| दिंनाक: 15 Nov 2016 16:08:18 |
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गत 4 से 6 नवंबर को 'इंडिया फाउंडेशन' द्वारा गोवा में विचार शिखर सम्मेलन (इंडिया आइडियाज कन्क्लेव-2016) का आयोजन संपन्न हुआ। सम्मेलन के एक सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यह आवश्यक है कि हम मुद्दों पर बातचीत करें। भारत की आजादी के 7 दशक बाद भी हम राष्ट्र, राष्ट्रीयता और धर्म आदि विषयों पर आम सहमति पर नहीं पहुंच पाए हैं। सन 1997 के एक विज्ञापन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक कॉरपोरेट हाउस ने भारत की आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर एक विज्ञापन में लिखा कि भारत माता हम आपके 50वें जन्मदिन पर आपको प्रणाम करते हैं। इसे कैसे स्वीकारा जा सकता है? यह इतिहास की अनभिज्ञता ही है। संपादक को इस प्रकार का विज्ञापन नहीं देना चाहिए था। हमारी सभ्यता अत्यंत प्राचीन है और सन1997 में उसका 50वां जन्मदिन कैसे हो सकता है? श्री होसबाले ने कहा कि इस सम्मेलन में, हमने असहमति या विरोध के स्वर भी सुने। मुझे लगता है कि यह संवाद ही लोकतंत्र का सार है। महाभारत में कृष्ण-अर्जुन संवाद एक विस्तृत बातचीत ही तो थी। यही हमारी परंपरा है। जब तक संवाद है, असंतोष को स्वीकार किया जा सकता है। तब यह सिर्फ एक अलग दृष्टिकोण बन जाता है। उन्होंने कहा लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज, अगर मैं आपकी असहमति से असहमत हूं, तो आप मुझे असहिष्णु कहते हो। लोकतंत्र के सार में आम सहमति भी शामिल है। यह बहुत आवश्यक है। लेकिन 70 साल के बाद भी हम महत्वपूर्ण विषयों पर आम सहमति तक नहीं पहुंच पाए। जैसे कि हम देश और राज्य की अवधारणा को भी नहीं समझ पाए, राष्ट्र का हित, एक राष्ट्रीय भाषा की जरूरत, आरक्षण कितना, आदि बातों पर अभी भी आम सहमति की जरूरत है। तीन दिन के सम्मेलन में भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री श्री सुरेश प्रभु, श्री जयंत सिन्हा, श्री एमजे अकबर व अनेक भारतीय और विदेशी राजनयिकों व विभिन्न क्षेत्रों से सम्बद्ध बौद्धिक व्यक्त्वि सहभागी हुए। – इ. प्र. वि.सं. के.