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बढ़ता चहुंओर खतरा

Written byArchiveArchive
Jan 2, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 02 Jan 2017 12:00:49

4 दिसंबर, 2016  

आवरण कथा 'शऽऽऽ…श कोई है!' इस तथ्य को स्पष्ट करती है कि वर्तमान में साइबर खतरा एक बहुत बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। जब कहीं आतंकी हमला होता है तो उसके बारे में पहले कुछ जानकारियां हो सकती हैं लेकिन जब साइबर हमला होता है तो पता ही नहीं चलता। आज भारत को अंदर और देश के बाहर दोनों ओर से खतरा है। पड़ोसी देश में बैठे हैकर हर समय भारत की महत्वपूर्ण सूचनाओं को लीक करने के लिए तैयार रहते हैं। ये सूचनाएं देश के लिए बड़ी ही महत्वपूर्ण होती हैं। आज इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
—अनुराधा मुकुंद, जयपुर(राज.)

आज हर हाथ में मोबाइल और कंप्यूटर है। हम जिस गति से साइबर संसार में अपनी पैठ बैढ़ाते जा रहे हैं, उतने ही खतरे हमें घेरते जा रहे हैं। साइबर विशेषज्ञ दुनिया में साइबर युद्ध का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में इस अपराध के बारे में समझ बढ़ाने के लिए स्कूल, विद्यालयों, और तकनीकी से जुड़े संस्थानों में जागरूकता लानी होगी, जिससे युवाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति मूलभूत जानकारी मिले और वे सर्तक रहें। वरना इसके दुष्परिणाम गंभीर होंगे जो युद्ध के मुकाबले कई गुना खतरनाक होंगे।
—राममोहन चन्द्रवंशी, हरदा (म.प्र.)

ङ्म  दुनिया को आज पूरी तरह से पता है कि पाकिस्तान और चीन छदम् युद्ध लड़ते हैं। वे बोलते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। भारत के लिए दोनों किसी खतरे से इसलिए कम नहीं हैं क्योंकि साइबर हैकर उनकी सेना का अभिन्न हिस्सा हैं। इनके द्वारा आए दिन भारत की महत्वपूर्ण सूचनाओं में सेंध लगाई जाती है। इन सेंधमारों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद के बिना रोक पाना संभव नहीं है। हमें सबकी मदद से इस क्षेत्र में पैठ
बढ़ानी होगी और ऐसे दुश्मनों से बचकर रहना होगा।
—रामनरहिर वर्मा, दिलसुखनगर (हैदराबाद)

नोटबंदी के बाद से लोगों ने तकनीकी का रास्ता चुना है। आज हम अधिकतर काम  प्लास्टिक कार्ड से कर रहे हैं। तो दूसरी ओर साइबर संसार में भी हमारी पैठ बढ़ रही है लेकिन अधिकतर लोग इसके खतरों के प्रति अनभिग्ज्ञ हैं। जिसके कारण उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है। आज इस बाबत लोगों को जागरूक करना होगा।
—सुनील निरंकारी, चड़ीगढ़ (हरियाणा)

बढ़ता दायरा
रपट 'साझे हित सकारात्मक मेल'(27 नवंबर, 2016) से जाहिर है कि भारत के साथ इस्रायल के संबंध आज के मौजूदा दौर में अत्यधिक जरूरी हैं। भारत-इस्रायल सदैव से एक मजबूत और विश्वासी मित्र की भांति रहे हैं। दुनिया में आज जिस प्रकार जिहादी आतंक बढ़ता जा रहा है ऐसे में उसकी धार को कुंद करने के लिए इस्रायल का साथ जरूरी है।
—अनूप नौटियाल, उत्तर काशी (उत्तराखंड)
 पाकिस्तान में जिस प्रकार हिंसा और अराजकता की क्रूर विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है, उससे पूरी मानवता कराह रही है। मजहब और जिहाद के नाम पर जो बर्बर घटनाएं हो रही हैं, उससे भारत ही नहीं वरन पाकिस्तान के लोग भी आहत हैं। पाक जिहादी आतंक को अपने घर में पाल-पोश रहा है लेकिन उसे यह पता होना चाहिए कि एक न एक दिन यही जिहादी आतंंक उसे निगल जाएगा।
—वेणु गौतम, मुरादाबाद (उ.प्र.)

