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शिक्षा : कमाल का क्षेत्र इंजीनियरिग
पहले बारहवीं और फिर ग्रेजुएशन करने के बाद छात्रों के सामने यह दुविधा होती है कि वे अपना करियर किस दिशा और किस क्षेत्र में बनाएं। बढ़ते करियर विकल्पों वाले आज के समय में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं। जहां बस जरूरत है थोड़ी जानकारी की। प्रस्तुत है ऐसे ही कुछ कोर्स की जानकारी जिन्हें करके युवा अपने भविष्य बना सकते हैं
शिक्षा : कमाल का क्षेत्र इंजीनियरि
सेवा में भविष्य
आपदा प्रबंधन: आज डिजास्टर मैनेजमेंट तेजी से फैलता क्षेत्र है। केदारनाथ में आई आपदा हो या फिर नेपाल का भूकंप। दोनों ही घटनाओं में हजारों लोगों की जान गई। एनडीआरएफ की वहां टीमें भेजी गईं। इन टीमों में अर्धसैनिक बलों के प्रशिक्षित जवान भी थे। किसी आपदा के दौरान उससे कैसे निबटा जाए, यही आपदा प्रबंधन है। वर्ष 2003 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने डिजास्टर मैनेजमेंट को प्रोफेशनल एजुकेशन में शामिल किया था।
योग्यता: विभिन्न मैनजमेंट इंस्टीट्यूट में डिजास्टर मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट से लेकर पीजी डिप्लोमा स्तर के कोर्स कराए जाते हैं। यदि आप सर्टिफिकेट कोर्स करते हैं तो बारहवीं नहीं तो पीजी डिप्लोमा के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है।
अवसर व वेतन: डिजास्टर मैनेजमेंट के क्षेत्र में सरकारी संस्थानों में, आपातकालीन सेवाओं में, मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी मिल सकती है। इसके अलावा इंश्योरेंस सेक्टर में भी नौकरी की काफी संभावनाएं हैं। शुरुआती तौर पर 25 से 35 हजार तक वेतन मिल सकता है।
संस्थान: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट दिल्ली, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी दिल्ली, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई, इंटरनेशल सेेंटर ऑफ मद्रास यूनिवर्सिटी चेन्नई, डिजास्टर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भोपाल। नार्थ बंगाल यूनिवर्सिटी, दार्जिलिंग आदि।
समझें सागर को
समुद्री इंजीनयरिंग: पृथ्वी का तीन चौथाई हिस्सा पानी से घिरा है जिसे हम समुद्र कहते हैं। समुद्री इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की वह शाखा है जो समुद्री वास्तुकला तथा विज्ञान से संबंधित है। इसके पाठ्यक्रम में जहाजों के निर्माण तथा उनके अनुरक्षण और अन्य समुद्री नौकाओं के बारे में पढ़ाया जाता है। समुद्री इंजीनियरों पर जहाज के तकनीकी प्रबंधन का पूर्ण दायित्व होता है। उन पर जहाजों के यंत्रों के चयन के लिए जिम्मेदारी होती है। जिन युवाओं को समुद्र लुभाता है वे इस क्षेत्र में अच्छा करियर बना सकते हैं।
योग्यता: समुद्री इंजीनियर बनने के लिए समुद्री इंजीनयरिंग में बीटेक और यांत्रिकी इंजीनियरिंग में पीजी डिप्लोमा होना चाहिए। समुद्री इंजीनियरिंग में बीटेक के लिए विज्ञान विषय में 60 फीसद अंकों के साथ 12वीं होना जरूरी है। इसके बाद प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला मिलता है।
अवसर व वेतन: समुद्री इंजीनियरों को डिजाइनिंग, अनुसंधान और कंसलटेंसी के क्षेत्रों में भी नियुक्त किया जाता है। उनके लिए डिजाइनिंग और भवन फर्मों में भी अवसर हैं। समुद्री इंजीनियरों के लिए विदेशों में भी रोजगार के ढेरों अवसर हैं। नौसेना, मर्चेंट नेवी में भी समुद्री इंजनियरों के लिए अपार संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में शतप्रतिशत रोजगार मिलने की गारंटी होती है। इस क्षेत्र में शुरुआती वेतन 70 हजार से 1 लाख तक होता है। अनुभव होने पर वेतन लाखों में पहुंच जाता है।
संस्थान: बंगलौर इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एंड इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग आंध्र प्रदेश, नौवहन महानिदेशालय मुंबई, आइआइटी मुंबई, भारतीय समुद्री कॉलेज हैदराबाद, इंटरनेशनल मरीन कम्युनिकेशन सेंटर चेन्नै, लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज ऑफ एडवांस्ड मैरीटाइम स्टडीज एंड रिसर्च मुंबई आदि।
जुड़ें धरती से
अर्थसाइंस में भविष्य: अर्थसाइंस यानी भूविज्ञान, पृथ्वी में होने वाली हलचलों, अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं, सिकुड़ते ग्लेशियरों का पृथ्वी की जलवायु पर प्रभाव ऐसे तमाम क्षेत्र हैं जिनका अध्ययन भूविज्ञानी करते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की मांग को देखते हुए अर्थसाइंस का पांच वर्षीय इंटीग्रेटिड कोर्स शुरू किया है। एमएससी इन अर्थसाइंस नाम के इस कोर्स में बारहवीं के बाद प्रवेश लिया जाता है। अर्थसाइंस की कई शाखाएं हैं। इनमें पर्यावरण अध्ययन, माइनिंग, जियोटेक्नोलॉजी, एटमॉस्टफोरिक साइंस, जियोहैजर्ड्स, जियोग्राफिक इंफोर्मेशन सिस्टम आदि प्रमुख हैं।
