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राजस्थान के जयपुर में गत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का परिसंवाद कार्यक्रम ओटीएस में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉॅ. कृष्णगोपाल उपस्थित रहे। उन्होंने परिसंवाद को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति की आकांक्षा होती है कि उसे समानता और प्रेम मिले। इस दिशा में भारत में लोकतांत्रिक तरीके से परिवर्तन हो रहे हैं लेकिन इसकी गति बढ़नी चाहिए। संविधान हमारे मन को नहीं बदल सकता है।
समाज से भेदभाव दूर हो, देश में समरसता आए, इसके लिए हमें ही मिलकर प्रयास करना होगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शिक्षक अगली पीढ़ी का निर्माण करता है किन्तु उसका अवमूल्यन हो गया है। शिक्षकों को गहराई तक जाना होगा। शिक्षक ही विद्यार्थी का मन बदल सकता है। लेकिन दुर्भाग्य है कि जो शिक्षा भारत में सदैव नि:शुल्क रही, अंग्रेजों के आने के बाद इसमें शुल्क शुरू हुआ और आज शिक्षा का व्यावसायीकरण हो गया है। इसको सुधारना होगा।
जैविक खेती पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पशुधन परिवार का अंग हुआ करता था किन्तु आज स्थिति बदल गई है जिसके कारण पशुधन में कमी आई है। जैविक खाद के अभाव में रासायनिक खाद आदि का उपयोग बढ़ा है जिससे कैंसर जैसे भयानक रोग उत्पन्न हुए एवं हमारी खेती को भी अत्यधिक नुकसान हुआ है। लेकिन पिछले कुछ सालों में देश में जैविक खेती को लेकर पुन: प्रयास शुरू हुए हैं। संघ द्वारा भी लगभग पांच हजार से अधिक स्थानों पर जैविक खेती के प्रयास प्रारंभ हुए हैं। -विसंके, जयपुर
'दूसरों के दुखों को करें दूर'
मानवता में देवत्व देखना ही हिन्दुत्व का मूल सिद्धांत है। समाज में जो पिछड़े हैं, जिन्हें सेवा की आवश्यकता है, ऐसे लोगों के दुखों को हम दूर करने का प्रयास करें। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री भागैय्या ने अमेरिका के सेन फ्रांसिसको में आयोजित विजयादशमी उत्सव पर हिन्दू स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहीं। इस अवसर पर स्वयंसेवकों के समूह ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेनफ्रांसिको में भारत के उपवाणिज्य जनरल श्री रोहित रथिस उपस्थित रहे। -प्रतिनिधि











