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अश्वनी मिश्र
भोपाल से 16 किमी. की दूरी पर हुजूर तहसील में बरखेड़ी अब्दुल्ला ग्राम पंचायत है। 4,000 से ज्यादा की जनसंख्या वाला यह गांव आज म.प्र. के आदर्श गांवों में गिना जाना जाता है। 2,400 महिलाओं और 2,100 पुरुषों वाला यह गांव आज जनसहभागिता के दम पर विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। इसका श्रेय पहली बार सरपंच बनीं भक्ति शर्मा को जाता है। अभी मात्र 1 वर्ष और कुछ महीने ही हुए हैं उन्हें सरपंच बने लेकिन उन्होंने इतने कम समय में जो कर दिखाया, वह अनूठा और अन्य गांवों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। भक्ति अपने गांव में हुए चहुंमुखी विकास के बारे में कहती हैं, ''जब मैं पंचायत चुनावों में गांव के लोगों से वोट मांग रही थी तो उन्होंने कहा, बाई, तुम बहुत पढ़ी-लिखी हो, ऐसा कुछ करना कि हमारी बिटिया भी ऐसे ही खूब पढ़ जाये। ''
वे बताती हैं, मैं जब सरपंच बनी तो गांव में एक प्राथमिक और जूनियर स्कूल ही था। मैंने प्रयास करके इसे हाईस्कूल तक कराया, ताकि गांव के बच्चों को पढ़ने में कोई समस्या न आए और लड़कियां गांव में ही रहकर पढ़ सकें। साथ ही गांव में पानी और सड़कों की कमी की समस्या थी, उसे भी काफी हद तक दूर कर दिया गया है। गांव में सबको सुलभता से पानी उपलब्ध हो, इसके लिए मैंने 73 लाख रु. की लागत से एक पानी टंकी का निर्माण कराया है। साथ ही एक टंकी का निर्माण कार्य वर्ष के अंत तक पूर्ण हो जायेगा। चूंकि यहां बोरिंग कराना आसान कार्य नहीं है। इसलिए सबको आसानी से पीने का पानी मिले इसके लिए, ग्राम सभा की ओर से 4 सरकारी नल और 2 टैंकर पानी के उपलब्ध कराये हैं। इनके जरिये सभी को पानी मिल जाता है और पानी की समस्या पर काफी हद तक लगाम लगी है।
यहां के 99 फीसद लोगों के पास बैंक खाता और 90 फीसद लोगों के पास राशन कार्ड हैं। गांव में युवा बेरोजगार कर्ज लेकर छोटे उद्यम शुरू कर सकें, इसके लिए समय-समय पर सरपंच के प्रयास से बैंक चौपाल का आयोजन होता है। आज इसका परिणाम दिख रहा है। दर्जनों युवा बैंक से कर्ज लेकर छोटे-छोटे उद्योग शुरू कर चुके हैं। जिस समय भक्ति शर्मा इस गांव की सरपंच बनी थीं तब गांव में कुछ ही लोगों के घर में शौचालय थे, लेकिन अब करीब सभी परिवारों में शौचालय हैं। शर्मा के मुताबिक, उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक गांव के सभी घरों में शौचालय हो जाएंगे। गांव में हर सप्ताह चिकित्सा शिविर आयोजित होता है। इसमें कुछ अस्पतालों के चिकित्सकों और गैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय रखकर लोगों को चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
इस गांव में एक अनूठी योजना शुरू हुई है। गांव के जिस घर में भी लड़की का जन्म होता है भक्ति शर्मा उसे अवश्य 2 महीने का अपना मानदेय देती हैं ताकि जन्म के बाद उसका ठीक ढंग से पालन-पोषण हो सके। वे कहती हैं कि गांव के लोगों के लिए ऐसी छोटी-छोटी खुशियां बड़ी मायने रखती हैं। जब उन्हें यह रकम मिलती है तो उन्हें बड़ी प्रसन्नता होती है। वे अब तक करीब दो दर्जन से ज्यादा महिलाओं को मानदेय दे चुकी हैं।
बरखेड़ी अब्दुल्ला
स्थान: भोपाल से 16 किलोमीटर
जनसंख्या: 4,000 से ज्यादा
प्रयास: 99 प्रतिशत लोगों के बैंक खाते
इस वर्ष के अंत तक गांव के सभी घरों में शौचालय बन जाएंगे
गांव में किसी कन्या के जन्म पर गांव की सरपंच बच्ची को अपना दो महीने का मानदेय देती हैं