अवसर व वेतन: कोर्स करने के बाद राज्य और केन्द्र सरकार में जियोलॉजिस्ट बनने के कई अवसर होते हैं। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड भी इस कोर्स के छात्रों को काम करने का अवसर मुहैया कराता है। इसमें हाइड्रोजियोलॉजिस्ट के रूप में उसी स्केल पर नियुक्ति होती है जिस स्केल पर जियोलॉजिस्ट की। रिसर्च इंस्टीट्यूट के अलावा निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को अपने यहां पर नौकरी देती हैं। सीमेंट, माइनिंग के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों की अच्छी खासी मांग है। शुरुआत में 40 से 50 हजार तक वेतन मिलता है। इसके बाद लाखों रुपए तक तनख्वाह हो सकती है।
संस्थान: हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, आइआइटी खड़गपुर और रुड़की, पाण्डिचेरी यूनिवर्सिटी, इंडियन स्कूल ऑफ माइंस धनबाद, सेंट्रल यूनिवर्सिटी हरियाणा महेंद्र्रगढ़ आदि।
समझें इतिहास को
फिशरीज: फिशरीज यानी मत्स्यपालन के क्षेत्र में आज करियर की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में फिशरीज एक उभरता हुआ क्षेत्र है। पिछले एक दशक की बात करें तो इस क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है। पहले लोग अपने शौक या फिर खान-पान के लिए मछली पालन करते थे, लेकिन अब भारतीय तथा मल्टीनेशनल कंपनियां इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रही हैं।
इस क्षेत्र में पेशेवरों की भारी मांग है। यदि आप फिशरीज में रुचि रखते हैं तो यह क्षेत्र आपके लिए अच्छा करियर विकल्प साबित हो सकता है। कोर्स के दौरान जलीय गुणवत्ता व क्षेत्र के अनुसार मछलियों के पालन, उन्नत किस्म की मछलियों के विकास, फिशरीज फार्म की बेहतर देखभाल व फिश रिसर्च से जुड़ी चीजें सिखाई जाती हैं।
योग्यता: फिशरीज का स्नातक स्तर का कोर्स करने के लिए बायोलॉजी विषय में 55 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं होना अनिवार्य है। इसके बाद आप बैचलर ऑफ साइंस इन फिशरीज में (बीएफएससी) कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इसके साथ फिशरीज से संबंधित कुछ शार्ट-टर्म कोर्सज भी होते हैं।
अवसर व वेतन: फिशरीज के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों में भरपूर मौके, फिशरीज विशेषज्ञ के तौर सरकारी नौकरी, फिश फार्म से संबंधित कॉरपोरेट सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। आप बैंक से लोन लेकर अपना कार्य भी कर सकते हैं। शुरुआती वेतन 25 से 35 हजार तक मिलता है। अपना काम करके लाखों तक कमाई की जा सकती है।
संस्थान: नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज लखनऊ उत्तर प्रदेश, सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट पश्चिम बंगाल, जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर ऐंड टेक्नोलॉजी पंतनगर, राजस्थान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बीकानेर, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन मुंबई, सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजी, कोच्चि केरल आदि। प्रस्तुति : आदित्य भारद्वाज
मछली पालन में संभावनाएं
फिशरीज: फिशरीज यानी मत्स्यपालन के क्षेत्र में आज करियर की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में
फिशरीज एक उभरता हुआ क्षेत्र है। पिछले एक दशक की बात करें तो इस क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है। पहले लोग अपने शौक या फिर खान-पान के लिए मछली पालन करते थे, लेकिन अब भारतीय तथा मल्टीनेशनल कंपनियां इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रही हैं।
इस क्षेत्र में पेशेवरों की भारी मांग है। यदि आप फिशरीज में रुचि रखते हैं तो यह क्षेत्र आपके लिए अच्छा करियर विकल्प साबित हो सकता है। कोर्स के दौरान जलीय गुणवत्ता व क्षेत्र के अनुसार मछलियों के पालन, उन्नत किस्म की मछलियों के विकास, फिशरीज फार्म की बेहतर देखभाल व फिश रिसर्च से जुड़ी चीजें सिखाई जाती हैं।
योग्यता: फिशरीज का स्नातक स्तर का कोर्स करने के लिए बायोलॉजी विषय में 55 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं होना अनिवार्य है। इसके बाद आप बैचलर ऑफ साइंस इन फिशरीज में (बीएफएससी) कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इसके साथ फिशरीज से संबंधित कुछ शार्ट-टर्म कोर्सज भी होते हैं।
अवसर व वेतन: फिशरीज के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों में भरपूर मौके, फिशरीज विशेषज्ञ के तौर सरकारी नौकरी, फिश फार्म से संबंधित कॉरपोरेट सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। आप बैंक से लोन लेकर अपना कार्य भी कर सकते हैं। शुरुआती वेतन 25 से 35 हजार तक मिलता है। अपना काम करके लाखों तक कमाई की जा सकती है।
संस्थान: नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज लखनऊ उत्तर प्रदेश, सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट पश्चिम बंगाल, जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर ऐंड टेक्नोलॉजी पंतनगर, राजस्थान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बीकानेर, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन मुंबई, सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजी, कोच्चि केरल आदि। प्रस्तुति : आदित्य भारद्वाज