 बड़े दु:ख की बात है कि पकिस्तान विकास एजेंडा नहीं है। तालिम और तरक्की की राह छोड़कर वह आतंकवाद फैलाने के रास्ते पर है। वह खुद को विकास के पथ पर बढ़ते देखना ही नहीं चाहता, उसी के चलते आज वह दिन-प्रतिदिन गर्त में चला जा रहा है। दुनिया में उसकी छवि आतंक फैलाने वाले मुल्क के रूप में बन चुकी है। दूसरे भारत के प्रति घृणा और नफरत के माहौल को बढ़ावा देना उसके लिए हानिकारक होता जा रहा है। वहां बुद्धिजीवियों को चाहिए कि वे अपने हुक्म्मरानों को समझाएं और हिंसा के रास्ते को छोड़कर विकास के पथ पर ले आएं। तभी वह एक सभ्य, सुसंस्कृत और विकसित देश बन सकेगा।
—मनोहर मंजुल, प. निमाड (म.प्र.)

करारी चोट
रपट 'कहर काली कमाई पर' (20 नवबंर, 2016) से यही बात जाहिर हुई कि केंद्र सरकार के एक ही फैसले ने सबको चित कर दिया। इसलिए ही जिनका काला पैसा इसमे रद्दी बना उन्होंने हंगामा मचाया। यहां तक कि सदन की कार्यवाही भी बाधित की। ऐसे नेता जो नोटबंदी के खिलाफ हैं, लोगों को भड़का रहे थे कि चुनाव में इस फैसले से सरकार को नुकसान उठाना पड़ेगा। लेकिन हुआ इसका उलटा। देश के कई हिस्सों में चुनाव हुए जिनमें देश की जागरूक जनता ने विपक्षी दलों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए इस फैसले को जायज ठहराया। प्रधानमंत्री देश को विकासपथ ले जाने का प्रयास कर रहे हैं उधर कुछ नेता हैं  जो अपने लाभ के लिए देश को भड़काने में लगे हुए हैं।
—रंजना सेठाना, बड़वाह(म.प्र.)

भारत के लोगांे ने मोदी सरकार में विश्वास जताते हुए नोटबंदी को सफल बनाया इसके लिए देश की जनता धन्यवाद की पात्र है। वह धन्यवाद की पात्र इसलिए भी है क्योंकि तमाम नेता दिन-रात उसको भड़काने में लगे हुए थे। हर दिन नए-नए छल-प्रपंच फैलाये जा रहे थे, सरकार के फैसले को गलत ठहराया जा रहा था। लेकिन लोगों का यही कहना था कि हमें यह सब मंजूर है और मोदी ने जो भी किया है, वह बहुत ही अच्छा किया है।
—सुनीता जायसवाल, फरीदाबाद (हरियाणा)

सरकार ने जैसे ही नोटबंदी का निर्णय लिया, देश को 60 साल से ज्यादा समय से लूटने वालों में बेचैनी बढ़ गई। अपनी काली कमाई को लुटता देख ऐसे लोग आम जनता को हो रही परेशानी का हवाला देकर, हो-हल्ला करने लगे। पर यह भारत की जनता जागरूक ही थी जिसने तमाम परेशानानियों के बावजूद देशहित में लिए गए परिणामों को देखा और सरकार का पूरा समर्थन किया।
—अश्वनी जागड़ा, महम (हरियाणा)

देश की जनता आज वाकई समझदार हो चुकी है और नेताओं की लोकलुभावन घोषणाओं के बारे में जानने लगी है। वह भलीभांति जानती है कि ऐसी घोषणाएं देश के लिए कितनी घातक हैं। ये लोगों को सरकार पर आश्रित बना देती हैं और स्वालंबन से दूर ले जाती हैं। कहने की जरूरत नहीं कि लोकलुभावन नीतियां एक अपाहिज समाज का निर्माण करती और ऐसे समाज के सहारे देश को परम वैभव पर नहीं ले जाया जा सकता। नोटबंदी का फैसला ऐसा ही एक कठोर फैसला है जो अभी तो तीखा लग रहा है लेकिन बाद में इसके सुखद परिणाम आएंगे।
—जुनैद खान, मेरठ (उ.प्र.)

  कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नोटबंदी के फैसले पर सदन में यह कहते नजर आए कि 'मैं बोलूंगा तो भूकंप आ जाएगा।' लेकिन उन्हें बोलने से रोका किसने है? वे इससे पहले भी इस तरह के अर्नगल प्रलाप करते रहे हैं और चुनाव में भी जनता को बरगलाते रहे हैं। लेकिन जनता अब उन्हें अच्छी तरह जानती है और उन्हें गंभीरता से नहीं लेती।
—मूलचंद अग्रवाल, कोरबा (छ.ग.)

केंद्र सरकार बधाई की पात्र है जिसने स्वतंत्रता के 65 वर्ष उपरांत नोटबंदी से  आर्थिक क्रांति के सूत्रपात का सफल प्रयास किया। यह सभी को पता है कि देश में काले धन का प्रसार तेजी से हुआ है जो अकुशल प्रशासनिक प्रबंधों का परिणाम था। पिछली सरकारों ने इसे रोकने के बजाय और बढ़ावा दिया। लेकिन इस सरकार ने ऐसे लोगों पर नकेल कसने का काम किया है।
—कृष्णा मोहन गोयल, अमरोहा (उ.प्र.)

