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डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के कई कारण हैं। अमेरिका में उनकी वही छवि है, जो भारत में नरेन्द्र मोदी की है। लोग कह रहे हैं कि ट्रम्प ने राष्ट्रवाद के सहारे चुनावी नैया को पार लगाया है। अमेरिकियों ने जिहादी आतंकवाद के प्रति ट्रम्प की स्पष्ट सोच को पसंद किया और हिलेरी की ढुलमुल नीति को खारिज
वाशिंगटन से विशेष प्रतिनिधि
न्यूयॉर्क के अरबपति रियल एस्टेट व्यवसायी और रियलिटी टीवी स्टार डॉनल्ड ट्रम्प ने 8 नवम्बर को अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को हराकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।
चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद 69 वर्षीय क्लिंटन ने ट्रम्प को बधाई दी। 20 जनवरी को ट्रम्प अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। वह बराक ओबामा के स्थान पर कुर्सी पर बैठेंगे जिनका कार्यकाल उस दिन पूरा होगा।
ट्रम्प की जीत के बाद व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में गंभीर मुद्रा धारण किए ओबामा ने अधिकारियों से सत्ता के हस्तांतरण की तैयारियां करने को कहा, जो उनके अनुसार अमेरिकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विशेषता है। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा। दरअसल, समूचे अमेरिका में मतगणना के बेहद तनावपूर्ण दौर के बाद ट्रम्प की जीत की घोषणा हुई। इससे पहले उनके और हिलेरी क्लिंटन का राजनीतिक भविष्य अर्धरात्रि तक अधर में लटका दिख रहा था। उस समय तक रिपब्लिकन प्रत्याशी के इलेक्टोरल वोट्स का आंकड़ा 254 था और 270 के जिताने वाले जादुई आंकड़े तक पहुंचने से वह 16 कदम दूर थे। हालांकि, उस समय तक ट्रम्प फ्लोरिडा और ओहायो जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में जीत हासिल कर चुके थे।
इसके अलावा, पेंसिल्वेनिया जैसे कुछ अन्य राज्यों के कारण भी नतीजों की घोषणा में देर हुई। 9 नवम्बर की प्रात: करीब 2 बजे कुछ बड़े टेलीविजन नेटवकार्ें ने घोषित किया कि ट्रम्प 270 इलेक्टोरल कॉलेज का आंकड़ा पर कर गए हैं। फिर भी क्लिंटन अभियान अपनी हार स्वीकारने को तैयार नहीं था। न्यूयॉर्क शहर के अत्याधुनिक केंद्र में पूर्व फर्स्ट लेडी एवं सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के हजारों समर्थक और स्वयंसेवी क्लिंटन को सुनने का इंतजार कर रहे थे जो उस सय तक एक होटल में अपने नजदीकियोें के साथ बैठी थीं। ऐसा महसूस होता था कि वह अपनी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं थीं। इसीलिए उन्होंने परंपरा भंग करते हुए अपने कैम्पेन चेयरमैन जॉन पोडेस्टा को
बाहर भेजा।
प्रात: लगभग 2 बजे पोडेस्टा ने समर्थकों से कहा, 'हम अभी तक वोट गिन रहे हैं और प्रत्येक वोट मायना रखता है। कई राज्यों मंे करीब की लड़ाई है। इसलिए इस समय हम और अधिक कुछ नहीं कह सकते।' उन्होंने कहा, 'आप मेरी बात सुनें। सब घर जाएं। आपको कुछ आराम करना चाहिए। हम कल बयान जारी करेंगे। इस हॉल में और देश में प्रत्येक वह व्यक्ति जिसने हिलेरी को समर्थन दिया, उसे जानना चाहिए कि उसकी आवाज और उसका उत्साह हिलेरी, टिम और हम सबके लिए बहुत मायने रखता है।' पोडेस्टा ने कहा, 'हमें आप सब पर गर्व है। हमें हिलेरी पर गर्व है। उन्होंने बेहतरीन कार्य किया। और अभी उनका कार्य पूरा नहीं हुआ है।' यह स्पष्ट इशारा था कि हिलेरी जनता का फैसला स्वीकार कर चुकी हैं। उस समय तक ट्रम्प का आंकड़ा 278 इलेक्टोरल वोट का दर्शाया जा रहा था और 213 मतों के साथ हिलेरी जीत से कोसों दूर थीं।
