सप्ताह का साक्षात्कार : 'प्रपंच फैलाने वालों के खेमे में अब है खलबली'
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सप्ताह का साक्षात्कार : 'प्रपंच फैलाने वालों के खेमे में अब है खलबली'

Written byArchiveArchive
Feb 20, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 20 Feb 2017 13:24:05

 

दिल्ली में केजरीवाल सरकार के दो वर्ष पूरे हो गए हैं और कुछ महीने बाद ही दिल्ली नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं। आम धारणा है कि दिल्ली सरकार काम नहीं कर रही है। इस धारणा को और धार देने के लिए मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सांसद और भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी  को प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा है। वे केजरीवाल की विफलताओं को कैसे जनता के सामने ले जा रहे हैं और निगम चुनाव की तैयारी कैसी चल रही है, इन्हीं मुद्दों पर  अरुण कुमार सिंह की उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश –

अपको जो बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, उसे कैसे निभा रहे हैं?

मेरी टोली लोगों को जोड़ने में लगी है। भारतीय जनता पार्टी का मूल भाव है गरीब कल्याण। भाजपा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों पर चलती है। दीनदयाल जी ने अंत्योदय का सिद्धांत दिया है। अंत्योदय का साधारण-सा अर्थ है समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का उदय या कल्याण। मैंने इसी सिद्धांत को आधार बनाया है, इसलिए मैंने लोगों को जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। इस काम में प्रधानमंत्री की कार्यशैली भी काम आ रही है। हम हर वर्ग और हर समाज के लोगों को जोड़ रहे हैं। इस कारण एक बड़ा परिवार बनता जा रहा है। पहले लोगों  को सुनना है, फिर गुनना है और फिर चुनना है। लोगों की बातें सुनने से तमाम तरह के रास्ते निकलते हैं। इसलिए हमें लग रहा है कि हमारी नीति सही दिशा की ओर है और आने वाले समय में इससे भाजपा को लाभ अवश्य मिलेगा।

अभी दिल्ली में भाजपा के केवल तीन विधायक हैं। पार्टी को फिर से बड़ी ताकत बनाने के लिए क्या कर रहे हैं?

मैंने महसूस किया कि दिल्ली में कई ऐसे वर्ग हैं, जो भाजपा से दूर हो गए थे। ऐसे लोग भाजपा से नफरत नहीं करते, बल्कि भाजपा उन तक पहुंचने के लिए सफल कोशिश नहीं कर पाई है। मेरी कोशिश है उन वर्गों को भाजपा से जोड़ने की। मुझे विश्वास है कि यदि हम इसमें सफल हो गए तो अगले विधानसभा चुनाव में  अपने आंकड़े को तीन से 63 कर सकते हैं।

लोग यह मानने लगे हैं कि केजरीवाल सरकार हर क्षेत्र में विफल हो रही है, लेकिन भाजपा उन विफलताओं को जनता तक पहुंचाने में सफल नहीं हो पा रही। क्या कारण है?

भाजपा से थोड़ी चूक हुई है और वह चूक यह है कि हम केजरीवाल-केन्द्रित हो गए हैं। हमें भाजपा के चरित्र के अनुसार जनता तक पहुंचना चाहिए था। लोगों को पता चल गया है कि केजरीवाल गड़बड़ हैं। इसलिए उनकी आलोचनाओं से ही काम नहीं चलेगा बल्कि लोगों को यह बताना होगा कि आप किस मामले में उनसे ज्यादा अच्छे हैं। केजरीवाल ने इतना झूठ और प्रपंच फैलाया है कि हम उनके जाल में फंसते गए। वे जो कहते हैं, उसका जवाब हम देते हैं। अब हमने अपना मानक तय किया है। अब हम कुछ करते या कहते हैं और केजरीवाल और उनकी टोली उसका जवाब देने के लिए मजबूर हो रही है। हम हर दिन एक मुद्दे को ठीक करने के लिए उठाते हैं, और उधर खलबली मच जाती है।

ल्ल  राज्य सरकार की ओर से शिथिलता दिखती  है, ठीक, किंतु आप भाजपा की सक्रियता के लिए क्या कर रहे हैं?