लोगों को याद होगा कि 2011 में भट्टा पारसोल मामले में राहुल गांधी ने दावा किया था कि वहां पुलिस ने 70 ग्रामीणों की हत्या की है। पर जांच में इस बात को कोरा झूठ पाया गया। अब उन्होंने नरेंद्र मोदी पर कथित भूकंप लाने वाला आरोप लगाकर उनसे उसका जवाब मांगा है। लगता है कि यह भी महज सनसनी हेतु किया गया प्रयास है। क्योंकि इस आरोप के संबंध में स्वयं उच्चतम न्यायालय ने कह दिया है कि इसमें कोई सबूत भी मौजूद नहीं। फिर भी राहुल गांधी इसे तूल दे रहे हैं। ऐसे कारणों से उनकी विश्वसनीयता समाप्त हो चली है।
—अजय मित्तल, मेरठ (उ.प्र.)
बढ़ता खतरा
लेख 'कार्बन का खतरा' (20 नवंबर, 2016) से स्पष्ट है कि विश्व में बढ़ते तापमान के चलते वातावरण प्रभावित हो रहा है। दुनियाभर में कार्बन की मात्रा बढ़ने से मौसम चक्र बिगड़ रहा है। हिमालय से हिम नद पिघल रहे हैं। आज पर्यावरण रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होनी चाहिए। दुनिया के सभी देशों को इस ओर तुरंत ध्यान
देना होगा।
—अपूर्व चावरे, दुर्ग (छ.ग.)

 

 

 पुरस्कृत पत्र
'माया', तेरा क्या होगा?
आजकल पूरे भारत में हलचल सी है, इसकी बजह है पांच सौ और हजार के नोटों का बंद होना। जैसे-जैसे पुराने नोटों के बैंक में लेने की तारीख नजदीक आई, वैसे-वैसे कुछ लोगों की सांस अटकी नजर आई। इस फैसले से कोई परेशान हुआ हो या नहीं, लेकिन बसपा प्रमुख मायावती की तो नींद ही उड़ गई है। इसका कारण है अपने प्रत्याशियों से लिया हुआ धन। चुनाव के समय मायावती विधानसभा के हर टिकट की कुछ न कुछ कीमत लेती हैं। और यह सब नकदी के रूप में होता हैं। इस समय विधान सभा चुनाव सिर पर हैं और बहिन जी द्वारा प्रत्याशियों से प्राप्त जो धन है वह सब कुछ नकद में ही है। लिहाजा वे इतनी बड़ी रकम को ठिकाने लगाने को लेकर परेशान हैं। सुनने में आया है कि उन्होंने अपने सभी प्रत्याशियों को लखनऊ  में आवास पर बुलाया। ये सभी प्रत्याशी बाद में भारी भरकम बैग लेकर बाहर निकले। संभावना है कि उन बैगों में उनसे पहले ली गई रकम थी। इन प्रत्याशियों को इस पुरानी रकम को नई रकम में बदलने की जिम्मेदारी दी गई होगी और जो बदलने में कामयाब नहीं होता या लेट लतीफी करता हुआ नजर आया उसकी टिकट कटना तय है। अब ये घबराए हुए प्रत्याशी नोट बदलने की फिराक दिखे। बहिन जी ने अपने सभी कोआर्डिनेटर और सभी प्रमुख पदाधिकारियों इस बारे में सख्त संदेश दिया है। दरअसल इस सब परेशानी का कारण नोटबंदी है। इसलिए वे बार-बार मोदी जी को कोश रही हैं और फैसले को गलत बता रही हैं। अभी उनके भाई के करोड़ों रुपये संदेह के घेरे में हैं जो बैंक में उनके द्वारा अचनाक नोटबंदी के बाद से जमा कराए गए है। लेकिन सेकुलरों ने इस पर अपनी बोलती बंद कर ली है। खैर, सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय से बहिन जी खुद से ही एक प्रश्न पूछती होंगी कि तेरा क्या होगा माया।    
    —ललित शंकर, मेरठ (उ.प्र.)

झूठे हैं आरोप
राहुल बाबा जी सुनो, झूठे हैं आरोप
पहली भी हैं चल चुकी, ऐसी नकली तोप।
ऐसी नकली तोप, नया कुछ लेकर आओ
तब जा करके मोदी पर आरोप लगाओ।
कह 'प्रशांत' वे दूजों को दोषी बतलाते
भ्रष्टाचारी हैं जिनके सब रिश्ते-नाते॥
—प्रशांत

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