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अक्सर देखने-सुनने में आता था कि खड़ी फसल पानी मांग रही होती थी, लेकिन बिजली की लंबी कटौती और महंगा पंप न खरीद पाने की वजह से छोटी जोत का किसान मन मसोस के रह जाता था। लेकिन नवाचार (इनोवेशन) का संचार करने वाली सोच ने अब ऐसा पंप दिया है जो सौर ऊर्जा से न केवल जमीन के नीचे 80 मीटर तक से पानी खींच लाता है बल्कि उस पानी से फसल को नुकसान पहंुचाने वाली अशुद्धियां निकालकर खेत का सींचता है। यूं समझ लीजिए, खेतों की सस्ती-टिकाऊ आर. ओ. मशीन है यह। व्यापारिक स्तर पर बागवानी करने वालों के लिए नवाचार का तोहफा है एक ऐसी प्रणाली, जिसमें पानी नाममात्र को लगता है, खाद नाममात्र को लगती है और छोटे से दायरे में तरह-तरह के पौधे उगाए जा सकते हैं। घर में दुधारू मवेशी पालने और दूध का व्यापार करने वालों के लिए भी अब बहुत कम कीमत में दूध निकालने की मशीन हाजिर है, मवेशी एक हो, दो या ज्यादा, बस एक ही मशीन में दो या तीन छोटे हिस्से जोड़ो और दूध दुह लो। मिनटों में डिब्बा लबालब।
इसी नवाचार की एक झलक दिखाते हुए नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में अभी तीन दिन (19 से 21 मार्च) तक चला कृषि उन्नति मेला कृषि वैज्ञानिकों, खेती-किसानी से जुड़े कारोबारियों, अनुसंधानकर्ताओं और किसानों का जैसे लघु तीर्थ बन गया था। इसमें हरे-भरे खेतों के बीच बड़े-बड़े प्रदर्शनी पंडालों में जहां खेती से जुड़ी तमाम तकनीकी जानकारियां दी जा रही थीं तो सेमिनारों के जरिए कृषि विशेषज्ञ किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों के बारे में बता रहे थे, उनको नई तकनीकों की बारीकियां समझा रहे थे। और इन सेमिनारों को नाम भी बड़ा सटीक दिया गया था-कृषि ज्ञान संगम। 'पूसा' के मीडिया प्रभारी प्रभात शुक्ला बताते हैं कि सेमिनारों में विशेषज्ञों ने ऑडियो-विजुअल तकनीक के माध्यम से खेती में नवाचार की जानकारी दी। दिलचस्प बात ये रही कि खुद किसान भी चर्चा में सहभागी बने थे। सेमिनार मेला परिसर में अलग से बनाए गए 3 विशाल पंडालों में तीनों दिन 3-3 सत्रों में चले। मेले के प्रभारी, 'पूसा' के संयुक्त निदेशक डॉ. जे. पी. शर्मा उत्साहित स्वर में बताते हैं, ''कृषि मेले तो यह संस्थान हर साल लगाता आ रहा है, लेकिन इस बार कृषि मंत्रालय ने इसमें विशेष दिलचस्पी ली और इसे इतने भव्य स्तर पर आयोजित करने में सहयोग दिया। साथ ही, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) भी आयोजन में सहभागी था।''
मेले में देश भर से 550 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें कई कृषि संस्थान थे तो प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय, एनजीओ और बड़ी संख्या में किसान भी थे। आकर्षण के केन्द्र 'थीम पैवेलियन' में किसानों को खेती में नवाचार, आईटी के योगदान, 'रीन्युएबल एनर्जी', सौर ऊर्जा के उपयोग के बारे में सीधी जानकारी दी जा रही थी तो सरकार की फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना की बारीकियों से परिचित कराया जा रहा था।
कृषि उन्नति मेले का कैसा असर दिखा? लोगों की कैसी प्रतिक्रिया रही? हमारे इन सवालों पर डॉ. शर्मा ने कहा, ''अद्भुत। उत्तर-पूर्व सहित भारत के सब राज्यों का यहां एक जगह आकर खेती में प्रौद्योगिकी के बढ़ते चलन की जानकारी साझा करना और अपने यहां की विशेषताओं से परिचित कराना किसानों के लिए बहुत लाभदायक रहा। मेले में किसानों को उन्नत किस्म के बीजों के बारे में जानकारी पाकर अच्छा लगा।'' मेले में हम मिले 'पूसा' के कृषि अभियांत्रिकी विभाग प्रमुख डॉ. इंद्रमणि मिश्र से। मेले में प्रदर्शित नूतन मशीनों/उपकरणों के बारे में उन्होंनेे हमें बताया, ''पूसा में हम किसी उपकरण या मशीन की तकनीक पर काम करते हैं। जैसे, संस्थान की ओर से देश में 100 से ज्यादा जगहों पर पशु आहार ब्लॉक बनाने की तकनीक पर काम चल रहा है। इसी तरह बड़े पैमाने पर कम्पोस्ट बनाने की तकनीक विकसित की। ये दोनों ही तकनीकें मेले में खूब सराही गईं। बासमती चावल के लिए खास तरह का थ्रेशर बनाया।''तकनीकों के आधार पर आगे उत्पादन या निर्माण कैसे होता है? इसके जवाब में डॉ. मिश्र का कहना था, '' दो तरीके होते हैं आगे बढ़ने के। पहला, 'रिवोल्विंग फंड स्कीम,' जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं मंगाकर कम से कम लागत पर उत्पाद बनवाकर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाता है। दूसरा, निर्माण करने वाली कंंपनी को तकनीक का लाइसेंस देकर, उनसे उत्पाद तैयार करवाकर किसानों/उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जाता है।'' 'पूसा' का लक्ष्य है कम से कम कीमत में किसानों को बेहतर तकनीक या मशीन उपलब्ध कराना। डॉ. मिश्र के अनुसार, 'पूसा' सरकार के 'मेरा गांव-मेरा गौरव' कार्यक्रम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है, क्योंकि किसान के विकास में ही देश का विकास निहित है।
19 मार्च को मेले का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में यही भाव झलका था। उन्होंने कहा था, ''2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लेना होगा। भारत के भविष्य का निर्माण कृषि विकास, भारत के किसानों और गांवों की समृद्धि की बुनियाद पर किया जा सकता है। भारतीय कृषि में अगली क्रांति प्रौद्योगिकी और आधुनिकीकरण का उपयोग करते हुए लानी होगी। सरकार इस दिशा में काम कर रही है।
मेले में प्रदर्शित ऐसे उपकरणों में प्रधानमंत्री ने खासी रुचि दिखाई। मेले में बड़ी तादाद में दिल्ली और आस-पास के किसान तो भारी संख्या में आकर दिलचस्पी से सब कुछ देख-समझ रहे ही थे, महिलाओं और बच्चों की संख्या भी कम नहीं थी। एक वजह तो यह थी कि स्कूलों में पेपर खत्म हो गए थे और दूसरी यह कि वहां कई कृषि उत्पाद जैसे अचार, शहद, घी, मक्खन, गमले, पौधे बिक्री के लिए उपलब्ध थे। इसमें संदेह नहीं कि हर वर्ष लगने वाला यह मेला कृषि पर मोदी सरकार के विशेष जोर देने से महत्वपूर्ण बन गया था। खेती में प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक प्रयोग कर ज्यादा फसल लेने के प्रधानमंत्री के आह्वान के कारण नए उपकरण और प्रणालियां इसमें प्रदर्शित हुईं। इससे खेती और किसान को अवश्य ही लाभ होगा।
-आलोक गोस्वामी