  अध्यक्ष बनने के बाद मैंने झुग्गी बस्तियों में जाना शुरू किया है। बस्तियों में रात में भी रुकता हूं। वहां के लोगों के साथ खाना खाता हूं, उनसे बात करता हंऔर उनकी समस्याओं को सुनता हं और फिर समाधान के रास्ते तलाशता हूं। इससेे लोगों को लगने लगा है कि दो वर्ष से दिल्ली सरकार का कोई प्रतिनिधि झुग्गी बस्तियों में नहीं आया, पर भाजपा वाले आए और उन्होंने लोगों के सुख-दु:ख को बांटा। मेरे इस कार्य से दिल्ली की सरकार जागी और उसने छह करोड़ रुपए का विज्ञापन देकर कहा कि वह झुग्गी बस्तियों की हितैषी है। जो सरकार पहले कुछ करने को तैयार नहीं थी, अब वह जाग गई है। झुग्गियों में मेरे जाने से वहां के 40 प्रतिशत काम भी हो गए हैं। दिल्ली की जनता समझदार है, भावुक है। भावुकता में उसने एक बार 

गलती कर दी और अब उसकी समझदारी कहती है कि दोबारा ऐसी गलती नहीं करनी। इसके लिए जरूरी है कि भाजपा हर दिन एक नया मुद्दा ठीक करने के लिए उठाए और सरकार उसका जवाब देने के लिए मजबूर हो।

कुछ महीने बाद दिल्ली में नगर निगम के चुनाव होने वाले हैं। इसके लिए भाजपा की क्या तैयारी चल रही है? 

एक तो हम जनता को तुलनात्मक अध्ययन दिखा रहे हैं कि दो साल में आम आदमी पार्टी ने क्या किया और भाजपा ने क्या किया। आम आदमी पार्टी का प्रशासन कैसा है, उसकी नीति क्या है और उसकी नीयत कैसी है, इन तीनों सवालों पर कांग्रेस को भी कसा जा रहा है। आज दिल्ली में अवैध कॉलोनियों में जो समस्याएं हैं, उन सबके लिए  कांग्रेस जिम्मेदार है। आज अगर महिलाएं असुरक्षित हैं तो इसके लिए भी कांग्रेस दोषी है। उसने अपने 15 वर्ष के कार्यकाल में इन मुद्दों पर कोई कार्य नहीं किया। दो वर्ष से आम आदमी पार्टी की सरकार है। उसने भी अभी तक इन मुद्दों पर कोई काम नहीं किया है। इन बातों को बताने के लिए भाजपा ने 'रियल्टी चेक' अभियान शुरू किया है। इसके जरिए लोगों को बताया जा रहा है कि किसने क्या किया है। इसके बाद जनता यह सोचने लगी है कि इन सबसे अच्छा काम तीनों निगमों में सत्तारूढ़ भाजपा ने किया है।

क्या आप निगम में भाजपा शासन के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं?

 मैं व्यक्तिगत रूप से भाजपा के काम से संतुष्ट नहीं हूं, लेकिन यह भी कहूंगा कि हमारा  काम अन्य दलों से बहुत ही बेहतर है। इसलिए हम लोगों को यह बता रहे हैं कि भाजपा ही अच्छा शासन दे सकती है और दे भी रही है। एक बात और है कि दिल्ली में जो गड़बडि़यां हुई हैं, उनके लिए किसी पार्षद, किसी जूनियर इंजीनियर, एमसीडी या डीडीए के किसी अधिकारी को दोषी ठहराने के साथ-साथ उन नियमों को भी दोषी ठहराना होगा, जिन्हें दिल्ली की सरकारों ने बदलने की कोशिश नहीं की। दिल्ली में भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दे दिया गया है। नियम बना दिया गया कि आप घर नहीं बना सकते, पर पूरी दिल्ली में अवैध निर्माण हो रहा है। अवैध निर्माण करने वाले जमकर पैसा कमा रहे हैं और जो लोग मकान खरीद रहे हैं, उन पर खतरे की तलवार लटक रही है। इन सारी चीजों को मैं बड़ी ईमानदारी से लोगों के सामने रख रहा हंू। आने वाले समय में भाजपा इसके लिए नियमों में बदलाव करेगी। मुझे उम्मीद है कि इससे भ्रष्टाचार रुकेगा और लोगों को राहत मिलेगी।

ल्ल  दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को वैध करने का मामला वर्षों से लटका हुआ है। दिल्ली सरकार कह रही है कि कॉलोनियों को वैध करने में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय रोड़ा बना हुआ है। इस पर आपका क्या कहना है?

अगर इन कॉलोनियोंे के नियमितीकरण के लिए दिल्ली सरकार ने कोई प्रयास किया होता तो निश्चित रूप से मुख्यमंत्री केजरीवाल विजेता होते। इस सरकार को दो साल हो गए हैं, पर इसने इस मुद्दे पर अभी तक केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के साथ एक बैठक तक नहीं की है। मैंने दिल्ली सरकार के कार्यों की जानकारी लेने के लिए आर.टी.आई. से कई जानकारियां प्राप्त की हैं। महिला सुरक्षा, अवैध कॉलोनी, मुहल्ला क्लीनिक, विद्यालयों के निर्माण, सी.सी.टी.वी. कैमरे, अस्पताल के निर्माण जैसे 15 मुद्दों पर हमने आर.टी.आई. के जरिए जानकारी मांगी थी। आर.टी.आई. से मिली जानकारी के अनुसार कुल 104 मुहल्ला क्लीनिक हैं। इनमें से मात्र 23 क्लीनिक ऐसे हैं, जो 60 प्रतिशत तक ठीक हैं। शेष क्लीनिकों में न तो पर्याप्त दवाइयां हैं और न ही चिकित्सक। जबकि दिल्ली सरकार दावा करती है कि उसने 1,000 मुहल्ला क्लीनिक बनाए हैं। मुहल्ला क्लीनिको की पूरी इमारत झूठ पर खड़ी है।

मैं तो अरविंद केजरीवाल से पूछना चाहता हूं कि जब उनको छींक भी आती है तो बेंगलुरू के लिए उड़ जाते हैं, तो फिर दिल्ली में मुहल्ला क्लीनिक क्यों बनवा रहे हैं? महिला सुरक्षा के लिए भी दिल्ली सरकार ने कुछ नहीं किया। उसकी केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ एक बैठक तक नहीं हुई है। दो वर्ष मंे केवल सात सी.सी.टी.वी. कैमरे लगे हैं, जबकि 15 लाख सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने की बात कही गई थी। 20 नए कॉलेज बनाने की घोषणा हुई थी, इनमें से एक भी नहीं बना, उलटे एक बंद भी हो गया। 500 स्कूल खोलने की बात की थी। अब तक एक भी स्कूल नहीं खुला है। हां, कुछ विद्यालयों का पुनर्निर्माण जरूर हुआ है।

ल्ल  आपने बताया, आप झुग्गी बस्तियों में जा रहे हैं, वहां के लोगों के साथ रात भी बिता रहे हैं। वहां मिले कुछ अनुभव बताएं।

 बस्तियों में जितनी भी महिलाएं मिलीं, उन सबने मुझसे कहा कि पानी के नल लगवा दें, जो भी बिल आएगा उसे हम लोग भरने के लिए तैयार हैं। हम पानी के लिए बाल्टियों से मारा-मारी नहीं करना चाहते। अरविंद केजरीवाल ने पानी बिल माफ करने की बात की थी, पर जहां पानी ही नहीं आ रहा है, वहां माफ क्या करेंगे? झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों का जीवन देखकर आंखों में आंसू आ जाते हैं। किसी ने भी उनकी ओर देखने की कोशिश नहीं की है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है।

 इन बस्तियों में न तो पानी है, न शौचालय है और न ही औषधालय। एक बस्ती में लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर शौचालय हैं। वहां इतनी दुर्गंध होती है कि लोग जाने से भी कतराते हैं, लेकिन वहां के लोग वहीं शौच करने जाते हैं। बहन-बेटियां खुले में स्नान करती हैं। एक परिवार मिला जिसकी दशा देखकर बहुत ही दु:ख हुआ। वह एक झुग्गी बस्ती में किराए के घर में रहता है। परिवार की महिला की उम्र करीब 65 वर्ष होगी। उसके पति लकवे से ग्रस्त हैं, बेटे की टांगें किसी कारण से खराब हो गई हैं। वृद्धा पेंशन बंद हो गई है। वह महिला मुश्किल से खाने का इंतजाम कर पाती है। दवाई के लिए पैसा होता ही नहीं। इसलिए वह दवाई की भीख मांगती है। हमने पार्टी की तरफ से कुछ पेंशन देने की शुरुआत की है, ताकि उसका घर चल सके। इन प्रसंगों ने दिल को दहला दिया। 

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