| दिंनाक: 12 Dec 2016 16:01:01 |
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गत दिनों आदिस अबाबा, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से आयोजित बैठक में भाग लेकर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ़ चिन्मय पंड्या स्वदेश लौटे। उन्होंने यूनेस्को द्वारा योग को विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में दी गयी मान्यता के बारे में पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यूनेस्को द्वारा योग को विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्वीकारना भारतीय परंपरा का बढ़ता हुआ रूप ही है जिसका चरम लक्ष्य वसुधैव कुटुंबकम् के रूप में एकता, समता के नये युग की शुरुआत है। देश के अनेक समुदायों, संस्थानों ने विश्व समुदाय द्वारा योग को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्वीकारने के संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णय को एक महवपूर्ण कदम माना। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय योग के क्षेत्र में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान बना चुका है। तपोनिष्ठ पं़ श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रणीत गायत्री परिवार योग के सूत्रों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पिछले कई दशकों से प्रयासरत है। -प्रतिनिधि