अगला डेढ़ घंटा पूरे देश के लिए रहस्य से भरा था। व्हाइट हाउस की बत्तियां अभी तक जल रही थीं। ओबामा तब तक मतगणना देख रहे थे। उस समय तक ट्रम्प अपने ट्रम्प टावर से मैनहेटन के एक होटल पहुंच चुके थे। इस होटल में उनके 1000 समर्थक और अभियान से जुड़े बड़े नेता उत्सुकतावश जीत का इंतजार कर रहे थे, जिसकी आहट उन्हें मिल चुकी थी। प्रात: 2:30 के कुछ देर बाद ट्रम्प को क्लिंटन का फोन आया। बीस मिनट बाद उन्होंने प्रफुल्लित भीड़ को संबोधित किया, 'मुझे अभी सेक्रेटरी क्लिंटन की कॉल आई। उन्होंने हमें हमारी जीत पर बधाई दी।' इसके बाद उन्हें मंच पर उप-राष्ट्रपति निर्वाचित माइक पेंस ने प्रस्तुत किया, जो इस समय इंडियाना राज्य के गवर्नर हैं।
ट्रम्प सपरिवार मंच पर पहुंचे। चुनाव अभियान के उनके हाव-भाव अब बदल चुके थे। उन्होंने 15 मिनट अवधि का छोटा सा संबोधन दिया। वह राष्ट्रपति की तरह गरिमामय लग रहे थे। सबसे पहले उन्होंने अपनी विरोधी हिलेरी क्लिंटन की प्रशंसा की। 'मैं उन्हें और उनके परिवार को बेहद सख्त चुनावी संघर्ष के लिए बधाई देना चाहूंगा। मेरा मतलब यह कि उन्होंने बेहद हिम्मत से यह चुनाव लड़ा। हिलेरी ने बेहद लंबा और कड़ा संघर्ष किया और देश के लिए उनकी सेवा के प्रति हम सब उनके ऋणी हैं।' इसके बाद उन्होंने देश को सशक्त करने पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'अब अमेरिका को विभाजित करने वाले अपने जख्मों को भरना होगा; उसे एक साथ आगे आना होगा। देशभर के रिपब्लिकन, डेमोक्रेट्स एवं निर्दलीय लोगों से मेरी अपील है कि वह एक होकर आगे आएं। यही समय है। मैं सभी नागरिकों को विश्वास दिलाता हूं कि मैं सभी अमेरिकियों का राष्ट्रपति बनूंगा और यह मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय है।'
विश्व के लिए भी उनका एक संदेश था जो मोदी के इंडिया फर्स्ट नारे के निकट दिखता है। ट्रम्प का मानना है अमेरिका फर्स्ट। उनके अनुसार, 'हमारे पास बेहतरीन आर्थिक योजना है। हम अपने विकास को दोहरा करेंगे और हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे प्रबल है। इसी तरह हमारे साथ चलने वाले देशों को हम साथ लेकर चलेंगे।'
ट्रम्प के अनुसार, 'दूसरों से हमारे संबंध मजबूत होंगे। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे संबंध बेहतर होते जाएं। कोई भी सपना बड़ा नहीं, कोई भी चुनौती इतनी बड़ी नहीं। अपने भविष्य के लिए कुछ भी हमारी पहुंच से दूर नहीं। अमेरिका अब सर्वश्रेष्ठ से कम और कुछ नहीं चाहेगा।' ट्रम्प के शब्दों में, 'हमें हमारे देश की किस्मत खुद लिखनी है और बड़े और असाधारण सपनों को सच करना है। हमें यह करना ही होगा। अपने देश के लिए एक बार फिर हम खूबसूरत और सुंदर चीजों के सपने सच करेंगे। मैं दुनिया को कहना चाहूंगा कि हम अमेरिकी हितों को सबसे ऊपर रखेंगे, सबके साथ निष्पक्ष व्यवहार करेंगे, सबके साथ – सभी लोगों और देशों के साथ। हम सबके साथ सामान्य आधार चाहेंगे, विद्वेष नहीं; संघर्ष नहीं।'
करीब 3:05 मिनट पर अपने भाषण की समाप्ति के बाद, ट्रम्प 10-15 मिनट तक अपने समर्थकों और पार्टी नेताओं से मिले। बाद में वह ट्रम्प टावर्स होटल रवाना हुए। उस समय तक वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में ओबामा जाग रहे थे और उन्होंने ट्रम्प से फोन पर बात की। उन्होंने ट्रम्प को जीत की मुबारकबाद दी और गुरुवार को उन्हें व्हाइट हाउस बुलाया। बुधवार दोपहर व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में ओबामा ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, 'मुझे प्रात: 3:30 बजे राष्ट्रपति निर्वाचित ट्रम्प से बात करने का अवसर मिला। यह उन्हें बधाई देने और कल उन्हें व्हाइट हाउस में बुलाने का मौका था ताकि हम राष्ट्रपति पद सफलतापूर्वक हस्तांतरण पर बात कर सकें।'
गौरतलब है कि पिछले 10 दिन में ओबामा ने ट्रम्प के खिलाफ करीब 17 चुनावी रैलियों को संबोधित किया, जिनमें उन्होंने ट्रम्प को अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के लिए अयोग्य और अनुपयुक्त बताया। एमएसएनबीसी न्यूज को एक साक्षात्कार में ओबामा ने कहा था कि यदि ट्रम्प देश के राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो यह खुद उनके लिए बेहद असहनीय होगा।
संवाददाता सम्मेलन में ओबामा ने कहा कि वह और ट्रम्प देश के लिए अपने मतभेद भुलाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'यह कोई रहस्य नहीं कि उनके और मेरे बीच कई गहरे मतभेद हैं। परंतु याद रखा जाए, आठ वर्ष पहले राष्ट्रपति बुश और मेरे बीच भी कई मतभेद थे। परंतु राष्ट्रपति बुश की टीम ने सत्ता हस्तांतरण की दिशा में बहुत पेशेवराना नजरिये से काम किया था, ताकि हम शुरू से ही पूरी रफ्तार से काम कर सकें।' ओबामा के अनुसार, 'इसलिए मैंने अपनी टीम को कहा है कि वह आठ वर्ष पहले की राष्ट्रपति बुश की टीम की तरह ही काम करे ताकि राष्ट्रपति निर्वाचित को सफलतापूर्वक सत्ता सौंपी जा सके।' उन्होंने कहा, 'चूंकि हम सब देश को जोड़ने और आगे ले जाने को प्रतिबद्ध हैं, इसलिए सत्ता में शांतिपूर्ण तरीके से परिवर्तन ही लोकतंत्र की बड़ी पहचान होती है। और अगले कुछ महीनों तक हम दुनिया के सामने यही उदाहरण रखेंगे।' ओबामा के इस भाषण के दौरान व्हाइट हाउस के कई कार्यकर्ताओं की आंखें नम थीं।
ओबामा के संबोधन से पहले, न्यूयॉर्क में उस होटल से हिलेरी ने भी अपने समर्थकों से बात की थी, जहां वह ठहरी हुई थीं। उन्होंने अपने संतुलित भाषण में कहा, 'कल रात मैंने डॉनल्ड ट्रम्प को बधाई दी और देश की ओर से उनके साथ काम करने की पेशकश भी की। मुझे उम्मीद है कि वह अमेरिकियों के लिए सफल राष्ट्रपति साबित होंगे। हम यह नतीजा नहीं चाहते थे और मुझे अफसोस है कि हम अपने साझा मूल्यों और देश के लिए भविष्य के आधार पर लड़ा गया यह चुनाव नहीं जीत पाए।' हिलेरी ने अपनी निराशा नहीं छुपाई, 'मुझे पता है कि आप कितने निराश हैं क्योंकि मैं भी ऐसा ही महसूस कर रही हूं और साथ ही लाखों अमेरिकी भी जिन्होंने इस प्रयास के साथ अपनी उम्मीदों और सपनों को जोड़ा था। यह बहुत दर्दनाक सत्य है और लंबे समय तक रहेगा, परंतु मैं चाहूंगी कि आप इसे याद रखें। हमारा अभियान किसी एक आदमी के लिए या एक चुनाव के लिए नहीं था, यह हमारे प्यारे देश के लिए था और अमेरिका को आशावादी, एकजुट और विशाल हृदयी बनाने के लिए था।' हिलेरी क्लिंटन ने कहा, 'हमने देखा कि हमारा देश कहीं ज्यादा बंटा हुआ है। परंतु मुझे अभी भी अमेरिका में पूरा विश्वास है और हमेशा रहेगा। और यदि आपका भी ऐसा ही सोचना है, तो हमें इस नतीजे को स्वीकार कर भविष्य की ओर देखना होगा। डॉनल्ड ट्रम्प हमारे राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। हम उन्हें अगुवाई करने के लिए खुले दिमाग से सहयोग दें।' कई लोगों की राय में यह संबोधन क्लिंटन युग का अंत था, जिसका पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रीय राजनीति पर दबदबा था। और यह ट्रम्प के अमेरिका की शुरुआत है।
भारत का दोस्त, आतंकवाद का दुश्मन
डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी, 2017 को अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यभार संभाल लेंगे। देखना यह है कि ट्रम्प का भारत को लेकर किस तरह का रुख रहेगा? दूसरा, वे अमेरिका के मुसलमानों और इस्लामिक देशों के साथ किस तरह का संबंध बनाकर रखना चाहेंगे?
ल्ल विवेक शुक्ला
जनीतिक पंडितों की भविष्यवाणियों को गलत साबित करते हुए जर्मन मूल के डोनाल्ड ट्रम्प ने हिलेरी क्लिंटन को मात दे दी। अब वे संसार के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठने वाले हैं। अब कुछ अहम सवाल उठते हैं। पहला, ट्रम्प का भारत को लेकर किस तरह का रुख रहेगा? दूसरा, वे अमेरिका के मुसलमानों और इस्लामिक देशों के साथ किस तरह का संबंध बनाकर रखना चाहेंगे?
कूटनीति को जानने वालों को पता है कि अमेरिका में सत्ता परिवर्तन से दोनों देशों के संबंध कतई प्रभावित नहीं होंगे। दोनों देशों के संबंध उस दायरे से कहीं आगे जाते हैं, जब सत्ता परिवर्तन का असर संबंधों पर होता है। इन संबंधों में किसी व्यक्तित्व का असर नहीं हो सकता। हां, दोनों नेताओं के निजी संबंधों से संबंध और बेहतर तो हो सकते हैं। ये हमने नरेन्द्र मोदी और बराक ओबामा के बेहतरीन संबंधों में देखा। अब मोदी और ट्रम्प भी मिलकर बेहतर तरीके से काम करेंगे, इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए। अब दोनों देशों को एक-दूसरे की ताकत और जरूरतों के बारे में कोई गलतफहमी नहीं है। ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में भारत के बाजार की अनदेखी नहीं कर सकते। अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अमेरिका को भारत का बाजार तो हर हालत में चाहिए। इसलिए अमेरिका किसी भी सूरत में भारत की अनदेखी नहीं कर सकता। लेकिन अब भारत भी बराबरी के मंच पर है। दो मुल्कों के ताल्लुकात में नेताओं के निजी रिश्ते भी बड़ा किरदार निभाते हैं। कई बार हाथ मिलते ही इतिहास बन जाता है, कई बार सिर्फ हाथ मिलते हैं, दूरी बढ़ जाती है। मोदी और ओबामा के बीच निजी संबंध बन गए थे। अब देखना है कि मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ किस तरह के संबंध बनते हैं।
एक बात यह भी है कि चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों से साफ हो गया था कि अमेरिका में बसे लगभग 30 लाख भारतीय डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के साथ हैं। इससे बेपरवाह ट्रम्प भारत और वहां बसे भारतीयों को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां ही कर रहे थे। इससे लगता है कि ट्रम्प भारत के साथ मधुर संबंध ही रखने वाले हैं।
मुसलमानों के प्रति नजरिया
ट्रम्प की अप्रत्याशित विजय से इस्लामिक संसार सन्न है। इसके भी कई कारण हैं। वे बार-बार इस्लाम को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने इस्लाम को अमेरिका विरोधी बताते हुए मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की मांग तक दोहराई थी। सीएनएन से बातचीत में उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई कट्टरवादी मुसलमानों से है। उनके इस बयान को लेकर पूरी दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को
मिली थी।
ट्रम्प आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के पनपने के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन को दोषी मानते हैं। उनके इन बयानों पर उन्हें अमेरिका के एक बड़े वर्ग का समर्थन भी मिला। ट्रम्प के इस दावे से सनसनी पैदा हो गई थी कि 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद दुनियाभर के मुसलमान जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। उसके बाद उन्होंने कहा, अरब और अमेरिकी मुसलमानों ने आंतकी हमलों का जश्न मनाया था। ट्रम्प ने देश में मुसलमानों की निगरानी करने के लिए एक डाटाबेस बनाने का भी वादा किया था। इस पर तगड़ा विवाद हो गया था। ट्रम्प ने एनबीसी न्यूज से कहा था, 'मैं निश्चित तौर डेटाबेस से इतर भी बहुत सी व्यवस्थाएं करूंगा।' इसके साथ ही ट्रम्प ने कहा, 'हम मस्जिदों पर निगाह रखने जा रहे हैं। हमें बहुत-बहुत सावधानी से देखना होगा।' ट्रम्प ने कहा कि उनका मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए अमेरिका के मुसलमानों पर अभूतपूर्व निगरानी जरूरी होगी। यही नहीं, फ्लोरिडा में एक समारोह को संबोधित करते हुए ट्रम्प इससे और आगे निकल गए। वहां उन्होंने कहा, 'सभी लोग यह मानते हैं कि हमलों के बाद दुनियाभर में मुसलमान असभ्य तरीके से जश्न मना रहे थे।' अब यह देखना होगा कि ट्रम्प उन वायदों को किस हद तक निभा पाते हैं जो उन्होंने मुसलमानों को लेकर किए हैं।
ट्रम्प के अहम पत्ते रूडी गुईिलयानी
रूडी ने 9/11 के हमले के वक्त ट्रम्प को सुरक्षित निकाला था। 72 साल के रूडी अमेरिका के प्रसिद्ध वकील और व्यापारी हैं। 1980 के दशक में साउथ न्यूयार्क के एटर्नी जनरल और न्यूयार्क के महापौर रह चुके हैं। अब उन्हें कुछ बड़ा पद मिल सकता है।
गिंगरिच
73 वर्ष के गिंगरिच ट्रम्प के खास तीन साथियों में शामिल हैं। गिंगरिच ने हर मुश्किल समय में ट्रम्प का साथ दिया है। इस बार जब पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ट्रम्प को छोड़कर चले गए तो गिंगरिच ने अपने समर्थकों को ट्रम्प का साथ देने के लिए कहा। कहा जा रहा है कि ये विदेश मंत्री बनाए जा सकते हैं।
रेयांस प्राइबस
प्राइबस 2011 से रिपब्लिकन नेशनल कमेटि के अध्यक्ष हैं। यही कमेटि चुनाव का निर्णय लेती है। उनके नेतृत्व में ही ट्रम्प राष्ट्रपति चुने गए। जब भी पार्टी में ट्रम्प के विरोध में आवाज उठी उसको शांत करने और उन्हें रोल मॉडल बताने का काम 41 वर्ष के प्राइबस ने किया।
ले.ज.(से.नि.) माइकल फ्लिन
गुप्तचर संस्थाओं में 33 वर्ष तक काम करने वाले माइकल और ट्रम्प सुरक्षा और आतंकवाद पर एक जैसी सोच रखते हैं। माइकल ने अपनी पुस्तक 'रेडिकल इस्लाम एंड इट्स एलाइज' में बराक ओबामा की आतंकरोधी नीति की आलोचना की थी। इन्हें भी नई सरकार में कोई ओहदा मिल सकता है।
यह कोई रहस्य नहीं कि उनके 'ट्रम्प' और मेरे बीच कई गहरे मतभेद हैं। परंतु याद रखा जाए, आठ वर्ष पहले राष्ट्रपति बुश और मेरे बीच भी कई मतभेद थे। परंतु राष्ट्रपति बुश की टीम ने सत्ता हस्तांतरण की दिशा में बहुत पेशेवराना नजरिये से काम किया था, ताकि हम शुरू से ही पूरी रफ्तार से काम कर सकें। — बराक ओबामा











