| दिंनाक: 16 Aug 2016 14:44:21 |
|
उस अबोध बालक का कसूर जानते हैं जिस पर मार्क्सवाद के झंडाबरदारों ने चाकू से हमला किया? महज 7 का ही तो है कार्तिक! उस पर चाकू से हमला! आप भले मुंह बनाएं लेकिन 'सर्वहारा के पहरुओं' ने इंसानियत को तिलांजलि देते हुए इस 'मर्दानगी' को अंजाम दिया। सेमिनार में अपने पिता राहुल के साथ आया नन्हा कार्तिक मासूम सी सूरत बनाए अपने पिता को आपबीती सुनाते देख-सुन रहा था।
राहुल ने मलयाली भाषा में बताना शुरू किया-''कण्णूर के कक्कायंगढ़ जिले के इरिट्टी उपनगर की मुझाकुन्नू पंचायत हमेशा से माकपाइयों के कब्जे में रही थी। लेकिन पंचायत चुनाव में मैंने भाजपा की ओर से चुनाव लड़ने की हिम्मत की थी। पर्चा भरा ही था कि धमकियां मिलनी शुरू हो गईं। घर पर पोस्टर चिपकाए गए-'भाजपा के साथ रहोगे तो पछताओगे'। मैँने हार नहीं मानी। इस बार के पंचायत चुनाव में कार्तिक की मां रम्या ने भी पराकुंदम वार्ड से चुनाव लड़ा था। उन्हें 180 वोट मिले। लेकिन उनकी वजह से हवा ऐसी बनी कि अपने ही गढ़ में माकपा दो पंचायतों में हार गई। गुस्सा उबल पड़ा। मुझे मारने की धमकियां दी गईं। 30 मई, 2016 की शाम। मैं बाहर गया हुआ था। करीब 7.30 बजे तीन गंुडे घर में घुसे, मुझे वहां न पाकर उन्होंने कार्तिक को ही निशाना बनाया और उस पर चाकू से वार किए। कार्तिक के बाएं हाथ में गहरा घाव हो गया। अस्पताल में इलाज चला, कई दिन स्कूल नहीं जा पाया। माकपा की पुलिस ने मामला दर्ज ही नहीं किया, धरने की धमकी पर रिपोर्ट दर्ज की। तीन अपराधियों ने आत्मसमर्पण का नाटक किया। चौथे दिन उनको छोड़ दिया गया। छूटते ही वे हमारे घर आए, कार्तिक की किताबें जला दीं।'' और….राहुल फफक पड़े।