मन में रहा होगा, उसे वह सिरे नहीं चढ़ा सकेगा। तीसरे, जाहिर तौर पर पाकिस्तान का यह दाव इस धारणा पर आधारित रहा होगा कि अमेरिका का ट्रम्प प्रशासन ढुलमुल बना रहेगा, (उस समय तक) शी जिंगपिंग की अमेरिका यात्रा से चीन अमेरिका पर असर डालने में सफल रहेगा ही और ऐसे में उसे भारत के खिलाफ एक मोर्चा खोलने की एक अनुकूल सुविधा मिल सकेगी। लेकिन ये पंक्तियां लिखे जाने तक अफगानिस्तान की पाकिस्तान सीमा पर, अमेरिका ने जीबीयू-43 बम गिराया है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल बम्ब्स' कहा जा रहा है। माने, पाकिस्तान अगर अफगानिस्तान में अमेरिकी शिथिलता पर भरोसा करके बैठा हुआ था, तो उसका भरोसा विश्व इतिहास के सबसे बड़े बम ने ध्वस्त कर दिया है। इसकी धमक पाकिस्तान तो पाकिस्तान , चीन को भी सुनाई दे गई होगी। दूसरे शी जिंगपिंग की अमेरिका यात्रा उन दोनों देशों के परस्पर संबंधों के लिहाज से लगभग बेमानी रही है, और बाकी कसर चीनी एजेंसी शिन्हुआ की बेसिरपैर की टिप्पणियों और चीन के पिछलग्गू देश उत्तरी कोरिया की गीदड़ भभकियों ने पूरी कर दी है। ऐसे में अमेरिका का नया निजाम अब सैनिक तौर-तरीके इस्तेमाल करता नजर आने लगा है, और अफगानिस्तान में बढ़ रही अमेरिकी सक्रियता की धमक से पाकिस्तान नहीं बच सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम तौर पर, पाकिस्तान के सामने मनमोहन सिंह नहीं, नरेन्द्र मोदी हैं। पाकिस्तान के फौजी सरदार चालाक भले ही हों, कायर जरूर हैं। उनका मुकाबला भारत के उस सुरक्षा प्रतिष्ठान से है, जो पाकिस्तान में घुसकर पाकिस्तान को सबक सिखाना जानता है। उसके पास क्षमता और इरादा दोनों हैं। शी जिंगपिंग की अमेरिका यात्रा नाकाम रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस्रायल यात्रा की सफलता की इबारत यात्रा के पहले ही लिखी जा चुकी है। जाधव का दाव खेलकर पाकिस्तान अपने ही जाल में फंस चुका है।      ल्ल

सच से डर रहा है पाकिस्तान

कुलभूषण जाधव मामले में सच बोलने के बजाय पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति सरकार का बचाव करते दिखे। एक न्यूज चैनल से बातचीत में पहले तो उन्होंने कहा कि कुलभूषण को जो सजा मिली है, उसके खिलाफ वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि सुनियोजित तरीके से नौसेना के इस पूर्व अधिकारी की हत्या का षड्यंत्र रचा जा रहा है तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यह पूछने पर कि पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा था कि कुलभूषण के खिलाफ उनके पास कोई सबूत नहीं है। ऐसे में अचानक फांसी की सजा देना कहां तक जायज है? इस पर उन्होंने चुप्पी साध ली। दोबारा यही सवाल पूछने पर उन्होंने दबी जुबान में कहा कि बाद में सबूत मिल गया होगा। कुलभूषण को वकील मुहैया नहीं कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ तो कारण रहा होगा। जाहिर है कि पाकिस्तान सच के सामने आने से डर रहा है।

वो तो खैर कुलभूषण हैं और रहेंगे। वे कहां हैं जो याकूब की फांसी पर सिर पीट रहे थे।       – दिनेश शर्मा

पाकिस्तान में बिना सबूत फांसी, यहां सबूत होने पर भी सरकारी मजा… अतिथि देवो भव  @ @ JyotiPrakashMi2

कुलभूषण जाधव के मुकदमे की सुनवाई में किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदे का पालन नहीं हुआ। सुनवाई का समय और स्थान भी गोपनीय रखा गया, जबकि हमने कसाब को वकील उपलब्ध करवाया था। –    @bhaiyyajispeaks

यह दुखदायी बात है। इससे भारत-पाकिस्तान के बचे-खुचे रिश्तों पर भी असर होगा। गुपचुप हुआ कोर्ट मार्शल कोई सही तरीका नहीं। — शेखर गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार

पाकिस्तान ऐसा देश है जहां कुलभूषण जाधव जैसे लोगों को फांसी की सजा सुनाई जाती है और ओसामा और हाफिज सईद जैसे लोगों को पनाह दी जाती है। – @Kohliholic

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आज जून का इतिहास

17 जून का इतिहास: रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान से लेकर HF-24 मारुत की पहली उड़ान तक, जानें आज के दिन की बड़ी घटनाएँ

महाराणा प्रताप और आक्रांता अकबर

आक्रान्ता मुगलों पर विजय का प्रतीक था हल्दीघाटी युद्ध

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्र चेतना संकल्प सभा : उदयपुर पहुंचे सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत

प्रतीकात्मक चित्र

कानपुर में डेयरी की आड़ में हो रही थी गोकशी, रेहान मुठभेड़ में घायल, तीन गिरफ्तार 

किशाऊ बांध परियोजना के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक करते गृहमंत्री अमित शाह

किशाऊ बांध परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति, अमित शाह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक

पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए पत्रकारों को दिया गया देवर्षि नारद सम्मान

‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ हमेशा प्रासंगिक रहेगा: सुनील आंबेकर

Load More

ताज़ा समाचार

आज जून का इतिहास

17 जून का इतिहास: रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान से लेकर HF-24 मारुत की पहली उड़ान तक, जानें आज के दिन की बड़ी घटनाएँ

महाराणा प्रताप और आक्रांता अकबर

आक्रान्ता मुगलों पर विजय का प्रतीक था हल्दीघाटी युद्ध

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्र चेतना संकल्प सभा : उदयपुर पहुंचे सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत

प्रतीकात्मक चित्र

कानपुर में डेयरी की आड़ में हो रही थी गोकशी, रेहान मुठभेड़ में घायल, तीन गिरफ्तार 

किशाऊ बांध परियोजना के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक करते गृहमंत्री अमित शाह

किशाऊ बांध परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति, अमित शाह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक

पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए पत्रकारों को दिया गया देवर्षि नारद सम्मान

‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ हमेशा प्रासंगिक रहेगा: सुनील आंबेकर

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं : भाजपा

कैंची धाम में इस बार आए करीब दो लाख श्रद्धालु

ऐतिहासिक रहा कैंची धाम मेला, 2 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, प्रशासनिक व्यवस्था से मिले सुगम दर्शन

सेना के खिलाफ प्रदर्शन करते पीओजेके के लोग

पीओजेके : दमन से भी नहीं दबा हाैसला

समीक्षा बैठक करते मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम एवं भारत निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त संजय कुमार

उत्तराखंड SIR : अनुपस्थित मतदाताओं के घर BLA को साथ ले जाएं BLO, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिया आदेश

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies