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अरुणाचल में कांग्रेस अस्त

Written byArchiveArchive
Sep 26, 2016, 12:00 am IST
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दिंनाक: 26 Sep 2016 14:27:21

अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस की पूरी सरकार दल बदल कर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (पीपीए) में शामिल हो गई और नई सरकार का गठन कर लिया। भारतीय राजनीति में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब किसी राज्य की पूरी सरकार ही दल बदल कर किसी और दल में शामिल हुई हो। कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह बहुत बड़ा झटका है  

 

जगदम्बा मल्ल
गत 16 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस का सफाया हो गया। मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में इसके 43 विधायक कांग्रेस को छोड़कर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (पीपीए) में शामिल हो गए और नई सरकार का गठन कर लिया।  पीपीए का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन है। जुलाई महीने में ही पेमा खांडू ने विधानसभा अध्यक्ष तेन्जींग नोरबू थांग्डोक के समक्ष अपने 42 विधायकों की उपस्थिति दर्ज कराकर सरकार बनाई थी। इसके साथ पूर्वोत्तर भारत में अब केवल मणिपुर, मिजोरम तथा मेघालय में कांग्रेस की सरकारें रह गई हैं। उम्मीद है कि  मार्च, 2017 में मणिपुर में भी कांग्रेस सरकार का सफाया हो जाएगा और भाजपा की सरकार बन जाएगी। इस समय  त्रिपुरा में वामपंथी शासन है और नागालैंड में नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) का शासन है जिसका भाजपा के साथ गठबंधन है।
अरुणाचल प्रदेश में अब कांग्रेस के एकमात्र विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री नाबाम टकी बच गए हैं। नाबाम कट्टर बैप्टिस्ट ईसाई हैं। उन पर आरोप है कि वे कैथोलिक एवं बैप्टिस्ट के अलावा मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी तथा अन्य अनेक चर्च संगठनों के साथ मिलकर अरुणाचल के लोगों को ईसाई बनाने के लिए समयबद्ध योजना बनाकर कार्य कर रहे हैं। उन पर यह भी आरोप है कि आतंकवादी संगठनों से उनके गुप्त संबंध हैं।
लोगों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में चर्च द्वारा प्रायोजित सरकार का समूल नष्ट होना और भाजपा समर्थित सरकार का आना राष्ट्रहित में है और यह समय की मांग भी थी। वह भी उस समय जब पाकिस्तान के कंधे पर बंदूक रखकर चीन भारतवर्ष पर निशाना साध रहा है। चीन ब्रह्मपुत्र घाटी सहित पूरे अरुणाचल प्रदेश को निगल जाना चाहता है। इसलिए अरुणाचल प्रदेश में भाजपा समर्थित पेमा खांडू के नेतृत्व में पीपीए की जो सरकार बनी है, वह अति महत्वपूर्ण है। पेमा खांडू बौद्ध हैं तथा पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के पुत्र हैं। एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में दोरजी खांडू की मृत्यु हो गई थी। इनका विधानसभा क्षेत्र तवांग अरुणाचल के एकदम पश्चिमोत्तर में चीनी सीमा से सटा हुआ है, जहां दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर बना विश्वप्रसिद्ध बौद्ध मठ है। यहीं बौद्ध मत के श्रेष्ठ संत तुल्कू गुरुजी रहते हैं। ये दलाई लामा जी के श्रेष्ठ एवं ज्येष्ठ शिष्य हैं। इस बौद्ध मठ पर भी चीन की गिद्ध दृष्टि है।
60 विधायकों वाली अरुणाचल विधानसभा में कुल 44 विधायक थे।  इनमें से भाजपा के 11 तथा दो निर्दलीय सदस्य हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने 9 अगस्त को आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उनकी सीट भी खाली है।  कांग्रेस के दो सदस्यों की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, जिसके समर्थन वापस लेने के कारण जनवरी, 2016 में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नाबाम टकी की सरकार गिर गई थी और राष्ट्रपति शासन लग गया था। राष्ट्रपति शासन के बाद 19 फरवरी, 2016 को कालिखो पुल ने अपनी सरकार बनाई थी, किंतु उच्चतम न्यायालय के निर्णय से 13 जुलाई, 2016 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था। 3 मार्च, 2016 को कांग्रेस के 29 विधायकों के साथ कालिखो पुल पीपीए में शामिल हो गए थे और 3 मार्च से 13 जुलाई तक उनके नेतृत्व में वहां सरकार रही थी।
पीपीए भी काफी पुरानी क्षेत्रीय पार्टी है। 1979 में तोमो रीबा के नेतृत्व में पीपीए की सरकार बनी थी। तोमो रीबा ने 18 सितंबर, 1979 को सरकार का गठन किया था, जो 3 नवंबर, 1979 तक ही चली। माना जा रहा है कि इस बार मुख्यमंत्री पेमा खांडू सहित सभी विधायक कांग्रेस के केन्द्रीय नेताओं से काफी नाराज थे, क्योंकि दिल्ली में उन्हें अपने नेताओं से मिलने के लिए 4-5 दिन तक इंतजार करना पड़ता था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तापिर गाव ने कहा कि अरुणाचल में जो राजनीतिक उथल-पुथल हुई है उसके लिए सोनिया तथा राहुल जिम्मेदार हैं।
 उत्तर-पूर्व क्षेत्र में भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व की देखरेख में 24 मई, 2016 को उत्तर-पूर्व प्रजातांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) का गठन हुआ था और हेमंत विश्वशर्मा (पूर्व कांग्रेसी नेता और वर्तमान में असम की भाजपा सरकार में स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री) इसके संयोजक बने थे। हेमंत विश्वशर्मा ने 18 सितंबर को ईटानगर में बताया कि भाजपा पेमा खांडू की सरकार को बाहर से समर्थन देती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि 23,24 एवं 25 सितंबर को कालीकट में संपन्न होने वाली भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा कि भाजपा खांडू सरकार को बाहर से समर्थन देती रहेगी अथवा सरकार में शामिल होगी। चूंकि एनईडीए उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय दलों का शीर्ष संगठन है इसलिए पेमा खांडू सरकार एनईडीए सरकार के नाम से जानी जाएगी।
कौन हैं पेमा खांडू
37 वर्षीय पेमा खांडू पूर्वोत्तर की राजनीति में एक नवीन सितारे के रूप में उभरे हैं। उन्होंने दिल्ली के हिन्दू कॉलेज से पढ़ाई की है। तावांग निवासी खांडू अपने पिता दोरजी खांडू की मृत्यु के बाद 2011 में पहली बार मुक्तो (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। यह सीट उनके पिता की मृत्यु के बाद खाली हुई थी। वर्ष 2014 में वे इस विधानसभा क्षेत्र से निर्विरोध चुने गए थे और जल संसाधन विकास तथा पर्यटन मंत्री बने। पेमा 2000 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे। कांग्रेस में उन्होंने अनेक दायित्वों को निभाया है। सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद वे 16 जुलाई, 2016 को कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद सिर्फ दो महीने के अंदर घटनाचक्र ऐसा चला कि 16 सितंबर 2016 को उन्होंने 43 विधायकों के साथ कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह कर नई सरकार बना ली।

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